सिंधु जल संधि: नेहरू के एकतरफा समझौते के कारण कैसे दशकों तक परेशान रहा देश
TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    बिहार के बाजीगरों के जरिये पश्चिम बंगाल फतह का ताना-बाना बुन रही भाजपा

    बिहार के बाजीगरों के जरिये पश्चिम बंगाल फतह का ताना-बाना बुन रही भाजपा

    ऑपरेशन सिंदूर 2:0

    दिल्ली धमाका और PoK के नेता का कबूलनामा: क्या भारत के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर 2.0’ का समय आ गया है?

    शशि थरूर पीएम की तारीफ कर अपनी ही पार्टी के अंदर निशाने पर आ गए हैं

    कांग्रेस का नया नियम यही है कि चाहे कुछ भी हो जाए पीएम मोदी/बीजेपी का हर क़ीमत पर विरोध ही करना है?

    सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ किया है कि राष्ट्रपति या गवर्नर को किसी भी तय न्यायिक समयसीमा के भीतर बिलों पर मंजूरी देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

    विधेयकों को मंजूरी देने के लिए समयसीमा से बाध्य नहीं हैं राष्ट्रपति और राज्यपाल , प्रेसिडेंट मुर्मू के सवालों पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या जवाब दिया, और ये क्यों महत्वपूर्ण हैं?

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    खनन क्षेत्र में बेहतरीन काम के लिए केंद्र सरकार ने धामी सरकार की तारीफ की

    खनन सुधारों में फिर नंबर वन बना उत्तराखंड, बेहतरीन काम के लिए धामी सरकार को केंद्र सरकार से मिली 100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    हमसे दुश्मनी महंगी पड़ेगी: भारत की सतर्कता और बांग्लादेश की गलती, जानें बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ रही चोट

    हमसे दुश्मनी महंगी पड़ेगी: भारत की सतर्कता और बांग्लादेश की गलती, जानें बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ रही चोट

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    शिप बेस्ड ISBM लॉन्च के पाकिस्तान के दावे में कितना दम है

    पाकिस्तान जिस SMASH मिसाइल को बता रहा है ‘विक्रांत किलर’, उसकी सच्चाई क्या है ?

    ऑपरेशन सिंदूर 2:0

    दिल्ली धमाका और PoK के नेता का कबूलनामा: क्या भारत के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर 2.0’ का समय आ गया है?

    जैवलिन मिसाइल

    अमेरिका ने भारत को बताया “मेजर डिफेंस पार्टनर”, जैवलिन मिसाइल समेत बड़े डिफेंस पैकेज को दी मंजूरी, पटरी पर लौट रहे हैं रिश्ते ?

    बांग्लादेश और भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की मुलाकात

    ‘हसीना’ संकट के बीच NSA अजित डोभाल की बांग्लादेश के NSA से मुलाकात के मायने क्या हैं?

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    दिल्ली ब्लास्ट के बाद पाकिस्तान में हड़कंप: असीम मुनीर की सेना हाई अलर्ट पर, एयर डिफेंस सक्रिय, भारत की ताकत और रणनीति ने आतंकियों और पड़ोसी को किया सतर्क

    दिल्ली ब्लास्ट के बाद पाकिस्तान में हड़कंप: असीम मुनीर की सेना हाई अलर्ट पर, एयर डिफेंस सक्रिय, भारत की ताकत और रणनीति ने आतंकियों और पड़ोसी को किया सतर्क

    राजनाथ सिंह ने दिखाया आईना, यूनुस को लगी मिर्ची: बांग्लादेश की नई दिशा, भारत की नई नीति

    राजनाथ सिंह ने दिखाया आईना, यूनुस को लगी मिर्ची: बांग्लादेश की नई दिशा, भारत की नई नीति

    आईएनएस सह्याद्री गुआम में: भारत की नौसेना का बहुपक्षीय सामरिक प्रदर्शन, एंटी-सबमरीन युद्ध क्षमता और एशिया-प्रशांत में नेतृत्व

    आईएनएस सह्याद्री गुआम में: भारत की नौसेना का बहुपक्षीय सामरिक प्रदर्शन, एंटी-सबमरीन युद्ध क्षमता और एशिया-प्रशांत में नेतृत्व

