समुद्र में महासंग्राम: ईरानी जहाज ‘टूस्का’ पर अमेरिकी मरीन का कब्जा, क्या कंटेनरों में छिपा है युद्ध का सामान?

ओमान की खाड़ी की लहरें इन दिनों व्यापारिक जहाजों की शांतिपूर्ण आवाजाही के लिए नहीं, बल्कि बारूदी तनाव के लिए जानी जा रही हैं। रविवार को समुद्र के बीचों-बीच एक ऐसा घटनाक्रम हुआ जिसने वाशिंगटन से लेकर तेहरान तक हड़कंप मचा दिया

टूस्का जहाज कांड: ईरानी जहाज पर अमेरिका का कब्जा

ओमान की खाड़ी की लहरें इन दिनों व्यापारिक जहाजों की शांतिपूर्ण आवाजाही के लिए नहीं, बल्कि बारूदी तनाव के लिए जानी जा रही हैं। रविवार को समुद्र के बीचों-बीच एक ऐसा घटनाक्रम हुआ जिसने वाशिंगटन से लेकर तेहरान तक हड़कंप मचा दिया। अमेरिकी मरीन सैनिकों ने एक दुस्साहसी ऑपरेशन को अंजाम देते हुए ईरानी कंटेनर जहाज ‘टूस्का’ (Touska) को अपने नियंत्रण में ले लिया। यह कोई सामान्य जब्ती नहीं थी; इस कार्रवाई ने न केवल हालिया युद्धविराम समझौते पर संकट के बादल मंडरा दिए हैं, बल्कि दुनिया को उस ‘रहस्यमयी सामान’ के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया है जिसे ईरान इतनी शिद्दत से बचाना चाहता था।

हाई-सी ड्रामा: मरीन मरीन सैनिकों की चढ़ाई और 6 घंटे की चेतावनी

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, यह ऑपरेशन अचानक नहीं हुआ। जहाज ट्रैकिंग डेटा और आधिकारिक बयानों से पता चलता है कि ओमान की खाड़ी में चाबहार बंदरगाह के करीब अमेरिकी युद्धपोतों ने ‘टूस्का’ को घेर लिया था। छह घंटे के भीतर जहाज को रुकने के लिए कई बार रेडियो चेतावनी दी गई, लेकिन ईरानी कप्तान ने उन्हें अनसुना कर दिया। इसके बाद अमेरिकी बलों ने पहले जहाज पर चेतावनी के तौर पर गोलीबारी की और फिर हेलिकॉप्टरों और तेज गति वाली नौकाओं के जरिए मरीन सैनिकों ने जहाज पर धावा बोल दिया। 1308 GMT के बाद जहाज का सिग्नल मिलना बंद हो गया, जो इस बात का संकेत था कि उस पर पूरी तरह से अमेरिकी कब्जा हो चुका है।

‘ड्यूल-यूज’ सामान का रहस्य: क्या यह मिसाइल प्रोग्राम की खुराक है?

सवाल यह उठता है कि अमेरिका ने एक छोटे कंटेनर जहाज के लिए इतनी बड़ी सैन्य शक्ति क्यों झोंकी? समुद्री सुरक्षा सूत्रों के हवाले से जो जानकारी सामने आ रही है, वह चौंकाने वाली है। जहाज पर लदे कंटेनरों में ‘दोहरे इस्तेमाल’ (Dual-use) वाली वस्तुएं होने का प्रबल संदेह है। CENTCOM ने धातु के विशेष ग्रेड, पाइप और जटिल इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स की एक सूची जारी की है। ये ऐसी चीजें हैं जिनका इस्तेमाल औद्योगिक मशीनों में भी हो सकता है और घातक बैलिस्टिक मिसाइलों या ड्रोन के निर्माण में भी। अमेरिका का आरोप है कि ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान शिपिंग लाइन्स’ (IRISL) ग्रुप का यह जहाज लंबे समय से ईरान के मिसाइल प्रोग्राम के लिए खरीद एजेंट के रूप में काम कर रहा है।

