टाटा समूह के भीतर चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को लेकर चल रहे विवाद में अब एक नया कारोबारी कनेक्शन सामने आया है। चंद्रशेखरन की पत्नी ललिता और बेटे प्रणव एक ऐसी कंपनी Hanno One Warehousing Pvt Ltd के निदेशक हैं, जिसका तमिलनाडु में TVS Motor के साथ वेयरहाउस परियोजना के लिए कारोबारी संबंध सामने आया है। खास बात यह है कि TVS Motor के चेयरमैन-एमेरिटस वेनु श्रीनिवासन Tata Sons के बोर्ड में हैं और उस नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति के सदस्य भी हैं, जो चंद्रशेखरन के प्रदर्शन और नियुक्ति से जुड़े मामलों को देखती है।
यही वजह है कि अब सवाल सिर्फ इस कारोबारी सौदे का नहीं, बल्कि हितों के टकराव और उसके खुलासे का भी है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि किसी नियम का उल्लंघन साबित हो चुका है। विवाद का केंद्र यही है कि किस स्तर पर और किसे इस कारोबारी संबंध की जानकारी दी गई थी।
आखिर Hanno One क्या है?
कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के रिकॉर्ड के मुताबिक Hanno One Warehousing Pvt Ltd मार्च 2025 में बनी थी। इसमें चंद्रशेखरन की पत्नी ललिता और बेटे प्रणव निदेशक हैं। रिपोर्ट के मुताबिक Hanno Infra LLP के पास Hanno One की 99.99 फीसदी हिस्सेदारी है, जबकि प्रणव के पास सीधे तौर पर एक शेयर है। कंपनी की वित्तीय स्थिति से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
कंपनी बनने के करीब तीन महीने बाद, जून 2025 में TVS Motor ने तमिलनाडु के कृष्णगिरि जिले के उड्डनापल्ली गांव में 17 एकड़ जमीन Hanno One को लीज पर दी। जमीन पर एक बड़े वेयरहाउस के निर्माण की योजना है।
यानी मामला किसी साधारण निवेश या शेयर खरीद का नहीं, बल्कि जमीन के इस्तेमाल और वेयरहाउस परियोजना से जुड़े कारोबारी समझौते का है।
17 एकड़ जमीन और ₹60 करोड़ का कर्ज क्या है?
दस्तावेजों के मुताबिक प्रस्तावित वेयरहाउस करीब 3.3 लाख वर्ग फुट का होगा। परियोजना की अनुमानित लागत ₹106.3 करोड़ बताई गई है और इसे मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके बाद नवंबर 2025 में HDFC Bank ने Hanno One को ₹60 करोड़ का निर्माण ऋण देने की पेशकश की। बैंक के टर्म शीट के अनुसार इस कर्ज के लिए कंपनी के लीज अधिकार और बनने वाली इमारत को आधार बनाया गया था।
हालांकि, TVS Motor और Hanno One के बीच हुए लीज समझौते की पूरी शर्तें, खासकर किराया कितना है, सार्वजनिक नहीं हैं। इसलिए उपलब्ध दस्तावेजों से यह निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है कि TVS Motor और चंद्रशेखरन परिवार की कंपनी के बीच आर्थिक शर्तें बाजार दरों के अनुरूप थीं या नहीं।
फिर विवाद इतना बड़ा क्यों है?
यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि TVS Motor के चेयरमैन-एमेरिटस वेनु श्रीनिवासन Tata Sons के निदेशक हैं। वह Tata Trusts के वाइस-चेयरमैन भी हैं और Tata Sons की Nomination and Remuneration Committee यानी NRC में शामिल हैं। यही समिति चंद्रशेखरन के प्रदर्शन और चेयरमैन के रूप में उनकी भूमिका से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
17 सितंबर को Tata Sons के बोर्ड ने चंद्रशेखरन के लिए एक और पांच साल का कार्यकाल मंजूर किया था। चार निदेशकों ने प्रस्ताव का समर्थन किया, जिनमें श्रीनिवासन भी शामिल थे। दूसरी तरफ Tata Trusts के चेयरमैन नोएल टाटा ने इसका विरोध किया।
ऐसे में सवाल यह उठा कि जिस कंपनी के प्रमुख श्रीनिवासन हैं, उसी कंपनी का चंद्रशेखरन के परिवार से जुड़ी कंपनी के साथ कारोबारी संबंध है और श्रीनिवासन उस समिति में भी हैं जो चंद्रशेखरन के कार्यकाल से जुड़े मामलों को देखती है—तो क्या इस संबंध का पर्याप्त खुलासा किया गया था?
क्या चंद्रशेखरन या श्रीनिवासन ने जानकारी छिपाई?
यहीं सबसे महत्वपूर्ण सावधानी जरूरी है। Tata Sons का कहना है कि Hanno One के गठन की जानकारी दी गई थी। कंपनी के प्रवक्ता के मुताबिक अप्रैल 2025 में Hanno One के गठन की जानकारी उन सभी कंपनियों को दी गई थी, जहां चंद्रशेखरन चेयरमैन हैं। Tata Sons का यह भी कहना है कि TVS Motor एक स्वतंत्र सूचीबद्ध कंपनी है और उसका Tata Group की कंपनियों के साथ कोई कारोबारी संबंध नहीं है। कंपनी के अनुसार चंद्रशेखरन के बेटे द्वारा संचालित कंपनी और TVS Motor के बीच हुए लेनदेन को Tata Sons या उसकी कंपनियों के सामने अलग से घोषित करना जरूरी नहीं था।
दूसरी तरफ Tata Trusts का कहना है कि श्रीनिवासन ने इस संबंध में ट्रस्ट के ट्रस्टीज को कोई खुलासा नहीं किया। Trusts ने यह भी कहा कि उसके पास Tata Sons बोर्ड की कार्यवाही की स्वतंत्र पहुंच नहीं है, इसलिए वह निश्चित तौर पर यह नहीं कह सकता कि बोर्ड के सामने क्या जानकारी रखी गई थी।
TVS Motor और प्रणव चंद्रशेखरन से इस मामले पर प्रतिक्रिया मांगी गई थी, लेकिन प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक उनका जवाब नहीं मिला।
Tata Code of Conduct में क्या कहा गया है?
Tata Code of Conduct में हितों के टकराव को लेकर प्रावधान हैं। इसमें ऐसी स्थिति को conflict of interest माना गया है जहां किसी निर्णय से किसी कर्मचारी, उसके परिवार के सदस्य या करीबी व्यक्ति को अनुचित लाभ मिल सकता है। कार्यकारी निदेशकों से वास्तविक या संभावित हितों के टकराव का बोर्ड के सामने खुलासा करने की अपेक्षा की जाती है।
इसलिए असली सवाल यह नहीं है कि चंद्रशेखरन के परिवार की कंपनी TVS Motor के साथ कारोबार कर सकती है या नहीं। सामान्य कारोबारी तौर पर ऐसा संबंध अपने आप में अवैध साबित नहीं करता। बड़ा सवाल यह है कि किसे इस संबंध की जानकारी थी, कब दी गई, क्या श्रीनिवासन को अपनी भूमिका से अलग होना चाहिए था और क्या बोर्ड के सामने पर्याप्त जानकारी रखी गई थी।
कॉरपोरेट गवर्नेंस विशेषज्ञों ने इसी बिंदु पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सामान्य कारोबारी लेनदेन और हितों के टकराव के बीच फर्क इस बात से तय होता है कि संबंधित व्यक्ति की निर्णय लेने की भूमिका क्या है और उसने अपने संभावित हित का कितना स्पष्ट खुलासा किया।
क्या यह चंद्रशेखरन की नियुक्ति को अपने आप अवैध बना देता है?
नहीं। उपलब्ध रिपोर्टों में अभी ऐसा कोई निष्कर्ष सामने नहीं आया है कि TVS Motor और Hanno One के कारोबारी संबंध के कारण चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति अपने आप अमान्य हो गई है।
चंद्रशेखरन की नियुक्ति को लेकर पहले से ही Tata Trusts और Tata Sons बोर्ड के बीच अलग विवाद चल रहा है। Trusts ने 17 सितंबर के बोर्ड प्रस्ताव की वैधता पर भी सवाल उठाए हैं और कहा है कि Trust-nominated directors की मंजूरी जरूरी थी।
TVS Motor से जुड़ा मामला इस पूरे विवाद में एक अलग कॉरपोरेट गवर्नेंस सवाल जोड़ता है, यानी बोर्ड के सदस्यों और उनके परिवारों से जुड़े कारोबारी हितों का खुलासा किस तरह होना चाहिए।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल तीन बातें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण रहेंगी। पहली, क्या Tata Sons बोर्ड के रिकॉर्ड में Hanno One और TVS Motor के संबंध से जुड़ी कोई औपचारिक जानकारी दर्ज थी। दूसरी, क्या श्रीनिवासन ने इस कारोबारी संबंध के कारण चंद्रशेखरन के पुनर्नियुक्ति प्रस्ताव पर चर्चा या मतदान से खुद को अलग करने की जरूरत समझी थी। तीसरी, क्या Tata Trusts इस मामले में कोई औपचारिक संस्थागत कदम उठाता है।
इसलिए फिलहाल इसे “चंद्रशेखरन परिवार की कंपनी और TVS Motor के बीच कारोबारी संबंध को लेकर उठे खुलासा और हितों के टकराव के सवाल” के रूप में देखना ज्यादा सटीक है, न कि किसी सिद्ध भ्रष्टाचार या अवैध लेनदेन के रूप में। उपलब्ध रिपोर्टों में TVS Motor की ओर से इस संबंध पर कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया भी सामने नहीं आई है।





























