बांग्लादेश में जब से शेख हसीना की सरकार गिरी है। उसके बाद से देश में हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। दुनिया को मोहम्मद यूनुस से उम्मीद थी कि वह भारत के साथ संबंध सुधार कर अपने देश को पटरी पर लाने की कोशिश करेंगे। हालांकि, वो इससे एकदम उलट चीन की गोद में जाकर बैठ गए हैं और चिकन नेक (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) पर नजरे गड़ाए हुए हैं। इतना ही नहीं यूनुस अपने आपको ‘समंदर का गार्डियन’ बताते हुए ड्रैगन को न्यौता भी दे रहे हैं। वह अपने निमंत्रण के साथ ये भी बता रहे हैं कि भारत के 7 राज्यों के पास समुद्र का कोई एक्सेस नहीं है। हालांकि, यूनुस को नहीं पता कि भारत उनसे कई ज्यादा आगे का सोचता है। PM मोदी और भारत सरकार ने मोहम्मद यूनुस के परखच्चे उड़ाने और ड्रैगन के पर कुतरने के लिए महा प्लान तैयार कर लिया है।
चीन में क्या बोले मोहम्मद यूनुस
कुछ समय पहले यूनुस चीन के दौरे पर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने खुद को ‘महासागर का एकमात्र संरक्षक’ बताया था। यूनुस ने चीन में कहा, “भारत के पूर्वी हिस्से के 7 राज्य 7 बहनें (सेवन सिस्टर्स) कहलाते हैं और वे चारों ओर से ज़मीन से घिरे क्षेत्र हैं। उनके पास समुद्र तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है।” यूनुस ने कहा कि यह चीनी अर्थव्यवस्था के विस्तार के लिए एक बड़ा अवसर हो सकता है। असल में यूनुस, चीन के आगे हाथ फैलाकर निवेश मांग रहे हैं और भारत को डेंट देने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, पीएम मोदी के लिए क्षेत्रीय चुनौतियों से निपटना कोई नई बात नहीं है।
BIMSTEC सम्मेलन जयशंकर ने बताया प्लान
यूनुस के बयान के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने थाईलैंड में आयोजित बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी-सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक को-ऑपरेशन (BIMSTEC) सम्मेलन में कड़े संकेत दिए हैं। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए हैं। जयशंकर ने कहा कि हम अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करने पर ध्यान दे रहे हैं। जयशंकर ने घोषणा की है कि भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र को ट्राई लेटरल हाईवे के जरिए प्रशांत महासागर से जोड़ेगा। यह हाईवे एक गेम चेंजर होगा।
भारत का मास्टर प्लान
भारत की अपनी ताकत के साथ ही पड़ोसियों के साथ मिलकर पूर्वोत्तर में अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए प्लान पर काम कर रहा है। इस प्लान की तस्वीर BIMSTEC सम्मेलन में सामने आई है। यूनुस के इस सपने को चकनाचूर करने के लिए पीएम मोदी और भारत का प्लेन तैयार है। भारत के पूर्वोत्तर का इलाका ‘ट्राई लैटरल हाइवे’ के जरिए सीधे प्रशांत महासागर से जुड़ेगा। पीएम मोदी गुरुवार को थाईलैंड की पीएम पेइटोनगटार्न शिनवात्रा से इसे लेकर चर्चा कर सकते हैं।
– पूर्वोत्तर को प्रशांत महासागर से जोड़ने की तैयारी
– 29 अरब डॉलर की लैंड ब्रिज परियोजना पर चर्चा
– थाईलैंड, मलेशिया और म्यांमार के साथ हाइवे का निर्माण होगा
– इसमें 87 किमी लंबा हाईवे और रेलवे लिंक परियोजना भी शामिल है
कैसे करेगा प्रोजेक्ट?
थाईलैंड गल्फ ऑफ थाईलैंड और अंडमान सागर में दो बड़े समुद्री बंदरगाह बना रहा है। इन्हें जोड़ने के लिए लैंड ब्रिज परियोजना पर काम कर रहा है। दूसरी ओर भारत-म्यांमार-थाईलैंड के बीच एक ‘ट्राई लैटरल हाइवे’ बनाया जा रहा है। इसके जरिए भारत का मोरे शहर म्यांमार के रास्ते थाईलैंड के माई सोट से जुड़ जाएगा। इसी हाइवे को थाइलैंड के लैंड ब्रिज से जोड़ने की कोशिश हो रही है। ऐसा होता है तो भारत आसानी से प्रशांत महासागर तक पहुंच बना लेगा। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वो थाईलैंड के साथ रिश्तों की समीक्षा कर रहे हैं। इसे लगातार मजबूत बनाने पर फोकस है। भारत, थाइलैंड के लैंड ब्रिज परियोजना को लेकर सकारात्मक रुख रखता है।
– थाईलैंड गल्फ ऑफ थाईलैंड और अंडमान सागर में दो बड़े समुद्री बंदरगाह बनाएगा
– दोनों बंदरगाहों को 87 किमी लंबे हाईवे और रेलवे से जोड़ा जाएगा
– यह मलक्का स्ट्रेट के विकल्प के रूप में तैयार होगा और इससे व्यापार आसान होगा
– भारत इस प्रोजेक्ट में शामिल होता है तो पूर्वोत्तर को सीधे समुद्र का एक्सेस मिल जाएगा
– लैंड ब्रिज प्रोजेक्ट के जरिए भारत दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से सीधे जुड़ जाएगा
– भारत-म्यांमार-थाईलैंड ‘ट्राई लैटरल हाइवे’ पूर्वोत्तर के व्यापार में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा
– इस हाईवे के बनने के बाद बांग्लादेश और चीन का चिकन नेक पर दबाव कम हो जाएगा
ड्रैगन का डर क्या है?
चीन को हमेशा डर रहता है कि किसी भी आपात स्थिति में भारत और अमेरिका साथ आ जाएंगे और मिलकर मलक्का स्ट्रेट (Malacca Strait) को ब्लॉक कर देंगे। मलक्का स्ट्रेट वो समुद्री रास्ता है जहां से चीन का अधिकांश कारोबार होता है। इसी कारण वो थाईलैंड के लैंड ब्रिज प्रोजेक्ट में निवेश करना चाहता है और बांग्लादेश को बाटली में उतारकर समुद्र में एक्सडेंट करना चाहता है। इतना ही नहीं कई बार चिकन नेक (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) को कमजोर करने का बयान भी आता रहा है।

यूनुस की निकल जाएगी हेकड़ी
चाइना को न्यौता देने से पहले यूनुस ने मैप को गौर से नहीं देखा। बांग्लादेश के नॉर्थ, ईस्ट, वेस्ट यानी तीनो ओर भारत है। भारतीय-बंगाल की खाड़ी को बे ऑफ बंगाल बोलते हैं। यूनुस खुद को इसका मालिक बताते हुए इसे चाइना के गोद में रखना चाहते हैं। उन्हें अंदाजा भी नहीं है कि जिस चिकन नेक के नाम पर वो दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं उसका तोड़ भारत चुटकियों में निकाल सकता है। क्योंकि, त्रिपुरा से समुद्र तक पहुंचने के लिए हमें बांग्लादेश की महज 20 किलोमीटर की जमीन पर सफर करना पड़ेगा।
कुतरे जाएंगे ड्रैगन के पर
बे ऑफ बंगाल में आईएनएस कोलकाता है। यहां से बांग्लादेश को आसानी से घेरा जा सकता है। इसके बाद आज जरा नीचे जाएंगे तो आईएनएस विशाखापटनम हैं। यहां हमारी न्यूक्लियर सबमरीन के साथ एयरक्राफ्ट कैरियर्स तैयार रहते हैं। इतना ही नहीं इसके और नीचे आईएनएस चेन्नई मिलेगा और अंडमान एंड निकोबार में भारत मुस्तैदी के साथ खड़ा है। अंडमान एंड निकोबार से तो चाइना के सबसे बड़े चोक पॉइंट मलक्का स्ट्रेट को हिट करने में कोई परेशानी नहीं आएगी। ऐसे में यूनुस हवा में उड़े तो उनकी हेकड़ी आसानी से निकल सकती है। यहां पर फैलाने की फिराक में बैठे ड्रैगन के पर कुतरने में भी ज्यादा समय नहीं लगना है।
अगर लैंड ब्रिज प्रोजेक्ट और ट्राई लेटरल हाईवे सही समय पर पूरा हो जाता है तो भारत प्रशांत महासागर तक अपनी सीधी पहुंच बना पाएगा। इसके साथ ही भारत अपनी रणनीतिक स्थिति को और मजबूत क लेगा। इससे आर्थिक और व्यापारिक ताकत के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा पुख्ता होगी। कुल मिलाकर भारत का ये प्लान चीन, बांग्लादेश और पाकिस्तान की चाल पर एक गहरी चोट साबित हो सकता है।