भारत की बढ़ी ताकत: जल्द ही सेना में शामिल होगी 800 किलोमीटर मारक क्षमता वाली ब्रह्मोस मिसाइल
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भारत की बढ़ी ताकत: जल्द ही सेना में शामिल होगी 800 किलोमीटर मारक क्षमता वाली ब्रह्मोस मिसाइल, अब कांपेंगे चीन और पाकिस्तानू

ब्रह्मोस मिसाइल का अगला संस्करण संशोधित रामजेट इंजन से लैस है और अंतिम सत्यापन परीक्षणों की प्रक्रिया में है। यह मिसाइल अब अपनी सटीकता और जामिंग-रोधी क्षमता में और अधिक उन्नत हो चुकी है।

TFI Desk द्वारा TFI Desk
21 October 2025
in आयुध, भारत, भू-राजनीति, रक्षा, रणनीति, विश्व
भारत की बढ़ी ताकत: जल्द ही सेना में शामिल होगी 800 किलोमीटर मारक क्षमता वाली ब्रह्मोस मिसाइल

भारत की नई मिसाइल क्षमताओं के साथ, क्षेत्रीय संतुलन में स्पष्ट बदलाव आएगा।

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भारत अपने रक्षा ढांचे में एक निर्णायक बदलाव की दहलीज पर खड़ा है। लंबे समय से क्षेत्रीय सामरिक संतुलन पर निर्भरता और आधुनिक तकनीक की कमी से जूझ रहे दक्षिण एशिया के परिदृश्य में, अब भारतीय सशस्त्र बल नई पीढ़ी की मिसाइल प्रणालियों के माध्यम से रणनीतिक असंतुलन को अपनी तरफ खींचने की तैयारी कर रहे हैं। इस बदलाव का केंद्र बिंदु है 800-किमी रेंज वाला ब्रह्मोस मिसाइल, जो मौजूदा 450-किमी संस्करण की तुलना में दोगुनी मारक क्षमता के साथ परिचालन में आएगा। इसके साथ ही, 200-किमी से अधिक रेंज वाली एस्ट्रा एयर-टू-एयर मिसाइलें भी भारतीय वायुसेना की लंबी दूरी की लड़ाकू श्रेष्ठता को भी तेजी से बढ़ाएंगी।

800-किमी ब्रह्मोस: तकनीकी और रणनीतिक छलांग

ब्रह्मोस मिसाइल का अगला संस्करण संशोधित रामजेट इंजन से लैस है और अंतिम सत्यापन परीक्षणों की प्रक्रिया में है। यह मिसाइल अब अपनी सटीकता और जामिंग-रोधी क्षमता में और अधिक उन्नत हो चुकी है। आंतरिक इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (INS) के साथ ग्लोबल सैटेलाइट नेविगेशन का संयोजन इसे किसी भी इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप के बावजूद लक्ष्य तक पहुंचने में सक्षम बनाता है।

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मौजूदा ब्रह्मोस की गति लगभग Mach 2.8 तक होती है, जो इसे विरोधियों के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण बनाती है। मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सुखोई-30MKI विमानों द्वारा इसका सफल परिचालन यह दर्शाता है कि भारतीय वायुसेना ने अपनी सटीक हमले की क्षमता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया है। 800-किमी संस्करण के आने के साथ, यह क्षमता दोगुनी होगी, जिससे भारत के निवारक संदेश और अधिक स्पष्ट और प्रभावी होंगे।

नौसेना और सेना के लिए यह महत्वपूर्ण है कि नया संस्करण मौजूदा लांचर प्रणाली में न्यूनतम बदलाव के साथ लागू किया जा सकता है। इसका मतलब है कि परिचालन सहजता के साथ-साथ अतिरिक्त प्रशिक्षण और लॉजिस्टिक झंझट भी कम होंगे। एयर-लॉन्च संस्करण थोड़ी देर बाद परिचालन में आएगा, जो वायुसेना के लिए लंबी दूरी की रणनीतिक मारक क्षमता में एक महत्वपूर्ण आयाम जोड़ देगा।

