पंजाब की कपूरथला जैल की यह घटना केवल चौंकाने वाली नहीं, बल्कि बेहद ख़तरनाक और अभूतपूर्व है। हाई-सिक्योरिटी जेल के भीतर ड्रोन के ज़रिए प्रतिबंधित सामान की आपूर्ति होना जेल प्रशासन और आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था के पूरी तरह ध्वस्त होने का प्रमाण है। जब सिगरेट, तंबाकू जैसे प्रतिबंधित सामान ड्रोन से कैदियों तक पहुंच सकते हैं, तो नशे, मोबाइल फोन, हथियार या वसूली के उपकरणों की सप्लाई से इनकार करना भोलेपन और गैर-जिम्मेदारी का परिचायक है।
हाई-सिक्योरिटी जेलों का उद्देश्य खतरनाक अपराधियों को समाज से अलग रखना होता है। लेकिन आज पंजाब की जेलें सुधार गृह नहीं, बल्कि गैंगस्टरों के लिए कमांड सेंटर बनती जा रही हैं, जहाँ से अपराधों का संचालन आसानी से किया जा रहा है। यह साफ़ दिखाता है कि गैंगस्टरों का राज सिर्फ जेल के बाहर ही नहीं, बल्कि जेल के अंदर भी कायम है। भगवंत मान सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पूरी तरह विफल साबित हुई है। बड़े-बड़े दावों के बावजूद ज़मीनी हकीकत बिल्कुल अलग तस्वीर दिखाती है, गैंग हिंसा लगातार बढ़ रही है
नशे का नेटवर्क सक्रिय है जेलों की सुरक्षा से समझौता हो चुका है पुलिस का मनोबल गिरा हुआ है अपराधियों के हौसले बुलंद हैं
जब ड्रोन जैसी तकनीक जेल सुरक्षा को भेद सकती है,
तो यह या तो घोर अक्षमता की ओर इशारा करता है या फिर गहरी मिलीभगत की ओर। दोनों ही स्थितियाँ बेहद चिंताजनक हैं। सरकार को इन सवालों के जवाब देने होंगे— इन ड्रोन डिलीवरी को किसने अंजाम दिया? इससे पहले यह कितनी बार हो चुका है? सुरक्षा में चूक के लिए ज़िम्मेदार जेल अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई? बार-बार चेतावनियों के बावजूद अब तक कोई ठोस सुधार क्यों नहीं किया गया? आज पंजाब एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। अगर सरकार यूँ ही आंखें मूंदे रही, तो जेलें सुधार गृह नहीं बल्कि संगठित अपराध के अड्डे बन जाएंगी। प्रशासनिक विफलता और राजनीतिक अहंकार के कारण आम नागरिकों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। पंजाब की जनता को सुरक्षा, जवाबदेही और सुशासन चाहिए, न कि बहाने, प्रेस कॉन्फ्रेंस और आरोप-प्रत्यारोप। यह घटना एक गंभीर चेतावनी है। दुर्भाग्यवश, मान सरकार अभी भी गहरी नींद में सोई हुई है।





























