TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    भारत और यूएई के बीच समग्र रणनीतिक साझेदारी

    ईरान संकट के बीच भारत पहुंचे UAE राष्ट्रपति, पीएम मोदी से अहम रणनीतिक बातचीत

    इस्लामिक NATO का सपना तोड़ेगा भारत

    इस्लामिक NATO का सपना तोड़ेगा भारत, UAE के साथ बड़ा रणनीतिक समझौता

    यूसीसी ने विवाह पंजीकरण प्रक्रिया को ऑनलाइन बनाया

    यूसीसी का एक साल ,ऑनलाइन प्रक्रिया से आसान हुआ विवाह पंजीकरण

    नितिन नवीन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगे

    बूथ स्तर तक होगा भाजपा के नए अध्यक्ष नितिन नबीन का स्वागत, पार्टी आलाकमान ने बनाई संगठन तक पहुँच बढ़ाने की रणनीतिs

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    PMAY U 2.0 और आवास फायनेंसियर्स: आसान EMI के साथ अपना घर कैसे बनाए?

    PMAY U 2.0 और आवास फायनेंसियर्स: आसान EMI के साथ अपना घर कैसे बनाए?

    खनन क्षेत्र में बेहतरीन काम के लिए केंद्र सरकार ने धामी सरकार की तारीफ की

    खनन सुधारों में फिर नंबर वन बना उत्तराखंड, बेहतरीन काम के लिए धामी सरकार को केंद्र सरकार से मिली 100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    चाबहार बंदरगाह भारत के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है

    अमेरिकी दबाव के बीच भारत चाबहार बंदरगाह पर अपनी रणनीतिक मौजूदगी बनाए रखने पर विचार कर रहा

    भारतीय नौसेना पानी और ज़मीन दोनों से उड़ान भर सकने वाले उभयचर विमानों को शामिल करने की योजना पर काम कर रही है।

    भारतीय नौसेना का नया प्लान, पानी पर नए रनवे बनाने की तैयारी

    भारत के लिए राफेल की डील होनी बड़ी सफलता है।

    भारत–फ्रांस के बीच 114 राफेल लड़ाकू विमानों पर बड़ी सहमति, नागपुर में बनेगी असेंबली लाइन

    आतंक के खिलाफ बड़ा कदम: J&K में 5 सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त

    जम्मू कश्मीर में 5 सरकारी कर्मचारी सेवा से बर्खास्त , जानें क्यों मनोज सिन्हा ने लिया यह फैसला?

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    भारत और यूएई के बीच समग्र रणनीतिक साझेदारी

    ईरान संकट के बीच भारत पहुंचे UAE राष्ट्रपति, पीएम मोदी से अहम रणनीतिक बातचीत

    ईरान से लौटें भारतीय नागरिकों के आंखों में साफ दिखा डर

    ईरान से लौटे भारतीय नागरिकों ने जताया अभार ,आंखों में दिखा डर और चिंता

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस विवादित कदम को बेझिझक अपनाया

    माचाडो ने ट्रंप को ‘वापस जीतने’ के लिए नोबेल शांति पुरस्कार दिया , अमेरिकी राष्ट्रपति ने बेझिझक अपनाया

    ईरान से कारोबार करने वाले देशों पर अमेरिका का 25% टैरिफ

    ईरान से कारोबार करने वाले देशों पर अमेरिका का 25% टैरिफ , भारत पर क्या पड़ेगा असर?

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    भारतीय संविधान और मौलिक अधिकार

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकार बाहर से नहीं आए, इनकी संकल्पना भारतीय ज्ञान परंपरा में सदियों से मौजूद है

    भारतीय संविधान

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकारों की संकल्पना हमारे लिए नई नहीं है, ये भारतीय ज्ञान परंपरा का अभिन्न हिस्सा है

    औरंगज़ेब ने जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवार मे ज़िंदा चुनवाने का आदेश दिया था

    वीर बाल दिवस: क्रिसमस-नववर्ष का जश्न तो ठीक है लेकिन वीर साहिबजादों का बलिदान भी स्मरण रहे

    गुरु गोबिंद सिंह जी ने मुगल शासक औरंगज़ेब की अधीनता स्वीकार करने से इंकार कर दिया

    वीर बाल दिवस: उत्सवों के बीच साहिबज़ादों के अमर बलिदान को नमन

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    आतंक के खिलाफ बड़ा कदम: J&K में 5 सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त

    जम्मू कश्मीर में 5 सरकारी कर्मचारी सेवा से बर्खास्त , जानें क्यों मनोज सिन्हा ने लिया यह फैसला?

