खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के सुप्रीम लीडर Ayatollah Ali Khamenei ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि दुनिया की “सबसे ताकतवर सेना” को भी ऐसा झटका दिया जा सकता है कि वह दोबारा खड़ी न हो सके। उन्होंने यह भी इशारा किया कि किसी युद्धपोत को “समुद्र की गहराई में भेजा जा सकता है।”
उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी नौसैनिक ताकत बढ़ा दी है, जिसमें उसका सबसे आधुनिक एयरक्राफ्ट कैरियर USS Gerald R. Ford तैनात किया गया है। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या ईरान वास्तव में इतने आधुनिक अमेरिकी सुपरकैरीयर को डुबो सकता है?
USS Gerald R. Ford को डुबोना इतना मुश्किल क्यों है?
USS Gerald R. Ford करीब 1 लाख टन वजनी परमाणु ऊर्जा से चलने वाला सुपरकैरीयर है। इसे इस तरह बनाया गया है कि युद्ध के दौरान भी यह लंबे समय तक टिक सके।
इसका ढांचा कई वाटरटाइट हिस्सों में बंटा है, ताकि किसी एक हिस्से को नुकसान होने पर पूरा जहाज न डूबे।
बिजली, अग्निशमन और विमान लॉन्च सिस्टम जैसे जरूरी सिस्टम बैकअप के साथ लगे हैं।
परीक्षण के दौरान जहाज के पास पानी के अंदर 40,000 पाउंड विस्फोटक फोड़े गए, फिर भी जहाज को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।
नेवल विशेषज्ञों का मानना है कि एक ही मिसाइल से ऐसे सुपरकैरीयर को डुबो देना लगभग असंभव है। इन्हें भारी हमले झेलने के लिए डिजाइन किया जाता है।
ईरान की “कैरीयर किलर” रणनीति
ईरान ने पारंपरिक युद्ध के बजाय “असममित युद्ध” (asymmetric warfare) पर ज्यादा ध्यान दिया है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संकरे समुद्री रास्तों में।
ईरान के पास एंटी-शिप मिसाइलें, बैलिस्टिक मिसाइलें, ड्रोन, समुद्री बारूदी सुरंगें और तेज रफ्तार नावें हैं।
लेकिन खुले समुद्र में तेज गति से चलते और बार-बार दिशा बदलते एयरक्राफ्ट कैरियर को निशाना बनाना बहुत मुश्किल है। इसके लिए लगातार निगरानी, सैटेलाइट जानकारी और सटीक लक्ष्य प्रणाली की जरूरत होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, एक मिसाइल से ज्यादा खतरा “एक साथ कई हमलों” (सैचुरेशन अटैक) से हो सकता है। यानी पहले ड्रोन और साधारण मिसाइलों से रक्षा प्रणाली को थकाया जाए और फिर उन्नत हथियारों से हमला किया जाए।
ईरान का दावा है कि उसने “फतह-2” जैसे हाइपरसोनिक मिसाइल सिस्टम तैयार किए हैं।
खामेनेई का सीधा संदेश
खामेनेई ने कहा कि एयरक्राफ्ट कैरियर खतरनाक जरूर है, लेकिन उससे ज्यादा खतरनाक वह हथियार है जो उसे समुद्र में डुबो सकता है।
हाल ही में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने होर्मुज जलडमरूमध्य में मिसाइल अभ्यास भी किया। यह इलाका रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया के लगभग 20% तेल की सप्लाई यहीं से गुजरती है।
अमेरिका की जवाबी तैयारी
तनाव के बीच अमेरिका ने भी क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, USS Abraham Lincoln जैसे एयरक्राफ्ट कैरियर भी इलाके में तैनात हैं, साथ ही अतिरिक्त एयर डिफेंस सिस्टम लगाए गए हैं।
सैटेलाइट तस्वीरों में अमेरिकी जहाज ईरान के तट से सैकड़ों किलोमीटर दूर दिखे हैं, लेकिन वे अभी भी ईरान की लंबी दूरी की मिसाइलों की रेंज में हैं।
बातचीत पर ईरान का रुख
ईरान ने साफ कहा है कि उसकी मिसाइल क्षमता किसी भी बातचीत का हिस्सा नहीं होगी। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दोहराया कि बातचीत केवल परमाणु मुद्दे तक सीमित रहनी चाहिए।
खामेनेई ने अमेरिका पर आंतरिक मामलों में दखल देने का आरोप लगाया और कहा कि 47 साल में अमेरिका ईरान की इस्लामी व्यवस्था को खत्म नहीं कर पाया और आगे भी सफल नहीं होगा।
निष्कर्ष
हालांकि ईरान की बयानबाजी सख्त है और उसके पास उन्नत हथियार मौजूद हैं, लेकिन किसी अमेरिकी सुपरकैरीयर को डुबोना बेहद कठिन और जटिल सैन्य चुनौती होगी। ऐसे किसी भी टकराव से पूरे खाड़ी क्षेत्र में बड़ा संघर्ष भड़क सकता है।





























