दिल्ली पुलिस ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है, जिसमें डर फैलाकर प्रचार करने की कोशिश सामने आई है। जनवरी 2026 की शुरुआत में सोशल मीडिया पर दिल्ली में 807 लोगों के लापता होने की खबरें फैलाई गई थीं। इनमें 509 महिलाएं और लड़कियां, और 191 नाबालिग बताए गए थे। ये दावे ठीक उसी समय वायरल किए गए, जब रानी मुखर्जी की फिल्म ‘मर्दानी 3’ सिनेमाघरों में रिलीज हुई।
जांच में पता चला कि ये डराने वाले आंकड़े जानबूझकर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए थे और यह सब फिल्म के प्रचार के लिए एक पेड प्रमोशन का हिस्सा था। फिल्म ‘मर्दानी 3’ का विषय मानव तस्करी और लापता लड़कियों पर आधारित है।
दिल्ली पुलिस के संयुक्त आयुक्त (पीआर) संजय त्यागी ने कहा कि सोशल मीडिया पर फैलाए गए आंकड़े पहले के वर्षों जैसे ही हैं, बल्कि सामान्य से कम हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 में 1,777 गुमशुदगी के मामले दर्ज हुए, जो 2024 और 2025 के औसत (हर महीने 2,000 से ज्यादा) से कम हैं। इनमें से ज्यादातर लोग पहले ही घर लौट आए थे या पुलिस ने उन्हें ढूंढ लिया था।
पुलिस ने साफ किया कि लड़कियों के लापता होने में किसी तरह की अचानक बढ़ोतरी नहीं हुई थी। कुछ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने पैसे लेकर झूठी खबरें फैलाईं, जिससे लोगों में डर पैदा किया गया।
दिल्ली पुलिस ने X पर चेतावनी देते हुए कहा:
“जांच में सामने आया है कि दिल्ली में लड़कियों के लापता होने की अफवाहें पेड प्रमोशन के जरिए फैलाई जा रही थीं। पैसे कमाने के लिए डर फैलाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
जांच एजेंसियों ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई मानव तस्करी गिरोह या संगठित अपराध इसमें शामिल नहीं था। सामान्य गुमशुदगी की रिपोर्टों को जानबूझकर एक बड़े संकट की तरह दिखाया गया।
फिल्म के निर्माता यशराज फिल्म्स (YRF) ने इस मामले में किसी भी तरह की भूमिका से इनकार किया है। हालांकि, फिल्म की रिलीज के समय इस तरह की अफवाहों के फैलने पर मार्केटिंग के तरीकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कहा:
“दिल्ली में बड़ी संख्या में बच्चों के लापता होने का दावा एक हिंदी फिल्म के प्रचार के लिए पेड कैंपेन के जरिए फैलाया गया है। दिल्ली पुलिस इसकी पूरी जांच करेगी।”
यह मामला दिखाता है कि डिजिटल दौर में डर को कितनी आसानी से फैलाया और बेचा जा सकता है। गंभीर सामाजिक मुद्दों को वायरल कंटेंट बनाकर व्यापारिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया गया।
दिल्ली पुलिस ने साफ कहा है कि जानबूझकर फैलाई गई झूठी खबरों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह मामला एक चेतावनी है कि डर को कभी भी प्रचार का हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए, और ऐसा करने वालों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।
































