TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    मोहन भागवत ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं होना चाहिए।

    मोहन भागवत बोले- विभाजन के बाद भारत आए लोग ‘शरणार्थी’ नहीं, बल्कि संघर्ष के योद्धा थे

    मॉनसून: दिल्ली-एनसीआर में झमाझम बारिश

    मॉनसून: दिल्ली-एनसीआर में झमाझम बारिश, उत्तर भारत के कई राज्यों में 6 जुलाई तक बारिश का अलर्ट

    रामपुर में गरजे सीएम

    रामपुर में गरजे सीएम योगी, सपा-कांग्रेस पर साधा निशाना; बोले- पहले विरासत का होता था अपमान, अब विकास और आस्था साथ-साथ

    कॉमेडी के नाम पर अश्लीलता

    कॉमेडी के नाम पर अश्लीलता : आखिर कब तक?

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    भारत-जापान शिखर सम्मेलन

    भारत-जापान शिखर सम्मेलन: पीएम मोदी और जापानी पीएम सनाए ताकाइची ने आर्थिक सुरक्षा, तकनीक और रक्षा सहयोग को दी नई दिशा

    India’s Infrastructure Boom: What It Means for Businesses and Citizens

    India’s Infrastructure Boom: What It Means for Businesses and Citizens

    वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि

    वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि ने मोदी सरकार के तहत भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था को दी मजबूती, सेवा क्षेत्र और निवेश बने व्यापक विकास के प्रमुख आधार

    भारत की अर्थव्यवस्था

    भारत की अर्थव्यवस्था ने दिखाई मजबूती, GDP ग्रोथ 7.7% पहुंची; अगले साल धीमी पड़ सकती है रफ्तार

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    भारतीय सेना का बड़ा बदलाव

    भारतीय सेना का बड़ा बदलाव: पहले इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स से बदलेगी युद्ध की रणनीति

    ब्रह्मोस मिसाइल

    ब्रह्मोस मिसाइल के जरिए बढ़ी भारत की रक्षा ताकत, वियतनाम से समझौता, इंडोनेशिया के साथ सौदा अंतिम चरण में

    अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नौसेना का नेतृत्व करने के बाद अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0: सेना प्रमुख ने भारत की अगली सैन्य रणनीति के दिए संकेत, भविष्य के संघर्षों के लिए तैयार हो रही हैं सशस्त्र सेनाएं

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर लगी मुहर,

    डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर लगी मुहर, मार्को रुबियो बोले- जल्द आएंगे अमेरिकी राष्ट्रपति

    अमेरिका-ईरान समझौते का दावा

    अमेरिका-ईरान समझौते का दावा: ट्रंप ने संघर्ष खत्म होने और होर्मुज़ जलडमरूमध्य खुलने की घोषणा की

    रूसी तेल का आयात

    रूसी तेल का आयात पहले से ज्यादा कर रहा है भारत, 41 देशों से हो रही ऊर्जा खरीद: हरदीप सिंह पुरी

    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल,

    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल, निजी संकट या व्हाइट हाउस का दबाव?

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    राम मंदिर चढ़ावा विवाद

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद: महंत धर्मदास बोले- अयोग्य लोगों को जिम्मेदारी देने से हुई गड़बड़ी, देशवासियों से शांति बनाए रखने की अपील

    शहीद हुए 6 जवानों के नाम पहली बार सार्वजनिक

    ऑपरेशन सिंदूर: शहीद हुए 6 जवानों के नाम पहली बार सार्वजनिक, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर हमेशा के लिए दर्ज

    महाभारत से जुड़े प्रमुख दृश्य

    महाभारत: श्रीकृष्ण ने पांडवों के लिए मांगे थे ये 5 गांव, आज इन नामों से जाने जाते हैं शहर

    अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच

    अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच SIT के हाथों में, 200 करोड़ रुपये से अधिक की कथित गड़बड़ी की आशंका

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    Rivalries in Cricket That Still Grab the Globe’s Attention

    Rivalries in Cricket That Still Grab the Globe’s Attention

    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल

    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल: National Investigation Agency ने 4 राज्यों में पाकिस्तान से जुड़े आतंकी नेटवर्क पर कसा शिकंजा

