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‘भारतीय स्टार्टअप्स फूड डिलीवरी तक सीमित’: पीयूष गोयल की टिप्पणी पर मचा घमासान; जानिए कैसे भारत AI की दौड़ में अमेरिका-चीन से पिछड़ा?

भारत अपनी GDP का सिर्फ 0.64% ही R&D पर खर्च करता है जबकि अमेरिका अपनी GDP का 3% से अधिक और चीन लगभग 3% खर्च करता है

himanshumishra द्वारा himanshumishra
4 April 2025
in चर्चित
पीयूष गोयल की स्टार्टअप्स पर टिप्पणी को लेकर मचा बवाल

पीयूष गोयल की स्टार्टअप्स पर टिप्पणी को लेकर मचा बवाल

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भारत में स्टार्टअप कल्चर ने तेज़ी से रफ्तार पकड़ी है, लेकिन इसकी दिशा को लेकर अब गंभीर बहस छिड़ गई है। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हुई, जिसमें भारत और चीन के स्टार्टअप्स की तुलना की गई। इस तस्वीर में दिखाया गया कि भारत के ज्यादातर स्टार्टअप्स फूड डिलीवरी, आइसक्रीम, कुकीज़ और इंस्टेंट ग्रॉसरी डिलीवरी जैसे सेक्टर्स में काम कर रहे हैं, जबकि चीन के स्टार्टअप्स इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), सेमीकंडक्टर्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स और डीप टेक जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इस तस्वीर और इससे जुड़ी बहस के बीच केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की एक टिप्पणी ने विवाद को और हवा दे दी।

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की प्रतिक्रिया पर शार्क टैंक के जज और स्टार्टअप आइकॉन अशनीर ग्रोवर, ज़ेप्टो के सीईओ आदित पालिचा और इन्फोसिस के पूर्व बोर्ड सदस्य मोहनदास पई जैसे दिग्गज बिजनेस लीडर्स ने कड़ी आपत्ति जताई और तीखे सवाल उठाए। इस लेख में हम इस पूरे विवाद पर विस्तार से चर्चा करेंगे कि आखिर केंद्रीय मंत्री की टिप्पणी ने इतना हंगामा क्यों मचाया? साथ ही, उन ठोस आंकड़ों पर भी नज़र डालेंगे, जो यह साबित करते हैं कि भारत AI और डीप टेक की दौड़ में अमेरिका और चीन से क्यों पिछड़ गया है। क्या सरकारी नीतियां और निवेश की प्राथमिकताएं इस गिरावट के लिए ज़िम्मेदार हैं? इन सभी पहलुओं को विस्तार से समझने की कोशिश करेंगे।

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केंद्रीय मंत्री का बयान और उस पर बिजनेस जगत के दिग्गजों की प्रतिक्रिया

नई दिल्ली के भारत मंडपम में स्टार्टअप महाकुंभ 2025 का आयोजन हो रहा है, जहां भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। इस आयोजन में शामिल हुए केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की टिप्पणी ने विवाद खड़ा कर दिया है।

स्टार्टअप महाकुंभ 2025 के मंच से बोलते हुए पीयूष गोयल ने भारतीय स्टार्टअप्स के फोकस पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “क्या हम डिलीवरी बॉय बनकर ही खुश रहेंगे? क्या यही भारत की दिशा है? ये स्टार्टअप नहीं, सिर्फ कारोबार है।” उन्होंने आगे कहा कि अब समय आ गया है कि भारतीय स्टार्टअप्स सेमीकंडक्टर्स, मशीन लर्निंग, एआई, रोबोटिक्स जैसे उन्नत क्षेत्रों में कदम बढ़ाएं। उन्होंने चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की कंपनियां रोबोटिक्स, 3D मैन्युफैक्चरिंग और भविष्य की फैक्ट्रियों पर काम कर रही हैं।

इसके अलावा, उन्होंने यह भी सवाल किया कि “क्या हमें सिर्फ आइसक्रीम और चिप्स बनाने पर ही ध्यान देना चाहिए?” साथ ही, उन्होंने हाल ही में कंटेंट क्रिएटर्स से अपील की थी कि वे जिम्मेदार और नए आइडियाज़ पर काम करें। उन्होंने डिजिटल मीडिया, फिल्म निर्माण, गेमिंग और संगीत जैसे क्षेत्रों में भारत की निर्यात क्षमता बढ़ाने की भी बात कही।

बिजनेस जगत से प्रतिक्रियाएँ 

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के इस बयान ने स्टार्टअप कम्युनिटी में नाराजगी की लहर पैदा कर दी। शार्क टैंक के पूर्व जज और भारतपे के को-फाउंडर अशनीर ग्रोवर, जेप्टो के सीईओ आदित पालिचा, और इन्फोसिस के पूर्व बोर्ड सदस्य मोहनदास पई सहित कई बिजनेस लीडर्स ने मंत्री के बयान की आलोचना की।