    ढाका में पाकिस्तानी सक्रियता: यूनुस सरकार, नौसेना प्रमुख की यात्रा और भारत की पूर्वोत्तर सुरक्षा पर खतरे की समीक्षा

    ढाका में पाकिस्तानी सक्रियता: यूनुस सरकार, नौसेना प्रमुख की यात्रा और भारत की पूर्वोत्तर सुरक्षा पर खतरे की समीक्षा

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    बी.एन राउ का संविधान निर्माण में बड़ा योगदान है

    क्या बेनेगल नरसिंह राउ थे संविधान के असली निर्माता ? इतिहास ने उनके योगदान को क्यों भुला दिया ?

    26 नवंबर भारतीय संविधान दिवस

    संविधान दिवस: भारतीय चिंतन परंपरा की दृष्टि से संविधान 

    Fate’s Play: Cultural Games That Echo Ancient Tales of Luck

    Fate’s Play: Cultural Games That Echo Ancient Tales of Luck

    श्री गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहीदी दिवस: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने निभाई ‘पालकी सेवा’ की रीति

    श्री गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहीदी दिवस: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने निभाई ‘पालकी सेवा’ की रीति

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    शोले फिल्म में पानी की टंकी पर चढ़े धर्मेंद्र

    बॉलीवुड का ही-मैन- जिसने रुलाया भी, हंसाया भी: धर्मेंद्र के सिने सफर की 10 नायाब फिल्में

    नीतीश कुमार

    जेडी(यू) के ख़िलाफ़ एंटी इन्कंबेसी क्यों नहीं होती? बिहार में क्यों X फैक्टर बने हुए हैं नीतीश कुमार?

    क्यों PariPesa भारत रोमांचक एविएटर क्रैश गेम्स का अनुभव लेने के लिए सबसे बेहतरीन जगह है

    क्यों PariPesa भारत रोमांचक एविएटर क्रैश गेम्स का अनुभव लेने के लिए सबसे बेहतरीन जगह है

    भारत की वैज्ञानिक विजय: ‘नैफिथ्रोमाइसिन’, कैंसर और डायबिटीज के मरीजों के उम्मीदों को मिली नई रोशनी, जानें क्यों महत्वपूर्ण है ये दवा

    आत्मनिर्भर भारत की वैज्ञानिक विजय: ‘नैफिथ्रोमाइसिन’, कैंसर और डायबिटीज के मरीजों के उम्मीदों को मिली नई रोशनी, जानें क्यों महत्वपूर्ण है ये दवा

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    बिहार के बाजीगरों के जरिये पश्चिम बंगाल फतह का ताना-बाना बुन रही भाजपा

    बिहार के बाजीगरों के जरिये पश्चिम बंगाल फतह का ताना-बाना बुन रही भाजपा

    ऑपरेशन सिंदूर 2:0

    दिल्ली धमाका और PoK के नेता का कबूलनामा: क्या भारत के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर 2.0’ का समय आ गया है?

    शशि थरूर पीएम की तारीफ कर अपनी ही पार्टी के अंदर निशाने पर आ गए हैं

    कांग्रेस का नया नियम यही है कि चाहे कुछ भी हो जाए पीएम मोदी/बीजेपी का हर क़ीमत पर विरोध ही करना है?

    सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ किया है कि राष्ट्रपति या गवर्नर को किसी भी तय न्यायिक समयसीमा के भीतर बिलों पर मंजूरी देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

    विधेयकों को मंजूरी देने के लिए समयसीमा से बाध्य नहीं हैं राष्ट्रपति और राज्यपाल , प्रेसिडेंट मुर्मू के सवालों पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या जवाब दिया, और ये क्यों महत्वपूर्ण हैं?

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    खनन क्षेत्र में बेहतरीन काम के लिए केंद्र सरकार ने धामी सरकार की तारीफ की

    खनन सुधारों में फिर नंबर वन बना उत्तराखंड, बेहतरीन काम के लिए धामी सरकार को केंद्र सरकार से मिली 100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    हमसे दुश्मनी महंगी पड़ेगी: भारत की सतर्कता और बांग्लादेश की गलती, जानें बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ रही चोट

    हमसे दुश्मनी महंगी पड़ेगी: भारत की सतर्कता और बांग्लादेश की गलती, जानें बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ रही चोट

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    शिप बेस्ड ISBM लॉन्च के पाकिस्तान के दावे में कितना दम है

    पाकिस्तान जिस SMASH मिसाइल को बता रहा है ‘विक्रांत किलर’, उसकी सच्चाई क्या है ?