चीन से मलेशिया और फिर चाबहार: टूस्का का संदिग्ध सफर

डेटा एनालिटिक्स कंपनी ‘सिनमैक्स’ के सैटेलाइट विश्लेषण ने इस जहाज के पिछले एक महीने के सफर का कच्चा चिट्ठा खोल दिया है। यह जहाज 25 मार्च को चीन के ताइचांग बंदरगाह पर था, जहाँ से इसने अपनी यात्रा शुरू की। इसके बाद 29-30 मार्च को इसने चीन के दक्षिणी गाओलान बंदरगाह से भारी मात्रा में कंटेनर लोड किए। सफर यहीं नहीं रुका; 11-12 अप्रैल को जहाज मलेशिया के पोर्ट क्लांग पहुँचा, जहाँ और अधिक सामान लादा गया। जब रविवार को यह ओमान की खाड़ी पहुँचा, तब यह ऊपर तक कंटेनरों से भरा हुआ था। चीन और मलेशिया जैसे देशों से इलेक्ट्रॉनिक और औद्योगिक सामान का यह संग्रह ही अमेरिका की नजरों में खटक रहा था।

ईरान का पलटवार: ‘यह समुद्र के बीचों-बीच डकैती है’

तेहरान ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने इसे ‘अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन’ और ‘खुली डकैती’ करार दिया है। ईरानी मीडिया का दावा है कि जहाज पर न केवल नाविक थे, बल्कि उनके परिवार और बच्चे भी सवार थे। ईरान का कहना है कि उनकी सेना जवाबी कार्रवाई करने में सक्षम थी, लेकिन निर्दोष परिवारों की सुरक्षा को देखते हुए उन्होंने संयम बरता। ईरान ने मांग की है कि जहाज, चालक दल और उनके परिवारों को तुरंत रिहा किया जाए। तेहरान ने चेतावनी दी है कि अमेरिका की यह ‘गैरकानूनी’ हरकत क्षेत्र में तनाव को उस स्तर पर ले जा सकती है जहाँ से वापसी मुमकिन नहीं होगी।

ट्रंप की ‘मैक्सिमम प्रेशर’ नीति और चीन की चिंता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले पर सोशल मीडिया (Truth Social) के जरिए अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि ‘टूस्का’ का इतिहास ही गैरकानूनी गतिविधियों का रहा है और उस पर पहले से ही प्रतिबंध थे। ट्रंप ने साफ कर दिया कि अमेरिकी बल अब जहाज के एक-एक कंटेनर की तलाशी ले रहे हैं। दूसरी ओर, चीन ने इस कार्रवाई पर गहरी चिंता जताई है। चीनी विदेश मंत्रालय ने संबंधित पक्षों से युद्धविराम का पालन करने की अपील की है। चीन के लिए यह मामला व्यापारिक हितों से भी जुड़ा है, क्योंकि जहाज का अधिकांश सामान चीनी बंदरगाहों से ही लादा गया था।

युद्ध की आहट या कूटनीतिक दबाव?

टूस्का जहाज पर कब्जे ने यह साबित कर दिया है कि अमेरिका अपनी समुद्री नाकेबंदी को लेकर अब पहले से कहीं अधिक आक्रामक है। यदि तलाशी के दौरान मिसाइल तकनीक या सैन्य हार्डवेयर के पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो ईरान पर प्रतिबंधों का शिकंजा और कस जाएगा। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें उस रिपोर्ट पर हैं जो अमेरिकी जांच दल इस जहाज की तलाशी के बाद पेश करेगा। क्या यह जहाज वाकई एक ‘फ्लोटिंग आर्मरी’ (तैरता हुआ शस्त्रागार) है या फिर ईरान की कमर्शियल शिपिंग को निशाना बनाने की अमेरिकी चाल? इसका जवाब आने वाले कुछ दिनों में समुद्र की इन्हीं अशांत लहरों से निकलेगा।

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