भारत में शिक्षा प्रणाली तेजी से बदलते तकनीकी दौर के साथ खुद को ढालने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसी कड़ी में Central Board of Secondary Education (CBSE) ने एक ऐतिहासिक पहल करते हुए कक्षा 3 से 8 तक के छात्रों के लिए कंप्यूटेशनल थिंकिंग (CT) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का नया पाठ्यक्रम लॉन्च किया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को कम उम्र से ही डिजिटल कौशल से लैस करना है, ताकि वे भविष्य की तकनीकी चुनौतियों का सामना कर सकें।
इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम का उद्घाटन धर्मेंद्र प्रधान ने नई दिल्ली के विज्ञानं भवन में किया। यह कदम न केवल भारत की शिक्षा प्रणाली में एक बड़ा बदलाव है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर भी भारत को तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में मजबूत स्थिति में लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
छोटे बच्चों के लिए कंप्यूटेशनल थिंकिंग की मजबूत नींव
कक्षा 3 से 5 तक के छात्रों के लिए यह पाठ्यक्रम बेहद सरल और रोचक तरीके से तैयार किया गया है। इस स्तर पर बच्चों को सीधे एआई की जटिलताओं में नहीं डाला जाएगा, बल्कि उन्हें कंप्यूटेशनल थिंकिंग की बुनियादी समझ दी जाएगी।
इसमें बच्चों को पहेलियों, खेलों और गतिविधियों के माध्यम से तार्किक सोच, पैटर्न पहचान, क्रमबद्धता (sequencing) और समस्या समाधान जैसे कौशल सिखाए जाएंगे। ये सभी कौशल आगे चलकर एआई और प्रोग्रामिंग सीखने के लिए आधार तैयार करते हैं।
सीबीएसई ने यह सुनिश्चित किया है कि यह नई शिक्षा प्रणाली मौजूदा विषयों के साथ सहज रूप से जुड़ सके। उदाहरण के लिए, पर्यावरण अध्ययन (EVS) और गणित जैसे विषयों में कंप्यूटेशनल थिंकिंग को शामिल किया जाएगा। इससे छात्रों को अलग से बोझ महसूस नहीं होगा, बल्कि वे इसे अपनी रोजमर्रा की पढ़ाई का हिस्सा समझेंगे।
हर कक्षा के लिए विशेष रिसोर्स बुक भी तैयार की जाएगी, जिससे शिक्षक आसानी से इन अवधारणाओं को पढ़ा सकें। साथ ही, मूल्यांकन भी पारंपरिक विषयों के साथ जोड़ा जाएगा ताकि सीखने की प्रक्रिया संतुलित बनी रहे।
उच्च प्राथमिक कक्षाओं में एआई की शुरुआती समझ
कक्षा 6 से 8 के छात्रों के लिए पाठ्यक्रम को और अधिक उन्नत बनाया गया है। यहां छात्रों को न केवल कंप्यूटेशनल थिंकिंग की गहराई समझाई जाएगी, बल्कि उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मूल अवधारणाओं से भी परिचित कराया जाएगा।
इस स्तर पर सालाना 100 घंटे का समय निर्धारित किया गया है, जिसमें 40 घंटे एडवांस कंप्यूटेशनल थिंकिंग, 20 घंटे एआई की बुनियादी जानकारी और 40 घंटे प्रोजेक्ट वर्क के लिए रखे गए हैं।
छात्रों को वास्तविक जीवन की समस्याओं को हल करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। उदाहरण के तौर पर, वे स्वास्थ्य, पर्यावरण, वित्त और सामाजिक मुद्दों से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम करेंगे। इससे उनकी रचनात्मकता और व्यावहारिक सोच दोनों का विकास होगा।
डिजिटल नागरिकता और नैतिकता पर भी फोकस
इस पाठ्यक्रम की एक खास बात यह है कि इसमें केवल तकनीकी ज्ञान ही नहीं, बल्कि डिजिटल नैतिकता और जिम्मेदारी भी सिखाई जाएगी।