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    शोले फिल्म में पानी की टंकी पर चढ़े धर्मेंद्र

    बॉलीवुड का ही-मैन- जिसने रुलाया भी, हंसाया भी: धर्मेंद्र के सिने सफर की 10 नायाब फिल्में

    नीतीश कुमार

    जेडी(यू) के ख़िलाफ़ एंटी इन्कंबेसी क्यों नहीं होती? बिहार में क्यों X फैक्टर बने हुए हैं नीतीश कुमार?

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    भारत और यूएई के बीच समग्र रणनीतिक साझेदारी

    ईरान संकट के बीच भारत पहुंचे UAE राष्ट्रपति, पीएम मोदी से अहम रणनीतिक बातचीत

    इस्लामिक NATO का सपना तोड़ेगा भारत

    इस्लामिक NATO का सपना तोड़ेगा भारत, UAE के साथ बड़ा रणनीतिक समझौता

    यूसीसी ने विवाह पंजीकरण प्रक्रिया को ऑनलाइन बनाया

    यूसीसी का एक साल ,ऑनलाइन प्रक्रिया से आसान हुआ विवाह पंजीकरण

    नितिन नवीन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगे

    बूथ स्तर तक होगा भाजपा के नए अध्यक्ष नितिन नबीन का स्वागत, पार्टी आलाकमान ने बनाई संगठन तक पहुँच बढ़ाने की रणनीतिs

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    PMAY U 2.0 और आवास फायनेंसियर्स: आसान EMI के साथ अपना घर कैसे बनाए?

    PMAY U 2.0 और आवास फायनेंसियर्स: आसान EMI के साथ अपना घर कैसे बनाए?

    खनन क्षेत्र में बेहतरीन काम के लिए केंद्र सरकार ने धामी सरकार की तारीफ की

    खनन सुधारों में फिर नंबर वन बना उत्तराखंड, बेहतरीन काम के लिए धामी सरकार को केंद्र सरकार से मिली 100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    चाबहार बंदरगाह भारत के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है

    अमेरिकी दबाव के बीच भारत चाबहार बंदरगाह पर अपनी रणनीतिक मौजूदगी बनाए रखने पर विचार कर रहा

    भारतीय नौसेना पानी और ज़मीन दोनों से उड़ान भर सकने वाले उभयचर विमानों को शामिल करने की योजना पर काम कर रही है।

    भारतीय नौसेना का नया प्लान, पानी पर नए रनवे बनाने की तैयारी

    भारत के लिए राफेल की डील होनी बड़ी सफलता है।

    भारत–फ्रांस के बीच 114 राफेल लड़ाकू विमानों पर बड़ी सहमति, नागपुर में बनेगी असेंबली लाइन

    आतंक के खिलाफ बड़ा कदम: J&K में 5 सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त

    जम्मू कश्मीर में 5 सरकारी कर्मचारी सेवा से बर्खास्त , जानें क्यों मनोज सिन्हा ने लिया यह फैसला?

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    भारत और यूएई के बीच समग्र रणनीतिक साझेदारी

    ईरान संकट के बीच भारत पहुंचे UAE राष्ट्रपति, पीएम मोदी से अहम रणनीतिक बातचीत

    ईरान से लौटें भारतीय नागरिकों के आंखों में साफ दिखा डर

    ईरान से लौटे भारतीय नागरिकों ने जताया अभार ,आंखों में दिखा डर और चिंता

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस विवादित कदम को बेझिझक अपनाया

    माचाडो ने ट्रंप को ‘वापस जीतने’ के लिए नोबेल शांति पुरस्कार दिया , अमेरिकी राष्ट्रपति ने बेझिझक अपनाया

    ईरान से कारोबार करने वाले देशों पर अमेरिका का 25% टैरिफ

    ईरान से कारोबार करने वाले देशों पर अमेरिका का 25% टैरिफ , भारत पर क्या पड़ेगा असर?

