भारत के लिए एक खुशखबरी है, भारत और फ्रांस के बीच भारतीय वायुसेना (IAF) के लिए 114 राफेल F4 लड़ाकू विमानों की खरीद को लेकर एक शुरुआती समझ पर पहुँच गए हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, इस सौदे से जुड़ी सभी औपचारिक प्रक्रियाएं 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत तक पूरी होने की उम्मीद है।
The Print की रिपोर्ट के मुताबिक, इस परियोजना की कुल लागत लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये होगी। इसके तहत 18 राफेल विमान सीधे उड़ान योग्य (फ्लाई-अवे कंडीशन) में खरीदे जाएंगे, जबकि बाकी विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। इन विमानों में से करीब 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री शामिल होगी, जैसे कि C-295 परिवहन विमान परियोजना में किया गया था। बता दें कि तेजस विमान में 62 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है।
इस समझौते में भारतीय राफेल विमानों को भविष्य में F5 स्टैंडर्ड में अपग्रेड भी किया जाएगा । इसके अलावा, भारतीय वायुसेना के सभी मौजूदा राफेल विमानों को F4 स्टैंडर्ड में अपग्रेड किया जाएगा।
F4 स्टैंडर्ड का मकसद राफेल की कनेक्टिविटी और संचार प्रणाली को और मजबूत बनाना है। इसके तहत नए सैटेलाइट लिंक, डेटा लिंक, आधुनिक सॉफ्टवेयर और रेडियो सिस्टम लगाए जाएंगे, जिससे नेटवर्क आधारित युद्ध में विमान की क्षमता बढ़ेगी और भविष्य के लड़ाकू सिस्टम से जोड़ने में मदद मिलेगी। फिलहाल भारतीय वायुसेना के पास मौजूद राफेल विमान F3-R प्लस संस्करण के हैं, जिन्हें अब नए स्टैंडर्ड में बदला जाएगा। इनमें 13 भारत-विशेष सुधार पहले से मौजूद हैं, जिससे ये सामान्य F3 संस्करणों से बेहतर माने जाते हैं।
सूत्रों के अनुसार, अंतिम लागत और शर्तें तब तय होंगी जब परियोजना को Acceptance of Necessity (AON) और अन्य जरूरी मंजूरियां मिल जाएंगी। हाल ही में भारतीय और फ्रांसीसी अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय बैठक में इस समझौते की रूपरेखा तय की गई है।
अगर यह सौदा 2027 की शुरुआत में साइन होता है, तो पहले 18 राफेल विमानों की डिलीवरी 2030 से शुरू होने की संभावना है। भारत के लिए यह एक ऐतिहासिक फैसला है। खबर है कि अगले महीने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा के दौरान अतिरिक्त राफेल विमानों की खरीद को लेकर एक घोषणा की जा सकती है, जैसा कि 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फ्रांस यात्रा के दौरान हुआ था। हालांकि 2015 में घोषणा हो गई थी, लेकिन तब असली करार 2016 में जाकर साइन हुआ था। इस बार अधिकारियों का मानना है कि प्रक्रिया तेज होगी, क्योंकि ज्यादातर बातें पहले ही तय हो चुकी हैं।
राफेल की फाइनल असेंबली लाइन (FAL) नागपुर में स्थित दसॉल्ट रिलायंस एयरोस्पेस लिमिटेड (DRAL) के कारखाने में लगाई जाएगी। अब यह कंपनी दसॉल्ट एविएशन की सहायक कंपनी है। पिछले साल सितंबर में दसॉल्ट एविएशन ने इस जॉइंट वेंचर में बहुमत हिस्सेदारी हासिल कर ली थी। वहीं अनिल अंबानी की रिलायंस अपनी बची हुई हिस्सेदारी किसी दूसरी भारतीय कंपनी को बेच सकती है, और आगे चलकर कंपनी का नाम भी बदला जा सकता है।
इस राफेल परियोजना में TATA, महिंद्रा, डायनामैटिक टेक्नोलॉजीज सहित 30 से ज्यादा भारतीय कंपनियां शामिल होंगी। TATA को पहले ही विदेशों के लिए बनने वाले राफेल विमानों के फ्यूज़लाज बनाने का ठेका मिल चुका है। नागपुर की यह असेंबली लाइन सिर्फ भारत की जरूरतें ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में राफेल की मांग को भी पूरा करेगी। यह फ्रांस के बाद दसॉल्ट एविएशन का दूसरा बड़ा उत्पादन केंद्र बन सकता है। यहीं नहीं ,आने वाले समय में भारत के पास राफेल विमानों की संख्या और बढ़ सकती है। फिलहाल दसॉल्ट एविएशन हर साल 25 विमान बनाता है, जिसे बढ़ाकर 50 करने की योजना है। भारत में बनने वाली असेंबली लाइन की क्षमता सालाना 24 विमान होगी।
31 दिसंबर 2025 तक दसॉल्ट एविएशन के पास कुल 220 राफेल विमानों के ऑर्डर थे, जिनमें 175 विदेशों के लिए और 45 फ्रांस के लिए थे।फिलहाल दसॉल्ट राफेल के F4 स्टैंडर्ड विमान बना रहा है, लेकिन भारत के लिए इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली SPECTRA में कुछ खास सुधार किए जाएंगे। इस विशेष संस्करण को F4 स्टार (F4*) कहा जाएगा। The Print ने सबसे पहले अप्रैल में रिपोर्ट किया था कि भारत सरकार ने 114 राफेल विमानों की खरीद का फैसला कर लिया है। 2025 के दूसरे हिस्से में भारतीय वायुसेना ने इसका औपचारिक प्रस्ताव दिया, जिसके बाद रक्षा मंत्रालय और दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू हुई।
सितंबर 2025 में बताया गया था कि यह सौदा 2026 में साइन हो सकता है, जिसकी अनुमानित लागत तब करीब 2 लाख करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर 3.25 लाख करोड़ रुपये हो गई है।
दसॉल्ट एविएशन भारत में मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) सुविधा भी स्थापित कर रहा है और भारत को राफेल विमानों का वैश्विक निर्माण और रखरखाव केंद्र बनाने की योजना है।
इस सौदे के बाद भारत, फ्रांस के अलावा दुनिया में राफेल विमानों का सबसे बड़ा ऑपरेटर बन जाएगा। भारत पहले ही 2016 में 36 राफेल विमान खरीद चुका है और पिछले साल भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल मरीन विमानों का ऑर्डर भी दे चुका है।





























