पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड हमजा बुरहान PoK में ढेर,अलबदर कमांडर को अज्ञात बाइक सवारों ने गोलियों से भूना

भारत की सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर चल रहे मोस्ट वांटेड आतंकी और पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड हमजा बुरहान की पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के मुजफ्फराबाद में हत्या कर दी गई है।

पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड हमजा बुरहान PoK में ढेर

भारत की सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर चल रहे मोस्ट वांटेड आतंकी और पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड हमजा बुरहान की पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के मुजफ्फराबाद में हत्या कर दी गई है। मिली जानकारी के अनुसार, गुरुवार को मुजफ्फराबाद में उसके ठिकाने (दफ्तर) के बाहर मोटरसाइकिल पर आए अज्ञात हमलावरों ने उसे बेहद करीब से गोलियों से भून डाला। हमजा बुरहान आतंकी संगठन ‘अलबदर‘ का टॉप कमांडर था और लंबे समय से पाकिस्तान में बैठकर जम्मू-कश्मीर में आतंकी वारदातों की साजिश रच रहा था।

मुजफ्फराबाद में दफ्तर के बाहर ‘धुरंधर स्टाइल’ में मर्डर

सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, यह घटना पीओके के मुजफ्फराबाद की है, जहां पेशे से डॉक्टर और ‘व्हाइट कॉलर इस्लामिस्ट’ कहे जाने वाले अरजुमंद गुलजार डार उर्फ हमजा बुरहान का दफ्तर था। जब वह अपने दफ्तर से बाहर निकल रहा था, तभी पहले से घात लगाए बैठे अज्ञात बंदूकधारियों ने उस पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। उसकी मौके पर ही मौत हो गई। आतंकी हलकों में हमजा को ‘अगला हाफिज सईद’ तक कहा जाता था, क्योंकि वह युवाओं को कट्टरपंथी बनाने में माहिर था।

पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड था हमजा बुरहान

14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ (CRPF) के काफिले पर एक आत्मघाती हमला हुआ था, जिसमें भारत के 40 वीर जवान शहीद हो गए थे। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की जांच में यह बात सामने आई थी कि हमजा बुरहान इस भयावह हमले के मुख्य साजिशकर्ताओं और मास्टरमाइंड में से एक था। वह काफी समय से भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की हिट लिस्ट में था।

ओवर ग्राउंड वर्कर से लेकर टॉप मोस्ट आतंकी तक का सफर

हमजा बुरहान का आतंकी सफर जम्मू-कश्मीर में एक ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) के रूप में शुरू हुआ था। पुलवामा हमले के दौरान वह खुफिया सूचनाएं और रसद पहुंचाने का काम करता था। बाद में वह पाकिस्तान भाग गया और वहां अलबदर संगठन में तेजी से ऊपर बढ़ा। वह अलबदर के ‘नैरेटिव वॉरफेयर नेटवर्क’ (प्रोपेगैंडा विंग) का सबसे अहम हिस्सा बन गया था, जो सोशल मीडिया पर पोस्टर, वीडियो और ऑनलाइन कट्टरपंथी सामग्री अपलोड कर कश्मीर के भोले-भले युवाओं को हथियार उठाने के लिए उकसाता था।

पैसे के विवाद और अंदरूनी गैंगवार में गई जान

सुरक्षा सूत्रों का दावा है कि PoK के भीतर सक्रिय आतंकी संगठनों में पिछले काफी समय से विदेशी फंडिंग और पैसों के बंटवारे को लेकर गंभीर विवाद चल रहा था। अलबदर के भीतर चल रहा यही अंदरूनी मतभेद हाल के दिनों में खूनी गैंगवार में बदल गया। माना जा रहा है कि इसी अंदरूनी संघर्ष और वर्चस्व की लड़ाई के चलते विरोधी गुट ने हमजा बुरहान को रास्ते से हटा दिया। हालांकि, हमेशा की तरह इस घटना पर पाकिस्तान सरकार या वहां की सेना की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

डिजिटल आतंकवाद और आतंकी नेटवर्क को बड़ा झटका

सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद जब जमीनी स्तर पर आतंकी नेटवर्क कमजोर हुआ, तो पाकिस्तान समर्थित संगठनों ने डिजिटल प्रोपेगैंडा और साइकोलॉजिकल कैंपेन का सहारा लेना शुरू किया। हमजा बुरहान इस नई रणनीति का मुख्य चेहरा था। वह केवल प्रोपेगैंडा ही नहीं फैलाता था, बल्कि एलओसी (LoC) पार से नशीले पदार्थों (Drugs Network) और हथियारों की तस्करी का नेटवर्क भी संभाल रहा था। सुरक्षा एजेंसियां उसकी मौत को आतंकी ढांचे के लिए एक बड़ा ऑपरेशनल और साइकोलॉजिकल झटका मान रही हैं।

POK के सुरक्षित माने जाने वाले इलाकों में एक शीर्ष आतंकी कमांडर की इस तरह सरेआम हत्या होना यह दर्शाता है कि भारतीय एजेंसियों के बढ़ते दबाव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टेरर फंडिंग पर कसी गई नकेल के कारण अब आतंकी संगठनों के भीतर ही बिखराव और अविश्वास का माहौल पैदा हो चुका है।

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