    ऑपरेशन सिंदूर 2:0

    दिल्ली धमाका और PoK के नेता का कबूलनामा: क्या भारत के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर 2.0’ का समय आ गया है?

    जैवलिन मिसाइल

    अमेरिका ने भारत को बताया “मेजर डिफेंस पार्टनर”, जैवलिन मिसाइल समेत बड़े डिफेंस पैकेज को दी मंजूरी, पटरी पर लौट रहे हैं रिश्ते ?

    बांग्लादेश और भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की मुलाकात

    ‘हसीना’ संकट के बीच NSA अजित डोभाल की बांग्लादेश के NSA से मुलाकात के मायने क्या हैं?

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    दिल्ली ब्लास्ट के बाद पाकिस्तान में हड़कंप: असीम मुनीर की सेना हाई अलर्ट पर, एयर डिफेंस सक्रिय, भारत की ताकत और रणनीति ने आतंकियों और पड़ोसी को किया सतर्क

    दिल्ली ब्लास्ट के बाद पाकिस्तान में हड़कंप: असीम मुनीर की सेना हाई अलर्ट पर, एयर डिफेंस सक्रिय, भारत की ताकत और रणनीति ने आतंकियों और पड़ोसी को किया सतर्क

    राजनाथ सिंह ने दिखाया आईना, यूनुस को लगी मिर्ची: बांग्लादेश की नई दिशा, भारत की नई नीति

    राजनाथ सिंह ने दिखाया आईना, यूनुस को लगी मिर्ची: बांग्लादेश की नई दिशा, भारत की नई नीति

    आईएनएस सह्याद्री गुआम में: भारत की नौसेना का बहुपक्षीय सामरिक प्रदर्शन, एंटी-सबमरीन युद्ध क्षमता और एशिया-प्रशांत में नेतृत्व

    आईएनएस सह्याद्री गुआम में: भारत की नौसेना का बहुपक्षीय सामरिक प्रदर्शन, एंटी-सबमरीन युद्ध क्षमता और एशिया-प्रशांत में नेतृत्व

    ढाका में पाकिस्तानी सक्रियता: यूनुस सरकार, नौसेना प्रमुख की यात्रा और भारत की पूर्वोत्तर सुरक्षा पर खतरे की समीक्षा

    ढाका में पाकिस्तानी सक्रियता: यूनुस सरकार, नौसेना प्रमुख की यात्रा और भारत की पूर्वोत्तर सुरक्षा पर खतरे की समीक्षा

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    बी.एन राउ का संविधान निर्माण में बड़ा योगदान है

    क्या बेनेगल नरसिंह राउ थे संविधान के असली निर्माता ? इतिहास ने उनके योगदान को क्यों भुला दिया ?

    26 नवंबर भारतीय संविधान दिवस

    संविधान दिवस: भारतीय चिंतन परंपरा की दृष्टि से संविधान 

    Fate’s Play: Cultural Games That Echo Ancient Tales of Luck

    Fate’s Play: Cultural Games That Echo Ancient Tales of Luck

    श्री गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहीदी दिवस: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने निभाई ‘पालकी सेवा’ की रीति

    श्री गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहीदी दिवस: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने निभाई ‘पालकी सेवा’ की रीति

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    शोले फिल्म में पानी की टंकी पर चढ़े धर्मेंद्र

    बॉलीवुड का ही-मैन- जिसने रुलाया भी, हंसाया भी: धर्मेंद्र के सिने सफर की 10 नायाब फिल्में

    नीतीश कुमार

    जेडी(यू) के ख़िलाफ़ एंटी इन्कंबेसी क्यों नहीं होती? बिहार में क्यों X फैक्टर बने हुए हैं नीतीश कुमार?

