WhatsApp पर जिस ‘लोन माफी’ की चर्चा, जानिए क्या है हकीकत ?

वित्त मंत्रालय ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में बैंकों की कर्ज वसूली को लेकर स्थिति साफ की है

सोशल मीडिया और WhatsApp पर अक्सर यह दावा किया जाता है कि सरकार ने बैंकों के लाखों करोड़ रुपए के कर्ज माफ कर दिए। लेकिन वित्त मंत्रालय के ताजा आंकड़े बताते हैं कि लोन राइटऑफऔरलोन माफीएक ही चीज नहीं हैं।

सच यह है कि ‘राइटऑफ’ और ‘लोन माफी’ दो अलग चीजें हैं, और बैंक ‘राइटऑफ’ के बाद भी कर्जदार का पीछा नहीं छोड़ते।

‘राइटऑफ’ दरअसल एक अकाउंटिंग एंट्री है। जब कोई कर्ज लंबे समय तक न चुकाए जाने की वजह से NPA बन जाता है, तो बैंक उसे अपनी बैलेंस शीट से हटा देते हैं ताकि किताबें साफ दिखें। इससे कर्जदार की देनदारी खत्म नहीं होती। बैंक SARFAESI, DRT, IBC और लोक अदालत जैसे कानूनी रास्तों से वसूली जारी रखते हैं। वित्त मंत्रालय ने संसद में यही बात लोकसभा के एक सवाल के जवाब में साफ की है।

आंकड़े भी इसी की तस्दीक करते हैं। पिछले पांच वित्त वर्षों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने कुल 5,19,185 करोड़ रुपए राइटऑफ किए, और इसी दौरान 1,76,937 करोड़ रुपए की वसूली भी कर ली; यानी राइटऑफ की गई रकम का करीब 34% वापस बैंकों के खजाने में गया।

साल दर साल वसूली बेहतर होती गई

दिलचस्प बात यह है कि जैसेजैसे साल बीते, बैंकों ने राइटऑफ कम किया और वसूली की रफ्तार बढ़ाई। 2021-22 में लिखे गए कर्ज का सिर्फ 21.41% वापस आया था। 2022-23 में यह 27.80% रहा, 2023-24 में लगभग उतना ही यानी 27.37%। लेकिन 2024-25 में यह छलांग लगाकर 46.64% पहुंच गया, और 2025-26 के प्रोविजनल आंकड़ों के मुताबिक अब यह 60.81% तक जा पहुंचा है।

वित्त वर्ष

राइटऑफ ( करोड़)

रिकवरी ( करोड़)

रिकवरी %

2021-22

1,15,537

24,739

21.41%

2022-23

1,27,237

35,377

27.80%

2023-24

1,14,622

31,369

27.37%

2024-25

91,261

42,563

46.64%

2025-26*

70,528

42,889

60.81%

कुल

5,19,185

1,76,937

34.08%

2025-26 के आंकड़े प्रोविजनल हैं। (स्रोत: वित्त मंत्रालय, लोकसभा प्रश्न संख्या 2392)

वसूली में यूको बैंक सबसे आगे, रकम में SBI

बैंकवार आंकड़े देखें तो प्रतिशत के हिसाब से यूको बैंक ने सबसे अच्छा काम किया हैउसने राइटऑफ की गई रकम का 76.80% वसूल लिया। बैंक ऑफ महाराष्ट्र 70.59% के साथ दूसरे नंबर पर रहा। लेकिन रकम के लिहाज से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का कोई मुकाबला नहीं। SBI ने पांच साल में करीब 39,869 करोड़ रुपए वसूल लिए, जो किसी भी बैंक से सबसे ज्यादा है, भले ही उसकी वसूली दर 40.68% से आगे न बढ़ी हो।

पंजाब नेशनल बैंक ने 73,062 करोड़ राइटऑफ करके 26,907 करोड़ (36.83%) वसूले, तो केनरा बैंक की वसूली दर 45.11% रही- यूनियन बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे बड़े बैंकों से भी बेहतर। बैंक ऑफ इंडिया की वसूली दर सबसे कमजोर, महज 20.53% रही।

बैंक

कुल राइटऑफ ( करोड़)

कुल रिकवरी ( करोड़)

रिकवरी %

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया

98,000

39,869

40.68%

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया

75,200

20,594

27.39%

पंजाब नेशनल बैंक

73,062

26,907

36.83%

बैंक ऑफ बड़ौदा

61,609

17,922

29.09%

केनरा बैंक

60,688

27,378

45.11%

बैंक ऑफ इंडिया

42,916

8,810

20.53%

इंडियन बैंक

36,511

10,551

28.90%

सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया

26,584

7,035

26.46%

इंडियन ओवरसीज बैंक

19,437

7,173

36.90%

यूको बैंक

11,208

8,608

76.80%

बैंक ऑफ महाराष्ट्र

7,604

5,368

70.59%

पंजाब एंड सिंध बैंक

6,366

2,722

42.76%

विलफुल डिफॉल्टरों पर भी शिकंजा

वित्त मंत्रालय ने लोकसभा को यह भी बताया कि 30 जून 2026 तक 25 लाख रुपए या उससे ज्यादा के 15,930 विलफुल डिफॉल्टरों पर कुल 2.85 लाख करोड़ रुपए बकाया थे। इनमें से 7,190 मामले पहले ही आपराधिक कार्रवाई के लिए भेजे जा चुके हैं, जिनकी डिफॉल्ट राशि 1.92 लाख करोड़ रुपए बैठती है।

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