चीन के शिनजियांग के रास्ते उड़ानें शुरू करने की तैयारी, पाकिस्तान का एयरस्पेस बंद होने से बढ़ा खर्च

चीन के साथ शिनजियांग के ऊपर से भारतीय विमानों को उड़ान भरने की अनुमति देने को लेकर बातचीत कर रहा है। अगर चीन इस रास्ते को मंजूरी देता है तो पाकिस्तान का एयरस्पेस बंद होने के कारण भारतीय एयरलाइंस को करना पड़ रहा लंबा सफर कुछ कम हो सकता है।

चीन के शिनजियांग के रास्ते उड़ानें शुरू करने की तैयारी

चीन के शिनजियांग के रास्ते उड़ानें शुरू करने की तैयारी

नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू ने मंगलवार को कहा कि भारत चीन के साथ शिनजियांग के ऊपर से भारतीय विमानों को उड़ान भरने की अनुमति देने को लेकर बातचीत कर रहा है। अगर चीन इस रास्ते को मंजूरी देता है तो पाकिस्तान का एयरस्पेस बंद होने के कारण भारतीय एयरलाइंस को करना पड़ रहा लंबा सफर कुछ कम हो सकता है।

पाकिस्तान ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारतीय विमानों के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया था। इसके बाद भारत से यूरोप और उत्तरी अमेरिका जाने वाली कई उड़ानों को पाकिस्तान के बजाय अरब सागर और मस्कट की ओर से लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। इससे उड़ान का समय और ईंधन का खर्च दोनों बढ़ गए हैं।

पाकिस्तान ने यह प्रतिबंध कई बार बढ़ाया है और फिलहाल यह 24 अक्टूबर 2026 तक लागू रहने वाला है।

एयर इंडिया पर पड़ा बड़ा असर

पाकिस्तान का एयरस्पेस बंद होने से सबसे ज्यादा असर लंबी दूरी की उड़ानों पर पड़ा है। एयर इंडिया के मुताबिक, इस प्रतिबंध से उसके मुनाफे पर सालाना करीब 455 मिलियन डॉलर का असर पड़ा है। कुछ उड़ानों में ईंधन की लागत करीब 29 फीसदी तक बढ़ गई, जबकि कई लंबी दूरी की उड़ानों में तीन घंटे तक अतिरिक्त समय लग रहा है।

एयर इंडिया ने अगस्त 2025 में दिल्ली-वॉशिंगटन उड़ान बंद कर दी थी। इसके अलावा न्यूयॉर्क-दिल्ली और वैंकूवर-दिल्ली जैसे रूटों पर यात्री और कार्गो क्षमता में भी कमी की गई है।

क्या है चीन के शिनजियांग वाला रास्ता?

भारत जिस वैकल्पिक रास्ते पर चीन से बातचीत कर रहा है, वह दक्षिण-पश्चिमी शिनजियांग के होतान क्षेत्र से होकर गुजरता है।

प्रस्तावित योजना के तहत भारतीय विमान लेह के रास्ते चीनी एयरस्पेस में प्रवेश कर सकते हैं और वहां से मध्य एशिया की ओर आगे बढ़ सकते हैं। इससे यूरोप, उत्तरी अमेरिका और मध्य एशिया जाने वाली कुछ उड़ानों को पाकिस्तान और ईरान के आसपास लंबा चक्कर लगाने की जरूरत कम हो सकती है।

नायडू ने बताया कि भारत और चीन के बीच होतान एयर रूट को लेकर एक साल से ज्यादा समय से बातचीत चल रही है। विदेश मंत्रालय भी इस मामले में चीन के साथ बातचीत कर रहा है। हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि यह रास्ता कब शुरू होगा या इसे मंजूरी मिलेगी भी या नहीं।

एयर इंडिया का अनुमान है कि अगर उसे होतान रूट का इस्तेमाल करने की अनुमति मिलती है तो उसे हर हफ्ते करीब 11.3 लाख डॉलर के नुकसान से राहत मिल सकती है। एयरलाइन ने भारत सरकार से चीन के साथ कूटनीतिक स्तर पर यह मुद्दा उठाने और पाकिस्तान का एयरस्पेस खुलने तक अस्थायी सरकारी सहायता देने की भी मांग की है।

रास्ते में कई बड़ी चुनौतियां

हालांकि, चीन के रास्ते से उड़ान शुरू करना इतना आसान नहीं है। सबसे बड़ी चुनौती चीन का संवेदनशील सैन्य क्षेत्र है। शिनजियांग रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है और वहां के एयरस्पेस पर चीनी सेना का काफी नियंत्रण है। इसलिए इस तरह के कॉरिडोर को मंजूरी मिलना आसान नहीं माना जा रहा है।

इसके अलावा इस रास्ते में दुनिया की ऊंची पर्वत श्रृंखलाएं आती हैं। ऐसे इलाके में किसी आपात स्थिति में विमान को दूसरे एयरपोर्ट पर उतारना मुश्किल हो सकता है। इसलिए सुरक्षा और आपातकालीन लैंडिंग की व्यवस्था भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा होगी।

भारत-चीन संबंधों का भी पड़ेगा असर

इस प्रस्ताव पर बातचीत ऐसे समय हो रही है जब भारत और चीन के संबंधों में कुछ सुधार देखने को मिला है। करीब छह साल के अंतराल के बाद दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें फिर शुरू हुई हैं। एयर इंडिया ने 1 फरवरी 2026 से दिल्ली-शंघाई उड़ान सेवा दोबारा शुरू की।

इसके अलावा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग हाल में BRICS शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली आए थे। हालांकि, दोनों देशों के बीच सीमा विवाद और लंबे समय से चले आ रहे तनाव के कारण किसी नए एयर रूट को मंजूरी देने के लिए लगातार कूटनीतिक बातचीत की जरूरत होगी।

पाकिस्तान का एयरस्पेस खुलने तक बढ़ता रहेगा खर्च

अगर चीन होतान रूट को मंजूरी भी दे देता है, तब भी यह पाकिस्तान के बंद एयरस्पेस का पूरी तरह विकल्प होगा, इसकी गारंटी नहीं है। इसका फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि किन उड़ानों को इस रास्ते से जाने की अनुमति मिलती है, विमान की क्षमता क्या है और दोनों देशों की ओर से किस तरह की मंजूरी मिलती है।

जब तक कोई समझौता नहीं होता, भारतीय एयरलाइंस को पाकिस्तान के एयरस्पेस से बचते हुए लंबा रास्ता तय करना पड़ेगा। इससे ईंधन और संचालन का खर्च बढ़ता रहेगा और यात्रियों को भी लंबी यात्रा तथा महंगे टिकटों का सामना करना पड़ सकता है।

वहीं, जिन विदेशी एयरलाइंस को पाकिस्तान के एयरस्पेस से उड़ान भरने की अनुमति है, उन्हें अपेक्षाकृत छोटे और कम खर्च वाले रूट का फायदा मिलता रहेगा। यही वजह है कि भारत के लिए चीन के साथ शिनजियांग वाले एयर रूट पर बातचीत आगे बढ़ाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Exit mobile version