भारत के राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 124(2) के तहत सुप्रीम कोर्ट में पांच नए जजों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिशों के आधार पर लिया गया। इन नियुक्तियों के बाद देश का सर्वोच्च न्यायालय लगभग अपनी पूर्ण स्वीकृत क्षमता के साथ काम करेगा।
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रपति ने पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी प्रदान कर दी है। बढ़ते मामलों के बोझ को देखते हुए न्यायपालिका की क्षमता मजबूत करने की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाले कॉलेजियम की सिफारिश
इन नामों की सिफारिश 27 मई को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने की थी। नवंबर 2025 में मुख्य न्यायाधीश का पद संभालने के बाद यह उनके नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट में नियुक्तियों का पहला बड़ा दौर है।
किन लोगों को मिली सुप्रीम कोर्ट में जगह?
सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किए गए नए न्यायाधीशों में शामिल हैं:
- पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शील नागू
- बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस श्री चंद्रशेखर
- मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव सचदेवा
- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अरुण पल्ली
- वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकिता सुब्रमणि मोहना, जिन्हें सीधे बार से सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट की संख्या बढ़कर 37 होगी
हाल ही में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026 के जरिए सुप्रीम कोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 कर दी थी।
इन पांच नई नियुक्तियों के बाद सुप्रीम कोर्ट में कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 37 हो जाएगी। यानी नई व्यवस्था के तहत अब केवल एक पद ही खाली रहेगा।
लंबित मामलों के निपटारे में मिलेगी मदद
सरकार और न्यायपालिका का मानना है कि जजों की संख्या बढ़ने से लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी। साथ ही अधिक संख्या में पीठों (Benches) का गठन किया जा सकेगा।
विशेष रूप से संविधान से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई करने वाली संविधान पीठों (Constitution Benches) के गठन में भी आसानी होगी, जिनमें आमतौर पर अधिक संख्या में न्यायाधीशों की आवश्यकता होती है।
संतुलित प्रतिनिधित्व पर भी ध्यान
इन नियुक्तियों में वरिष्ठता, योग्यता, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और न्यायिक संतुलन जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखा गया है। सुप्रीम कोर्ट में विभिन्न राज्यों और न्यायिक पृष्ठभूमि से आने वाले न्यायाधीशों को शामिल करने की परंपरा को आगे बढ़ाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के लगभग पूर्ण क्षमता के साथ काम करने की स्थिति में पहुंचने को भारतीय न्याय व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न्यायिक कार्यों में तेजी आने और लंबित मामलों का बोझ कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