    क्यों PariPesa भारत रोमांचक एविएटर क्रैश गेम्स का अनुभव लेने के लिए सबसे बेहतरीन जगह है

    क्यों PariPesa भारत रोमांचक एविएटर क्रैश गेम्स का अनुभव लेने के लिए सबसे बेहतरीन जगह है

    भारत की वैज्ञानिक विजय: ‘नैफिथ्रोमाइसिन’, कैंसर और डायबिटीज के मरीजों के उम्मीदों को मिली नई रोशनी, जानें क्यों महत्वपूर्ण है ये दवा

    आत्मनिर्भर भारत की वैज्ञानिक विजय: ‘नैफिथ्रोमाइसिन’, कैंसर और डायबिटीज के मरीजों के उम्मीदों को मिली नई रोशनी, जानें क्यों महत्वपूर्ण है ये दवा

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

सिंधु जल संधि: नेहरू के एकतरफा समझौते के कारण कैसे दशकों तक परेशान रहा देश

बहुतों को यह भी याद नहीं है कि जब इस संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे तो यह संसद से परामर्श लेने की भी जरूरत नहीं समझी गई।

Vibhuti Ranjan द्वारा Vibhuti Ranjan
18 August 2025
in इतिहास, चर्चित, ज्ञान, भारत, भू-राजनीति, राजनीति, विश्व
सिंधु जल संधि: नेहरू के एकतरफा समझौते के कारण कैसे दशकों तक परेशान रहा देश

सिंधु जल संधि के कारण पानी से वंचित रहे भारत के किसान।

Share on FacebookShare on X

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से बोलते हुए 1960 की सिंधु जल संधि को “अन्यायपूर्ण और एकतरफ़ा” बताया। उनके शब्दों ने जवाहरलाल नेहरू के समय से चली आ रही बहस को फिर से हवा दे दी, जब संसद भी इस समझौते के ख़िलाफ़ थी। उस समय राजनीतिक हलकों में एक प्रमुख राय यह थी कि भारत ने बहुत ज़्यादा त्याग किया है, जिसकी कीमत उसके किसानों और आने वाली पीढ़ियों को चुकानी पड़ रही है।

संबंधितपोस्ट

पाकिस्तान जिस SMASH मिसाइल को बता रहा है ‘विक्रांत किलर’, उसकी सच्चाई क्या है ?

दिल्ली धमाका और PoK के नेता का कबूलनामा: क्या भारत के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर 2.0’ का समय आ गया है?

अमेरिका ने भारत को बताया “मेजर डिफेंस पार्टनर”, जैवलिन मिसाइल समेत बड़े डिफेंस पैकेज को दी मंजूरी, पटरी पर लौट रहे हैं रिश्ते ?

और लोड करें

संसद से भी नहीं लिया गया परामर्श

बहुतों को यह याद नहीं है कि जब इस संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे, तो यह संसद से परामर्श किए बिना किया गया था और जब तक सांसदों ने इस पर बहस की, तब तक समझौते की पुष्टि हो चुकी थी। सिंधु जल समझौता नेहरू के करियर में उनकी सबसे तीखी आलोचना के कारणों में से एक बन गया, जिसकी आलोचना न केवल अटल बिहारी वाजपेयी जैसे विपक्षी नेताओं ने की, बल्कि कांग्रेस के भीतर से भी हुई। सिंधु जल संधि की कहानी सिर्फ़ पानी के बारे में नहीं है। यह इस बारे में है कि कैसे एक राष्ट्र के नेतृत्व ने राष्ट्रीय हित की बजाय तुष्टिकरण को चुना और कैसे इस विकल्प ने छह दशकों से भी ज़्यादा समय तक भारत के विकास और सुरक्षा पर ग्रहण लगा दिया।

संधि: नेहरू ने क्या त्याग दिया

सिंधु जल संधि पर 19 सितंबर, 1960 को कराची में नेहरू और पाकिस्तान के सैन्य शासक, राष्ट्रपति अयूब खान ने हस्ताक्षर किए थे, जिसमें विश्व बैंक गारंटर के रूप में कार्यरत था। इस समझौते के तहत तीन पूर्वी नदियों रावी, व्यास और सतलुज का पानी भारत को आवंटित किया गया था। तीन पश्चिमी नदियां सिंधु, झेलम और चिनाब पाकिस्तान को दी गईं। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह थी कि उस समय विदेशी मुद्रा संकट से जूझने के बावजूद भारत को प्रतिस्थापन कार्यों के लिए पाकिस्तान को ₹83 करोड़ स्टर्लिंग पाउंड का भुगतान करना पड़ा।

