वक्फ बिल संशोधन संसद के दोनों सदनों से पास हो गया है और वक्फ बिल को लेकर देश में गंभीर बहस चल रही है। मुस्लिम नेता, संगठन और राजनीतिक दल दो धड़ों में बंटे हुए हैं एक तरफ यहां लोग इसे बड़ा सुधारवादी कदम बता रहे हैं तो दूसरी तरफ इसे संविधान पर हमला तक बताया जा रहा है। बहस के बीच असल हकीकत तो यही है कि जल्द ही यह संशोधन बिल अब कानून का रूप लेने जा रहा है। इसे केवल राष्ट्रपति की मंज़ूरी मिलनी बाकी है। वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ एवं हज राज्यमंत्री दानिश आज़ाद अंसारी ने वक्फ बोर्ड में भ्रष्टाचार को लेकर हैरान करने वाला दावा किया है।
दानिश ने क्या कहा?
‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ के साथ बातचीत के दौरान दानिश आज़ाद अंसारी ने वक्फ बोर्ड के वार्षिक राजस्व में लगभग 1100 करोड़ रुपये के गबन का संदेह जताया है। अंसारी ने वक्फ संशोधन बिल पारित होने पर खुशी जाहिर की और कहा कि यह मुसलमानों के कल्याण में मील का पत्थर साबित होगा और जो लोग विधेयक का विरोध कर रहे हैं, वे अपने निहित स्वार्थों के लिए ऐसा कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “यह किसी सरकार द्वारा किया गया पहला संशोधन नहीं है, 1954, 1995 और 2013 में भी संशोधन हुए थे। मुसलमानों को यह नहीं सोचना चाहिए कि यह अपनी तरह का पहला संशोधन है। वक्फ बोर्ड एक प्रशासनिक निकाय है, न कि धार्मिक निकाय, जैसा कि कई लोग मानते हैं।”
दानिश ने वक्फ बोर्ड में भ्रष्टाचार किए जाने का दावा किया है। दानिश ने कहा, “देश में करीब 1.25 लाख वक्फ संपत्तियों की अनुमानित कीमत करीब 1.25 लाख करोड़ रुपये है, जिससे सालाना 1200 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होना चाहिए। हालांकि, फिलहाल वक्फ बोर्ड को सालाना सिर्फ 150 करोड़ रुपये का राजस्व मिल रहा है। करीब 1100 करोड़ रुपये का अंतर, यह पैसा कहां जा रहा है? अगर यह 1100 करोड़ रुपये हर साल वक्फ बोर्ड के पास आते तो 800 स्कूल/कॉलेज खुल जाते, जिससे गरीब मुसलमानों को मदद मिलती। करीब 200 अस्पताल खुल जाते, जिससे गरीबों को मदद मिलती, साथ ही कई कौशल विकास केंद्र भी खुल जाते। मुझे वक्फ के जरिए हर साल 1100 करोड़ रुपये के गबन की बू आ रही है।”
दानिश ने वक्फ को लेकर जारी लड़ाई को ‘खास’ बनाम ‘आम’ मुसलमान के बीच की लड़ाई बताया है। उनका कहना है कि जो लोग विधेयक का विरोध करने रहे थे वे अपने निहित स्वार्थ के लिए ऐसा कर रहे हैं उन्हें मुसलमानों के कल्याण से कोई लेना-देना नहीं है।