तमिलनाडु में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं लेकिन राजनीतिक सरगर्मी अभी से शुरू हो गई है। बीजेपी की तमिलनाडु इकाई के चीफ के अन्नामलाई ने अपना पद छोड़ने की बात कह दी है। अन्नामलाई का कहना है कि वे कुछ ही दिनों में नए चुने जाने वाले तमिलनाडु के अध्यक्ष पद की दौड़ में नहीं हैं। दक्षिण भारत में BJP के सबसे मुखर और उभरते हुए चेहरे के तौर पर देखे जा रहे अन्नामलाई के इस फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इस फैसले की पृष्ठभूमि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और AIADMK के महासचिव एडप्पादी के पलानीस्वामी (EPS) की मुलाकात को माना जा रहा है। एक समय BJP और AIADMK एकसाथ थीं लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के रास्ते अलग हो गए। अब जब दोनों दलों के फिर साथ आने की अटकलें हैं तो अन्नामलाई के भविष्य और तमिलनाडु की राजनीति को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। इस लेख में चर्चा करेंगे कि अन्नामलाई का इस्तीफा किस तरह तमिलनाडु की राजनीति को प्रभावित कर सकता है।
इस्तीफे की वजह AIADMK-BJP का गठबंधन!
तमिलनाडु में BJP अभी संगठन के विस्तार के दौर में है, पार्टी बूथ स्तर तक अपना संगठन खड़ा करना चाहती है जिससे की वो क्षेत्रीय दलों को कड़ी टक्कर दे पाए। BJP ने 2024 में AIADMK से अलग होकर लोकसभा चुनाव लड़ा और इसका खामियाजा ना केवल BJP बल्कि AIADMK को भी भुगतना पड़ा था। 2021 में AIADMK और BJP ने साथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ा था और इन चुनावों में BJP को 4 सीटें भी मिलीं। इसके बाद अन्नामलाई के आक्रामक रूख के चलते दोनों पार्टियों में मतभेद बढ़ते गए। ‘न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अन्नामलाई का रुख रहा था कि यह गठबंधन (AIADMK-BJP) बीजेपी के हित में नहीं है और उनके लगातार हमलों की वजह से सितंबर 2023 में AIADMK को NDA छोड़ना पड़ा था।
अन्नामलाई अपने आक्रामक तेवरों के साथ प्रचार में जुटे रहे और बीजेपी को उम्मीद थी कि 2024 के लोकसभा चुनावों में पार्टी को तमिलनाडु में अकेले दम पर अच्छी सीटें मिल सकती हैं। जब चुनाव नतीजे आए तो बीजेपी के खाते में तमिलनाडु की कोई लोकसभा सीट नहीं थी। हालांकि, पार्टी ने अपने वोट शेयर बढ़ा लिया था लेकिन यह सीटों में बदलने के लिए अपर्याप्त था। इन चुनावों में AIADMK भी खाली हाथ रही और कम-से-कम 13 सीटों पर दोनों ने एक-दूसरे को चुनावी नुकसान पहुंचाया। खुद अन्नामलाई अपनी कोयंबटूर की सीट DMK के उम्मीदवार से 1.18 लाख वोटों से हार गए जबकि तीसरे नंबर पर रहे AIADMK के उम्मीदवार को 2.36 लाख वोट मिले थे। अब जब राज्य में विधानसभा चुनाव में करीब एक वर्ष की बाकी है तो बीजेपी फिर पुरानी गठबंधन की राजनीति की ओर लौटने का मन बना रही है।
BJP-AIADMK के साथ रहने से दोनों ही दलों के वोट प्रतिशत में फायदा रहा है जो पिछले विधानसभा चुनाव में सीटों में भी परिवर्तित हुआ था। DMK को हराने के लिए AIADMK के नेता भी BJP के साथ आने का मन बना रहे थे। ‘द प्रिंट’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, तमिलनाडु के पश्चिमी क्षेत्र के एक वरिष्ठ नेता लगातार AIADMK को BJP से हाथ मिलाने के लिए प्रेरित कर रहे थे। एक वरिष्ठ नेता के प्रिंट को बताया, “अन्नामलाई ने जो कुछ कहा था, उससे हमारे मतभेद थे, फिर भी हमने (AIADMK महासचिव) EPS को बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व से बातचीत करने और संबंधों को फिर से जोड़ने के लिए राजी किया। क्योंकि, डीएमके को हराने का यही एकमात्र तरीका है।” अन्नामलाई के आक्रामक बयानों को लेकर दोनों पार्टियों के बीच मतभेद थे और अब अन्नामलाई के पद छोड़ने को दोनों पार्टियों के साथ आने पर मुहर की तरह देखा जा रहा है। अगर दोनों पार्टियां एकसाथ आती हैं तो यह गठबंधन निश्चित तौर पर DMK के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
अन्नामलाई के पद छोड़ने की एक और वजह उनका और पलानीस्वामी का एक ही समुदाय से आना भी हो सकती है। अन्नामलाई और पलानीस्वामी दोनों ही तमिलनाडु के पश्चिमी क्षेत्र के गौंडर समुदाय से हैं। पलानीस्वामी AIADMK का चेहरा हैं और अगर दोनों पार्टियों में गठबंधन होता है तो BJP नए अध्यक्ष के तौर पर एक और समुदाय या क्षेत्र में अपनी पैंठ बनाने के लिए विकल्प तलाश सकती है। इससे गठबंधन को फायदा मिलना तय माना जा रहा है।
क्या है अन्नामलाई का भविष्य?
इस समय एक बड़ा सवाल अन्नामलाई के भविष्य को लेकर है। तमिलनाडु में बीजेपी की तेज़ी से बढ़ती लोकप्रियता के पीछे एक बड़ी वजह अन्नामलाई की आक्रामकता को माना जा रहा था। लेकिन अन्नामलाई के पद छोड़ने को उनके लिए सज़ा के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक, केंद्रीय नेतृत्व अन्नामलाई के लिए पार्टी में एक शानदार भविष्य देख रहा है। एक अन्य नेता ने कहा, “अन्नामलाई राज्य अध्यक्ष पद से हटें या नहीं लेकिन तमिलनाडु के लिए पार्टी की दीर्घकालिक रणनीति में वे एक महत्वपूर्ण व्यक्ति बने रहेंगे। वे राष्ट्रीय भूमिका निभाते हैं या राज्य में कोई अलग कार्यभार संभालते हैं, यह देखना अभी बाकी है।” अन्नामलाई ने पार्टी के प्रति पूरी प्रतिबद्धता जताई है और वे एक साधारण कार्यकर्ता के तौर पर काम करने के लिए भी तैयार हैं।