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    मोहन भागवत ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं होना चाहिए।

    मोहन भागवत बोले- विभाजन के बाद भारत आए लोग ‘शरणार्थी’ नहीं, बल्कि संघर्ष के योद्धा थे

    मॉनसून: दिल्ली-एनसीआर में झमाझम बारिश

    मॉनसून: दिल्ली-एनसीआर में झमाझम बारिश, उत्तर भारत के कई राज्यों में 6 जुलाई तक बारिश का अलर्ट

    रामपुर में गरजे सीएम

    रामपुर में गरजे सीएम योगी, सपा-कांग्रेस पर साधा निशाना; बोले- पहले विरासत का होता था अपमान, अब विकास और आस्था साथ-साथ

    कॉमेडी के नाम पर अश्लीलता

    कॉमेडी के नाम पर अश्लीलता : आखिर कब तक?

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    भारत-जापान शिखर सम्मेलन

    भारत-जापान शिखर सम्मेलन: पीएम मोदी और जापानी पीएम सनाए ताकाइची ने आर्थिक सुरक्षा, तकनीक और रक्षा सहयोग को दी नई दिशा

    India’s Infrastructure Boom: What It Means for Businesses and Citizens

    India’s Infrastructure Boom: What It Means for Businesses and Citizens

    वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि

    वित्त वर्ष 2025–26 में 7.7% की आर्थिक वृद्धि ने मोदी सरकार के तहत भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था को दी मजबूती, सेवा क्षेत्र और निवेश बने व्यापक विकास के प्रमुख आधार

    भारत की अर्थव्यवस्था

    भारत की अर्थव्यवस्था ने दिखाई मजबूती, GDP ग्रोथ 7.7% पहुंची; अगले साल धीमी पड़ सकती है रफ्तार

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    भारतीय सेना का बड़ा बदलाव

    भारतीय सेना का बड़ा बदलाव: पहले इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स से बदलेगी युद्ध की रणनीति

    ब्रह्मोस मिसाइल

    ब्रह्मोस मिसाइल के जरिए बढ़ी भारत की रक्षा ताकत, वियतनाम से समझौता, इंडोनेशिया के साथ सौदा अंतिम चरण में

    अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नौसेना का नेतृत्व करने के बाद अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0: सेना प्रमुख ने भारत की अगली सैन्य रणनीति के दिए संकेत, भविष्य के संघर्षों के लिए तैयार हो रही हैं सशस्त्र सेनाएं

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर लगी मुहर,

    डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर लगी मुहर, मार्को रुबियो बोले- जल्द आएंगे अमेरिकी राष्ट्रपति

    अमेरिका-ईरान समझौते का दावा

    अमेरिका-ईरान समझौते का दावा: ट्रंप ने संघर्ष खत्म होने और होर्मुज़ जलडमरूमध्य खुलने की घोषणा की

    रूसी तेल का आयात

    रूसी तेल का आयात पहले से ज्यादा कर रहा है भारत, 41 देशों से हो रही ऊर्जा खरीद: हरदीप सिंह पुरी

    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल,

    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल, निजी संकट या व्हाइट हाउस का दबाव?

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    राम मंदिर चढ़ावा विवाद

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद: महंत धर्मदास बोले- अयोग्य लोगों को जिम्मेदारी देने से हुई गड़बड़ी, देशवासियों से शांति बनाए रखने की अपील

    शहीद हुए 6 जवानों के नाम पहली बार सार्वजनिक

    ऑपरेशन सिंदूर: शहीद हुए 6 जवानों के नाम पहली बार सार्वजनिक, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर हमेशा के लिए दर्ज

    महाभारत से जुड़े प्रमुख दृश्य

    महाभारत: श्रीकृष्ण ने पांडवों के लिए मांगे थे ये 5 गांव, आज इन नामों से जाने जाते हैं शहर

    अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच

    अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच SIT के हाथों में, 200 करोड़ रुपये से अधिक की कथित गड़बड़ी की आशंका

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    Rivalries in Cricket That Still Grab the Globe’s Attention

