पिच ब्लैक से उदारा शक्ति तक: इंडो पैसेफिक में भारतीय वायु सेना का दम

Exercise Pitch Black 2026 in Australia and Exercise Udara Shakti 2026 in Malaysia

Pitch Black 2026 में हिस्सा लेते भारतीय फाइटर जेट्स

भारतीय वायुसेना ने ऑस्ट्रेलिया और मलेशिया में आयोजित दो महत्वपूर्ण बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यासों पिच ब्लैक 2026 और उदारा शक्ति 2026 में भागीदारी की है। लगातार दो देशों में हुए इन संयुक्त अभियानों ने भारतीय वायुसेना की ऑपरेशनल रीच, आधुनिक हवाई युद्ध की क्षमताओं और हिंदप्रशांत क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक साझेदारियों को एक बार फिर सामने रखा है।

ऑस्ट्रेलिया में रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स (RAAF) की मेजबानी में आयोजित Exercise Pitch Black 2026 में भारतीय वायुसेना ने अपने फ्रंटलाइन राफेल लड़ाकू विमानों के साथ हिस्सा लिया। इस अभ्यास में 20 से अधिक देशों की वायुसेनाएं शामिल हुईं। यहां भारतीय टीम ने हाईथ्रेट और मल्टीडोमेन वातावरण में जटिल लार्ज फोर्स एम्पलॉयमेंट LFE मिशनों को अंजाम दिया।

LFE मिशनों में बड़ी संख्या में लड़ाकू विमानों को एक साथ शामिल करते हुए वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में मिशन प्लानिंग, एयर कॉम्बैट कोऑर्डिनेशन और टैक्टिकल एक्जीक्यूशन का अभ्यास किया जाता है। ऐसे अभ्यासों से अलगअलग देशों की वायुसेनाओं को एकदूसरे की ऑपरेशनल प्रक्रियाओं को समझने और संयुक्त अभियानों में बेहतर तालमेल विकसित करने का अवसर मिलता है।

मलेशिया में उदाराशक्ति एक्सरसाइज

Pitch Black के बाद भारतीय वायुसेना का दल सीधे ऑस्ट्रेलिया से मलेशिया के सुबांग पहुंचा, जहां उसने उदार शक्ति अभ्यास 2026 में हिस्सा लिया। यह भारत और मलेशिया की वायुसेनाओं के बीच द्विपक्षीय हवाई अभ्यास है। इस दौरान भारतीय वायुसेना के एयरक्रू ने रॉयल मलेशियन एयर फोर्स (RMAF) के साथ हाईइंटेंसिटी कॉम्बैट sorties और संयुक्त टैक्टिकल मैन्युवर्स में हिस्सा लिया।

इस अभ्यास की खास बात यह रही कि भारतीय और मलेशियाई पायलटों ने Su-30MKM और F/A-18 Hornet जैसे विमानों के साथ और उनके विरुद्ध विभिन्न हवाई युद्ध परिस्थितियों में प्रशिक्षण लिया। इससे दोनों देशों के एयरक्रू को अलगअलग प्लेटफॉर्म्स की क्षमताओं, टैक्टिक्स और ऑपरेशनल प्रक्रियाओं को समझने का अवसर मिला।

Udara Shakti के दौरान Subject Matter Expert Exchanges (SMEE) पर भी विशेष जोर दिया गया। एयर कॉम्बैट टैक्टिक्स, मिशन प्लानिंग और संयुक्त ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी को बेहतर बनाने के लिए दोनों वायुसेनाओं के विशेषज्ञों ने अनुभव साझा किए।

इन दोनों अभ्यासों की खासियत सिर्फ उड़ान और एयर कॉम्बैट ट्रेनिंग तक सीमित नहीं रही। भारतीय और साझेदार देशों की टीमों के बीच मेंटेनेंस प्रैक्टिस, मिशन प्लानिंग और तकनीकी प्रक्रियाओं को लेकर भी अनुभवों का आदानप्रदान हुआ। इसके अलावा दोनों देशों के सैन्यकर्मियों के बीच सांस्कृतिक और पेशेवर संवाद ने आपसी विश्वास को मजबूत किया।

ऑस्ट्रेलिया और मलेशिया में लगातार दो बड़े अभ्यासों में हिस्सा लेना भारतीय वायुसेना की बढ़ती इंडोपैसिफिक ऑपरेशनल पहुंच को भी दर्शाता है। एक तरफ वैश्विक स्तर पर इंडियन एयर फोर्स की क्षमताओं का प्रदर्शन हुआ, तो दूसरी ओर मलेशिया के साथ द्विपक्षीय स्तर पर जटिल हवाई युद्ध परिस्थितियों में प्रशिक्षण और ‘टैक्टिकल इंटरऑपरेबिलिटी’ को मजबूत किया गया।

भारतीय वायु सेना लगातार दुनिया की प्रमुख वायु सेनाओं के साथ संयुक्त अभ्यासों के जरिए अपने एयरक्रू और सपोर्ट स्टाफ को वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों के लिए तैयार कर रही है। ऐसे अभ्यास न केवल युद्धक क्षमताओं को बेहतर बनाते हैं, बल्कि हिंदप्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारियों, इंटरऑपरेबिलिटी और क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को भी मजबूत करते हैं।

इन दोनों अभ्यासों के जरिए IAF ने साफ संदेश दिया है कि भारत की हवाई शक्ति अब सिर्फ अपनी सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर लंबी दूरी तक तेजी से तैनाती, बहुराष्ट्रीय अभियानों में भागीदारी और जटिल हवाई अभियानों को अंजाम देने की क्षमता रखती है।

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