छात्रों को डिजिटल फुटप्रिंट, डेटा प्राइवेसी, एल्गोरिदमिक बायस और तकनीक के सामाजिक प्रभाव जैसे विषयों के बारे में बताया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे केवल तकनीक का उपयोग करना ही न सीखें, बल्कि उसके प्रभावों को भी समझें और जिम्मेदारी से उसका इस्तेमाल करें।
प्रोजेक्ट आधारित और इंटरडिसिप्लिनरी लर्निंग
सीबीएसई का यह नया पाठ्यक्रम पूरी तरह से प्रोजेक्ट आधारित और बहु-विषयक (interdisciplinary) दृष्टिकोण पर आधारित है। इसमें गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और अंग्रेजी जैसे विषयों को एक साथ जोड़कर पढ़ाया जाएगा।
छात्रों को डेटा एनालिसिस, समस्या समाधान और डिजाइन थिंकिंग जैसे कौशल सिखाए जाएंगे। मूल्यांकन के लिए पारंपरिक परीक्षा के बजाय प्रेजेंटेशन, असाइनमेंट, प्रैक्टिकल कार्य और जर्नल लेखन जैसे तरीकों का उपयोग किया जाएगा।
यह प्रणाली छात्रों को रटने की बजाय समझने और लागू करने की दिशा में प्रेरित करेगी।
विशेषज्ञों की टीम ने तैयार किया पाठ्यक्रम
इस पाठ्यक्रम को तैयार करने के लिए एक 10 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति बनाई गई थी, जिसका नेतृत्व कार्तिक रमन ने किया। इसमें IIT Madras, Azim Premji University और Dhirubhai Ambani University के विशेषज्ञ शामिल थे।
समिति ने तीन महीनों में नौ बैठकों के दौरान शिक्षकों, प्रिंसिपलों और तकनीकी विशेषज्ञों से चर्चा कर यह पाठ्यक्रम तैयार किया। इससे यह सुनिश्चित किया गया कि पाठ्यक्रम व्यावहारिक और प्रभावी हो।
पूरे देश में लागू होगा नया पाठ्यक्रम
यह नया कार्यक्रम 2026-27 शैक्षणिक सत्र से देशभर के लगभग 32,900 सीबीएसई से जुड़े स्कूलों में लागू किया जाएगा। Rahul Singh के अनुसार, इस पहल से शिक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव आएगा।
साथ ही, इस पाठ्यक्रम को क्षेत्रीय भाषाओं में भी अनुवाद करने की योजना है, ताकि देश के हर हिस्से में छात्र इसका लाभ उठा सकें।
भारत को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने की दिशा
यह पहल भारत को उन देशों की सूची में शामिल करती है, जिन्होंने पहले ही स्कूल स्तर पर एआई शिक्षा शुरू कर दी है। इनमें चीन, दक्षिण कोरिया, फिनलैंड, एस्टोनिया और सिंगापुर जैसे देश शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत को तकनीकी नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाने में मदद करेगा। इससे आने वाले समय में भारत के युवा न केवल तकनीक का उपयोग करेंगे, बल्कि उसे विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
भविष्य के लिए तैयार हो रही नई पीढ़ी
सीबीएसई का यह नया पाठ्यक्रम केवल एक शैक्षणिक बदलाव नहीं, बल्कि एक सोच में बदलाव है। यह पहल बच्चों को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें वास्तविक दुनिया की समस्याओं से जोड़ती है।
एआई और कंप्यूटेशनल थिंकिंग जैसे विषयों को शुरुआती स्तर पर शामिल करना इस बात का संकेत है कि भारत अब भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए शिक्षा प्रणाली को तैयार कर रहा है।
यह पहल आने वाली पीढ़ी को न केवल डिजिटल रूप से सक्षम बनाएगी, बल्कि उन्हें जिम्मेदार, जागरूक और नवाचार करने वाला नागरिक भी बनाएगी।
































