पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान इस समय मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती हैं। इसी बीच खुद को खालिस्तान नेशनल आर्मी बताने वाले संगठन ने पुलिस को ई-मेल भेजकर दावा किया है कि मुख्यमंत्री को “पोलोनियम” के ज़रिए संक्रमित किया गया है। मेल में यह भी कहा गया कि अगर वे बच गए तो उनका अंजाम पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह जैसा किया जाएगा। संगठन ने अस्पताल समेत 16 स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी भी दी है। ‘पोलोनियम’ का नाम सामने आते ही सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।
सांस लेने में दिक्कत के बाद अस्पताल में भर्ती हुए भगवंत मान
दरअसल रविवार को ब्लड प्रेशर बढ़ने के बाद भगवंत मान को मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सोमवार को उन्हें छुट्टी मिल गई और वे मोगा में आम आदमी पार्टी की नशा विरोधी रैली में शामिल होने पहुंचे, लेकिन वहां सांस लेने में दिक्कत होने पर सोमवार शाम करीब पांच बजे फिर उन्हें फोर्टिस अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। पंजाब में एक हफ्ते के भीतर खालिस्तान नेशनल आर्मी की यह दूसरी धमकी भरी मेल है। इससे पहले 11 फरवरी को संगठन ने दावा किया था कि 13 फरवरी को मुख्यमंत्री पर मानव बम से हमला किया जाएगा। मेल में जिस दिलावर सिंह का जिक्र किया गया, वही कॉन्स्टेबल था जिसने 31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ सचिवालय में तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या कर दी थी।
साइलेंट पॉइजन क्यों है ‘पोलोनियम’?
लेकिन इस बार धमकी में जिस तरह से ‘पोलोनियम’ का उल्लेख किया गया है वो बेहद चौकाने वाला है। क्योंकि पोलोनियम की गिनती दुनिया के सबसे खतरनाक ज़हरों में होती है।
पोलोनियम-210 एक अत्यधिक रेडियोएक्टिव तत्व है जो अल्फा रेडिएशन छोड़ता है और शरीर के अंदर पहुंचने पर कोशिकाओं के DNA को नष्ट करने लगता है। इसकी बहुत छोटी मात्रा भी जानलेवा हो सकती है। सबसे खतरनाक बात यह है कि यह बाहर से लगभग हानि रहित दिखता है लेकिन शरीर के भीतर जाते ही असर शुरू कर देता है और शुरुआती जांच में पकड़ना मुश्किल होता है। इसी वजह से इसे ‘साइलेंट पॉइज़न’ कहा जाता है।
पोलोनियम को खाने-पीने में मिलाकर या सांस के जरिए शरीर में पहुंचाया जा सकता है और इसमें कोई स्वाद या गंध नहीं होती। शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य बीमारी जैसे लगते हैं—उल्टी, मतली, हल्का बुखार, दस्त, पेट दर्द और कमजोरी। लेकिन जल्द ही हालत गंभीर हो जाती है और अंदरूनी अंग फेल होने लगते हैं। अंततः मल्टी ऑर्गन फेल्योर, इंटरनल ब्लीडिंग या इम्यून सिस्टम के पूरी तरह खत्म हो जाने से मौत हो सकती है।
हाईप्रोफ़ाइल हत्याएं जिनमें हुआ ‘पोलोनियम’ का इस्तेमाल
इतिहास में इस ज़हर का इस्तेमाल हाई-प्रोफाइल मामलों में सामने आ चुका है। 2006 में रूसी खुफिया एजेंसी FSB के पूर्व अधिकारी अलेक्जेंडर लिटविनेंको को लंदन में चाय में पोलोनियम मिलाकर दिया गया था, जिसके बाद रेडिएशन पॉइजनिंग से उसकी मौत हो गई। इसे इतिहास की पहली आधिकारिक रूप से साबित रेडियोएक्टिव हत्या माना जाता है। वहीं फिलिस्तीनी नेता यासिर अराफात की 11 नवंबर 2004 को हुई मौत के बाद भी यही शक सामने आया था। बाद में 2012 में कब्र खोलकर जांच करने पर उनकी हड्डियों और मिट्टी में पोलोनियम का स्तर सामान्य से 18 गुना तक अधिक पाया गया। रिपोर्ट में कहा गया कि उनकी मौत ज़हर से हुई हो सकती है, हालांकि अंतिम निष्कर्ष विवादित रहा।
यही वजह है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान को लेकर किए गए दावे को सुरक्षा एजेंसियां गंभीरता से ले रही हैं। ‘पोलोनियम’ का नाम साधारण धमकी की तरह नहीं देखा जाता, क्योंकि इसका संबंध पहले भी राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर के मामलों से जुड़ा रहा है। फिलहाल एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं और मुख्यमंत्री की सुरक्षा तथा चिकित्सकीय निगरानी दोनों बढ़ा दी गई हैं।






























