ईरान ने सैन्य अभ्यास के दौरान Strait of Hormuz के एक हिस्से को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। इसी दौरान ईरान, चीन और रूस पास के समुद्री इलाकों में संयुक्त नौसैनिक अभ्यास कर रहे हैं। दूसरी तरफ, अमेरिका और इज़राइल सैन्य विकल्पों की समीक्षा कर रहे हैं क्योंकि कूटनीतिक प्रयास ठहरते नजर आ रहे हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei ने चेतावनी दी है कि अगर युद्ध हुआ तो अमेरिकी युद्धपोतों को निशाना बनाया जा सकता है।
यह स्थिति अब सामान्य क्षेत्रीय तनाव से आगे बढ़ चुकी है। इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य क्यों महत्वपूर्ण है?
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति हर दिन इसी रास्ते से गुजरती है। अगर यहां थोड़ी देर के लिए भी रुकावट आती है, तो तेल की कीमतें तुरंत बढ़ सकती हैं।
तेल महंगा होने से दुनिया भर में महंगाई बढ़ सकती है और तेल आयात करने वाले देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ता है।
ईरान जानता है कि इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति उसे रणनीतिक ताकत देती है। अभ्यास के दौरान रास्ता आंशिक रूप से बंद करना एक स्पष्ट संदेश है—अगर ईरान पर हमला हुआ, तो वह दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है।
ईरान की सैन्य तैयारी
हाल के अभ्यासों में ईरान ने नौसैनिक ड्रोन, एंटी-शिप मिसाइल, पनडुब्बियां और तेज हमला करने वाली नौकाओं का इस्तेमाल किया।
ईरान की रणनीति सीधी टक्कर की बजाय असमान (Asymmetric) युद्ध पर आधारित है। वह अमेरिका की नौसेना से सीधे मुकाबले की बजाय जोखिम और लागत बढ़ाने की रणनीति अपनाता है।
अमेरिका के जहाज आधुनिक सुरक्षा सिस्टम से लैस हैं, लेकिन कोई भी रक्षा प्रणाली पूरी तरह अजेय नहीं होती। अगर किसी बड़े जहाज को नुकसान हुआ, तो उसका आर्थिक और राजनीतिक असर बहुत बड़ा हो सकता है।
ईरान का संदेश साफ है—युद्ध की कीमत एकतरफा नहीं होगी।
रूस-चीन-ईरान की बढ़ती साझेदारी
चीन और रूस के साथ ईरान के संयुक्त नौसैनिक अभ्यास सिर्फ सैन्य गतिविधि नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी हैं।
रूस उन्नत हथियार और रक्षा तकनीक देता है।
चीन आर्थिक सहयोग और तेल खरीद के जरिए समर्थन करता है।
ईरान अपनी रणनीतिक भौगोलिक स्थिति से इन दोनों को लाभ देता है।
ईरान एशिया और मध्य पूर्व के बीच अहम स्थान पर है। चीन के लिए सुरक्षित ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार मार्ग बहुत जरूरी हैं, इसलिए ईरान उसके लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
यह साझेदारी दिखाती है कि ईरान पूरी तरह अलग-थलग नहीं है।
अमेरिका और इज़राइल की तैयारी
अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपने युद्धपोत, लड़ाकू विमान और निगरानी सिस्टम तैनात किए हैं। यह संकेत है कि स्थिति गंभीर है।
इज़राइल ने भी कहा है कि वह ईरान को परमाणु क्षमता हासिल नहीं करने देगा। अगर कूटनीति विफल होती है, तो सैन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
लेकिन ईरान पर हमला आसान नहीं होगा। उसके पास बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, जो क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना सकती हैं। उसके कई ठिकाने भूमिगत और सुरक्षित हैं।
तकनीकी और आर्थिक पहलू
चीन ईरान को डिजिटल और तकनीकी सहयोग भी दे रहा है, जिससे वह पश्चिमी सिस्टम पर कम निर्भर हो सके। इससे साइबर हमलों और तकनीकी बाधाओं से बचाव मजबूत होता है।
चीन ईरानी तेल का बड़ा खरीदार है। अगर ईरान अस्थिर होता है, तो चीन की ऊर्जा सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
अगर हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद होता है, तो तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। इसका असर यूरोप, एशिया और अमेरिका—सभी पर पड़ेगा।
बढ़ता खतरा
दोनों पक्षों ने सख्त चेतावनियां दी हैं। इस इलाके में कई बड़ी शक्तियों की मौजूदगी से किसी छोटी गलती या गलतफहमी के कारण भी बड़ा संघर्ष शुरू हो सकता है।
इतिहास बताता है कि कई बड़े युद्ध गलत आकलन की वजह से शुरू हुए हैं।
आगे क्या?
यह तनाव केवल परमाणु मुद्दे तक सीमित नहीं है। यह दुनिया की बदलती ताकत के संतुलन का संकेत है।
पहले मध्य पूर्व में अमेरिका का दबदबा था, लेकिन अब चीन और रूस भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य अब सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं, बल्कि 21वीं सदी की वैश्विक राजनीति का अहम मोर्चा बन चुका है।
आने वाले हफ्तों में तेहरान, वॉशिंगटन, बीजिंग और मॉस्को के फैसले न केवल क्षेत्र की स्थिरता, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर सकते हैं।
दुनिया के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि कोई गलत कदम या गलतफहमी बड़े संघर्ष में न बदल जाए।





