क्या बोले अशनीर ग्रोवर 

अपने बेबाक अंदाज के लिए मशहूर अशनीर ग्रोवर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर केंद्रीय मंत्री पर तंज कसते हुए लिखा, “भारत में सिर्फ नेताओं को ‘रियलिटी चेक’ की जरूरत है, बाकी हर कोई भारत की वास्तविकता में ही रह रहा है।”

अशनीर ग्रोवर का ट्वीट
अशनीर ग्रोवर का ट्वीट

उन्होंने कहा कि चीन ने भी शुरुआत फूड डिलीवरी स्टार्टअप्स से ही की थी और फिर धीरे-धीरे डीप टेक की ओर बढ़ा। ग्रोवर ने कटाक्ष करते हुए लिखा कि “नेताओं को आज के जॉब क्रिएटर्स को फटकारने से पहले 20 साल तक 10% से ज्यादा की आर्थिक वृद्धि दर बनाए रखने का लक्ष्य तय करना चाहिए।”

क्या बोले जेप्टो के सीईओ आदित पालिचा 

क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ज़ेप्टो के सीईओ आदित पालिचा ने भी इस बयान की कड़ी आलोचना की और X पर लंबी पोस्ट लिखी। उन्होंने कहा, “भारतीय उपभोक्ता इंटरनेट स्टार्टअप्स की आलोचना करना बहुत आसान है। अमेरिका और चीन की डीप टेक कंपनियों से तुलना करना भी आसान है। लेकिन क्या हम इस हकीकत को नज़रअंदाज कर सकते हैं कि आज 1.5 लाख लोग ज़ेप्टो के ज़रिए कमाई कर रहे हैं?”

It is easy to criticise consumer internet startups in India, especially when you compare them to the deep technical excellence being built in US/China. Using our example, the reality is this: there are almost 1.5 Lakh real people who are earning livelihoods on Zepto today – a…

— Aadit Palicha (@aadit_palicha) April 3, 2025

उन्होंने आगे कहा, “जेप्टो जैसी कंपनियां जो 3.5 साल पहले तक अस्तित्व में नहीं थीं, आज सरकार को सालाना 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा टैक्स दे रही हैं, एक बिलियन डॉलर से अधिक FDI ला रही हैं, भारत की बैकएंड सप्लाई चेन को व्यवस्थित करने में सैकड़ों करोड़ का निवेश कर रही हैं। अगर यह भारतीय नवाचार का चमत्कार नहीं है, तो फिर क्या है?”

उन्होंने भारत में AI और डीप टेक स्टार्टअप्स की कमी के पीछे सरकार की नीति पर सवाल उठाते हुए कहा, “भारत के पास खुद का AI मॉडल क्यों नहीं है? ऐसा इसलिए है क्योंकि हमने अभी भी महान इंटरनेट कंपनियां नहीं बनाई हैं।”

उन्होंने बताया कि आज AI में बड़े खिलाड़ी कौन हैं? फेसबुक, गूगल, अलीबाबा, टेंसेंट – क्योंकि सभी ने उपभोक्ता इंटरनेट कंपनियों के रूप में शुरुआत की थी। पालिचा ने चेताया कि “अगर भारत को महान टेक्नोलॉजी क्रांतियों में शामिल होना है, तो हमें स्थानीय इंटरनेट चैंपियंस को आगे लाना होगा। सरकार और भारतीय पूंजी निवेशकों को इन चैंपियंस के निर्माण में मदद करनी होगी, बजाय उन्हें नीचा दिखाने के।”

क्या बोले इन्फोसिस के पूर्व बोर्ड सदस्य मोहनदास पई

केंद्रीय मंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए इन्फोसिस के पूर्व बोर्ड सदस्य मोहनदास पई ने भी X पर लिखा, “भारत में कई छोटे डीप टेक स्टार्टअप्स तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन पूंजी कहां है?”

उन्होंने डेटा साझा करते हुए कहा कि, “2014 से 2024 के बीच भारतीय स्टार्टअप्स को सिर्फ 160 अरब डॉलर का निवेश मिला, जबकि चीन को 845 अरब डॉलर और अमेरिका को 2.3 ट्रिलियन डॉलर का निवेश मिला। इस फंडिंग गैप के बावजूद भारत के स्टार्टअप्स आगे बढ़ रहे हैं। लेकिन RBI विदेशी निवेशकों को परेशान करता है। सरकार को चाहिए कि वह स्टार्टअप्स की मदद करे, न कि उन्हें कमजोर करे।”

भारत AI की दौड़ में अमेरिका और चीन से क्यों पिछड़ा?

