स्पेन के चर्च का काला सच: 3,000 से अधिक बच्चों के यौन शोषण और दशकों पुराने ‘सिस्टम’ का पर्दाफाश

दशकों तक स्पेन का कैथोलिक चर्च खुद को नैतिकता और पवित्रता का पर्याय बताता रहा। लेकिन आज वही छवि गहन जांच और शर्मिंदगी के घेरे में है

स्पेन के चर्च का काला सच

दशकों तक स्पेन का कैथोलिक चर्च खुद को नैतिकता और पवित्रता का पर्याय बताता रहा। लेकिन आज वही छवि गहन जांच और शर्मिंदगी के घेरे में है। स्पेन के प्रमुख समाचार पत्र ‘एल पाइस’ (El País) द्वारा की गई आठ साल की एक विस्तृत और साहसी जांच ने चर्च के भीतर छिपे उस खौफनाक सच को उजागर किया है, जिसे अब तक खामोशी की चादर से ढका गया था। इस जांच में 3,000 से अधिक बच्चों के यौन शोषण के मामलों का दस्तावेजीकरण किया गया है, जो यह दर्शाता है कि यह केवल कुछ व्यक्तिगत गलतियाँ नहीं थीं, बल्कि एक लंबे समय से चली आ रही संस्थागत सुरक्षा और चुप्पी का पैटर्न था।

आंकड़ों की भयावह गूंज: आठ दशकों का अनसुना दर्द

जांच के निष्कर्ष रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 1940 के दशक से लेकर अब तक कुल 3,084 नाबालिगों का यौन शोषण किया गया। इस घिनौने कृत्य में 1,613 पादरी और अन्य धार्मिक हस्तियों को आरोपी बनाया गया है। ये आंकड़े करीब आठ दशकों यानी लगभग 80 सालों के इतिहास को समेटे हुए हैं। यह किसी एक कालखंड की घटना नहीं है, बल्कि एक सतत संस्थागत संकट है जो पीढ़ियों तक चलता रहा। जब 2018 में ‘एल पाइस’ ने इन मामलों पर नज़र रखना शुरू किया था, तब चर्च आधिकारिक तौर पर केवल 34 घटनाओं को स्वीकार कर रहा था। लेकिन जैसे-जैसे उत्तरजीवी (Survivors) सामने आए और अदालती रिकॉर्ड खंगाले गए, यह संख्या आसमान छूने लगी।

खामोशी से सच तक का सफर: नई गवाहियां और वैश्विक विस्तार

ताजा रिपोर्ट में स्पेन से 58 नई गवाहियां जोड़ी गई हैं, जिनमें 50 व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपियों में केवल पुरुष ही नहीं, बल्कि दो नन भी शामिल हैं। यह जांच केवल स्पेन की सीमाओं तक सीमित नहीं रही है। इसने लैटिन अमेरिका के आठ देशों से 21 गवाहियां और 24 अतिरिक्त आरोपियों के नाम भी सार्वजनिक किए हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि शोषण का यह तंत्र भौगोलिक सीमाओं से परे फैला हुआ था और चर्च के वैश्विक नेटवर्क का इस्तेमाल इन दागों को छिपाने के लिए किया गया।

जवाबदेही के बदले तबादला: अपराधियों को बचाने का ‘चर्च मॉडल’

रिपोर्ट में सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि चर्च ने इन आरोपों को कैसे संभाला। जब भी किसी पादरी पर शोषण का आरोप लगा, उसे सजा देने या पुलिस के हवाले करने के बजाय, अक्सर उसका तबादला दूसरी बस्ती (Parish) में कर दिया गया या उसे विदेश, विशेषकर लैटिन अमेरिका भेज दिया गया। कई मामलों में आरोप है कि तबादले के बाद भी इन पादरियों को ऐसे वातावरण में काम करने दिया गया जहाँ उनकी पहुँच बच्चों तक बनी रही। रिपोर्ट सुझाव देती है कि यह केवल कुप्रबंधन नहीं था, बल्कि एक सोची-समझी संस्थागत रणनीति थी ताकि संस्था की साख बची रहे, भले ही इसके लिए मासूमों की जान जोखिम में डालनी पड़े।

वेटिकन की चुप्पी और ‘डिनायल मोड’ में स्पेनिश बिशप

जांचकर्ताओं ने अपने निष्कर्ष स्पेनिश एपिस्कोपल कॉन्फ्रेंस, मानवाधिकार आयुक्त और वेटिकन के साथ साझा किए। लेकिन पिछले पांच वर्षों में चर्च की प्रतिक्रिया निराशाजनक रही है। रिपोर्ट में इसे “अपारदर्शिता और इनकार” (Opacity and Denial) के रूप में वर्णित किया गया है। वेटिकन ने प्रत्यक्ष कार्रवाई करने के बजाय जिम्मेदारी स्पेनिश बिशपों पर डाल दी है। हालांकि 2023 के एक सर्वेक्षण का अनुमान है कि स्पेन की वयस्क आबादी का 1.13% हिस्सा (लगभग 4,40,000 लोग) कैथोलिक वातावरण में यौन शोषण का शिकार हुए होंगे, लेकिन आधिकारिक स्वीकृति अभी भी बहुत कम है।

वैश्विक संकट: अमेरिका से लेकर स्पेन तक एक ही कहानी

यह समस्या केवल स्पेन तक सीमित नहीं है। अमेरिका में ब्रुकलिन का सूबा (Diocese of Brooklyn) वर्तमान में 1,100 बाल यौन शोषण मामलों के निपटारे के लिए काम कर रहा है और अब तक उत्तरजीवियों को $100 मिलियन (लगभग 830 करोड़ रुपये) से अधिक का भुगतान कर चुका है। स्पेन में अब सबकी नज़रें पोप लियो XIV की जून में होने वाली यात्रा पर टिकी हैं। क्या वे इन पीड़ितों के घावों पर मरहम लगाएंगे या चर्च की दशकों पुरानी खामोशी जारी रहेगी?

न्याय की लंबी और कठिन राह

एल पाइस की यह जांच केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं है, बल्कि उन हजारों बच्चों की खोई हुई मासूमियत की गूंज है जिन्होंने दशकों तक अपनी आवाज़ को दबाए रखा। यह रिपोर्ट उस ‘सिस्टम’ को बेनकाब करती है जिसने अपराधियों को सजा देने के बजाय उन्हें सुरक्षा प्रदान की। उत्तरजीवियों के लिए यह रिपोर्ट एक लंबे समय से प्रतीक्षित मान्यता है, लेकिन असली सवाल जवाबदेही और बदलाव का है। क्या कैथोलिक चर्च अपनी गलतियों को स्वीकार कर खुद में सुधार करेगा, या भविष्य में भी ‘तबादलों’ के जरिए सच को दबाने की कोशिश होगी?

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