एस्ट्रा मिसाइलें और वायु श्रेष्ठता का विस्तार

इसी दौरान, DRDO ने एस्ट्रा एयर-टू-एयर मिसाइल प्रणाली को उन्नत किया है। एस्ट्रा मार्क-2 की रेंज अब 200-किमी तक पहुंच चुकी है, जो पहले के 160-किमी संस्करण से अधिक है। इसकी प्रणोदन प्रणाली में अधिक थ्रस्ट और लंबी बर्न अवधि शामिल की गई है, जिससे उच्च लक्ष्य पर सटीक मारक क्षमता सुनिश्चित होती है।

भारतीय वायुसेना ने पहले ही 700 एस्ट्रा मार्क-2 मिसाइलों का आदेश दे दिया है, जो सुखोई-30MKI और तेजस विमानों में लगाए जाएंगे। इसके साथ ही, एस्ट्रा मार्क-3 पर भी काम चल रहा है, जिसमें सॉलिड-फ्यूल डक्टेड रामजेट (SFDR) इंजन होगा और रेंज लगभग 350 किमी तक बढ़ जाएगी। यह रणनीतिक कदम चीन और पाकिस्तान की लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइलों के मुकाबले भारत को तैयार रखेगा और क्षेत्रीय संतुलन में स्पष्ट बढ़त देगा।

ऑपरेशन सिंदूर: परीक्षण और वास्तविकता

मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय मिसाइल क्षमताओं की ताकत का वास्तविक प्रमाण दिया। सुखोई-30MKI विमानों द्वारा ब्रह्मोस की सटीक तैनाती ने यह दिखाया कि भारतीय वायुसेना अब न केवल सीमाओं पर निगरानी कर सकती है, बल्कि दुश्मन के गहन इलाके में लक्ष्यों को नष्ट करने की सामर्थ्य भी रखती है। यह ऑपरेशन केवल एक सैन्य अभ्यास नहीं था, यह दक्षिण एशिया में भारत की बढ़ते सामरिक दबदबे और निर्णायक शक्ति का संकेत था।

इंटीग्रेटेड रॉकेट फोर्स (IRF): लंबी दूरी की रणनीति का केंद्र

800-किमी ब्रह्मोस का भूमि-आधारित संस्करण भारत की प्रस्तावित इंटीग्रेटेड रॉकेट फोर्स (IRF) का हिस्सा बनेगा। IRF का उद्देश्य है कि सभी पारंपरिक मिसाइल क्षमताओं को एकीकृत और केंद्रीकृत तरीके से संचालित किया जाए, ताकि एक संयुक्त, तेज और सटीक रणनीतिक प्रतिक्रिया तैयार हो।

IRF में ब्रह्मोस के साथ प्रलय बैलिस्टिक मिसाइल (400 किमी रेंज) और लंबी दूरी की लैंड अटैक क्रूज़ मिसाइल (LACM) शामिल होंगी। ये प्रणालियां न केवल सामरिक निवारक क्षमता बढ़ाएंगी, बल्कि किसी भी संभावित आक्रामकता के खिलाफ तत्काल प्रतिक्रिया भी सुनिश्चित करेंगी।

800-किमी ब्रह्मोस और नई एस्ट्रा मिसाइलें केवल हथियार नहीं, बल्कि संदेश और सामरिक संतुलन के प्रतीक हैं। पाकिस्तान और चीन के संदर्भ में यह स्पष्ट है कि भारत अब क्षेत्रीय सुरक्षा पर पूर्ण नियंत्रण और निर्णायक दबदबा बनाए रखने में सक्षम है।

पाकिस्तान के सीमावर्ती और वायु क्षेत्रीय विकल्प अब सीमित हो गए हैं, क्योंकि भारत के पास लंबी दूरी की मारक क्षमता के साथ तत्काल प्रतिशोध और सटीक निवारक हमला करने का विकल्प उपलब्ध है। इसी तरह, चीन को भी क्षेत्रीय विस्तार और प्रभाव में भारतीय क्षमता की मजबूती को नजरअंदाज नहीं करना पड़ेगा।

आर्थिक और औद्योगिक पहलू

ब्राह्मोस प्रणाली भारत-रूस संयुक्त उपक्रम का उत्पाद है। अब तक इस परियोजना में ₹58,000 करोड़ से अधिक का निवेश हो चुका है। मार्च 2024 में रक्षा मंत्रालय ने नौसेना के लिए ₹19,519 करोड़ का सबसे बड़ा डील किया, जिसमें 220 ब्रह्मोस मिसाइलें शामिल थीं। वर्तमान में लगभग 20 अग्रणी युद्धपोतों में वर्टिकल-लॉन्च ब्रह्मोस प्रणाली स्थापित है।

इसके अतिरिक्त, रक्षा अधिग्रहण परिषद ने एयर-लॉन्च ब्रह्मोस मिसाइलों की खरीद के लिए ₹10,800 करोड़ की मंजूरी दी। यह निवेश केवल मिसाइल खरीद का नहीं, बल्कि भारतीय रक्षा उद्योग और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है।

तकनीकी श्रेष्ठता और भविष्य की तैयारी

800-किमी ब्रह्मोस और 200+ किमी रेंज वाली एस्ट्रा मिसाइलों का विकास केवल रेंज बढ़ाने तक सीमित नहीं है। यह सटीकता, जामिंग प्रतिरोध, उच्च गति और लंबी दूरी की स्थिरता के सभी मानकों पर खरा उतरने वाली प्रणालियों का निर्माण है। ये मिसाइलें भारत की सामरिक योजना और रणनीति का नया मापदंड तय करती हैं।

भविष्य में एस्ट्रा मार्क-3 की रेंज 350 किमी तक बढ़ने से भारत की वायु श्रेष्ठता और हवाई निवारक क्षमता में नया आयाम जुड़ जाएगा। ब्रह्मोस के एयर-लॉन्च संस्करण के इंदक्शन के बाद भारतीय वायुसेना की सामरिक मारक शक्ति में अप्रत्याशित वृद्धि होगी।

रणनीतिक और नैतिक संदेश

इन मिसाइल प्रणालियों का महत्व केवल तकनीकी या सैन्य नहीं है। यह दक्षिण एशिया में भारत के निवारक संदेश, सामरिक दबदबे और सुरक्षा नीति का स्पष्ट प्रतिबिंब है। 800-किमी ब्रह्मोस और एस्ट्रा मिसाइलें यह दिखाती हैं कि भारत अब न केवल सीमाओं की रक्षा कर सकता है, बल्कि दूर तक अपने प्रभाव को फैलाने और किसी भी संभावित चुनौती का सामना करने में सक्षम है।

भारत की नई मिसाइल क्षमताओं के साथ, क्षेत्रीय संतुलन में स्पष्ट बदलाव आएगा। कोई भी पड़ोसी अब भारतीय सामरिक क्षमता और तीव्र प्रतिक्रिया की संभावना को हल्के में नहीं ले सकता। यह केवल हथियारों का अधिग्रहण नहीं, बल्कि रणनीतिक आत्मनिर्भरता और भू-राजनीतिक संदेश भी है।

800-किमी ब्रह्मोस और नई एस्ट्रा मिसाइलें भारतीय सशस्त्र बलों की तकनीकी और रणनीतिक छलांग का प्रतीक हैं। ये प्रणालियाँ यह दर्शाती हैं कि भारत लंबी दूरी, सटीकता और प्रतिक्रिया समय में अपनी क्षमताओं को दोगुना कर रहा है। ऑपरेशन सिंदूर और परीक्षणों ने यह साबित किया कि भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना अब किसी भी सीमा पर संभावित खतरे का सामना करने के लिए तैयार हैं।

जब मिसाइलें बोलती हैं, तो उनका संदेश स्पष्ट होता है। भारत अब न केवल अपनी सीमाओं की रक्षा कर सकता है, बल्कि किसी भी आक्रामकता का निर्णायक जवाब देने में सक्षम है। 800-किमी ब्रह्मोस और नई एस्ट्रा मिसाइलें भारत को क्षेत्रीय सुरक्षा, सामरिक संतुलन और वैश्विक रक्षा मानचित्र पर एक मजबूत, आत्मनिर्भर और निर्णायक शक्ति के रूप में स्थापित करती हैं।

Tags: BrahmosChinaIndiaIndian Armynew missilePakistanSelf-reliant Indiaआत्मनिर्भर भारतचीननई मिसाइलपाकिस्तानब्रह्मोसभारतभारतीय सेना
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An Quiet Dialogue Between Nature and the City|Ft. Shashi Tripathi | Art| Indian Navy

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