इसका प्रभावी अर्थ यह था कि भारत के पास सिंधु बेसिन के कुल जल का केवल लगभग 20% ही नियंत्रण रह गया, जबकि पाकिस्तान को लगभग 80% का बड़ा हिस्सा मिल गया। नेहरू ने इस समझौते की सराहना सहयोग की एक मिसाल के रूप में की, लेकिन विभिन्न दलों के सांसदों ने इसे “बेचना”, “दूसरा विभाजन” और “भारतीय किसानों के साथ घोर अन्याय” बताया। आलोचना केवल पानी को लेकर नहीं थी। यह इस सिद्धांत को लेकर भी थी कि भारत इतना महत्वपूर्ण संसाधन एक शत्रुतापूर्ण पड़ोसी को क्यों दे रहा है। खासकर संसद से परामर्श किए बिना या इसे जम्मू-कश्मीर के व्यापक मुद्दे से जोड़े बिना?

नेहरू बनाम संसद: “दूसरा विभाजन”

30 नवंबर, 1960 को लोकसभा में सिंधु जल संधि पर बहस हुई। दस सदस्यों ने इसके खिलाफ प्रस्ताव पेश किए। केवल दो घंटे का समय दिया गया था, लेकिन इतने कम समय में किए गए हस्तक्षेपों से असंतोष की सीमा का पता चलता है। कांग्रेस के सांसद भी इस पर तीखे थे। हरीश चंद्र माथुर ने चेतावनी दी कि इस संधि का मतलब राजस्थान को सालाना 70-80 करोड़ रुपये का स्थायी नुकसान होगा और इसे “अपने ही लोगों की कीमत पर अति-उदारता” का कार्य बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री पर 1948 से ही पाकिस्तान के सामने कदम दर कदम समर्पण करने और जल समझौते को कश्मीर से जोड़ने में विफल रहने का आरोप लगाया।

कांग्रेस के एक अन्य दिग्गज नेता अशोक मेहता ने इस संधि की तुलना “दूसरे विभाजन” से की और चेतावनी दी कि इसने 1947 के ज़ख्मों को फिर से ताज़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि एक निष्पक्ष समझौता हासिल करने के बजाय भारत को वास्तव में पहले के प्रस्तावों से भी बदतर शर्तें मिली हैं, और इसे एक ऐसी भूल बताया जो आने वाली पीढ़ियों को परेशान करेगी।

एसी गुहा ने क्या कहा था जानें

बंगाल के एसी गुहा ने इस भयावह असंतुलन की ओर इशारा किया: भारत के पास सिंधु बेसिन में 2.6 करोड़ एकड़ ज़मीन थी, लेकिन उसमें से केवल 19% ही सिंचित थी, जबकि पाकिस्तान के 3.9 करोड़ एकड़ में 50% से ज़्यादा सिंचाई होती थी। उन्होंने वित्तीय शर्तों की भी आलोचना की। पाकिस्तान को 400 करोड़ रुपये से ज़्यादा का अनुदान मिला, जबकि भारत कर्ज़ों के बोझ तले दबा हुआ था। उन्होंने पाकिस्तान को 83 करोड़ रुपये का भुगतान “मूर्खता की पराकाष्ठा” बताया, ऐसे समय में जब भारत ख़ुद संघर्ष कर रहा था।

ये सिर्फ़ विपक्ष की आवाज़ें नहीं थीं। ये नेहरू की अपनी पार्टी के भीतर से भी उठ रही थीं, जो इस बात पर गहरी बेचैनी ज़ाहिर कर रही थीं कि प्रधानमंत्री ने संसद की अवहेलना करके भारत के हितों से समझौता कैसे किया।

वाजपेयी की चेतावनी: “यह संधि ग़लत है”

