Waqf Alal Aulad: भारत में अब वक्फ अधिनियम (Waqf Amendment Bill)की बात पुरानी हो गई। वक्फ संशोधन विधेयक 2025 के पास होते ही अब ये ‘उम्मीद’ हो गया है। उम्मीद यानी यूनिफाइड वक्फ मैनेजमेंट एंपावरमेंट एफिशिएंसी एंड डेवलपमेंट। जैसा इस कानून का नाम है वैसा ही मुस्लिम समुदाय में महिलाओं और पिछड़ों के लिए आशा की किरण बनकर सामने आया है। इस बिल में महिला अधिकारों के लिए खास प्रावधान किए गए हैं। क्योंकि, वक्फ-अलल-औलाद की प्रथा में इस बिल के जरिए गहरी चोट की गई है। आइये जानें वक्फ की ये प्रणाली क्या है और इसमें चोट पड़ने से महिलाओं को क्या फायदा होने वाला है।
इस बिल में महिलाओं, विधवाओं और अनाथों के अधिकारों को प्राथमिकता दी गई है। वक्फ संपत्तियों की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कई प्रावधान जोड़े गए हैं। अब वक्फ-अलल-औलाद के तहत पुरुष अपनी मनमर्जी नहीं चला पाएंगे। आइये जानें वक्फ-अलल-औलाद क्या है और ये महिलाओं के अधिकार को अभी तक कैसे मारा जा रहा था।
वक्फ संपत्तियों के प्रकार
– वक्फ-अलल-औलाद (Waqf Alal Aulad)
– वक्फ-अलल-खैर
वक्फ-अलल-औलाद: यह परिवार के कल्याण के लिए की जाने वाली संपत्ति का दान होता है। इसमें कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति को अपने बच्चों या परिवार के सदस्यों के लाभ के लिए वक्फ करता है। हालांकि, इसका प्रबंधन परिवार के पास ही रहता है।
वक्फ-अलल-खैर: इस श्रेणी में संपत्ति समाज कल्याण के लिए वक्फ की जाती है। इसका प्रबंधन ‘मुतवल्ली’ करता है। यह वक्फ बोर्ड द्वारा नियुक्त होता है। इसमें एक बार संपत्ति दान करने के बाद मालिक का इसपर कोई अधिकार नहीं होता है।
वक्फ-अलल-औलाद का इतिहास
माना जाता है वक्फ-अलल-औलाद की शुरुआत ओटोमन साम्राज्य के दौरान हुई थी। इस दौर में संपन्न मुस्लिम परिवारों ने संपत्ति का उत्तराधिकार और जब्ती से बचाने के लिए वक्फ-अलल-औलाद का सहारा लिया। जब देश में इस्लाम और मुगल आए तो नवाबों ने भी इसी प्रणाली से अपनी संपत्तियों की रक्षा की।
पुरुष करते थे बेजा इस्तेमाल
‘वक्फ-अलल-औलाद’ प्रणाली में संपत्ति को परिवार कल्याण के लिए वक्फ की जाती है। हालांकि, भाारत में ये देखा गया कि पुरुष इस प्रणाली का गलत उपयोग करते रहे हैं। वो किसी संपत्ति को वक्फ कर महिलाओं का अधिकार छीन लेते थे। परिवार के पुरुष संपत्ति को वक्फ में बदल देते थे। इस कारण महिलाएं अपने अधिकारों से वंचित हो जाती थीं। इन्हीं खामियों को दूर करने के लिए सरकार ने नए संशोधन किए हैं।
महिलाओं को होगा फायदा
बिल में साफ किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति को वक्फ घोषित करता है, तो पहले उसे परिवार की महिलाओं और अन्य पात्रों को उनका वैधानिक हिस्सा देना होगा। इसके बाद ही शेष संपत्ति को वक्फ में बदला जा सकेगा। इतना ही नहीं नए प्रावधानों के अनुसार, अब वक्फ संपत्तियों से होने वाली आय में भी बेटियां, विधवाएं और परिवार के अन्य सदस्य हिस्सेदार होंगे।
उदाहरण से समझिए
मान लीजिए अगर कोई 10 लाख की संपत्ति वक्फ करना चाहता है। उसके परिवार में एक बेटी, एक बेटा और उसकी पत्नी शामिल है। ऐसे में कानूनी रूप से तय हिस्सा तीनो सदस्यों को देना होगा। उसके बाद संपत्ति वक्फ की जा सकेगी। इसके साथ ही अगर उसे ‘वक्फ-अलल-औलाद’ किया जाता है कि उससे होने वाली आय इन तीन सदस्यों को भी मिलेगी।
बता दें वक्फ संशोधन विधेयक लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों से पास हो गया है। अब इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाना है। इसके बाद ये कानून देश में प्रभावी हो जाएगा। इसके साथ ही वक्फ बोर्ड का संचालन ट्रांसपेरेंट होगा और ये निष्पक्ष बन पाएगा। विधेयक को लेकर विशेषज्ञ भी मान रहे हैं कि ये महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करेगा। बिल के तहत देशभर की वक्फ संपत्तियों का विवरण ऑनलाइन उपलब्ध होगा। इससे वर्षों से हो रही गड़बड़ियों पर लगाम लग सकेगा। इसमें भ्रष्टाचार की गुंजाइस कम हो जाएगी।