क्यों बिहार की सड़कों से लेकर दिल्ली की संसद तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गालियाँ और निजी हमले झेलने पड़ते हैं? अभी हाल ही में दरभंगा, बिहार में राहुल गांधी की रैली के दौरान मंच पर मौजूद एक व्यक्ति ने मोदी और उनकी स्वर्गीय मां के खिलाफ अपमानजनक शब्द कहे। यह सिर्फ प्रधानमंत्री का नहीं, बल्कि हर भारतीय मां का अपमान है। मोदी पिछले 11 सालों से साधारण परिवार से निकलकर देश का नेतृत्व कर रहे हैं, लेकिन विपक्ष उनकी यह सफलता बर्दाश्त नहीं कर पा रहा।
दरभंगा घटना: मर्यादा की सारी हदें पार
शुक्रवार को बिहार पुलिस ने मोहम्मद रिज़वी नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया, जिसने राहुल गांधी की “वोट अधिकार यात्रा” के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और उनकी मां के खिलाफ गालियाँ दी थीं। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इसे लेकर सख्त नाराज़गी जताई और कहा कि यह हमारे लोकतंत्र पर धब्बा है। उनका कहना था – “विपक्ष इस बात को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा कि एक गरीब मां का बेटा पिछले 11 साल से प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठा है।” यह कोई पहली घटना नहीं, बल्कि मोदी पर हुए लगातार अपमानजनक हमलों की कड़ी का हिस्सा है।
मोदी से नफरत की असली वजह
विपक्ष की नफ़रत के तीन बड़े कारण हैं:
- मोदी किसी बड़े राजनीतिक परिवार से नहीं हैं और न ही उनके नाम के साथ कोई वंशवादी पहचान जुड़ी है। उनकी यह सफलता दिल्ली के उन खानदानी नेताओं के लिए चुनौती है जो राजनीति को अपनी पैदाइशी हक़ समझते हैं।
- मोदी खुले तौर पर अपनी सनातनी पहचान को अपनाते हैं। वे मंदिर जाते हैं, पूजा-पाठ करते हैं, राम मंदिर जैसे आयोजनों में शामिल होते हैं और दिखावे वाली राजनीति से दूर रहते हैं। यही बात विपक्ष को खटकती है।
- शौचालय बनाने, डिजिटल पेमेंट, स्वच्छ भारत और आत्मनिर्भरता जैसे कामों के जरिए मोदी सीधे आम लोगों की ज़रूरतों और सपनों की भाषा बोलते हैं। इसी वजह से तथाकथित “एलिट वर्ग” खुद को जनता से कटा हुआ पाता है।
विचारधारा की लड़ाई, सिर्फ राजनीति नहीं
मोदी के खिलाफ नफ़रत सिर्फ राजनीति की वजह से नहीं है, बल्कि सोच और विचारधारा की लड़ाई है। कांग्रेस और वामपंथी दल अक्सर हिंदू परंपराओं और संस्कृति को छोटा दिखाते आए हैं। वहीं मोदी लोगों को अपनी जड़ों और परंपराओं पर गर्व करने की बात करते हैं। स्वच्छ भारत, गैस सिलेंडर, शौचालय और आत्मनिर्भर भारत जैसी योजनाएँ सीधे आम लोगों की ज़िंदगी बदलती हैं। यही बात उन नेताओं को परेशान करती है जो परिवारवाद और खास सुविधाओं के सहारे राजनीति करते हैं।
अपमानों का लंबा इतिहास
मोदी पर हमला कोई नई बात नहीं है। गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए भी उन्हें लगातार अपमानित किया गया। कुछ प्रमुख उदाहरण:
- मणि शंकर अय्यर (2017) – मोदी को “नीच आदमी” कहा।
- राहुल गांधी (2019) – “चौकीदार चोर है” नारा दिया।
- सोनिया गांधी (2007) – “मौत का सौदागर” कहा।
- जातिगत अपशब्द (2019) – “गंगू तेली” कहकर उनका मजाक उड़ाया गया।
- शशि थरूर (2018) – “शिवलिंग पर बिच्छू” की टिप्पणी की।
- रावण, हिटलर, मुसोलिनी – विपक्षी नेताओं ने मोदी की तुलना तानाशाहों से की।
- टीएमसी नेताओं की टिप्पणी – मोदी को “नफरत फैलाने वाला वायरस” बताया।
हर बार इन अपमानों ने मोदी और जनता के बीच का रिश्ता और मजबूत ही किया।
दरभंगा की घटना केवल मोदी का नहीं, बल्कि हर भारतीय माँ का अपमान है। अमित शाह ने सही कहा- “यह केवल मोदी नहीं, बल्कि भारत की हर माँ का अपमान है।” पिछले वर्षों में जितने भी तंज कसे गए, वे मोदी को और मज़बूत ही करते गए।
नफ़रत की असली वजह
असल में विपक्ष की नाराज़गी सिर्फ मोदी से नहीं है, बल्कि उस सोच से भी है जिसे वह सामने लाते हैं। मोदी एक ऐसे नेता हैं जो खुले तौर पर अपने हिंदू होने पर गर्व करते हैं, अपनी मेहनत से आगे बढ़े हैं और बिना किसी खानदानी सहारे के देश के सर्वोच्च पद तक पहुँचे हैं। साथ ही, वे भारत के आम आदमी की आवाज़ और उसकी आकांक्षाओं को सीधे तौर पर सामने रखते हैं। यही वजह है कि विपक्ष को उनकी मौजूदगी और उनकी सोच दोनों ही असहज कर देती हैं।