सिंधु जल संधि: नेहरू के एकतरफा समझौते के कारण कैसे दशकों तक परेशान रहा देश
TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    मनमोहन सिंह और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी

    ‘गांधी परिवार’ बार-बार नीचा ना दिखाता तो ‘इतिहास’ ही नहीं ‘वर्तमान’ भी करता मनमोहन सिंह का उदार मूल्यांकन

    टाटा सन्स में फिर बड़ा फैसला: 5 साल और चेयरमैन रहेंगे एन. चंद्रशेखरन, अब Tata Group में क्या बदलेगा?

    Tata Sons Row: चंद्रशेखरन परिवार का TVS Motor से क्या कनेक्शन? ₹60 करोड़ के लोन से उठे हितों के टकराव के सवाल

    Trump का IMEC पर बड़ा दांव: ईरान को बायपास कर बदलेगा भारत-यूरोप का रास्ता? क्या है पूरा प्लान

    Trump का IMEC पर बड़ा दांव: ईरान को बायपास कर बदलेगा भारत-यूरोप का रास्ता? क्या है पूरा प्लान

    पीएम मोदी दिसंबर में जा सकते हैं कनाडा

    पीएम मोदी दिसंबर में जा सकते हैं कनाडा, भारत-कनाडा ट्रेड डील को साल के अंत तक पूरा करने की तैयारी

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    Make in India के 12 साल: अब भारत का अगला मैन्युफैक्चरिंग मिशन क्या है? सेमीकंडक्टर से ग्लोबल सप्लाई चेन तक नजर

    Make in India के 12 साल: अब भारत का अगला मैन्युफैक्चरिंग मिशन क्या है? सेमीकंडक्टर से ग्लोबल सप्लाई चेन तक नजर

    टाटा सन्स में फिर बड़ा फैसला: 5 साल और चेयरमैन रहेंगे एन. चंद्रशेखरन, अब Tata Group में क्या बदलेगा?

    टाटा सन्स में फिर बड़ा फैसला: 5 साल और चेयरमैन रहेंगे एन. चंद्रशेखरन, अब Tata Group में क्या बदलेगा?

    BRICS 2026 में PM Modi, Putin and Xi Jinping

    BRICS Explained: क्या अमेरिकी डॉलर से दूर जा रही है दुनिया ?

    BRICS VS G7

    BRICS बनाम G7: क्या दुनिया की आर्थिक ताकत का संतुलन बदल चुका है?

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    16 साल बाद ट्रेनर तेजस की डिलीवरी! Mk1 से Mk1A तक क्यों उलझता रहा भारत का स्वदेशी फाइटर प्रोग्राम?

    16 साल बाद ट्रेनर तेजस की डिलीवरी! Mk1 से Mk1A तक क्यों उलझता रहा भारत का स्वदेशी फाइटर प्रोग्राम?

    BRICS 2026 में PM Modi, Putin and Xi Jinping

    BRICS Explained: क्या अमेरिकी डॉलर से दूर जा रही है दुनिया ?

    SU 57 India Russia

    भारत को Su-57 की जरूरत कितनी? क्या रूस का 5th Gen Fighter भर पाएगा AMCA का गैप?

    Exercise Pitch Black 2026 in Australia and Exercise Udara Shakti 2026 in Malaysia

    पिच ब्लैक से उदारा शक्ति तक: इंडो पैसेफिक में भारतीय वायु सेना का दम

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    The Moon Is Ours’! ट्रंप के दावे के बीच बड़ा सवाल- क्या कोई देश चांद पर कब्जा कर सकता है

    The Moon Is Ours’! ट्रंप के दावे के बीच बड़ा सवाल- क्या कोई देश चांद पर कब्जा कर सकता है

    BRICS 2026 में PM Modi, Putin and Xi Jinping

    BRICS Explained: क्या अमेरिकी डॉलर से दूर जा रही है दुनिया ?

