कैप्टन स्मित मच्छार आज दुनिया के लिए हीरो हैं, लेकिन विपक्ष के बड़े चेहरे उनके लिए दो शब्द तक क्यों नहीं लिख पा रहे हैं?एक बहादुर भारतीय पायलट गंभीर रूप से घायल है। उनके सामने 180 लोगों की जिंदगी दांव पर थी। उसके ओमानी को-पायलट ने उस पर हमला किया था और विमान को क्रैश कराने की कोशिश की थी।
इज़रायल के पीएम बेंजामिन नेतनयाहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प तक ने इंडियन पायलट अमित मच्छार की तारीफ़ करते हुए कहा कि अगर उन्होने घायल होने के बावजूद बहादुरी और समझदारी से काम न लिया होता तो दुनिया 9/11 जैसा एक दूसरा हादसा देख सकती थी।
दरअसल चाकू से गोदे जाने के बावजूद भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाबी हासिल की, जिसके बाद यात्रियों और चालक दल के सदस्य अंदर पहुंचे और हमलावर को काबू किया। कुछ सह यात्रियों की मदद से पायलट आखिरकार विमान को सऊदी अरब के ताबूक में सुरक्षित उतारने में कामयाब रहे।
ये किसी चमत्कार से कम नहीं था। विमान क़रीब 30 सेकेंड में 14 हज़ार फ़ीट तक नीचे आ गया था और वहां मौजूद लोगों के पास जीवन-मृत्यु की लड़ाई लड़ने के लिए एक या डेढ़ मिनट का ही समय बचा था, लेकिन कुछ हीरोज़ की वजह से ये थ्रिलर स्टोरी रनवे पर एक सुरक्षित लैंडिंग के रूप में खत्म हुई।
कैप्टन स्मित की इस बहादुरी की चर्चा अब भारत तक सीमित नहीं है।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने उन्हें हीरो बताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनकी बहादुरी की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत को कैप्टन मच्छार पर गर्व है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, विदेश मंत्री एस जयशंकर और कई केंद्रीय मंत्रियों ने भी उनकी तारीफ की है। लेकिन इसी तारीफ के बीच भारत में एक दूसरा सवाल उठ खड़ा हुआ है। सवाल यह कि जब पूरी दुनिया एक भारतीय पायलट की बहादुरी पर बात कर रही है तो राहुल गांधी कहां हैं? प्रियंका गांधी कहां हैं? अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया कहां है?
इसी चुप्पी को लेकर भाजपा नेता संबित पात्रा ने विपक्ष को घेरा है। 1 अक्टूबर को इस स्टोरी के लिखे जाने तक राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव की तरफ से कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया हमें नहीं मिली।
सिर्फ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मीडिया के एक सवाल के जवाब में कैप्टन मच्छार की तारीफ़ की है।
लेकिन सवाल फिर भी बचता है, क्योंकि कांग्रेस अध्यक्ष बोल सकते हैं तो राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को किस बात ने रोक रखा है? और यही सवाल अखिलेश यादव जैसे दूसरे बड़े विपक्षी नेताओं से भी है। किसी नेता का सोशल मीडिया पर पोस्ट न करना अपने आप में उसकी मंशा साबित नहीं करता, लेकिन सार्वजनिक जीवन में उसकी चुप्पी पर सवाल जरूर उठाया जा सकता है।
और यहां मामला सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है।
घटना के तुरंत बाद सोशल मीडिया के एक हिस्से में इसे लेकर सवाल और कॉन्स्पिरेसी थ्योरीज़ भी शुरू हो गईं। तथाकथित बुद्धिजीवी मृणाल पांडे भी अपनी घृणा नहीं छिपा सकीं, उन्होने पहले एक पोस्ट को शेयर किया और तंज कसते हुए लिखा
“शुरुआत में कई संयोग जुट गये थे। मसलन हाईजैक हो रहे प्लेन का यमनी को-पायलट सुरक्षा को चकमा दे कर चाकू ले कर चालू विमान, दो दो प्रशिक्षित पायलटों की बतौर यात्री मौजूदगी, घायल पायलट का कॉकपिट का दरवाजा खोलते ही उनका आरोपी पर काबू और भारत के कथित फ़ादरलैंड के मुखिया द्वारा भरपूर तारीफ़!!”