    Rivalries in Cricket That Still Grab the Globe’s Attention

    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल

    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल: National Investigation Agency ने 4 राज्यों में पाकिस्तान से जुड़े आतंकी नेटवर्क पर कसा शिकंजा

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

प्लेग महामारी में दुर्व्यवहार कर रहे अंग्रेज अधिकारी को सरेआम मारी गोली और हाथ में गीता लिए चूम लिया फंदा: कहानी दामोदर चापेकर की

हाथ में गीता मंद मुस्कान के साथ फँसी के फंदे को लगाया था गला

himanshumishra द्वारा himanshumishra
18 April 2025
in इतिहास, चर्चित
दामोदर हरी चाफेकर

दामोदर हरी चाफेकर (Image Source: File Pic)

Share on FacebookShare on X

आज, 18 अप्रैल को उस महान राष्ट्रभक्त दामोदर हरी चापेकर की पुण्यतिथि है जिस वीर ने विदेशी सत्ता की जड़ें हिलाने वाली पहली क्रांति की चिंगारी जलाई और जिसके सनातन समर्पण ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम की वैचारिक नींव रखी। चापेकर बंधुओं में से एक दामोदर हरी चापेकर का जीवन केवल ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ विद्रोह नहीं था, बल्कि यह राष्ट्र, संस्कृति और धर्म की रक्षा के लिए उठाए गए आत्मबलिदान की गाथा थी। उनका पूरा परिवार राष्ट्रधर्म की वेदी पर समर्पित था तीनों भाइयों ने हंसते-हंसते फाँसी का फंदा स्वीकार किया, लेकिन कभी अपने सिद्धांतों से विचलित नहीं हुए। उनका संघर्ष राजनीतिक सत्ता के लिए नहीं, बल्कि भारत की आत्मा उसकी सनातन संस्कृति और सामाजिक चेतना की रक्षा के लिए था। दामोदर हरी चापेकर ने जिस वातावरण में जन्म लिया, उसी में राष्ट्र के लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग किया।

आज उनकी पुण्यतिथि पर यह लेख उन विस्मृत क्रांतिकारियों को मुख्यधारा में लाने का एक प्रयास है, जिन्हें वामपंथी इतिहासकारों ने सुनियोजित तरीके से इतिहास से बाहर रखा। यह तिथि स्मरण कराती है कि भारत की स्वतंत्रता कोई राजनीतिक समझौता नहीं, बल्कि ऐसे बलिदानों की बुनियाद पर हासिल हुई थी, जिन्हें दशकों तक ऐतिहासिक विमर्श से दरकिनार किया गया।

संबंधितपोस्ट

बलिदान दिवस विशेष: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के ऐतिहासिक भाषणों की प्रासंगिकता

प्लेन क्रैश में महाराष्ट्र डिप्टी सीएम अजीत पवार समेत 5 लोगों की मौत, पीएम मोदी समेत पूरा देश जता रहा दुख

सॉफ्टवेयर इंजीनियर से कट्टर जिहादी तक: जुबैर की गिरफ्तारी ने खोले अल-कायदा और आईएस के डिजिटल नेटवर्क के पते

और लोड करें

तिलक थे प्रेरणा स्रोत

दामोदर हरि चापेकर उस वीर परिवार के अग्रज थे, जिन्होंने भारत माता की अस्मिता की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। उनका जन्म 25 जून, 1869 को पुणे में प्रसिद्ध कथावाचक श्री हरि विनायक पन्त के घर हुआ था। दामोदर के बाद उनके छोटे भाई बालकृष्ण (1873) और वासुदेव (1879) का जन्म हुआ। तीनों भाई बचपन से ही अपने पिता के साथ भजन-कीर्तन में भाग लेते थे, लेकिन उनका दिल मात्र धार्मिक कार्यों में नहीं, बल्कि राष्ट्र की सेवा में भी लगा था।

तीनों भाई दामोदर, बालकृष्ण और वासुदेव इन वीर कथाओं को बचपन से ही सुनते-सुनते बड़े हुए। इन कहानियों ने उनके मन में परतंत्रता के खिलाफ आक्रोश और स्वराज्य के प्रति आत्मगौरव से भरी भावना को जन्म दिया। इन्हीं प्रेरणाओं के बीच दामोदर के हृदय में सैनिक बनने की प्रबल इच्छा जगी एक ऐसा सिपाही जो मातृभूमि की रक्षा के लिए जीए और बलिदान दे।

