योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रयागराज में संपन्न महाकुंभ को दुनियाभर में सराहा जा रहा है। हिंदू आस्था के इस भव्य आयोजन ने न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के सामने एक मिसाल पेश की है। योगी सरकार की कुशल रणनीति और शानदार प्रबंधन की वजह से महाकुंभ 2025 ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ दी है।
इसकी भव्यता और सफलता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दुनिया की प्रतिष्ठित हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने महाकुंभ के भोजन प्रबंधन (फूड मैनेजमेंट) को अपने एमबीए पाठ्यक्रम में शामिल करने का फैसला किया है। इसके लिए हार्वर्ड यूनिवर्सिटी एक केस स्टडी तैयार कर रही है, जो बड़े आयोजनों के प्रबंधन के लिए एक बेहतरीन उदाहरण बनेगी। सिर्फ हार्वर्ड ही नहीं, बल्कि भारत के आईआईटी और आईआईएम जैसे शीर्ष शिक्षण संस्थान भी महाकुंभ के विभिन्न पहलुओं पर केस स्टडी तैयार कर इसे अपने पाठ्यक्रम में शामिल करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
1 अप्रैल को नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव अमृत अभिजात की अध्यक्षता में हुई बैठक में इन संस्थानों ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट पेश की। इससे साफ है कि योगी सरकार के नेतृत्व में हुआ यह महाकुंभ केवल आध्यात्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि प्रबंधन के क्षेत्र में भी एक ऐतिहासिक मिसाल बन चुका है।
हार्वर्ड कर रहा भव्य आयोजन के फूड मैनेजमेंट की केस स्टडी
महाकुंभ 2025 में करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का संगम देखने को मिला, जहां 66 करोड़ से अधिक लोगों ने पवित्र डुबकी लगाई। इतनी बड़ी संख्या में भक्तों की भागीदारी के बावजूद, प्रशासन ने जिस तरह से हर व्यवस्था को संभाला, वह एक मिसाल बन गई। खासकर भोजन प्रबंधन को लेकर जिस तरह की सुव्यवस्था रही, उसने दुनियाभर का ध्यान आकर्षित किया।
अब हार्वर्ड यूनिवर्सिटी इस ऐतिहासिक आयोजन के फूड मैनेजमेंट पर एक केस स्टडी तैयार कर रही है। इसमें इस बात का विश्लेषण किया जाएगा कि 45 दिनों तक चले महाकुंभ में इतनी विशाल भीड़ उमड़ने के बावजूद, किसी भी श्रद्धालु को भूखा नहीं सोना पड़ा, न ही कोई बिना भोजन के लौटा। यह सुनियोजित व्यवस्थापन अब मैनेजमेंट छात्रों के लिए अध्ययन का विषय बनेगा।
महाकुंभ में जगह-जगह भंडारे लगाए गए, जहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु एक साथ बैठकर भोजन कर सकते थे। ये भंडारे 24 घंटे खुले रहे, ताकि हर जरूरतमंद को समय पर भोजन मिल सके। योगी सरकार की ओर से सभी वर्गों के लिए भोजन की पर्याप्त व्यवस्था की गई थी। वहीं, समाजसेवी संस्थाएं, साधु-संतों के मठ और मंदिर, उद्योग जगत की प्रतिष्ठित कंपनियां जैसे अंबानी और अडाणी समूह, व्यापारिक संगठन और अन्य सामाजिक संस्थाओं ने भी इसमें महत्वपूर्ण योगदान दिया।
महाकुंभ का यह प्रबंधन इतना प्रभावी था कि किसी को भी यह महसूस नहीं हुआ कि वह दान का भोजन कर रहा है। हर श्रद्धालु को प्रसाद स्वरूप भोजन परोसा गया, जिससे यह आयोजन सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के अतिथि सत्कार और सेवाभाव का अद्भुत उदाहरण बन गया।
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधियों ने बताया कि उनकी केस स्टडी जल्द पूरी होगी, जिसे यूनिवर्सिटी के प्रबंधन विभाग के समक्ष प्रस्तुत कर एमबीए पाठ्यक्रम में शामिल करने का प्रस्ताव रखा जाएगा। उनका मानना है कि महाकुंभ का भोजन प्रबंधन वैश्विक स्तर पर अध्ययन और अनुसंधान के लिए एक आदर्श मॉडल साबित हो सकता है।
इतने बड़े पैमाने पर भोजन की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रबंध किए गए थे। बड़े बर्तनों का उपयोग कर भोजन तैयार किया गया, जिससे किसी भी श्रद्धालु को भोजन की कमी न हो। इस सुव्यवस्थित प्रक्रिया ने महाकुंभ 2025 को एक ऐसा ऐतिहासिक आयोजन बना दिया, जिसका प्रभाव अब दुनियाभर के मैनेजमेंट विशेषज्ञों और शिक्षण संस्थानों तक पहुंच चुका है।
महाकुंभ पर हो रहीं केस स्टडीज
यह आयोजन भविष्य में मैनेजमेंट, चिकित्सा, जल संसाधन और संचार प्रबंधन के क्षेत्र में शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं के अध्ययन का विषय बन चूका है।
आईआईटी चेन्नई वाटर मैनेजमेंट पर शोध कर रहा है, जिसमें यह समझने का प्रयास किया जा रहा है कि कैसे 45 दिनों तक 66 करोड़ श्रद्धालुओं के लिए संगम में स्वच्छ जल उपलब्ध कराया गया। इसमें पेयजल, स्नान और अपशिष्ट जल प्रबंधन की बारीकियों का अध्ययन किया जा रहा है ताकि भविष्य में इस पैमाने के आयोजनों में जल संसाधन का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
एम्स दिल्ली हेल्थ सिस्टम पर स्टडी कर रहा है, जिसमें यह विश्लेषण किया जा रहा है कि इतनी बड़ी भीड़ के बावजूद किसी महामारी के फैलने से कैसे बचाव किया गया, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को कैसे संभाला गया, और भगदड़ जैसी स्थितियों में घायलों को तुरंत उपचार कैसे मुहैया कराया गया।
आईआईएम इंदौर पर्यटन, मीडिया की भूमिका और सोशल मीडिया प्रबंधन पर रिसर्च कर रहा है। इस अध्ययन में देखा जा रहा है कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महाकुंभ की ब्रांडिंग और प्रचार-प्रसार किस तरह हुआ, मीडिया की क्या भूमिका रही और सोशल मीडिया के माध्यम से आयोजन को कैसे विश्वस्तर पर पहुंचाया गया।