पंजाब में BJP का ‘मिशन 120 दिन’: हर सीट पर 5 हजार कार्यकर्ताओं का टारगेट, युवा-किसान मोर्चे को मिला बड़ा टास्क

नशामुक्ति यात्रा के रिस्पॉन्स से उत्साहित BJP ने बदली रणनीति, कमजोर सीटों पर संगठन 3 से 4 गुना करने की तैयारी, अकाली दल से गठबंधन पर भी अंदरखाने मंथन

BL Santosh BJP Punjab Mission 120 Days ahead of Punjab Assembly Election 2027पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले BJP ने संगठन विस्तार के लिए 120 दिनों की रणनीति पर काम तेज किया है।

पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले BJP ने संगठन विस्तार के लिए 120 दिनों की रणनीति पर काम शुरू किया है।

पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले BJP अब अपनी सबसे बड़ी कमजोरी पर सीधा हमला करने की तैयारी में है। पार्टी का नया फोकस सिर्फ बड़े नेताओं की रैलियों, रोड शो या चुनावी माहौल बनाने पर नहीं, बल्कि विधानसभा स्तर पर इतना मजबूत कैडर तैयार करने पर है, ताकि वह पंजाब की हर सीट पर अपने दम पर मुकाबले की स्थिति में आ सके।

इसी रणनीति के तहत BJP के संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने पंजाब संगठन को अगले 120 दिनों का टारगेट दिया है।

सूत्रों के मुताबिक 1 और 2 अक्टूबर के पंजाब दौरे के दौरान बीएल संतोष ने पार्टी पदाधिकारियों के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकें कीं। इन बैठकों में हाल की नशामुक्ति यात्रा के फीडबैक से लेकर बूथ स्तर पर पार्टी की स्थिति, युवाओं और किसानों के बीच पहुंच तथा अगले विधानसभा चुनाव की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। ख़ासकर संगठन विस्तार का लक्ष्य रखा गया है।

कमजोर इलाकों से मिले रिस्पॉन्स ने बदला BJP का प्लान

दरअसल BJP ने हाल में पूरे पंजाब में बड़े स्तर पर नशामुक्ति यात्रा निकाली थी। महत्वपूर्ण बात यह रही कि यात्रा सिर्फ उन क्षेत्रों तक सीमित नहीं रही जहां BJP पहले से मजबूत है। इसे उन इलाकों में भी ले जाया गया जहां पार्टी का संगठन कमजोर है या राजनीतिक मौजूदगी बेहद सीमित रही है।
दरअसल पार्टी के लिए सबसे उत्साहजनक संकेत इन्हीं इलाकों से मिला। सूत्रों के मुताबिक कई कमजोर क्षेत्रों में भी सैकड़ों कार्यकर्ता और युवा यात्रा से जुड़े। वहीं जिन क्षेत्रों में BJP पहले से मजबूत है, वहां अभियान को अपेक्षाकृत अच्छा समर्थन देखने को मिला।

यही फीडबैक अब पार्टी की अगली रणनीति का आधार बन रहा है।

सूत्र बताते हैं कि संगठन महामंत्री ने पदाधिकारियों से साफ कहा है कि अगले 120 दिनों में कमजोर क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं की संख्या को तीन से चार गुना तक बढ़ाने पर काम किया जाए।

दरअसल इसके पीछे BJP का एक दिलचस्प चुनावी कैलकुलेशन भी है। पार्टी के भीतर माना जा रहा है कि अगर किसी विधानसभा क्षेत्र में BJP 3,000 से 5,000 सक्रिय कार्यकर्ताओं का नेटवर्क खड़ा करने में सफल होती है तो वह उस सीट पर न केवल मजबूती से चुनाव लड़ सकती है, बल्कि चुनावी परिणाम को प्रभावित करने की स्थिति में भी आ सकती है।

यानी अगले चार महीने BJP के लिए रैली से ज्यादा कैडर बिल्डिंग के महीने होने वाले हैं।

युवा मोर्चा को सड़क पर उतरने का टास्क

इस रणनीति में अलग–अलग मोर्चों को भी अलग जिम्मेदारियां दी गई हैं।

सबसे आक्रामक टास्क युवा मोर्चा को मिला है। सूत्रों के अनुसार युवा मोर्चा को कहा गया है कि वह पंजाब सरकार के प्रति लोगों, खासकर युवाओं के बीच मौजूद नाराजगी और स्थानीय समस्याओं को लगातार उठाए।

