कैसे खुली ‘एंटी हिंदू एजेंडे’ की पोल? एफिल टावर विवाद में जांच ने क्या बताया

पेरिस की जांच में BAPS के खिलाफ महिला कर्मचारियों को हटाने की स्पष्ट मांग नहीं मिली, सूचना के गलत अर्थ और प्रबंधन की गड़बड़ी को माना गया जिम्मेदार

पेरिस का एफिल टावर। दुनिया की सबसे मशहूर इमारतों में से एक। सितंबर की शुरुआत में यही जगह एक ऐसे विवाद का केंद्र बन गई, जिसने फ्रांस से लेकर भारत तक बहस छेड़ दी। आरोप था कि हिंदू संगठन BAPS के एक प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दौरान एफिल टावर की महिला कर्मचारियों को उनके काम से हटा दिया गया और उनकी जगह पुरुष कर्मचारियों को लगाया गया। कुछ ही समय में मामला कर्मचारियों के विरोध से आगे बढ़कर हिंदू धर्म, महिलाओं के अधिकार और फ्रांस में समानता के सवाल से जोड़ दिया गया। लेकिन अब पेरिस की जांच के निष्कर्ष सामने आए हैं और कहानी का एक अहम हिस्सा बदल गया है।

जांच में BAPS की ओर से महिला कर्मचारियों को हटाने या उन्हें प्रतिनिधिमंडल से दूर रखने की कोई स्पष्ट मांग नहीं मिली। जांचकर्ताओं ने पूरे घटनाक्रम के पीछे एफिल टावर के प्रबंधन में हुई सामूहिक स्तर की गड़बड़ी को जिम्मेदार माना।

पहले क्या आरोप लगाए गए थे?

5 सितंबर को BAPS से जुड़े करीब 100 लोगों का प्रतिनिधिमंडल एफिल टावर पहुंचा था। यह दौरा फ्रांस में BAPS के एक बड़े हिंदू मंदिर के उद्घाटन से जुड़े कार्यक्रमों के दौरान हुआ था।

दौरे के बाद एफिल टावर के कर्मचारियों की ओर से आरोप सामने आए कि महिला कर्मचारियों को अपने काम की जगह से हटने के लिए कहा गया। कुछ स्थानों पर उनकी जगह पुरुष कर्मचारियों को लगाया गया।

इससे कर्मचारियों में नाराजगी फैल गई। 7 सितंबर को कर्मचारियों ने विरोध किया और एफिल टावर का संचालन प्रभावित हुआ। इसके बाद मामले की जांच शुरू हुई।

उस समय एफिल टावर का संचालन करने वाली कंपनी SETE की ओर से कहा गया था कि BAPS प्रतिनिधिमंडल के दौरे को इस तरह व्यवस्थित करने का अनुरोध किया गया था, जिससे महिलाओं के साथ संपर्क सीमित रहे। बाद में SETE ने माना कि ऐसी शर्तों को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए था। यहीं से विवाद और बड़ा हो गया।

लेकिन जांच में क्या मिला?

पेरिस की सामान्य निरीक्षण संस्था ने मामले की जांच की। जांच के दौरान संबंधित लोगों से बातचीत की गई और SETE से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की गई।

निष्कर्ष में कहा गया कि BAPS की ओर से महिलाओं को पूरे दौरे के दौरान हटाने या बाहर रखने की कोई स्पष्ट मांग नहीं मिली। न ऐसा कोई लिखित आदेश मिला और न ऐसा संदेश, जिसमें BAPS ने कहा हो कि महिला कर्मचारियों को प्रतिनिधिमंडल के रास्ते से हटा दिया जाए। यानी “BAPS ने महिलाओं को छिपाने या हटाने की मांग की थी ” ये दावा को जांच ने साबित नहीं किया।

फिर महिलाओं को हटाया क्यों गया?