इस समझौते के सबसे कड़े आलोचकों में युवा अटल बिहारी वाजपेयी भी थे, जो उस समय 30 के आसपास थे। स्पष्टता और दृढ़ता के साथ बोलते हुए, वाजपेयी ने सदन को याद दिलाया कि सरकार ने पहले घोषणा की थी कि वह 1962 तक पाकिस्तान को पानी देना बंद कर देगी। अब, वही सरकार स्थायी अधिकार दे रही है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि “या तो वह घोषणा गलत थी, या यह संधि गलत है।”

वाजपेयी ने अयूब खान का हवाला दिया, जिन्होंने दावा किया था कि भारत ने नदियों पर संयुक्त नियंत्रण स्वीकार कर लिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की रियायतें पाकिस्तान को और मज़बूत करेंगी और भारत की संप्रभुता को कमज़ोर करेंगी। महत्वपूर्ण बात यह है कि वाजपेयी ने इस समझौते से जुड़ी गोपनीयता की भी आलोचना की और कहा कि संसद को जानबूझकर तब तक अंधेरे में रखा गया जब तक कि यह एक निश्चित निष्कर्ष पर नहीं पहुंच गया।

उनका निष्कर्ष तीखा था: “यह संधि भारत के हित में नहीं है। इससे पाकिस्तान के साथ स्थायी मित्रता नहीं बनेगी।” उनके ये शब्द भविष्यसूचक साबित हुए। सद्भावना पैदा करने के बजाय पाकिस्तान ने अपनी शत्रुता जारी रखी। भारत के खिलाफ आतंकवाद और युद्धों को प्रायोजित किया, जबकि उसे सिंधु नदी प्रणाली से पानी की गारंटी वाली एक संधि का लाभ मिल रहा था।

नेहरू का बचाव: एकाकी रुख

जब नेहरू जवाब देने के लिए उठे, तो वे थके हुए और रक्षात्मक लग रहे थे। उन्होंने विभाजन से तुलना को “निरर्थक भाषा” कहकर खारिज कर दिया, यहां तक कि आलोचना का मज़ाक उड़ाते हुए पूछा, “किस चीज़ का विभाजन? एक बाल्टी पानी का?”

उन्होंने तर्क दिया कि अंतर्राष्ट्रीय संधियों को निरंतर संसदीय परामर्श के माध्यम से नहीं चलाया जा सकता और पाकिस्तान को भुगतान को “शांति ख़रीदने” के रूप में उचित ठहराया। उनके अनुसार, संधि को अस्वीकार करने से पश्चिमी पंजाब और व्यापक उपमहाद्वीप में अस्थिरता फैल जाती। लेकिन उनका तर्क लोगों को राज़ी नहीं कर सका। इसके तुरंत बाद, वे एक अतिथि गणमान्य व्यक्ति से मिलने के लिए सदन से चले गए और अपने पीछे एक असंतुष्ट सदन और यह बढ़ती धारणा छोड़ गए कि भारत के साथ धोखा हुआ है।

विरासत और मोदी का सुधार

दशकों तक सिंधु जल संधि (IWT) अछूती रही, जबकि पाकिस्तान छद्म युद्धों और सीमा पार आतंकवाद के ज़रिए भारत को नुकसान पहुंचाता रहा। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर के किसान पानी की कमी से जूझते रहे, जबकि पाकिस्तान भारत की रियायतों का फ़ायदा उठाता रहा।

1960 में की गई आलोचना वास्तव में कभी खत्म नहीं हुई। बाद के वर्षों में, खासकर जब पाकिस्तान ने अपनी शत्रुता बढ़ा दी, तो इसने नई प्रतिध्वनि पाई। अंततः, 2025 में, पहलगाम आतंकी हमले के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस संधि को स्थगित करने का फैसला किया। उनकी सरकार ने संकेत दिया है कि भारत अब अपने संसाधनों को ऐसे पड़ोसी के हाथों में नहीं जाने देगा जो खुलेआम आतंकवाद का समर्थन करता है। लाल किले से मोदी के ये शब्द कि यह संधि अन्यायपूर्ण है और इससे भारत के किसानों को भारी नुकसान होगा, वाजपेयी और अन्य नेताओं की चेतावनियों की प्रतिध्वनि थे, जिन्होंने छह दशक पहले नेहरू के इस समझौते का विरोध किया था।