इसके लिए केवल सोशल मीडिया या प्रेस कॉन्फ्रेंस पर निर्भर रहने के बजाय संगठन को सड़क पर उतरने के निर्देश दिए गए हैं।

युवा मोर्चा को हर पंद्रह दिन में किसी न किसी जिले में जनसाधारण से जुड़े किसी मुद्दे को आक्रामकता के साथ उठाने को कहा गया है, ताकि युवाओं को ज्यादा से ज्यादा बीजेपी की तरफ़ जोड़ा जा सके।

किसान मोर्चे के जरिए गांवों में एंट्री की तैयारी

दूसरी बड़ी जिम्मेदारी किसान मोर्चा को दी गई है। पंजाब की राजनीति में किसानों के प्रभाव को देखते हुए BJP चाहती है कि किसान मोर्चा केवल पार्टी के कार्यक्रमों तक सीमित न रहे, बल्कि किसानों की रोजमर्रा की समस्याओं और मांगों को लेकर सक्रिय रूप से सामने आए।

सूत्रों के मुताबिक किसान मोर्चा को किसानों से जुड़े स्थानीय मुद्दे उठाने, प्रदेश स्तर पर उनके साथ हो रहे कथित अन्याय को सामने लाने और उनकी मांगों को राजनीतिक मंच देने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके साथ ही किसानों को केंद्र सरकार की योजनाओं और उनके लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देने पर भी जोर रहेगा। इसके पीछे बड़ा मकसद साफ है। BJP पंजाब के गांवों में अपनी स्वतंत्र राजनीतिक जमीन तैयार करना चाहती है।

अकेले लड़ने की तैयारी, लेकिन अकाली वाला दरवाजा भी खुला?

इसी बीच पंजाब की राजनीति का एक और बड़ा सवाल गठबंधन को लेकर है। सूत्रों के मुताबिक अकाली दल के साथ संभावित गठबंधन को लेकर चर्चा पूरी तरह खत्म नहीं हुई है और इसे लेकर राजनीतिक स्तर पर मंथन जारी है।

लेकिन दिलचस्प बात यह है कि BJP अपनी सांगठनिक तैयारी को किसी संभावित गठबंधन पर निर्भर नहीं रखना चाहती। यानी अकाली दल के साथ समझौता हो या न हो, संगठन को इस स्थिति में तैयार किया जा रहा है कि जरूरत पड़ने पर BJP पंजाब में अधिकतम सीटों पर अपने दम पर पूरी ताकत से उतर सके।

यही वजह है कि 3 से 5 हजार कार्यकर्ताओं वाले फॉर्मूले पर काफी फ़ोकस किया जा रहा है।
अगर गठबंधन होता है तो मजबूत संगठन BJP की बार्गेनिंग क्षमता को बदल सकता है। और गठबंधन नहीं होता है तो यही कैडर उसके स्वतंत्र चुनावी अभियान की रीढ़ बनेगा।

पंजाब को लेकर BJP इतनी आक्रामक क्यों?

दरअसल इसके पीछे केवल चुनावी गणित नहीं है। पंजाब भारत का सीमावर्ती राज्य है और उसकी सीमा सीधे पाकिस्तान से लगती है। सीमा पार से ड्रग्स, तस्करी और प्रोपेगेंडा जैसी चुनौतियां लगातार सामने आती रही हैं।

ऐसे में BJP के रणनीतिकार पंजाब को केवल एक और चुनावी राज्य की तरह नहीं देख रहे हैं। बंगाल के बाद पार्टी अब पंजाब जैसे राज्य में भी अपनी सांगठनिक मौजूदगी को मजबूत करना चाहती है, जहां लंबे समय तक उसकी राजनीति गठबंधन और सीमित क्षेत्रों के प्रभाव के इर्द–गिर्द रही है। इसीलिए नशामुक्ति यात्रा के बाद मिले रिस्पॉन्स को पार्टी एक अवसर की तरह देख रही है।

अब अगले 120 दिन तय करेंगे कि BJP इस रिस्पॉन्स को स्थायी राजनीतिक ताकत में बदल पाती है या नहीं। लेकिन संगठन के भीतर इसे लेकर साफ़ संदेश दिए गए हैं कि अब मजबूत इलाकों में संगठन बढ़ाने की तैयारी करनी होगी।
अगर हर विधानसभा क्षेत्र में 3 से 5 हजार सक्रिय कार्यकर्ताओं का BJP का यह फॉर्मूला जमीन पर उतरता है, तो 2027 से पहले पंजाब की चुनावी बिसात में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकता है।

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