भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने लड़ाकू विमानों और स्क्वॉड्रनों की घटती संख्या पर चिंता जताई है। उन्होंने शनिवार को नई दिल्ली में वायुसेना दिवस से पहले आयोजित अपनी वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वायुसेना को अपनी मौजूदा ताकत बनाए रखने और धीरे-धीरे बढ़ाने के लिए हर साल कम से कम 36 से 40 लड़ाकू विमानों को शामिल करना होगा।
हर साल करीब दो स्क्वॉड्रन के बराबर विमान जरूरी
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि अगले कुछ वर्षों में हर साल 36 से 40 विमानों की जरूरत होगी। यह संख्या करीब दो लड़ाकू स्क्वॉड्रन के बराबर है। उन्होंने कहा कि वायु शक्ति किसी भी देश की सैन्य क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा है और भारत को अपनी वायु शक्ति को और मजबूत करने की जरूरत है।
वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास स्वीकृत संख्या की तुलना में लड़ाकू स्क्वॉड्रनों की संख्या कम है। इसी वजह से नए लड़ाकू विमानों को तेजी से शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है।
114 लड़ाकू विमानों की खरीद पर भी नजर
एयर चीफ ने बताया कि 114 बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमानों की खरीद की योजना पर बातचीत चल रही है। यह सौदा इस वित्तीय वर्ष में पूरा होने की उम्मीद है, हालांकि यह कई महत्वपूर्ण मुद्दों और कीमत पर चल रही बातचीत पर निर्भर करेगा। भारत ने फरवरी में 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।
उन्होंने यह भी कहा कि रूस ने भारत को एसयू-57 लड़ाकू विमान की पेशकश की है, लेकिन अभी इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। इसके अलावा, अगर स्वदेशी एएमसीए यानी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट कार्यक्रम में और देरी होती है, तो वायुसेना दूसरे लड़ाकू विमान विकल्पों पर भी विचार कर सकती है।
स्वदेशी क्षमता बढ़ाने पर जोर
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने वायुसेना के आधुनिकीकरण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस्तेमाल पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि वायुसेना को एआई आधारित क्षमता से लैस करना जरूरी है। साथ ही उन्होंने लड़ाकू विमान के इंजन का देश में ही निर्माण करने की जरूरत बताई।
उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता वायुसेना की युद्धक तैयारी के लिए महत्वपूर्ण है। नए विमानों की तेज गति से खरीद और स्वदेशी तकनीक के विकास के साथ वायुसेना अपनी भविष्य की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