    मोहन भागवत ने न्यू यॉर्क के मेडिसिन स्क्वॉयर गार्डन में संबोधित करते हुए हिंदुत्व और हिंदुस्तान की व्यापक अवधारणा को सामने रखा था

    हिंदुत्व का स्पंदन: मोहन भागवत का वैश्विक संदेश

    अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में घर के अंदर अंधाधुंध फायरिंग

    अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में घर के अंदर अंधाधुंध फायरिंग, कई लोगों की मौत; जांच में जुटी पुलिस

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    22 मार्च को भगत सिंह ने अपने साथियों को पत्र लिखा था

    ‘मैं एक शर्त पर ज़िंदा रह सकता हूं…’: अपने आखिरी पत्र में भगत सिंह ने साथियों से क्या कहा?

    Pandit Deendayal Upadhyaya Integral Humanism Antyodaya Jana Sangh

    पश्चिमी मॉडल से अलग भारत का रास्ता: क्या था दीनदयाल उपाध्याय का ‘एकात्म मानववाद’?

    भारत के अलावा किन-किन देशों में होती है गणेश जी की पूजा और क्या है मान्यताएं?

    भारत के अलावा किन-किन देशों में होती है गणेश जी की पूजा और क्या है मान्यताएं?

    सरस्वती धरोहर विकास बोर्‍ के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमिच सरस्वती के उद्गम स्थल पर

    मोदी के ‘सेवा संकल्प’ को सरस्वती के पुनरुद्धार से जोड़ रहा हरियाणा, ‘आदि बद्री’ से सभ्यता और संस्कृति को सहेजने की मुहिम

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    भारत में हेयर रिस्टोरेशन: जल्दबाज़ी वाले समाधानों से ज़्यादा ज़रूरी है सही योजना

    भारत में हेयर रिस्टोरेशन: जल्दबाज़ी वाले समाधानों से ज़्यादा ज़रूरी है सही योजना

    The Basketball Draw Will Rewrite Every Asian Games Forecast

    The Basketball Draw Will Rewrite Every Asian Games Forecast

    Why Sports Betting Exploded Among Cricket Fans in India

    Why Sports Betting Exploded Among Cricket Fans in India

    Mostbet Casino in the Czech Republic: What Players Actually Get

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    मनमोहन सिंह और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी

    ‘गांधी परिवार’ बार-बार नीचा ना दिखाता तो ‘इतिहास’ ही नहीं ‘वर्तमान’ भी करता मनमोहन सिंह का उदार मूल्यांकन

    टाटा सन्स में फिर बड़ा फैसला: 5 साल और चेयरमैन रहेंगे एन. चंद्रशेखरन, अब Tata Group में क्या बदलेगा?

    Tata Sons Row: चंद्रशेखरन परिवार का TVS Motor से क्या कनेक्शन? ₹60 करोड़ के लोन से उठे हितों के टकराव के सवाल

    Trump का IMEC पर बड़ा दांव: ईरान को बायपास कर बदलेगा भारत-यूरोप का रास्ता? क्या है पूरा प्लान

    Trump का IMEC पर बड़ा दांव: ईरान को बायपास कर बदलेगा भारत-यूरोप का रास्ता? क्या है पूरा प्लान

    पीएम मोदी दिसंबर में जा सकते हैं कनाडा

    पीएम मोदी दिसंबर में जा सकते हैं कनाडा, भारत-कनाडा ट्रेड डील को साल के अंत तक पूरा करने की तैयारी

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    Make in India के 12 साल: अब भारत का अगला मैन्युफैक्चरिंग मिशन क्या है? सेमीकंडक्टर से ग्लोबल सप्लाई चेन तक नजर

    Make in India के 12 साल: अब भारत का अगला मैन्युफैक्चरिंग मिशन क्या है? सेमीकंडक्टर से ग्लोबल सप्लाई चेन तक नजर

    टाटा सन्स में फिर बड़ा फैसला: 5 साल और चेयरमैन रहेंगे एन. चंद्रशेखरन, अब Tata Group में क्या बदलेगा?