दामोदर को गायन के साथ काव्यपाठ और व्यायाम का भी शौक था। उनके घर में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का ‘केसरी’ नामक समाचार पत्र आता था, जिसे पूरे परिवार के साथ-साथ आस-पास के लोग भी पढ़ते थे। तिलक के विचारों से प्रेरित होकर, दामोदर ने युवकों का एक संगठन ‘व्यायाम मंडल’ तैयार किया और ब्रिटिश साम्राज्य के प्रति तिरस्कार की भावना को बढ़ावा दिया। जब तिलक जी को गिरफ्तार किया गया, तो दामोदर की आँखों में आँसू थे, परंतु उनकी माँ ने कहा, “तिलक जी ने हमें रोना नहीं, लड़ना सिखाया है।” यह बात दामोदर के दिल में बैठ गई, और उन्होंने जीवनभर उसी संघर्ष और समर्पण की राह पर चलने का संकल्प लिया।

इसके बाद दामोदर ने ‘राष्ट्र हितेच्छु मंडल’ के नाम से एक संगठन गठित किया, जिसमें युवकों को व्यायाम और शारीरिक सशक्तिकरण का प्रशिक्षण दिया जाता था। जब उन्हें वासुदेव बलवन्त फड़के की अमानवीय मृत्यु का समाचार मिला, तो दामोदर और उनके साथी सिंहगढ़ दुर्ग पर गए और वहाँ से यह संकल्प लिया कि वे फड़के के अधूरे कार्यों को पूरा करेंगे।

यही नहीं राष्ट्रनिष्ठ परिवार की जड़ें वीरता और बलिदान से सिंचित थीं। इनके पूर्वजों ने छत्रपति शिवाजी महाराज की हिंदवी स्वराज्य स्थापना से लेकर बाजीराव पेशवा के अभियानों तक अनेक युद्धों में भाग लिया था और वीरगति को प्राप्त हुए थे। ऐसे बलिदानी पूर्वजों की गौरवगाथाएँ इस घर में बड़े गर्व से सुनाई जाती थीं। तीनों भाई दामोदर, बालकृष्ण और वासुदेव इन वीर कथाओं को बचपन से ही सुनते-सुनते बड़े हुए। इन कहानियों ने उनके मन में परतंत्रता के खिलाफ आक्रोश और स्वराज्य के प्रति आत्मगौरव से भरी भावना को जन्म दिया। इन्हीं प्रेरणाओं के बीच दामोदर के हृदय में सैनिक बनने की प्रबल इच्छा जगी। यही कारण था की आगे चलकर उन्होंने शस्त्र संचालन सीखने के लिए सेना में भर्ती होने का प्रयास किया पर उन्हें भर्ती नहीं किया गया। जिसके बाद उन्होएँ अपने पिता की तरह कीर्तन-प्रवचन करने लगे।

जब गुलामी की प्रतीक मूर्ति को पहनाई गई जूतों की माला

बात उन दिनों की है जब हरी चापेकर मुंबई पहुँचे थे। वहाँ एक सभा हो रही थी, रानी विक्टोरिया की मूर्ति के सामने जहाँ उसे देवी की तरह पूजने की कोशिश की जा रही थी। अंग्रेजों के अत्याचारों को सहते हुए भी जनता अगर गुलामी को सम्मान देने लगे, तो इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण क्या हो सकता था? यही बात हरी चापेकर को भीतर तक झकझोर गई।

उन्होंने रातों-रात उस रानी विक्टोरिया की मूर्ति पर कालिख पोत दी और उसके गले में जूतों की माला लटका दी। ये कोई सामान्य विरोध नहीं था बल्कि ब्रिटिश हुकूमत को दी गई खुली चेतावनी थी कि भारत अब चुप नहीं बैठेगा। इसी समय पुणे प्लेग की मार झेल रहा था। अंग्रेज सरकार ने ‘प्लेग कमिश्नर’ बनाकर मिस्टर रैण्ड को वहाँ तैनात किया। लेकिन बीमारी से ज्यादा डरावना बन गया उसका अमानवीय रवैया। रैण्ड अपने सिपाहियों के साथ हिंदुओं के घरों में बूट पहनकर घुसता, पूजाघरों को अपवित्र करता, और महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करता। ये सब अब ‘सरकारी कार्यवाही’ के नाम पर हो रहा था।