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    भारतीय संविधान और मौलिक अधिकार

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकार बाहर से नहीं आए, इनकी संकल्पना भारतीय ज्ञान परंपरा में सदियों से मौजूद है

    भारतीय संविधान

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकारों की संकल्पना हमारे लिए नई नहीं है, ये भारतीय ज्ञान परंपरा का अभिन्न हिस्सा है

    औरंगज़ेब ने जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवार मे ज़िंदा चुनवाने का आदेश दिया था

    वीर बाल दिवस: क्रिसमस-नववर्ष का जश्न तो ठीक है लेकिन वीर साहिबजादों का बलिदान भी स्मरण रहे

    गुरु गोबिंद सिंह जी ने मुगल शासक औरंगज़ेब की अधीनता स्वीकार करने से इंकार कर दिया

    वीर बाल दिवस: उत्सवों के बीच साहिबज़ादों के अमर बलिदान को नमन

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    आतंक के खिलाफ बड़ा कदम: J&K में 5 सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त

    जम्मू कश्मीर में 5 सरकारी कर्मचारी सेवा से बर्खास्त , जानें क्यों मनोज सिन्हा ने लिया यह फैसला?

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    शोले फिल्म में पानी की टंकी पर चढ़े धर्मेंद्र

    बॉलीवुड का ही-मैन- जिसने रुलाया भी, हंसाया भी: धर्मेंद्र के सिने सफर की 10 नायाब फिल्में

    नीतीश कुमार

    जेडी(यू) के ख़िलाफ़ एंटी इन्कंबेसी क्यों नहीं होती? बिहार में क्यों X फैक्टर बने हुए हैं नीतीश कुमार?

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

सेलुलर जेल: अंग्रेज़ों के भयावह अत्याचार के ‘सबसे बड़े प्रतीक’ को कितना जानते हैं आप?

इस जेल का डिज़ाइन 'पैनोप्टिकॉन' के विचार पर आधारित था, जानें कहां से आया है यह शब्द?

Shiv Chaudhary द्वारा Shiv Chaudhary
10 March 2025
in इतिहास
सेलुलर जेल का निर्माण 1906 में पूरा हुआ था

सेलुलर जेल का निर्माण 1906 में पूरा हुआ था

Share on FacebookShare on X

संबंधितपोस्ट

हिंदी में पढ़ें वीर सावरकर की कविता ‘सागर प्राण तलमाला’

अंडमान में एक मंच पर होंगे अमित शाह और मोहन भागवत; वीर सावरकर के कार्यक्रम में संघ-भाजपा के मजबूत तालमेल का संदेश

राजा महेंद्र प्रताप सिंह: आजादी की लड़ाई का योद्धा, जिसने काबुल में बनाई थी स्वतंत्र भारत की पहली निर्वासित सरकार

और लोड करें

जब कभी नरक की कल्पना की जाती है तो उसमें बताया जाता है कि धरती पर किए गए पापों के हिसाब के लिए वहां अंतहीन प्रताड़ना झेलनी पड़ती है और असीमित कष्ट दिए जाते हैं। प्रताड़नाओं के जिस स्तर की कहानियां लोगों को सुनाई जाती हैं उसे सुनकर ही लोगों का कलेजा कांप उठता है लेकिन सोचिए धरती पर अगर ऐसी जगह हो तो, धरती पर ऐसी यातनाओं लोगों को झेलनी पड़ें जिनकी कल्पना करना भी मुश्किल हो तो ऐसे लोगों पर क्या बीतती होगी। अंडमान निकोबार की ‘सेलुलर जेल’ ऐसा ही एक जीवंत नरक थी। सागर के विस्तार में लहरों की गूंज के बीच यह एक ऐसा अंधकार था जहां पहुंचने पर रोशनी भी दम तोड़ देती थी। आज जानेंगे अंडमान की सेलुलर जेल की पूरी कहानी जहां नरक की परिभाषा साकार हो उठी थी।

अंडमान की सेलुलर जेल (चित्र: Wikimedia Commons)