    टाटा सन्स में फिर बड़ा फैसला: 5 साल और चेयरमैन रहेंगे एन. चंद्रशेखरन, अब Tata Group में क्या बदलेगा?

    BRICS 2026 में PM Modi, Putin and Xi Jinping

    BRICS Explained: क्या अमेरिकी डॉलर से दूर जा रही है दुनिया ?

    BRICS VS G7

    BRICS बनाम G7: क्या दुनिया की आर्थिक ताकत का संतुलन बदल चुका है?

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    16 साल बाद ट्रेनर तेजस की डिलीवरी! Mk1 से Mk1A तक क्यों उलझता रहा भारत का स्वदेशी फाइटर प्रोग्राम?

    16 साल बाद ट्रेनर तेजस की डिलीवरी! Mk1 से Mk1A तक क्यों उलझता रहा भारत का स्वदेशी फाइटर प्रोग्राम?

    BRICS 2026 में PM Modi, Putin and Xi Jinping

    BRICS Explained: क्या अमेरिकी डॉलर से दूर जा रही है दुनिया ?

    SU 57 India Russia

    भारत को Su-57 की जरूरत कितनी? क्या रूस का 5th Gen Fighter भर पाएगा AMCA का गैप?

    Exercise Pitch Black 2026 in Australia and Exercise Udara Shakti 2026 in Malaysia

    पिच ब्लैक से उदारा शक्ति तक: इंडो पैसेफिक में भारतीय वायु सेना का दम

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    The Moon Is Ours’! ट्रंप के दावे के बीच बड़ा सवाल- क्या कोई देश चांद पर कब्जा कर सकता है

    The Moon Is Ours’! ट्रंप के दावे के बीच बड़ा सवाल- क्या कोई देश चांद पर कब्जा कर सकता है

    BRICS 2026 में PM Modi, Putin and Xi Jinping

    BRICS Explained: क्या अमेरिकी डॉलर से दूर जा रही है दुनिया ?

    मोहन भागवत ने न्यू यॉर्क के मेडिसिन स्क्वॉयर गार्डन में संबोधित करते हुए हिंदुत्व और हिंदुस्तान की व्यापक अवधारणा को सामने रखा था

    हिंदुत्व का स्पंदन: मोहन भागवत का वैश्विक संदेश

    अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में घर के अंदर अंधाधुंध फायरिंग

    अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में घर के अंदर अंधाधुंध फायरिंग, कई लोगों की मौत; जांच में जुटी पुलिस

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    22 मार्च को भगत सिंह ने अपने साथियों को पत्र लिखा था

    ‘मैं एक शर्त पर ज़िंदा रह सकता हूं…’: अपने आखिरी पत्र में भगत सिंह ने साथियों से क्या कहा?

    Pandit Deendayal Upadhyaya Integral Humanism Antyodaya Jana Sangh

    पश्चिमी मॉडल से अलग भारत का रास्ता: क्या था दीनदयाल उपाध्याय का ‘एकात्म मानववाद’?

    भारत के अलावा किन-किन देशों में होती है गणेश जी की पूजा और क्या है मान्यताएं?

    भारत के अलावा किन-किन देशों में होती है गणेश जी की पूजा और क्या है मान्यताएं?

    सरस्वती धरोहर विकास बोर्‍ के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमिच सरस्वती के उद्गम स्थल पर

    मोदी के ‘सेवा संकल्प’ को सरस्वती के पुनरुद्धार से जोड़ रहा हरियाणा, ‘आदि बद्री’ से सभ्यता और संस्कृति को सहेजने की मुहिम

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    भारत में हेयर रिस्टोरेशन: जल्दबाज़ी वाले समाधानों से ज़्यादा ज़रूरी है सही योजना

