देश की सबसे प्रतिष्ठित और चुनौतीपूर्ण परीक्षाओं में से एक NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले की जांच अब एक बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए अब उन माता-पिता (Parents) को सीधे रडार पर ले लिया है, जिन पर अपने बच्चों के लिए लीक हुए प्रश्नपत्र खरीदने का संदेह है। जांच एजेंसियों का मानना है कि परीक्षा को प्रभावित करने वाले इस खेल में पैसा, कोचिंग सेंटरों का प्रभाव और माता-पिता की बेताबी का एक खतरनाक गठजोड़ शामिल था।
मास्टरमाइंड के बाद अब ‘खरीदार’ माता-पिता पर फोकस
शुरुआत में सीबीआई की जांच पेपर सॉल्व करने वाले गिरोहों, बिचौलियों और मास्टरमाइंडों पर केंद्रित थी। हालांकि, अब अधिकारियों का मानना है कि कई संपन्न परिवारों ने 3 मई को होने वाली NEET-UG परीक्षा से पहले ही अपने बच्चों के लिए मेडिकल सीट पक्की करने के उद्देश्य से जानबूझकर भारी रकम चुकाई थी। इसी सिलसिले में सीबीआई की टीमों ने खुफिया इनपुट्स के आधार पर महाराष्ट्र के नांदेड़ और लातूर में एक साथ कई जगहों पर छापेमारी की।
नांदेड़ में कारोबारी पिता से 8 घंटे लंबी पूछताछ
नांदेड़ के विद्युत नगर इलाके में सीबीआई की आठ अधिकारियों की टीम ने एक छात्र के घर पर छापा मारा। जांचकर्ताओं ने छात्र के व्यवसायी पिता से करीब 8 घंटे से अधिक समय तक कड़ी पूछताछ की। इस दौरान परिवार के सदस्यों और संदिग्ध बिचौलियों के बीच हुए फोन कॉल्स, संदेशों (Messages), बैंक रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की बारीकी से जांच की गई।
अधिकारियों के मुताबिक, इस व्यवसायी ने लीक हुए प्रश्नपत्रों के लिए लगभग ₹10 लाख का भुगतान किया था, जिसमें से ₹5 लाख एक बिचौलिए को और बाकी के ₹5 लाख इस सिंडिकेट से जुड़े एक अन्य व्यक्ति को ट्रांसफर किए गए थे।
रडार पर कोचिंग संस्थान: केवल पढ़ाई या लीक नेटवर्क के संपर्क सूत्र?
सीबीआई की इस कार्रवाई से महाराष्ट्र के प्रतियोगी परीक्षा कोचिंग इकोसिस्टम (Coaching Ecosystem) में हड़कंप मच गया है। जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि क्या कुछ संस्थान केवल छात्रों को ट्रेनिंग दे रहे थे या वे चुपके से इस पेपर लीक नेटवर्क के ‘कॉन्टैक्ट पॉइंट’ बने हुए थे।
पुणे का AIB संस्थान: संदिग्ध छात्रा परीक्षा से पहले पुणे के एक निजी कोचिंग संस्थान ‘AIB’ से जुड़ी हुई थी। इस संस्थान ने परीक्षा से पहले ही होनहार छात्रों की तस्वीरों के साथ “The Results To Come” (आने वाले परिणाम) टैगलाइन वाले बड़े-बड़े फ्लैक्स बैनर लगाए थे। सीबीआई जांच कर रही है कि क्या इन दावों का संबंध लीक पेपर तक पहले से पहुंच होने से था। हालांकि, संस्थान के अतुल मोरे ने दावा किया कि छात्रा मॉक टेस्ट में 400 से 450 अंक लाती थी और आखिरी 15 दिनों से वह संस्थान नहीं आ रही थी।
लातूर की रेणुकाई केमिस्ट्री क्लासेस: सीबीआई की टीम ने लातूर के शिवनगर में स्थित ‘रेणुकाई केमिस्ट्री क्लासेस’ के कार्यालय की भी तलाशी ली और इसके संस्थापक शिवराज मोटेगांवकर से 8 घंटे तक पूछताछ की।
मनी ट्रेल: पैसे वसूलने के लिए आपस में ही बेच डाले पेपर
सीबीआई को संदेह है कि यह नेटवर्क पुणे, लातूर, नांदेड़, नासिक, बीड और अहिल्यानगर (अहमदनगर) जैसे प्रमुख शिक्षा केंद्रों में फैला हुआ था। जांच में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है कि कुछ माता-पिता ने पेपर खरीदने में खर्च हुई अपनी रकम का एक हिस्सा वसूलने के लिए लीक हुए प्रश्नपत्रों को अपने अन्य भरोसेमंद संपर्कों और रिश्तेदारों में भी सर्कुलेट (साझा) कर दिया था। प्रश्नपत्रों के लिए अलग-अलग परिवारों से ₹10 लाख से ₹25 लाख तक की वसूली की गई थी।
डेटाबेस का दुरुपयोग और आगे की कार्रवाई
जांचकर्ताओं को अंदेशा है कि इस घोटाले के मास्टरमाइंडों ने संभावित खरीदारों (अमीर माता-पिता) की पहचान करने के लिए कोचिंग सेक्टर से छात्रों के बड़े डेटाबेस (Database) का अवैध रूप से इस्तेमाल किया था। सीबीआई पहले ही इस मामले में कई मुख्य आरोपियों, बिचौलियों और सॉल्वरों को गिरफ्तार कर चुकी है, और अब पूरा ध्यान मनी ट्रेल (पैसे के लेन-देन के स्रोत) को ट्रैक करने और इसके अंतिम लाभार्थियों तक पहुंचने पर है। आने वाले दिनों में और भी कई जिलों में छापेमारी और गिरफ्तारियां संभव हैं।
नीट पेपर लीक मामले में सीबीआई का यह कदम दिखाता है कि सरकार अब केवल परीक्षा माफिया पर ही नहीं, बल्कि भ्रष्ट तरीकों से व्यवस्था को कप्रमाइज करने वाले संरक्षकों (माता-पिता) पर भी सख्त कार्रवाई करने के मूड में है। इस कार्रवाई से देश के एस्पिरेशनल क्लास (आकांक्षी वर्ग) और कोचिंग उद्योग के भीतर छिपे काले चेहरों के बेनकाब होने की उम्मीद है।