यही इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। जांच के मुताबिक शुरुआत में एफिल टावर के प्रबंधन तक जो बात पहुंची थी, वह कहीं ज्यादा सीमित थी। इसमें धार्मिक प्रतिनिधियों और महिलाओं के बीच शारीरिक संपर्क नहीं होने की बात थी। लेकिन यह संदेश जैसे-जैसे प्रबंधन के अलग-अलग स्तरों तक पहुंचा, उसका अर्थ बदलता गया। एक सीमित धार्मिक आवश्यकता धीरे-धीरे ऐसी व्यवस्था में बदल गई, जिसमें कुछ जगहों पर पुरुष कर्मचारियों को तैनात किया गया और महिला कर्मचारियों को उनकी जगह से हटा दिया गया।

संदेश कैसे बदल गया?

जांच में सामने आया कि समस्या केवल किसी एक व्यक्ति के फैसले की नहीं थी। सूचना कई स्तरों से होकर आगे बढ़ी और हर स्तर पर उसकी व्याख्या बदलती गई। इसी वजह से जांच ने इसे सामूहिक स्तर की प्रशासनिक गड़बड़ी बताया।

एक सीमित धार्मिक आवश्यकता को कर्मचारियों ने व्यापक व्यवस्था के रूप में लागू कर दिया। नतीजा यह हुआ कि महिलाओं को कुछ स्थानों से हटा दिया गया और पुरुष कर्मचारियों ने उनकी जगह ले ली।

यानी विवाद की मुख्य कड़ी BAPS की किसी लिखित महिला-विरोधी मांग से ज्यादा सूचना के गलत अर्थ निकाले जाने और उसके गलत तरीके से लागू किए जाने में दिखाई देती है।

BAPS ने क्या कहा?

BAPS ने शुरुआत से ही इस आरोप से इनकार किया कि उसने महिला कर्मचारियों को हटाने, छिपाने या प्रतिनिधिमंडल के रास्ते से बाहर रखने को कहा था। जांच सामने आने के बाद BAPS France ने भी कहा कि उसने महिला कर्मचारियों को बाहर रखने की कोई मांग नहीं की थी। संगठन ने जांच के निष्कर्ष का स्वागत किया।

BAPS का कहना था कि उसके साधुओं की कुछ धार्मिक और व्यक्तिगत मान्यताएं हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं था कि एफिल टावर की महिला कर्मचारियों को उनके काम से हटाया जाए।

फिर एफिल टावर के प्रमुख पर सवाल क्यों उठा?

जांच के बाद सवाल एफिल टावर के प्रबंधन पर भी गया। SETE के महानिदेशक Patrick Branco Ruivo ने घोषणा की कि वह 2026 के अंत में पद छोड़ देंगे। उन्होंने कहा कि उन्होंने महिला कर्मचारियों को हटाने या उनकी जगह बदलने का कोई निर्देश नहीं दिया था। जांच ने पूरे मामले में व्यवस्था और संगठन के स्तर पर हुई गड़बड़ियों की ओर इशारा किया।

इससे साफ है कि मामले को अब केवल BAPS से जोड़कर नहीं देखा जा रहा। एफिल टावर के प्रबंधन में फैसले कैसे लिए गए और सूचनाएं किस तरह नीचे तक पहुंचीं, यह भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।

तो क्या शुरुआती ‘एंटी हिंदू’ कहानी गलत थी?

यह कहना कि पूरा विवाद “झूठा” था, सही नहीं होगा। महिला कर्मचारियों को वास्तव में कुछ जगहों से हटाया गया था और कर्मचारियों ने इसका विरोध भी किया। लेकिन यह कहना भी जांच के निष्कर्ष के अनुरूप नहीं है कि BAPS ने महिला कर्मचारियों को हटाने का स्पष्ट आदेश दिया था। शुरुआती खबरों में जिस बात को BAPS की सीधी मांग के तौर पर देखा जा रहा था, जांच में उसका स्पष्ट दस्तावेजी प्रमाण नहीं मिला। जांच ने इसके बजाय सूचना के गलत तरीके से आगे बढ़ने और उसके गलत इस्तेमाल को इस घटनाक्रम की बड़ी वजह माना।

 

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