    भारत में हेयर रिस्टोरेशन: जल्दबाज़ी वाले समाधानों से ज़्यादा ज़रूरी है सही योजना

    The Basketball Draw Will Rewrite Every Asian Games Forecast

    The Basketball Draw Will Rewrite Every Asian Games Forecast

    Why Sports Betting Exploded Among Cricket Fans in India

    Why Sports Betting Exploded Among Cricket Fans in India

    Mostbet Casino in the Czech Republic: What Players Actually Get

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

सिंधु जल संधि: नेहरू के एकतरफा समझौते के कारण कैसे दशकों तक परेशान रहा देश

बहुतों को यह भी याद नहीं है कि जब इस संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे तो यह संसद से परामर्श लेने की भी जरूरत नहीं समझी गई।

Vibhuti Ranjan द्वारा Vibhuti Ranjan
18 August 2025
in इतिहास, चर्चित, ज्ञान, भारत, भू-राजनीति, राजनीति, विश्व
सिंधु जल संधि: नेहरू के एकतरफा समझौते के कारण कैसे दशकों तक परेशान रहा देश

सिंधु जल संधि के कारण पानी से वंचित रहे भारत के किसान।

Share on FacebookShare on X

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से बोलते हुए 1960 की सिंधु जल संधि को “अन्यायपूर्ण और एकतरफ़ा” बताया। उनके शब्दों ने जवाहरलाल नेहरू के समय से चली आ रही बहस को फिर से हवा दे दी, जब संसद भी इस समझौते के ख़िलाफ़ थी। उस समय राजनीतिक हलकों में एक प्रमुख राय यह थी कि भारत ने बहुत ज़्यादा त्याग किया है, जिसकी कीमत उसके किसानों और आने वाली पीढ़ियों को चुकानी पड़ रही है।

संबंधितपोस्ट

पुरुष कबड्डी फाइनल: ईरान के खिलाफ पलटा खेल, भारत ने शानदार वापसी कर जीता एशियाड गोल्ड

Make in India के 12 साल: अब भारत का अगला मैन्युफैक्चरिंग मिशन क्या है? सेमीकंडक्टर से ग्लोबल सप्लाई चेन तक नजर

‘पाकिस्तान कहां है?’ मंडेला के सवाल पर अटके हामिद मीर, भारत का नाम लेते ही मिली लोकेशन

और लोड करें

संसद से भी नहीं लिया गया परामर्श

बहुतों को यह याद नहीं है कि जब इस संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे, तो यह संसद से परामर्श किए बिना किया गया था और जब तक सांसदों ने इस पर बहस की, तब तक समझौते की पुष्टि हो चुकी थी। सिंधु जल समझौता नेहरू के करियर में उनकी सबसे तीखी आलोचना के कारणों में से एक बन गया, जिसकी आलोचना न केवल अटल बिहारी वाजपेयी जैसे विपक्षी नेताओं ने की, बल्कि कांग्रेस के भीतर से भी हुई। सिंधु जल संधि की कहानी सिर्फ़ पानी के बारे में नहीं है। यह इस बारे में है कि कैसे एक राष्ट्र के नेतृत्व ने राष्ट्रीय हित की बजाय तुष्टिकरण को चुना और कैसे इस विकल्प ने छह दशकों से भी ज़्यादा समय तक भारत के विकास और सुरक्षा पर ग्रहण लगा दिया।

संधि: नेहरू ने क्या त्याग दिया

सिंधु जल संधि पर 19 सितंबर, 1960 को कराची में नेहरू और पाकिस्तान के सैन्य शासक, राष्ट्रपति अयूब खान ने हस्ताक्षर किए थे, जिसमें विश्व बैंक गारंटर के रूप में कार्यरत था। इस समझौते के तहत तीन पूर्वी नदियों रावी, व्यास और सतलुज का पानी भारत को आवंटित किया गया था। तीन पश्चिमी नदियां सिंधु, झेलम और चिनाब पाकिस्तान को दी गईं। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह थी कि उस समय विदेशी मुद्रा संकट से जूझने के बावजूद भारत को प्रतिस्थापन कार्यों के लिए पाकिस्तान को ₹83 करोड़ स्टर्लिंग पाउंड का भुगतान करना पड़ा।

इसका प्रभावी अर्थ यह था कि भारत के पास सिंधु बेसिन के कुल जल का केवल लगभग 20% ही नियंत्रण रह गया, जबकि पाकिस्तान को लगभग 80% का बड़ा हिस्सा मिल गया। नेहरू ने इस समझौते की सराहना सहयोग की एक मिसाल के रूप में की, लेकिन विभिन्न दलों के सांसदों ने इसे “बेचना”, “दूसरा विभाजन” और “भारतीय किसानों के साथ घोर अन्याय” बताया। आलोचना केवल पानी को लेकर नहीं थी। यह इस सिद्धांत को लेकर भी थी कि भारत इतना महत्वपूर्ण संसाधन एक शत्रुतापूर्ण पड़ोसी को क्यों दे रहा है। खासकर संसद से परामर्श किए बिना या इसे जम्मू-कश्मीर के व्यापक मुद्दे से जोड़े बिना?

नेहरू बनाम संसद: “दूसरा विभाजन”

30 नवंबर, 1960 को लोकसभा में सिंधु जल संधि पर बहस हुई। दस सदस्यों ने इसके खिलाफ प्रस्ताव पेश किए। केवल दो घंटे का समय दिया गया था, लेकिन इतने कम समय में किए गए हस्तक्षेपों से असंतोष की सीमा का पता चलता है। कांग्रेस के सांसद भी इस पर तीखे थे। हरीश चंद्र माथुर ने चेतावनी दी कि इस संधि का मतलब राजस्थान को सालाना 70-80 करोड़ रुपये का स्थायी नुकसान होगा और इसे “अपने ही लोगों की कीमत पर अति-उदारता” का कार्य बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री पर 1948 से ही पाकिस्तान के सामने कदम दर कदम समर्पण करने और जल समझौते को कश्मीर से जोड़ने में विफल रहने का आरोप लगाया।

कांग्रेस के एक अन्य दिग्गज नेता अशोक मेहता ने इस संधि की तुलना “दूसरे विभाजन” से की और चेतावनी दी कि इसने 1947 के ज़ख्मों को फिर से ताज़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि एक निष्पक्ष समझौता हासिल करने के बजाय भारत को वास्तव में पहले के प्रस्तावों से भी बदतर शर्तें मिली हैं, और इसे एक ऐसी भूल बताया जो आने वाली पीढ़ियों को परेशान करेगी।

एसी गुहा ने क्या कहा था जानें

बंगाल के एसी गुहा ने इस भयावह असंतुलन की ओर इशारा किया: भारत के पास सिंधु बेसिन में 2.6 करोड़ एकड़ ज़मीन थी, लेकिन उसमें से केवल 19% ही सिंचित थी, जबकि पाकिस्तान के 3.9 करोड़ एकड़ में 50% से ज़्यादा सिंचाई होती थी। उन्होंने वित्तीय शर्तों की भी आलोचना की। पाकिस्तान को 400 करोड़ रुपये से ज़्यादा का अनुदान मिला, जबकि भारत कर्ज़ों के बोझ तले दबा हुआ था। उन्होंने पाकिस्तान को 83 करोड़ रुपये का भुगतान “मूर्खता की पराकाष्ठा” बताया, ऐसे समय में जब भारत ख़ुद संघर्ष कर रहा था।

ये सिर्फ़ विपक्ष की आवाज़ें नहीं थीं। ये नेहरू की अपनी पार्टी के भीतर से भी उठ रही थीं, जो इस बात पर गहरी बेचैनी ज़ाहिर कर रही थीं कि प्रधानमंत्री ने संसद की अवहेलना करके भारत के हितों से समझौता कैसे किया।

वाजपेयी की चेतावनी: “यह संधि ग़लत है”

इस समझौते के सबसे कड़े आलोचकों में युवा अटल बिहारी वाजपेयी भी थे, जो उस समय 30 के आसपास थे। स्पष्टता और दृढ़ता के साथ बोलते हुए, वाजपेयी ने सदन को याद दिलाया कि सरकार ने पहले घोषणा की थी कि वह 1962 तक पाकिस्तान को पानी देना बंद कर देगी। अब, वही सरकार स्थायी अधिकार दे रही है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि “या तो वह घोषणा गलत थी, या यह संधि गलत है।”

वाजपेयी ने अयूब खान का हवाला दिया, जिन्होंने दावा किया था कि भारत ने नदियों पर संयुक्त नियंत्रण स्वीकार कर लिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की रियायतें पाकिस्तान को और मज़बूत करेंगी और भारत की संप्रभुता को कमज़ोर करेंगी। महत्वपूर्ण बात यह है कि वाजपेयी ने इस समझौते से जुड़ी गोपनीयता की भी आलोचना की और कहा कि संसद को जानबूझकर तब तक अंधेरे में रखा गया जब तक कि यह एक निश्चित निष्कर्ष पर नहीं पहुंच गया।

उनका निष्कर्ष तीखा था: “यह संधि भारत के हित में नहीं है। इससे पाकिस्तान के साथ स्थायी मित्रता नहीं बनेगी।” उनके ये शब्द भविष्यसूचक साबित हुए। सद्भावना पैदा करने के बजाय पाकिस्तान ने अपनी शत्रुता जारी रखी। भारत के खिलाफ आतंकवाद और युद्धों को प्रायोजित किया, जबकि उसे सिंधु नदी प्रणाली से पानी की गारंटी वाली एक संधि का लाभ मिल रहा था।

नेहरू का बचाव: एकाकी रुख

जब नेहरू जवाब देने के लिए उठे, तो वे थके हुए और रक्षात्मक लग रहे थे। उन्होंने विभाजन से तुलना को “निरर्थक भाषा” कहकर खारिज कर दिया, यहां तक कि आलोचना का मज़ाक उड़ाते हुए पूछा, “किस चीज़ का विभाजन? एक बाल्टी पानी का?”

उन्होंने तर्क दिया कि अंतर्राष्ट्रीय संधियों को निरंतर संसदीय परामर्श के माध्यम से नहीं चलाया जा सकता और पाकिस्तान को भुगतान को “शांति ख़रीदने” के रूप में उचित ठहराया। उनके अनुसार, संधि को अस्वीकार करने से पश्चिमी पंजाब और व्यापक उपमहाद्वीप में अस्थिरता फैल जाती। लेकिन उनका तर्क लोगों को राज़ी नहीं कर सका। इसके तुरंत बाद, वे एक अतिथि गणमान्य व्यक्ति से मिलने के लिए सदन से चले गए और अपने पीछे एक असंतुष्ट सदन और यह बढ़ती धारणा छोड़ गए कि भारत के साथ धोखा हुआ है।

विरासत और मोदी का सुधार

दशकों तक सिंधु जल संधि (IWT) अछूती रही, जबकि पाकिस्तान छद्म युद्धों और सीमा पार आतंकवाद के ज़रिए भारत को नुकसान पहुंचाता रहा। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर के किसान पानी की कमी से जूझते रहे, जबकि पाकिस्तान भारत की रियायतों का फ़ायदा उठाता रहा।

1960 में की गई आलोचना वास्तव में कभी खत्म नहीं हुई। बाद के वर्षों में, खासकर जब पाकिस्तान ने अपनी शत्रुता बढ़ा दी, तो इसने नई प्रतिध्वनि पाई। अंततः, 2025 में, पहलगाम आतंकी हमले के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस संधि को स्थगित करने का फैसला किया। उनकी सरकार ने संकेत दिया है कि भारत अब अपने संसाधनों को ऐसे पड़ोसी के हाथों में नहीं जाने देगा जो खुलेआम आतंकवाद का समर्थन करता है। लाल किले से मोदी के ये शब्द कि यह संधि अन्यायपूर्ण है और इससे भारत के किसानों को भारी नुकसान होगा, वाजपेयी और अन्य नेताओं की चेतावनियों की प्रतिध्वनि थे, जिन्होंने छह दशक पहले नेहरू के इस समझौते का विरोध किया था।

इतिहास से सीख

सिंधु जल संधि इस बात का एक ज्वलंत उदाहरण है कि कैसे नेतृत्व के फैसले पीढ़ियों तक किसी राष्ट्र के भाग्य को आकार दे सकते हैं। एक राजनेता के रूप में पहचाने जाने की नेहरू की उत्सुकता ने उन्हें संसद की मंजूरी के बिना महत्वपूर्ण संसाधनों को सौंपने के लिए प्रेरित किया और तब से भारत को इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है। उनके आलोचकों वाजपेयी, अशोक मेहता, गुहा और कई अन्य लोगों ने इसके खतरों को स्पष्ट रूप से देखा था।

प्रधानमंत्री मोदी का इस संधि पर पुनर्विचार करने का निर्णय केवल पानी के बारे में नहीं है। यह एक ऐतिहासिक भूल को सुधारने, भारत की संप्रभुता की पुष्टि करने और यह सुनिश्चित करने के बारे में है कि राष्ट्रीय हित कभी भी गलत आदर्शवाद की बलि न चढ़े। 1960 में भारत को एक ऐसे समझौते को स्वीकार करने के लिए मजबूर होना पड़ा जिसे कई लोगों ने “दूसरा विभाजन” कहा था। 2025 में, मोदी के नेतृत्व में, भारत ने उस विरासत को खत्म करना शुरू कर दिया है, जो तुष्टिकरण से नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और ताकत से प्रेरित है।

Tags: Atal Bihari VajpayeeIndiaIndus Water TreatyNarendra ModiPakistanPandit jawaharlal nehruअटल बिहारी वाजपेयीनरेंद्र मोदीपंडित जवाहर लाल नेहरूपाकिस्तानभारतसिंधु जल संधि
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

“घुसपैठिये ग़रीब हैं, बाहर मत निकालो”- कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का बयान

अगली पोस्ट

भारत ने पाकिस्तान के किराना हिल्स में अमेरिकी परमाणु भंडार पर हमला किया: पूर्व राजदूत दीपक वोहरा का बड़ा दावा

संबंधित पोस्ट

J&K Assembly में ‘स्टेटहुड’ पर संग्राम: स्पीकर हटाने की मांग, ऑटोनॉमी के जिक्र पर BJP का हंगामा
चर्चित

J&K Assembly में ‘स्टेटहुड’ पर संग्राम: स्पीकर हटाने की मांग, ऑटोनॉमी के जिक्र पर BJP का हंगामा

28 September 2026

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने के प्रस्ताव ने सियासी टकराव को और तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 25...

22 मार्च को भगत सिंह ने अपने साथियों को पत्र लिखा था
इतिहास

‘मैं एक शर्त पर ज़िंदा रह सकता हूं…’: अपने आखिरी पत्र में भगत सिंह ने साथियों से क्या कहा?

28 September 2026

भारत के स्वतंत्रता संग्राम के नायकों की चर्चा भगत सिंह का नाम लिए बगैर हमेशा अधूरी ही मानी जाएगी। भगत सिंह का योगदान इतिहास के...

केतन अग्रवाल मौत मामला
चर्चित

केतन अग्रवाल मौत मामले में चश्मदीद का दावा: पहले पैर पर मारी लात, फिर चट्टान से दिया धक्का

28 September 2026

पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की मौत के मामले में पुलिस को एक अहम गवाह मिला है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, गवाह ने...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

China and the Philippines Are Fighting a War With Maps, Not Missiles

China and the Philippines Are Fighting a War With Maps, Not Missiles

00:05:55

ONGC finds gas off Odisha: Can the Mahanadi basin fuel India’s energy future?

00:07:22

India-Russia Relations: Putin की रणनीति और भारत के लिए आगे क्या? | Maj Gen Deepak Mehra (Retd)

00:12:10

The Su-57 Question: Is India Taking a Huge Risk by Waiting for AMCA only ? IAF | Stealth fighter

00:05:37

Beginning Of Saudi Arabia's End ? A Case Study...

00:16:00
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited