पश्चिम एशिया (Middle East) में ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण सैन्य व कूटनीतिक तनाव के बीच अमेरिका से पाकिस्तान के लिए एक बेहद सख्त और परेशान करने वाली खबर सामने आई है। अमेरिका के कद्दावर सीनेटर लिंडसे ग्राहम (Lindsey Graham) ने इजराइल के प्रति पाकिस्तान के लगातार बने हुए कट्टर विरोधी रुख को लेकर गहरी नाराजगी जाहिर की है। ग्राहम ने वैश्विक मंचों पर खुद को एक मध्यस्थ (Mediator) के रूप में पेश करने की पाकिस्तान की कोशिशों पर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा है कि जो देश खुद बुनियादी रूप से इजराइल के अस्तित्व का विरोध करता आया है, वह इस वैश्विक संकट में निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका कभी नहीं निभा सकता।
“पाकिस्तानी एयरबेस पर मौजूद हैं ईरानी सैन्य विमान”—अमेरिकी सीनेटर का सनसनीखेज दावा
अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक पोस्ट साझा करते हुए एक बेहद संवेदनशील और सनसनीखेज दावा किया है। उन्होंने खुफिया इनपुट्स के हवाले से कहा कि ईरान के सैन्य विमान इस वक्त पाकिस्तान के एयरबेस पर मौजूद हैं, जो दोनों देशों के बीच गहरे होते जा रहे सैन्य तालमेल को दिखाता है। ग्राहम ने पाकिस्तानी नेतृत्व को याद दिलाया कि एक तरफ वे ईरान के साथ खड़े नजर आ रहे हैं और दूसरी तरफ अमेरिका के सामने खुद को संतुलित दिखाने का नाटक कर रहे हैं, जो अब और नहीं चलेगा। इसके साथ ही उन्होंने पाकिस्तानी राजनेताओं के उन पुराने बयानों को भी रेखांकित किया जो पूरी तरह से इजराइल विरोधी मानसिकता से भरे हुए हैं।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के पुराने बयान का हवाला
अपने गुस्से का इजहार करते हुए अमेरिकी सीनेटर ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के उस पुराने और चर्चित बयान का भी विशेष रूप से हवाला दिया, जिसमें उन्होंने सार्वजनिक मंच से कहा था कि पाकिस्तान कभी भी ‘अब्राहम समझौते’ (Abraham Accords) का हिस्सा नहीं बनेगा, क्योंकि इस्लामाबाद को इजराइल की नीतियों पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं है। सीनेटर ग्राहम ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि भले ही पाकिस्तान के नेताओं का यह बयान कुछ समय पुराना हो, लेकिन आज के मौजूदा संकट में भी पाकिस्तानी हुक्मरानों और वहां की फौज की सोच बिल्कुल वैसी ही दिखाई दे रही है।
“राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की अपील पर तुरंत रुख साफ करे इस्लामाबाद”
सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने पाकिस्तान को दोटूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब पाकिस्तान को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की उस वैश्विक अपील पर अपना अंतिम और आधिकारिक जवाब देना चाहिए, जिसमें उन्होंने मुस्लिम जगत के देशों से इजराइल के साथ अपने कूटनीतिक रिश्ते सामान्य करने का आग्रह किया है। ग्राहम का इशारा साफ था कि अगर पाकिस्तान अमेरिका के साथ अपने द्विपक्षीय, आर्थिक और सैन्य संबंधों को बचाए रखना चाहता है, तो उसे अपनी इस पुरानी इजराइल विरोधी हठधर्मिता को छोड़कर आगे बढ़ना होगा।
क्या है अब्राहम समझौता (Abraham Accords) और पाकिस्तान का स्टैंड?
दरअसल, ‘अब्राहम समझौता’ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के पिछले कार्यकाल की सबसे बड़ी कूटनीतिक उपलब्धियों में से एक माना जाता है। इस ऐतिहासिक समझौते के तहत संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन, सूडान और मोरक्को जैसे प्रमुख मुस्लिम व अरब देशों ने इजराइल के साथ अपने दशकों पुराने गतिरोध को खत्म करते हुए औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित किए थे और इजराइल को एक संप्रभु देश के रूप में मान्यता दी थी। डोनाल्ड ट्रम्प अब इस समझौते के दायरे को और अधिक व्यापक बनाना चाहते हैं ताकि पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित की जा सके।
दूसरी ओर, पाकिस्तान इस समझौते का पहले दिन से ही मुखर विरोध करता आया है। पाकिस्तान दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है जो इजराइल को एक वैध राष्ट्र के रूप में स्वीकार नहीं करते। पाकिस्तानी पासपोर्ट पर आज भी साफ अक्षरों में लिखा होता है कि यह ‘इजराइल को छोड़कर दुनिया के सभी देशों के लिए मान्य है’। पाकिस्तान का लंबे समय से यह कड़ा और आधिकारिक रुख रहा है कि जब तक फिलिस्तीन विवाद (Palestine Dispute) का दो-राष्ट्र सिद्धांत (Two-State Solution) के आधार पर पूर्ण समाधान नहीं हो जाता और एक स्वतंत्र फिलिस्तीन देश का निर्माण नहीं हो जाता, तब तक वह इजराइल को किसी भी कीमत पर मान्यता नहीं देगा। अमेरिकी सीनेटर के इस ताजा और कड़े बयान के बाद वाशिंगटन और इस्लामाबाद के बीच कूटनीतिक तनाव और बढ़ने के आसार हैं।