इतिहास से सीख

सिंधु जल संधि इस बात का एक ज्वलंत उदाहरण है कि कैसे नेतृत्व के फैसले पीढ़ियों तक किसी राष्ट्र के भाग्य को आकार दे सकते हैं। एक राजनेता के रूप में पहचाने जाने की नेहरू की उत्सुकता ने उन्हें संसद की मंजूरी के बिना महत्वपूर्ण संसाधनों को सौंपने के लिए प्रेरित किया और तब से भारत को इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है। उनके आलोचकों वाजपेयी, अशोक मेहता, गुहा और कई अन्य लोगों ने इसके खतरों को स्पष्ट रूप से देखा था।

प्रधानमंत्री मोदी का इस संधि पर पुनर्विचार करने का निर्णय केवल पानी के बारे में नहीं है। यह एक ऐतिहासिक भूल को सुधारने, भारत की संप्रभुता की पुष्टि करने और यह सुनिश्चित करने के बारे में है कि राष्ट्रीय हित कभी भी गलत आदर्शवाद की बलि न चढ़े। 1960 में भारत को एक ऐसे समझौते को स्वीकार करने के लिए मजबूर होना पड़ा जिसे कई लोगों ने “दूसरा विभाजन” कहा था। 2025 में, मोदी के नेतृत्व में, भारत ने उस विरासत को खत्म करना शुरू कर दिया है, जो तुष्टिकरण से नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और ताकत से प्रेरित है।

Tags: Atal Bihari VajpayeeIndiaIndus Water TreatyNarendra ModiPakistanPandit jawaharlal nehruअटल बिहारी वाजपेयीनरेंद्र मोदीपंडित जवाहर लाल नेहरूपाकिस्तानभारतसिंधु जल संधि
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

“घुसपैठिये ग़रीब हैं, बाहर मत निकालो”- कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का बयान

अगली पोस्ट

भारत ने पाकिस्तान के किराना हिल्स में अमेरिकी परमाणु भंडार पर हमला किया: पूर्व राजदूत दीपक वोहरा का बड़ा दावा

संबंधित पोस्ट

बिहार के बाजीगरों के जरिये पश्चिम बंगाल फतह का ताना-बाना बुन रही भाजपा
राजनीति

बिहार के बाजीगरों के जरिये पश्चिम बंगाल फतह का ताना-बाना बुन रही भाजपा

27 November 2025

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बिहार में दिन-रात मेहनत कर विजय सुनिश्चित करने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं के कंधों पर अब बंगाल फतह की सबसे...

बी.एन राउ का संविधान निर्माण में बड़ा योगदान है
इतिहास

क्या बेनेगल नरसिंह राउ थे संविधान के असली निर्माता ? इतिहास ने उनके योगदान को क्यों भुला दिया ?

26 November 2025

इतिहास की एक बड़ी विशेषता ये है कि वो नायकों और खलनायकों को परिभाषित करने का जिम्मा आने वाली पीढ़ियों पर छोड़ देता है, और...

26 नवंबर भारतीय संविधान दिवस
इतिहास

संविधान दिवस: भारतीय चिंतन परंपरा की दृष्टि से संविधान 

26 November 2025

भारत में संविधान दिवस  प्रतिवर्ष  26 नवंबर को मनाया जाता है। यह मात्र एक स्मृति-दिवस नहीं, बल्कि उस ऐतिहासिक क्षण का उत्सव है जब 1949...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

‘Mad Dog’ The EX CIA Who Took Down Pakistan’s A.Q. Khan Nuclear Mafia Reveals Shocking Details

‘Mad Dog’ The EX CIA Who Took Down Pakistan’s A.Q. Khan Nuclear Mafia Reveals Shocking Details

00:06:59

Dhurandar: When a Film’s Reality Shakes the Left’s Comfortable Myths

00:06:56

Tejas Under Fire — The Truth Behind the Crash, the Propaganda, and the Facts

00:07:45

Why Rahul Gandhi’s US Outreach Directs to a Web of Shadow Controversial Islamist Networks?

00:08:04

How Javelin Missiles Will Enhance India’s Anti-Tank Dominance?

00:06:47
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2025 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2025 TFI Media Private Limited