हरी चापेकर और उनके साथियों ने तय कर लिया अब चुप नहीं बैठना है। ये सिर्फ विरोध नहीं था, ये एक जवाब था। और जब उन्होंने अपने इस फैसले के बारे में लोकमान्य तिलक को बताया, तो तिलक ने सिर्फ समर्थन ही नहीं दिया, बल्कि आशीर्वाद भी दिया।

मुस्कुराते हुए फाँसी के तख्ते पर झूल गए

सन 1897 में जब प्लेग की बीमारी ने भारत के कई हिस्सों में कहर बरपाना शुरू किया, पुणे भी उसकी चपेट में आ गया। बीमारी जितनी भयावह थी, उससे कहीं ज़्यादा निर्दयी था ब्रिटिश प्रशासन का रवैया। दो अंग्रेज अफसर वाल्टर चार्ल्स रैण्ड और आयर्स्ट को इस महामारी से निपटने के नाम पर पुणे भेजा गया, लेकिन इनका असली काम अंग्रेज अधिकारियों और उनके परिवारों को संक्रमण से बचाने के बहाने आम जनता पर दमन करना था।

इनके आदेश से पुलिसकर्मी बूट पहने हुए हिंदू घरों में घुस जाते। पूजा स्थलों तक की पवित्रता को नहीं बख्शा जाता। लोग बीमार थे, डरे हुए थे, लेकिन शासन की क्रूरता ने उनकी पीड़ा को और बढ़ा दिया। ज़्यादा दुख की बात ये थी कि महिलाओं को भी अपमानित किया जाने लगा, रसोई और मंदिर तक सुरक्षित नहीं बचे थे। चापेकर बंधु दामोदर, बालकृष्ण और वासुदेव इन हालातों से भीतर तक विचलित हो चुके थे। वे देश और धर्म की मर्यादा को इस तरह कुचले जाते नहीं देख सकते थे। इन हालातों से कोई समाधान मिले, इस आस में वे लोकमान्य तिलक के पास पहुँचे। तिलक जी ने उन्हें शिवाजी महाराज का उदाहरण देते हुए कहा “अत्याचार के सामने झुकना कभी वीरों की परंपरा नहीं रही।” बस, यही एक बात थी जिसने तीनों भाइयों के मन में आग भर दी।

अब वे सिर्फ बोलने वाले नहीं थे, अब उन्होंने हथियार उठाने की ठान ली थी। उनका लक्ष्य साफ़ था अपने देशवासियों को इस अपमान से मुक्ति दिलानी है। 22 जून 1897 को पुणे के गवर्नमेंट हाउस में महारानी विक्टोरिया के शासन के साठ साल पूरे होने पर भव्य समारोह हो रहा था। रैण्ड और आयर्स्ट भी इस कार्यक्रम में शामिल थे। उसी रात, दामोदर और बालकृष्ण अपने साथी विनायक रानडे के साथ वहां पहुँचे और इन अधिकारियों के लौटने का इंतज़ार करने लगे।

रात के क़रीब सवा बारह बजे, दोनों अंग्रेज अफसर अपनी-अपनी बग्घियों में सवार होकर निकले। जैसे ही रैण्ड की बग्घी आगे बढ़ी, दामोदर पीछे से चढ़ गए और गोली चला दी। उधर बालकृष्ण ने आयर्स्ट को निशाना बनाया। आयर्स्ट मौके पर ही मारा गया, जबकि रैण्ड ज़ख़्मी हो गया और कुछ दिन बाद अस्पताल में उसकी भी मौत हो गई।

इस साहसिक कार्रवाई की खबर पूरे शहर में फैल गई। जहाँ एक ओर पुणे की जनता ने चापेकर बंधुओं को हीरो की तरह देखा, वहीं अंग्रेज सरकार बौखला गई। बड़े पैमाने पर छापेमारी शुरू हुई। हर घर की तलाशी ली गई। चापेकर बंधुओं से जुड़े लोगों पर ज़ुल्म ढाया गया, लेकिन फिर भी वे पकड़ में नहीं आए। गुप्तचर विभाग के प्रमुख ब्रुइन ने ऐलान किया कि जो भी चापेकर बंधुओं के बारे में जानकारी देगा, उसे 20,000 रुपये इनाम मिलेगा। दुखद यह रहा कि उसी क्रांतिकारी संगठन में शामिल गणेश शंकर द्रविड़ और रामचंद्र द्रविड़ नामक दो भाई लालच में आकर पुलिस से जा मिले और दामोदर का पता दे दिया।

इसके बाद दामोदर गिरफ्तार कर लिए गए। बालकृष्ण बच निकलने में सफल रहे। जब दामोदर को अदालत में पेश किया गया, तो उन्हें फांसी की सज़ा सुनाई गई। उन्होंने चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान के साथ यह फैसला सुना जैसे कोई विजयी योद्धा अंतिम युद्ध की तैयारी कर रहा हो। जेल में उनसे मिलने तिलक जी पहुँचे और उन्हें श्रीमद्भगवद्गीता भेंट की। 18 अप्रैल 1898, सुबह का समय। दामोदर हरि चापेकर हाथ में गीता लेकर शांति से फांसी के तख़्ते की ओर बढ़े। उनके चेहरे पर कोई भय नहीं, सिर्फ आत्मविश्वास था। उन्होंने मुस्कुराते हुए फांसी को गले लगाया।

स्रोत: दामोदर चापेकर, बलिदान दिवस, पुणे, बाल गंगाधर तिलक
Tags: Bal Gangadhar TilakDamodar ChapekarMartyrdom DayPuneदामोदर चाफेकरपुणेबलिदान दिवसबाल गंगाधर तिलकहरी चापेकर
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

काशी विश्वनाथ मंदिर मार्ग का होगा विस्तार: रास्ते में आने वाली 6 मस्जिदें हटेंगी, सैकड़ों दुकानें भी होंगी शिफ्ट

अगली पोस्ट

मुर्शिदाबाद का भयावह सच

संबंधित पोस्ट

भारत-जापान शिखर सम्मेलन
अर्थव्यवस्था

भारत-जापान शिखर सम्मेलन: पीएम मोदी और जापानी पीएम सनाए ताकाइची ने आर्थिक सुरक्षा, तकनीक और रक्षा सहयोग को दी नई दिशा

2 July 2026

भारत और जापान ने अपने रणनीतिक संबंधों को नई मजबूती देते हुए गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में आर्थिक...

वेनेज़ुएला में आए विनाशकारी भूकंप के बाद की तस्वीरें
चर्चित

वेनेजुएला भूकंप: 7 दिन से मलबे में जिंदा फंसा सिक्योरिटी गार्ड, 7 देशों की टीम बचाने में जुटी

2 July 2026

वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के सात दिन बाद भी एक 43 वर्षीय सिक्योरिटी गार्ड के जिंदा होने की खबर ने पूरी दुनिया को हैरान...

राम मंदिर दान जांच
चर्चित

राम मंदिर भर्ती विवाद: ड्राइवर बना खजांची, सफाईकर्मी बने कैशियर, योग्यता पर उठे सवाल

2 July 2026

अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले करोड़ों रुपये के दान को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। आरोप है कि...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

THE DRONE GENERAL'S LEGACY: HOW GEN DWIVEDI TRANSFORMED THE INDIAN ARMY | UAV

THE DRONE GENERAL'S LEGACY: HOW GEN DWIVEDI TRANSFORMED THE INDIAN ARMY | UAV

00:04:51

Nepal's Natural Ally: Why India, Not China ? Indo-Nepal

00:04:05

Pakistan’s Investment Rescue Plan or Another Economic Promise? Munir | Sharif

00:03:41

Gilgit Baltistan's Youth Rising: The Fight for Dignity, Rights and Self Governance

00:03:08

Doklam’s Legacy: How the 2017 Standoff Reshaped Himalayan Security and Border Tensions। Indo china

00:03:11
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited