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SC पर टिप्पणी: न्यायपालिका के विरोध पर निशिकांत दुबे को सोशल मीडिया पर क्यों मिल रहा है समर्थन?

बीजेपी ने भले ही निशिकांत दुबे की टिप्पणी से किनारा करते हुए उन्हें संभलकर बोलने की नसीहत दी हो लेकिन सोशल मीडिया पर एक बड़ा वर्ग दुबे के समर्थन में भी खड़ा हो रहा है, इस वर्ग के अपने सवाल हैं जिनके कटघरे में न्यायपालिका है

Shiv Chaudhary द्वारा Shiv Chaudhary
21 April 2025
in राजनीति, समीक्षा
SC पर टिप्पणी: न्यायपालिका के विरोध पर निशिकांत दुबे को सोशल मीडिया पर क्यों मिल रहा है समर्थन?
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देश में न्यायपालिका और कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र को लेकर ज़ोरदार बहस चल रही है। सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के राज्यपाल से जुड़े बिल के एक मामले में राष्ट्रपति को फैसला लेने के लिए 90 दिनों की समय सीमा तय कर दी जिसके बाद हालिया बहस शुरू हुई है। इस मामले में उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने जजों की तुलना ‘सुपर संसद’ से करते हुए जजों पर सवाल उठाए हैं। इसी कड़ी में झारखंड के गोड्डा से बीजेपी के लोकसभा सांसद निशिकांत दुबे ने कोर्ट और चीफ जस्टिस को लेकर तल्ख टिप्पणियां कीं जिसके बाद बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उनके बयान को निजी बयान बताया है। उत्तर प्रदेश से बीजेपी के राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा ने भी कोर्ट को लेकर टिप्पणी की थी और उसे भी नड्डा ने निजी बयान बताया है। पार्टी ने बेशक सांसदों के बयानों से पल्ला झाड़ लिया है लेकिन सोशल मीडिया का एक बड़ा वर्ग निशिकांत दुबे के समर्थन में आ गया है।

सुप्रीम कोर्ट में दिखा बहस का असर

देश में चल रही इस बहस असर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में भी नज़र आया। सोमवार को दो अलग-अलग मामलों सुनवाई के दौरान जस्टिस बीआर गवई ने इस मामले को लेकर टिप्पणियां कीं। एक मामले में वकील विष्णु शंकर जैन ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा के मद्देनज़र राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग की थी। जिस पर टिप्पणी करते हुए जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि आप चाहते हैं कि हम केंद्र को यह आदेश देने के लिए रिट जारी करें? वैसे भी हम पर कार्यपालिका में अतिक्रमण करने के आरोप लग रहे हैं। वहीं, एक मामले में नेटफ्लिक्स, अमेज़न और प्लैटफार्म्स के खिलाफ जनहित याचिका दायर की गई थी जिनमें इन प्लैटफार्म्स पर अश्लील सामग्री के वितरण का आरोप लगाया था। जस्टिस गवई ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि हम पर विधायी और कार्यकारी कार्यों में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया जा रहा है।

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डॉग लवर्स को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, आम लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता

क्या जस्टिस यशवंत वर्मा को ‘नोट कांड’ में जबरन फँसाया गया, पढ़ें 13 पन्नों के ‘उस लेटर’ की इनसाइड स्टोरी?

NCERT किताब विवाद के बीच केंद्र ने मांगी माफी , CJI ने काउंसिल पर कड़ा रुख अपनाया

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निशिकांत दुबे और दिनेश शर्मा ने क्या कहा?

निशिकांत दुबे ने 19 अप्रैल को ‘X’ पर एक पोस्ट करते हुए लिखा, “क़ानून यदि सुप्रीम कोर्ट ही बनाएगा तो संसद भवन बंद कर देना चाहिए।” जिसके बाद यह विवाद शुरू हुआ था।

क़ानून यदि सुप्रीम कोर्ट ही बनाएगा तो संसद भवन बंद कर देना चाहिये

— Dr Nishikant Dubey (@nishikant_dubey) April 19, 2025

इसके बाद निशिकांत दुबे ने ANI से बातचती करते हुए सुप्रीम कोर्ट और CJI जस्टिस संजीव खन्ना को लेकर तल्ख टिप्पणियां कीं। निशिकांत दुबे ने कहा, “आप राम मंदिर, कृष्ण जन्मभूमि और ज्ञानवापी के मामले में कहते हो कि कागज़ दिखाओ लेकिन मुगलों के आने के बाद बनी मस्जिदों को लेकर कहते हैं कि कागज़ कहां से दिखाएंगे। देश में धार्मिक युद्ध भड़काने के लिए सिर्फ सुप्रीम कोर्ट ज़िम्मेदार है। सुप्रीम कोर्ट अपनी सीमा से बाहर जा रहा है। अगर हर बात के लिए सुप्रीम कोर्ट जाना है, तो संसद और विधानसभा का कोई मतलब नहीं है, इसे बंद कर देना चाहिए।” उन्होंने आगे कहा, “इस देश में जितने गृह युद्ध हो रहे हैं उसके ज़िम्मेदार केवल यहां के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया संजीव खन्ना साहब हैं।”

#WATCH दिल्ली: भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा, “…देश में धार्मिक युद्ध भड़काने के लिए सुप्रीम कोर्ट जिम्मेदार है। सुप्रीम कोर्ट अपनी सीमा से बाहर जा रहा है…अगर हर बात के लिए सुप्रीम कोर्ट जाना है, तो संसद और विधानसभा का कोई मतलब नहीं है, इसे बंद कर देना चाहिए…” pic.twitter.com/ahVx2kzBgD

— ANI_HindiNews (@AHindinews) April 19, 2025

निशिकांत दुबे के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए दिनेश शर्मा ने न्यायपालिका के फैसले पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा, “लोगों में एक आशंका होती है कि जब बाबा साहब आंबेडकर ने संविधान बनाया था, तो उसमें उन्होंने विधायिका और न्यायपालिका के अधिकारों का स्पष्ट रूप से वर्णन किया है। नियम बनाने का काम संसद करेगी। भारत के संविधान के अनुसार, कोई भी संसद यानी लोकसभा और राज्यसभा को निर्देशित नहीं कर सकता है क्योंकि राष्ट्रपति ने साइन कर दिए हैं और राष्ट्रपति सर्वोच्च है। कोई भी राष्ट्रपति को चुनौती नहीं दे सकता क्योंकि राष्ट्रपति सर्वोच्च हैं।”

#WATCH लखनऊ: भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के सुप्रीम कोर्ट पर दिए गए बयान पर भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने कहा, “…जब बाबा साहब अंबेडकर ने संविधान बनाया था, तो उसमें उन्होंने विधायिका और न्यायपालिका के अधिकारों का स्पष्ट रूप से वर्णन किया है…भारत के संविधान के अनुसार, कोई भी लोकसभा… pic.twitter.com/FXqtz2argN

— ANI_HindiNews (@AHindinews) April 19, 2025

नड्डा ने बयानों को बताया ‘निजी’

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस मामले में प्रतिक्रिया देते हुए दोनों सांसदों के बयान को निजी बताया। उन्होंने ‘X’ पर एक पोस्ट में लिखा, “भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और दिनेश शर्मा का न्यायपालिका एवं देश के चीफ जस्टिस पर दिए गए बयान से भारतीय जनता पार्टी का कोई लेना–देना नहीं है। यह इनका व्यक्तिगत बयान है, लेकिन भाजपा ऐसे बयानों से न तो कोई इत्तेफाक रखती है और न ही कभी भी ऐसे बयानों का समर्थन करती है। भाजपा इन बयान को सिरे से खारिज करती है।”

नड्डा ने आगे कहा, “भारतीय जनता पार्टी ने सदैव ही न्यायपालिका का सम्मान किया है, उनके आदेशों और सुझावों को सहर्ष स्वीकार किया है क्योंकि एक पार्टी के नाते हमारा मानना है कि सर्वोच्च न्यायालय सहित देश की सभी अदालतें हमारे लोकतंत्र का अभिन्न अंग हैं तथा संविधान के संरक्षण का मजबूत आधार स्तंभ हैं। मैंने इन दोनों को और सभी को ऐसे बयान ना देने के लिए निर्देशित किया है।”

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और दिनेश शर्मा का न्यायपालिका एवं देश के चीफ जस्टिस पर दिए गए बयान से भारतीय जनता पार्टी का कोई लेना–देना नहीं है। यह इनका व्यक्तिगत बयान है, लेकिन भाजपा ऐसे बयानों से न तो कोई इत्तेफाक रखती है और न ही कभी भी ऐसे बयानों का समर्थन करती है। भाजपा इन बयान…

— Jagat Prakash Nadda (@JPNadda) April 19, 2025

सोशल मीडिया पर निशिकांत दुबे के समर्थन में लोग

बीजेपी ने भले ही निशिकांत दुबे के बयान से किनारा कर लिया है लेकिन सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग उन्हें समर्थन दे रहे हैं। दुबे के इस बयान के बाद से लगातार ‘निशिकांत दुबे’ और ‘सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया’ X पर ट्रेंड में बने हुए हैं। निशिकांत का समर्थन करते हुए एक ‘X’ यूज़र ने लिखा है, “मैं निशिकांत दुबे जी से सहमत हूं।मैं निशिकांत दुबे का समर्थन करता हूं। अब समय है कुछ बड़े परिवर्तनों की आवश्यकता है।” वहीं, एक अन्य यूज़र ने लिखा, “मैं निशिकांत दुबे के साथ हूं।”

आनंद रंगनाथन ने भी दुबे की टिप्पणियों का समर्थन किया है और उन्होंने तो लोगों से उनके साथ खड़े होने का आह्वान तक कर दिया है। रंगनाथन ने ‘X’ पर लिखा, “शानदार, मैं निशिकांत दुबे के साथ खड़ा हूं और हर भारतीय को भी ऐसा ही करना चाहिए।” मिस्टर सिन्हा नामक एक अन्य यूज़र ने लिखा, “HC के वर्तमान जज के पास से करोड़ों रुपए मिलने के मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है जबकि दुबे जी ने CJI पर उंगली उठाई तो उनके खिलाफ अवमानना ​​की अनुमति मांगी गई है। बड़ा अपराध कौन सा है? आलोचना या भ्रष्टाचार?”

स्वाति तिवारी नामक एक यूज़र ने दुबे का समर्थन करते हुए सुप्रीम कोर्ट पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने ‘X’ पर एक पोस्ट में लिखा, “जब संविधान ही यह कहता है कि न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका एक दूसरे के काम में हस्तक्षेप नहीं कर सकती तो निशिकांत दूबे और दिनेश शर्मा ने क्या गलत बयानबाजी की है?” उन्होंने एक अन्य पोस्ट में लिखा, “निशिकांत दुबे ने संविधान सम्मत और लॉजिकल बात ही कही है। जब पारिवारिक, सामाजिक मामलों से लेकर वक्फ प.बंगाल मणिपुर मामलों में भी न्यायालय का पूर्वाग्रह दिखता है तब भारतीय संविधान की निर्णय क्षमता से विश्वास डोलता है।”

सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग न्यायिक सिस्टम में आमूल-चूल परिवर्तन की वकालत कर रहे हैं। लेकिन एक बड़े सवाल जो उठता है वो यही है कि लोग न्यायपालिका से इतने नाराज़ क्यों हैं? इस समर्थन के पीछे जो सबसे बड़ा कारण नज़र आ रहा है वो यही है कि लोगों में न्यायपालिका के प्रति असंतोष बढ़ रहा है। कई लोगों ने सुप्रीम कोर्ट पर पक्षपातपूर्ण फैसले लेने के आरोप भी लगाए हैं। आनंद रंगनाथन ने एक वीडियो में 9 ऐसी घटनाओं का ज़िक्र किया है जहां ‘सर्वोच्च न्यायालय ने हिंदुओं के खिलाफ स्पष्ट भेदभाव’ किया है। पिछले दिनों हाईकोर्ट के जज के घर से नोटों के ढेर मिलने के बाद जब उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई होती नहीं नज़र आई तो लोगों में और गुस्सा पनपा है। धनखड़ ने भी इसे लेकर सवाल उठाए और कोई केस तक दर्ज ना होने के मामले में नाराज़गी भी ज़ाहिर की।

जनता की न्यायपालिका के प्रति निराशा सिर्फ असंतोष तक सीमित नहीं है बल्कि लोग अब सुधार की मांग कर रहे हैं। लोग चाहते हैं कि न्यायिक व्यवस्था में पारदर्शिता आए और उसकी जवाबदेही भी बढ़े। लोग मान रहे हैं कि कोर्ट के कुछ निर्णय खास समुदायों के प्रति झुके हुए हैं और मौजूदा न्यायिक ढांचा उनके हितों को प्रतिबिंबित नहीं करता है। दुबे का बयान उन लोगों के लिए एक मंच बन गया है जो मानते हैं कि न्यायपालिका अपनी सीमाओं से बाहर जा रही है। जाहिर है कि इन सवालों के जवाब न्यायपालिका को भी खोजने होंगे। इन्हें सिर्फ सोशल मीडिया के ट्रेंड्स बताकर खारिज नहीं किया जा सकता है। न्यायपालिका को भी अब अपना मूल्यांकन करने की ज़रूरत है।
स्रोत: निशिकांत दुबे, सुप्रीम कोर्ट, जगदीप धनखड़, जस्टिस यशवंत वर्मा, Nishikant Dubey, Supreme Court, Jagdeep Dhankhar, Justice Yashwant Verma,
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