कल भारत और द.अफ्रीका के बीच T-20 का मुकाबला था। सुपर -8 का ये मैच भारत न सिर्फ बुरी तरह हारा, बल्कि इस रिकॉर्ड हार के बाद भारत की सेमी फ़ाइनल पहुंचने की उम्मीदों को भी झटका लगा है। ज़ाहिर है, बीते कुछ वक्त से टीम इंडिया जिस तरह का प्रदर्शन कर रही थी, उसे देखते हुए ये हार क्रिकेट प्रेमियों को मायूस कर गई। अब इस हार की समीक्षा की जा रही है, कोई शुरुआती झटकों के बावजूद द अफ्रीक्री बल्लेबाज़ों को काबू न कर पाने की वजह से गेंदबाज़ों पर सवाल उठा रहा है तो कोई बल्लेबाज़ों पर। भारत जैसे देश के लिए जहां क्रिकेट किसी धर्म से कम नहीं- वहां ये टीका-टिप्पणियां और समीक्षाएं नई भी नहीं हैं। लेकिन AIMIM ने अपनी महजबी मानसिकता का परिचय देते हुए इसमें भी अपना ‘यूनीक’ मजहबी एजेंडा ढूँढ निकाला है।
AIMIM के प्रवक्ता और उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष शोएब जमई ने क्रिकेट को हिंदू-मुस्लिम में बांटते हुए हार की वजह टीम में एक भी मुस्लिम खिलाड़ी के न होने को बता डाला।
शोएब जमई ने एक ट्वीट करते हुए टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर पर आरोप लगाते हुए कहा कि गंभीर क्रिकेट के मैदान में भी राजनीति कर रहे हैं। उन्होने कुछ मुस्लिम खिलाड़ियों का नाम लेते हुए कहा कि ‘मोहम्मद शमी’, ‘मोहम्मद सिराज’, ‘अकीब’ ‘नबी’ और ‘सरफराज खान’ जैसे प्रतिभाशाली और होनहार खिलाड़ियों को जान बूझ कर नजरअंदाज करके केवल “पर्ची खिलाड़ियों” को टीम में शामिल किया जा रहा है, जो कि टीम इंडिया को महंगा पड़ सकता है।
मोहम्मद शमी, मोहम्मद सिराज, अकीब नबी और सरफराज खान जैसे क़ाबिल और होनहार क्रिकेटर्स को नजरअंदाज करके सारे पर्ची प्लेयर्स को शामिल करना आपको महंगा पड़ेगा ही. गौतम गंभीर को समझना होगा कि वह अब भाजपा के सांसद नहीं एक कोच हैं.क्या सच में भारतीय क्रिकेट टीम नफरत की राजनीति के शिकार हो…
— Dr. Shoaib Jamai (@shoaibJamei) February 22, 2026
यही नहीं शोएब जमई ने इसे कोच गौतम गंभीर और उनके बीजेपी के पूर्व सांसद होने से जोड़ दिया। उन्होने कहा कि गंभीर मैदान में भी बीजेपी की राजनीति कर रहे हैं और इसीलिए इन मुस्लिम क्रिकेटर्स को नहीं खिलाया जा रहा है। हालांकि सच्चाई ये है कि मोहम्मद सिराज अभी भी टीम इंडिया की वर्ल्ड कप टीम का हिस्सा हैं और वो टीम के साथ ही हैं। बल्कि USA के खिलाफ़ टूर्नामेंट के पहले ही मैच में उन्होने 3 विकेट भी लिए थे। वहीं मोहम्मद शमी पिछले ही साल ICC चैंपिंयस ट्रॉफी में न सिर्फ टीम इंडिया का हिस्सा थे, बल्कि वो टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज़ भी थे, जिसमें बांग्लादेश के ख़िलाफ़ 5 विकेट भी शामिल थे।
दिलचस्प बात ये है कि उस वक्त भी टीम इंडिया के कोच गौतम गंभीर ही थे। हालांकि टीम इंडिया को लेकर लोगों का ये नजरिया नया नहीं है और पहले भी कुछ लोग टीम इंडिया और क्रिकेट में जाति वाला एंगल घुसाते रहे हैं, लेकिन इस बार तो AIMIM ने खुले तौर पर इसे हिंदू-मुसलमान में बांट दिया, वो भी तथ्यों को पूरी तरह दरकिनार करते हुए।
जमई भूल गए कि भारत में क्रिकेट एक अलग धर्म का दर्जा रखता है और इसके मानने वाले हिंदू-मुस्लिम-सिख और ईसाई की परिभाषा से ऊपर सिर्फ ‘क्रिकेटियंस’ हैं। लेकिन जिनकी आंखों में हमेशा मजहबी चश्मा चढ़ा रहता हो, उन्हें ये शायद ही दिखाई दे कि जब टीम इंडिया के लिए कोई भी खिलाड़ी खेलता है तो उसकी पहचान हिंदू-मुसलमान से कहीं ज्यादा ‘भारतीय’ होती है।






