बहसबाजी से इतर आइये आंकड़ों के आधार पर समझते हैं कि आखिर भारत अभी तक अमेरिका और चीन जैसे देशों से इतना पीछे क्यों है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग (ML) और रोबोटिक्स आज के दौर की सबसे तेजी से बढ़ती तकनीकें हैं। अमेरिका, चीन और यूरोप में इन तकनीकों पर आधारित स्टार्टअप्स अरबों डॉलर के मूल्यांकन तक पहुंच चुके हैं। लेकिन भारत, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा IT हब माना जाता है, इस क्षेत्र में अब तक कोई बड़ा वैश्विक स्टार्टअप नहीं खड़ा कर पाया है। इसके पीछे कई कारण हैं, जिनमें सरकारी नीतियों की अपर्याप्तता, निवेश की कमी और जरूरी संसाधनों की अनुपलब्धता शामिल हैं। सरकार ने AI को बढ़ावा देने के लिए कुछ पहलें की हैं, जैसे कि ‘राष्ट्रीय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रणनीति’ और ‘IndiaAI मिशन’ की घोषणा। लेकिन इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और स्टार्टअप्स के लिए व्यावहारिक समर्थन अभी भी नदारद है।

AI इंडस्ट्री में अमेरिका की बढ़ती ताकत को देखते हुए, चीन ने DeepSeek जैसे बड़े AI मॉडल तैयार किए, लेकिन भारत अब तक इस स्तर की कोई सफलता हासिल नहीं कर पाया। आर्थिक सर्वेक्षण 2025 के अनुसार, भारत में रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) पर अपर्याप्त खर्च इसकी एक बड़ी वजह है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत 480-पृष्ठीय आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, भारत R&D के क्षेत्र में अन्य बड़े देशों से काफी पीछे है। IT, फार्मा, स्टार्टअप और नीति निर्माण जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भी R&D निवेश की बड़ी कमी है। भारत का कुल R&D खर्च 2011 में ₹60,196 करोड़ था, जो FY21 में बढ़कर ₹1,27,381 करोड़ हो गया। लेकिन यह GDP का सिर्फ 0.64% ही है। वहीं, अमेरिका अपनी GDP का 3% से अधिक और चीन लगभग 3% खर्च करता है (वर्ल्ड बैंक डेटा, 2020-21)।

आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी बताया गया है कि हालांकि सरकार ने R&D को बढ़ावा देने के लिए कुछ प्रयास किए हैं, जैसे कि टैक्स छूट, अनुदान, और Digital India जैसे कार्यक्रम, लेकिन निजी क्षेत्र की भागीदारी अपर्याप्त बनी हुई है। अमेरिका में निजी कंपनियां (Google, Amazon, Microsoft) R&D का 70% खर्च करती हैं। चीन में सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर GDP का 2.1% R&D में निवेश करते हैं। लेकिन भारत में R&D का बड़ा हिस्सा अभी भी सरकारी संस्थानों के माध्यम से आता है, जबकि निजी क्षेत्र का योगदान बहुत कम है।

सर्वे के मुताबिक, भारत का R&D बेसिक रिसर्च पर केंद्रित है, जबकि अमेरिका और चीन एप्लाइड रिसर्च पर ध्यान देते हैं। एप्लाइड रिसर्च का अभाव भारतीय स्टार्टअप्स के विकास को बाधित करता है और निजी निवेश को आकर्षित करने में असफल रहता है। भारत में AI और रोबोटिक्स स्टार्टअप्स के उभरने में कई समस्याएं हैं, जिनमें फंडिंग की कमी, नीतिगत अस्थिरता, औद्योगिक-अकादमिक सहयोग की कमी और बुनियादी ढांचे की समस्या प्रमुख हैं। भारत में अभी भी AI और रोबोटिक्स के लिए आवश्यक उच्चस्तरीय डेटा सेंटर और सुपरकंप्यूटिंग संसाधन सीमित हैं।

आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में R&D कुछ गिने-चुने क्षेत्रों में केंद्रित है, जैसे कि ड्रग और फार्मा उद्योग, सूचना प्रौद्योगिकी (IT), परिवहन, रक्षा और बायोटेक्नोलॉजी। सरकार की घोषणाएं और योजनाएं कागजों पर भले ही शानदार दिखती हों, लेकिन व्यवहारिक क्रियान्वयन की कमी भारत को AI की इस दौड़ में पीछे छोड़ रही है। अमेरिका और चीन जहां AI में दुनिया का नेतृत्व कर रहे हैं, वहीं भारत केवल IT सर्विस प्रोवाइडर बनकर रह गया है। अगर भारत को इस क्षेत्र में वाकई आगे बढ़ना है, तो सिर्फ घोषणाएं नहीं, बल्कि R&D निवेश में वृद्धि, निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने और ठोस नीतिगत सुधारों की जरूरत है। वरना आने वाले समय में भी AI और रोबोटिक्स की वैश्विक दौड़ में भारत केवल एक दर्शक बनकर रह जाएगा।

स्रोत: Piyush Goyal, Startups, AI, Supercomputing
Tags: AIPiyush GoyalStartupsSupercomputingएआईपीयूष गोयलसुपरकम्प्युटिंन्गस्टार्टअप्स
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