यहां दो बातें गौर करने वाली हैं। वो दो ऑफ ड्यूटी पायलट्स के विमान में मौजूद होने पर सवाल खड़े कर रही हैं, जबकि ये बेहद सामान्य है, अक्सर क्रू अपनी ड्यूटी पूरी होने के बाद फ्लाइट से ही लौटते हैं।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।
इस पोस्ट पर आलोचना हुई तो मृणाल को ये पोस्ट डिलीट करना पड़ा। इसके बाद मृणाल पांडे ने एक दूसरा पोस्ट किया- माफी या संवेदना प्रकट करने के लिए नहीं, बल्कि इस बार तो और भी ज्यादा तंज़ और घृणा से भरपूर।
उन्होने लिखा:
“जनहित में श्री स्मित मच्छर को बधाई देकर हम इस अद्भुत कथा का समापन करते हैं। सभा विसर्जित होत है सुनहु वीर जिजमान,
अपने अपने प्रकोष्ठ में जाय करो विश्राम।।”
यानी पहले घटनाक्रम के कई पहलुओं को “संयोग” के रूप में एक साथ रखकर सवाल उठाए गए, फिर आलोचना के बाद पहला पोस्ट हट गया और दूसरे पोस्ट में कैप्टन को बधाई जरूर दी गई, लेकिन वह भी साफ तौर पर व्यंग्यात्मक अंदाज में।
अब पाठक इसे किस रूप में देखते हैं, यह उनका फैसला है। लेकिन सवाल जरूर है कि एक भारतीय पायलट अस्पताल में पड़ा है, स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टिंग उसके गंभीर रूप से घायल होने और कॉकपिट डोर खोलने की पुष्टि कर रही है, दुनिया भर के नेता उसकी बहादुरी की प्रशंसा कर रहे हैं, फिर इस कहानी में सबसे पहले शक और व्यंग्य खोजने की जरूरत क्यों महसूस हुई?
और शायद इसी जगह इस पूरी कहानी का राजनीतिक पहलू और दिलचस्प हो जाता है।
Flydubai की FZ1073 दुबई से तेल अवीव जा रही थी। उसमें बड़ी संख्या में इजरायली यात्री थे। आरोपी सह-पायलट ओमान का नागरिक बताया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति तक कह चुके हैं कि वह “perhaps a terrorist” हो सकता है। उन्होने ये तक कहा कि अगर कप्तान मच्छार ने बहादुरी नहीं दिखाई होती तो शायद दुनिया एक और 9/11 जैसी घटना का सामना कर चुकी होती।
तो क्या इजरायल कनेक्शन इस असहजता के पीछे है?
क्या तेल अवीव जा रहे विमान में इजरायली यात्रियों की जान बचाने वाले भारतीय की तारीफ करना कुछ लोगों की स्थापित राजनीतिक लाइन में फिट नहीं बैठता? या फिर तुष्टिकरण का पुराना रोक इन्हें स्मित मच्छार को बधाई देने से रोक रहा है कि कहीं ‘सेव फिलीस्तीन’ के नाम पर जिस वोट बैंक को रिझाते रहे हैं, वो नाराज़ न हो जाए
या इसकी कोई दूसरी वजह है?
जवाब हमारे पास नहीं है। लेकिन सवाल इसलिए जायज है क्योंकि कैप्टन स्मित मच्छार ने विमान में यह नहीं पूछा था कि यात्रियों की राष्ट्रीयता क्या है, उनका धर्म क्या है या वे इजरायल और फिलिस्तीन के सवाल पर किस तरफ खड़े हैं। उस वक्त उनके सामने सिर्फ इंसानी जिंदगियां थीं।
हालांकि ऐसा भी नहीं है कि पूरा विपक्ष यहां पर चुप्पी साधे है- अरविंद केजरीवाल ने कैप्टन मच्छार की तारीफ़ की है। शिवसेना UBT की प्रियंका चतुर्वेदी भी उनकी भारतीय पहचान को लेकर सार्वजनिक रूप से सामने आईं।
ऐसा भी नहीं है कि राहुल गांधी या अखिलेश यादव को इस घटना की जानकारी उनकी टीम के द्वारा नहीं मिली होगी। निश्चित मिली होगी- अगर वो जरा भी सोशल मीडिया या खबरों के संपर्क में होंगे तो बिल्कुल मिली होगी, फिर भी वो एक भारतीय की सलामती के लिए एक दो शब्द नहीं बोल-लिख सके।
हो सकता है कि सवाल उठाए जाने के बाद वो इस पर प्रतिक्रिया दें, लेकिन सवाल अपनी जगह बने रहेंगे।
सवाल ये भी है कि क्या भारत की राजनीतिक और वैचारिक खेमेबंदी अब उस स्तर तक पहुंच गई है जहां किसी भारतीय की बहादुरी पर प्रतिक्रिया देने से पहले भी यह देखा जाएगा कि विमान कहां जा रहा था, उसमें कौन बैठा था और आरोपी कौन था?