यह जेल केंद्र शासित प्रदेश अंडमान और निकोबार द्वीप समूह बनाने वाले 572 द्वीपों में से एक दक्षिण अंडमान में स्थित है, इन 572 में से केवल 37 द्वीप स्थाई रूप से बसे हुए हैं। 2000 वर्षों से बसे इस द्वीप पर 18वीं शताब्दी के मध्य में यूरोपीय लोगों ने कब्ज़ा कर लिया था। कुछ वर्षों बाद ब्रिटिशों ने चौथम द्वीप पर एक नौसैनिक अड्डा और दंडात्मक बस्ती स्थापित की और बाद में इसे वाइपर द्वीप पर स्थानांतरित कर दिया गया था। भारत की आज़ादी के लिए 1857 में स्वतंत्रता संग्राम हुआ जिसने अंग्रेज़ों की चूलें हिला दी थीं। भारत के बड़े हिस्सा पर राज कर रहे अंग्रेज़ों को अलग-अलग हिस्सों में सशस्त्र विद्रोह का सामना करना पड़ा और उनके मन में कब्ज़ा छिनने का भय सताने लगा था। इसके बाद अंग्रेज़ों ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पर लोगों को दंडित करने के लिए एक ‘दंडात्मक बस्ती’ बनाने का खयाल आया। दंडात्मक बस्ती एक ऐसी जगह होती है जहां अपराधियों या राजनीतिक बंदियों को सजा के रूप में भेजा जाता है और वहां उसने जबरन काम कराया जाता है।

रोज़ द्वीप (नेताजी बोस द्वीप) पर दंडात्मक बस्ती (चित्र: Wikimedia Commons)

अंग्रेज सरकार द्वारा बनाई गई विशेषज्ञों की एक समिति ने दिसंबर 1857 में इन द्वीपों का सर्वे किया और जनवरी 1858 में सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। चारों और समुद्र, खतरनाक जंगली जानवर और जनजातियों से भरे इन द्वीपों पर रहना किसी के लिए भी बुरे सपने जैसा ही थी। इस जगह से किसी कैदी का भागना नामुमकिन था।अंतत: अंग्रेज़ों को तो भारतीयों को कष्ट देने ही थे और इस जगह को कारावास के लिए चुन लिया गया था। इस स्थान की साफ-सफाई करना भी दुष्कर काम था और इसके लिए भी भारतीय बंदियों को ही चुना गया था। आज ही के दिन यानी 10 मार्च को 1858 में जे. पी. वॉकर के नेतृत्व में 200 बंदियों का पहला जत्था पोर्ट ब्लेयर पहुंचा था। 1857 के स्वतंत्रता आंदोलन को तो दबा दिया गया था लेकिन स्वतंत्रता प्राप्ति की ज्वाला जलती रही। जगह-जगह लोगों के आंदोलन चल रहे थे और अंग्रज़ों का कहर भारतीयों पर टूट रहा था। जल्द ही, वहाबी आंदोलन, मणिपुरी विद्रोह और थारवाडा से बड़ी संख्या में बर्मी लोगों को सज़ा के तौर पर इन द्वीपों पर भेज दिया गया था।

भारत के अलग-अलग हिस्सों से 1858 और 1860 के बीच करीब 2,000-4,000 स्वतंत्रता सेनानियों को अंडमान निर्वासित कर दिया गया था। उनमें से कई लोग इन कठिन परिस्थितियों को सह नहीं पाए और मारे गए, जिन लोगों ने भागने की कोशिश की तो उनमें से भी कोई जिंदा नहीं बच सका था। इन कैदियों को शुरुआत में खुले बाड़ों में रखा जाता था लेकिन धीरे-धीरे इन बस्तियों का आकार बढ़ता गया था और तब तक अंग्रेज़ों को समझ आ गया था कि लोगों को इस तरह रखना संभव नहीं है। अंग्रेज़ों को वहां एक बड़ी जेल की आवश्यकता हुई जिसमें कैदियों को एकांतवास में रखा जा सके।

1890 में चार्ल्स जे लायल और एएस लेथब्रिज की दो सदस्यीय समिति ने पोर्ट ब्लेयर का दौरा किया और वहां एक जेल बनाने की सिफारिश की थी। इसके बाद 13 दिसंबर 1893 को वहां जेल बनाए जाने का आदेश जारी किया गया और इसका निर्माण 1906 में जाकर पूरा हुआ। दिलचस्प बात यह भी है कि इस जेल के निर्माण के लिए केवल कैदियों का ही श्रमिक के तौर पर इस्तेमाल किया गया था और इसकी निर्माण सामग्री बर्मा (अब म्यांमार) से लाई गई थी।

निर्माणाधीन सेलुलर जेल (चित्र: Wikimedia Commons)

इस जेल का डिज़ाइन ‘पैनोप्टिकॉन’ के विचार पर आधारित था। यह विचार ग्रीक पौराणिक कथाओं से जुड़े एक विशालकाय ‘अर्जोस पैनॉप्टिस’ के नाम पर आधारित था जिसकी कई आंखें होती थीं और जो हर जगह पर देख सकता था, इसे पहरेदार या रक्षक के रूप में जाना जाता था। 18वीं शताब्दी में अंग्रेज दार्शनिक जेरेमी बेंथम ने पैनोप्टिकॉन की अवधारणा को विकसित किया था। इसमें जेल ऐसी होती थी कि एक केंद्रीय वॉच टॉवर से सभी कैदियों को देखा जा सकता था। अंडमान की सेलुलर जेल एक विशाल तीन मंज़िला संरचना था जिसमें सात पंख जैसी संरचनाएं थीं और ये सभी संरचनाएं एक केंद्रीय निगरानी टॉवर से निकलती थीं। इसमें एक ही या अलग-अलग पंखों में कैद कैदियों के बीच किसी भी तरह के संचार की कोई संभावना नहीं थी। इसे मृत्युदंड के बाद दूसरा सबसे कठोर दंड माना जाता था।

सेलुलर जेल का मॉडल (चित्र: Wikimedia Commons)

छोटी-छोटी सेल जैसी कोठरियां होने के कारण इसका नाम ‘सेलुलर जेल’ दिया गया था। सेलुलर जेल के लिए लिए ‘काला पानी’ का भी इस्तेमाल किया जाता था जो जेल के चारों ओर समुद्र के पानी और मृत्यु भयावहता से जुड़ा हुआ था। इस जेल में जेलर और सहायक जेलर सहित अधिकारियों के लिए आवास की व्यवस्था इमारत के भीतर की गई थी। इस जेल में 4 फीट चौड़े बरामदे के साथ अलग-अलग कोठरियां एक पंक्ति में बनाई गई थीं। हर कोठरी की माप 13-1/2 फीट x 7 फीट होती थी। जो विशेष रूप से डिज़ाइन की गई कुंडी प्रणाली के साथ एक भारी लोहे की ग्रिल के दरवाज़े के साथ सुरक्षित होती थी। जेल के निर्माण में लगभग 20,000 क्यूबिक फीट स्थानीय पत्थर और कैदियों द्वारा बनाई गई 30,00,000 ईंटों का इस्तेमाल किया गया था। इस जेल में कुल 693 कमरे थे और बस छत के पास एक रोशनदान हुआ करता था।

सेलुलर जेल (चित्र: Wikimedia Commons)

इन कैदियों को दिए जाने वाले कामों को तय समय में पूरा करना होता था जो लगभग असंभव होता था। ऐसे में जो कैदी इन कार्यों को समय से पूरा नहीं कर पाते थे उन्हें अमानवीय यातनाएं दी जाती थीं। कैदियों को बैल की तरह कोल्हू में जोता जाता था और उन्हें हर रोज़ 30 पाउंड तेल निकालना पड़ता था और अगर थकान के चलते कोई काम करना बंद कर देता था तो उसे कौड़े मारे जाते थे। अंग्रेज़ों का इरादा किसी भी तरह इन लोगों की इच्छाशक्ति को समाप्त करना था। तेल निकालने के अलावा वहां लोगों को, नारियल छीलने, नारियल की जटा को पीसने, रस्सी बनाने, पहाड़ काटने, दलदल भरने, जंगलों को साफ करने, सड़कें बिछाने आदि के लिए भेजा जाता था।

कैदियों को कोल्हू में जोता जाता था (चित्र: Konstantinos Kalaitzis)
जेल में कैदियों को दी जाने वाली यातनाएं (चित्र: Konstantinos Kalaitzis) 

कहा जाता है कि वहां कैद लोगों के लिए सबसे ज़्यादा डर ‘ओकम’ चुनने से था। यह रामबन घास से ‘रस्सी बनाने की कला’ थी जिसमें उच्च अम्लता होती थी और इसे करने के दौरान लगातार खुजली होती थी, खरोंच आ जाती थीं और खून बहता रहता था। स्वतंत्रता के लिए संघर्ष कर रहे लोगों को भूखे पेट कठोर श्रम करवाया जाता था और खाना इतना कम या खराब होता था कि कई कैदी कुपोषण का शिकार हो गए थे। लोगों को लोहे के त्रिकोणीय फ्रेम पर लटका दिया जाता, बैर फेटर्स, क्रॉसबार फेटर्स, गले में रिंग, पैरों में लोहे की चेन जैसी चीज़ों से लोगों को यातनाएं दी जाती थीं। सेलुलर जेल की किसी भी कोठरी में शौचालय तक की सुविधा नहीं थी।

 

सेलुलर जेल में इस तरह दी जाती थीं यातनाएं

काला पानी जेल में भारत से लेकर बर्मा तक के अनेक लोगों को कैद किया गया था। एक बार 238 कैदियों ने जेल से भागने की कोशिश की थी लेकिन उन्हें पकड़ लिया गया। जेल के अधीक्षक ने इन कैदियों में से 87 लोगों को फांसी पर लटकाने का आदेश दे दिया था।  राजनीतिक कैदियों के पास अंग्रेज़ों के अत्याचार के प्रतिरोध का एकमात्र तरीका भूख हड़ताल थी। 1932 में भूख हड़ताल की शुरुआत हुई और मई 1935 में हुई सामूहिक भूख हड़ताल 45 दिनों तक चली थी। इसके विरोध में ब्रिटिश अधिकारियों ने कैदियों को जबरन खाना देने का फैसला किया गया कैदियों को बिस्तर पर लिटाया जाता था और जेल प्रहरियों द्वारा उसके पैर और हाथों को दबा दिया जाता था। इसके बाद एक डॉक्टर नाक के ज़रिए एक ट्यूब से उसके पेट में दूध, चीनी और अंडे का मिश्रण ज़बरदस्ती डाल देता था। इस दौरान कुछ कैदियों के फेफड़ों में दूध चला गया और कई लोग निमोनिया से मर गए। इन लोगों में महावीर सिंह, मोहन किशोर और मोहित मोइत्रा शामिल थे। इन सैनानियों के शवों को पत्थरों से भरे थैले में डालकर समुद्र में फेंक दिया गया ताकि वे ऊपर ना आएं। अंग्रेज़ों के अत्याचारों का यह सिलसिला अंतहीन जैसा था। स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते लोगों को पकड़कर जेल में डाला जाता था और फिर अत्याचारों से मातृभूमि को आज़ाद कराने के उनके सपने को तोड़ने की कोशिश की जाती थी।

‘क्रास बार फिटर्स’ को इस तरह पहनाया जाता था

जुलाई 1937 आते-आते भारत के 7 प्रांतों में कांग्रेस के मंत्रिमंडलों का गठन हो गया था और सेलुलर जेल के राजनीतिक कैदियों को भारत वापस लाने की मांग ने ज़ोर पकड़ लिया था। अंग्रेज़ सरकार किसी भी तरह से झुकने को तैयार नहीं थी तो राजनीतिक बंदियों ने एक बार फिर भूख हड़ताल का सहारा लिया। 183 लोगों ने भूख हड़ताल शुरू कर दी। यह हड़ताल करीब 37 दिनों तक चली और इनके समर्थन में मुख्य भूमि की जेलों में बंद उनके साथियों ने भी भूख हड़ताल शुरू कर दी। महात्मा गांधी और रवींद्रनाथ टैगोर ने भी हस्तक्षेप किया और अंतत: अंग्रेज़ों को घुटने टेकने पर मजबूर होना पड़ा। राजनीतिक बंदियों को छोड़ने का फैसला लिया गया और स्वतंत्रता सेनानियों का पहला जत्था 22 सितंबर 1937 को अंडमान से चला और फिर लगातार कैदियों की रिहाई होती रही। जनवरी 1938 आते-आते के सभी राजनीतिक कैदियों को छोड़ दिया गया था।

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 1942 से 1945 तक जापानियों ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पर कब्ज़ा कर लिया था। इन द्वीपों से अंग्रेज़ अधिकारियों को भगा दिया गया था। उस समय नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लिए जापानियों के साथ मिलकर काम कर रहे थे और उन्होंने दिसंबर 1930 में भारत की अंतरिम सरकार के मुखिया के तौर पर सेलुलर जेल का दौरा किया था। इस यात्रा के दौरान नेताजी ने सेलुलर जेल को ‘भारतीय बास्टिल’ कहा था। फ्रांस में बास्टिल एक शाही किला और जेल था जो बॉर्बन राजाओं के अत्याचार का प्रतीक बन गया था। सेलुलर जेल में अंग्रेज़ों की यातनाओं के चलते इसे ‘भारतीय बास्टिल’ कहा गाय था।

दिसंबर 1930 में सेलुलर जेल का दौरा करते नेताजी बोस

विनायक दामोदर सावरकर और उनके भाई, उल्लासकर दत्त, बारिन कुमार घोष, भाई परमानंद, मोतीलाल वर्मा, बाबू राम हरि, पंडित परमानंद, लाधा राम, इंदु भूषण रॉय, पृथ्वी सिंह आजाद और पुलिन दास जैसे सैकड़ों लोगों को इस जेल में ले जाया गया था। 1941 में भूकंप के दौरान हुए नुकसान के बाद जेल के मूल सात में से चार विंग को ध्वस्त करना पड़ा था। 1947 में स्वतंत्रता के बाद इसके तीन विंग को स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की याद में संरक्षित करने का प्रस्ताव रखा गया। 11 फरवरी 1979 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई द्वारा सेलुलर जेल को राष्ट्रीय स्मारक के रूप में समर्पित किया गया था। सेलुलर जेल यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल की अस्थाई सूची में भी शामिल है।

स्रोत: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, सेलुलर जेल, स्वतंत्रता संग्राम, वीर सावरकर, Andaman and Nicobar Islands, Cellular Jail, Freedom Struggle, Veer Savarkar,
Tags: Andaman and Nicobar IslandsCellular JailFreedom struggleVeer Savarkarअंडमान और निकोबार द्वीप समूहवीर सावरकरसेलुलर जेलस्वतंत्रता संग्राम
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

DGP का भी आदेश ताक पर: बाहर भटकती रही पीड़िता और थाने में टहलता रहा सलमान…मुरादाबाद की दलित बच्ची ने झेली दोहरी दरिंदगी; पुलिसकर्मियों पर एक्शन, लेकिन कौन था वो उर्दू अनुवादक?

अगली पोस्ट

चैंपियंस ट्रॉफी विजय के जश्न पर सांप्रदायिक हमला – इतनी संख्या में ईंट-पत्थर और आगजनी की सामग्री कहाँ से आई?

संबंधित पोस्ट

औरंगज़ेब ने जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवार मे ज़िंदा चुनवाने का आदेश दिया था
इतिहास

वीर बाल दिवस: क्रिसमस-नववर्ष का जश्न तो ठीक है लेकिन वीर साहिबजादों का बलिदान भी स्मरण रहे

26 December 2025

यह सप्ताह, वर्ष का अंतिम सप्ताह है। नए साल की दहलीज़ पर खड़े इस सप्ताह का इंतज़ार सबको ही रहता है, क्योंकि पहले क्रिसमस का...

गुरु गोबिंद सिंह जी ने मुगल शासक औरंगज़ेब की अधीनता स्वीकार करने से इंकार कर दिया
इतिहास

वीर बाल दिवस: उत्सवों के बीच साहिबज़ादों के अमर बलिदान को नमन

26 December 2025

यह सप्ताह वर्ष का अंतिम सप्ताह होता है, जिसका लोग बेसब्री से इंतज़ार करते हैं, क्योंकि इसी दौरान पहले क्रिसमस और फिर नए साल का...

23 दिसम्बर  बलिदान-दिवस: परावर्तन के अग्रदूत — स्वामी श्रद्धानन्द
इतिहास

23 दिसम्बर बलिदान-दिवस: परावर्तन के अग्रदूत — स्वामी श्रद्धानन्द

23 December 2025

भारत में परावर्तन आंदोलन के सबसे प्रभावशाली और निर्भीक अग्रदूत स्वामी श्रद्धानन्द थे। उनका दृढ़ विश्वास था कि भारत में निवास करने वाले मुसलमानों के...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

French Media Exposes Pakistan and China on the Rafale lost

French Media Exposes Pakistan and China on the Rafale lost

00:04:36

An Quiet Dialogue Between Nature and the City|Ft. Shashi Tripathi | Art| Indian Navy

00:03:24

Ramjet-Powered Shell: A Potential Game Changer for Indian Artillery| IIT Madra

00:06:25

Trump makes false apache deal claims, runs down India US relations

00:05:44

Captured Turkish YIHA drone Showed by the Indian Army |Defence News| Operation Sindoor

00:00:58
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited