उत्तर प्रदेश के बरेली में पकड़े गए धर्मांतरण रैकेट ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। जांच में सामने आया है कि मौलाना अब्दुल मजीद के नेतृत्व में चल रहा यह गिरोह न सिर्फ बरेली या यूपी तक सीमित है, बल्कि इसका नेटवर्क देश के लगभग 13 राज्यों में फैला हुआ है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस पूरे गिरोह से 200 से ज्यादा मौलाना जुड़े हैं, जो गरीब, अशिक्षित, असहाय और युवाओं को निशाना बनाकर उन्हें इस्लाम में धर्मांतरण के लिए मजबूर करते थे।
शादी, पैसा और दबाव-लोगों को फंसाने का तरीका
जांच में सामने आया है कि गिरोह धर्मांतरण कराने के लिए कई तरीके अपनाता था। कुछ लोगों को लालच देकर, कुछ को शादी के बहाने और कई को दबाव बनाकर मुस्लिम धर्म कबूल करवाया जाता था। अब्दुल मजीद ने अपनी बहन आयशा की शादी आगरा के हिंदू युवक पियूष से कराई। शादी के बाद उसका नाम बदलकर मोहम्मद अली रखा गया और बाद में उसका परिवार भी नेटवर्क से जुड़ गया।
बरेली के सुभाषनगर इलाके में कई हिंदू परिवारों का धर्मांतरण कराया गया। इनमें बृजपाल साहू, उनकी मां उषा देवी और बहन राजकुमारी के नाम बदलकर अब्दुल्ला, आमिना और आयशा रखे गए।
विदेशी फंडिंग और हवाला कनेक्शन
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस नेटवर्क के पास भारी मात्रा में संदिग्ध धनराशि पाई गई। अब्दुल मजीद और उसकी पत्नी के 5 बैंक खातों में ₹13.20 लाख जमा मिले। सलमान नामक आरोपी के 12 बैंक खाते पाए गए, जिनमें लगभग ₹12 लाख का लेन-देन हुआ। आरिफ और फैहीम के भी बैंक खातों में संदिग्ध रकम का लेन-देन मिला है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि गिरोह को विदेश से फंडिंग और हवाला चैनल के जरिए आर्थिक मदद मिल रही थी।
सोशल मीडिया पर कट्टरपंथी सामग्री
गिरोह केवल व्यक्तिगत संपर्कों के जरिए ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल कर रहा था। व्हाट्सऐप और अन्य प्लेटफॉर्म पर कई ग्रुप बनाए गए, जिनमें जाकिर नाइक और पाकिस्तानी मौलानाओं के भाषण साझा किए जाते थे। ग्रुप्स में हिंदू लड़कियों की तस्वीरें और वीडियो शेयर कर युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश की जाती थी।
पुलिस ने सभी आरोपियों के मोबाइल, लैपटॉप और डिजिटल डिवाइस जब्त कर लिए हैं। अब साइबर टीम उनके डेटा की गहराई से जांच कर रही है।
नशे के कारोबार से भी जुड़ाव की आशंका
पुलिस को इस नेटवर्क के नशे के कारोबार से जुड़े होने की भी आशंका है। जांच में सामने आया है कि कुछ ड्रग तस्कर, जो पहले जेल जा चुके हैं, अब्दुल मजीद से संपर्क में थे। संभावना जताई जा रही है कि धर्मांतरण रैकेट को आर्थिक मदद के लिए नशे की तस्करी का नेटवर्क भी इस्तेमाल किया जा रहा था।
कैसे हुआ भंडाफोड़?
यह पूरा मामला तब खुला जब अलीगढ़ की रहने वाली महिला अखिलेश कुमारी ने पुलिस से शिकायत की। उसने बताया कि उसका नेत्रहीन बेटा प्रभात उपाध्याय शादी का झांसा देकर जबरन धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया जा रहा है। 25 अगस्त को बरेली पुलिस ने फैयजनगर मदरसे में छापेमारी की।
वहां चार आरोपी – अब्दुल मजीद (35), सलमान रज़ा (30), मोहम्मद आरिफ (29) और मोहम्मद फैहीम (24) – को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने मौके से धर्मांतरण प्रमाणपत्र, धारदार ब्लेड, जाकिर नाइक की सीडी, पाकिस्तानी मौलानाओं की किताबें, मोबाइल और लैपटॉप बरामद किए।
कॉल डिटेल्स से खुला नेटवर्क
एसपी (दक्षिण) अंशिका वर्मा ने बताया कि आरोपियों की कॉल डिटेल्स की जांच की जा रही है। अब्दुल मजीद की अक्सर कॉल्स तेलंगाना, केरल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और राजस्थान में होती थीं। यह भी संदेह है कि गिरोह का नेटवर्क हवाला चैनलों के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों से जुड़ा हुआ है। इंटेलिजेंस एजेंसियां अब मजीद की यात्रा हिस्ट्री और उसके विदेशी कनेक्शन की भी पड़ताल कर रही हैं।
यूपी में छठा बड़ा धर्मांतरण रैकेट
गौरतलब है कि यह इस साल उत्तर प्रदेश में पकड़ा गया छठा बड़ा धर्मांतरण रैकेट है। इससे पहले बलरामपुर, आगरा, प्रयागराज, कुशीनगर और अलीगढ़ में भी ऐसे नेटवर्क का भंडाफोड़ हो चुका है।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर में चल रहे ऐसे धर्मांतरण रैकेट राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बनते जा रहे हैं? पुलिस और खुफिया एजेंसियां अब इस गिरोह की जड़ तक पहुंचने में जुट गई हैं और आने वाले दिनों में कई और बड़े खुलासे होने की संभावना है।