फ्लाईदुबई की उस उड़ान में भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला करने वाले सह-पायलट की पहचान अब हमाम अल-हमामी के तौर पर हुई है। 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट FZ1073 में उसने कॉकपिट के अंदर कैप्टन पर हमला किया और विमान का नियंत्रण लेने की कोशिश की। विमान में 182 लोग सवार थे और कुछ ही देर में विमान हजारों फीट नीचे चला गया। यात्रियों और दो ऑफ-ड्यूटी पायलटों की मदद से हमलावर को काबू किया गया और विमान सऊदी अरब के ताबुक में सुरक्षित उतरा।
अब जांच का फोकस सिर्फ उस दिन की घटना पर नहीं है। सवाल यह है कि जिस व्यक्ति के बारे में उसके पुराने नियोक्ता के स्तर पर ही कट्टरपंथी विचारों को लेकर चिंता सामने आ चुकी थी, वह बाद में एक अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन का पायलट कैसे बना?
कौन है हमाम अल-हमामी?
रिपोर्टों के मुताबिक हमाम अल-हमामी ओमान का नागरिक है और उसका जन्म संयुक्त अरब अमीरात में हुआ था। उसके पिता ओमानी और मां सीरियाई हैं। उसने ब्रिटेन की Buckinghamshire New University से एविएशन मैनेजमेंट की पढ़ाई की थी और 2023 में डिग्री पूरी की थी।
उसके करियर की टाइमलाइन भी अब जांच का अहम हिस्सा है। उसके नाम से बने और बाद में डिलीट किए गए LinkedIn प्रोफाइल के मुताबिक उसने करीब सात साल Oman Air में काम किया। इसके बाद जून 2025 में Royal Air Maroc से जुड़ा और जनवरी 2026 में वहां से निकल गया। एक इजरायली अधिकारी के मुताबिक वह करीब आठ महीने पहले Flydubai में शामिल हुआ था। CNN ने भी उसके LinkedIn प्रोफाइल को उसी व्यक्ति से जुड़ा बताया है।
Oman Air में पहले ही सामने आ गई थी चिंता
इस मामले का सबसे गंभीर पहलू उसका पुराना रिकॉर्ड है। CNN, AP और अन्य रिपोर्टों के मुताबिक Oman Air में रहते हुए उसके विचारों को लेकर चिंता पैदा हुई थी। उसे फ्लाइट ट्रेनिंग से हटा दिया गया था और बाद में एयरलाइन में दूसरी भूमिका दी गई। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि उसके पास कथित तौर पर चरमपंथी सामग्री मिलने के बाद यह कदम उठाया गया था।
लेकिन सवाल फिर भी बड़ा है कि अगर एक एयरलाइन ने उसके कथित चरमपंथी विचारों को लेकर चिंता जताई थी, तो बाद में दूसरी एयरलाइनों की नियुक्ति प्रक्रिया में यह जानकारी कितनी दूर तक पहुंची? यही अब विमानन सुरक्षा जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सोशल मीडिया पर क्या मिला?
जांचकर्ताओं की नजर उसके पुराने सोशल मीडिया खातों पर भी है। CNN ने उसके नाम से जुड़े करीब 3,000 पुराने डिलीट किए गए पोस्टों की जांच की। 2021 और 2022 के पोस्टों में महिलाओं के काम करने और पुरुष-महिला के साथ काम करने को लेकर आपत्तिजनक तथा बेहद रूढ़िवादी विचार बताए गए हैं। कुछ पोस्टों में कथित तौर पर उसने ऐसी पत्नी की इच्छा जताई थी जो नकाब पहने और शादी के बाद नौकरी न करे।
लेकिन सोशल मीडिया पोस्ट और किसी व्यक्ति के वास्तविक आपराधिक इरादे के बीच फर्क करना जरूरी है। ये पोस्ट उसके कथित विचारों का संकेत हो सकते हैं, लेकिन अकेले इनसे यह साबित नहीं होता कि 30 सितंबर का हमला किस मकसद से किया गया था। यही कारण है कि जांच एजेंसियां डिजिटल रिकॉर्ड को दूसरे सबूतों के साथ जोड़कर देख रही हैं।
हमले के बाद आए अल-कायदा से जुड़े पोस्ट ने बढ़ाई चिंता
मामले को और गंभीर बनाने वाली बात उसके नाम से जुड़े LinkedIn और Instagram खातों पर घटना के बाद सामने आए दो पोस्ट हैं। एक वीडियो में Boeing 737 Max के कॉकपिट के दृश्य और दुबई एयरपोर्ट पर El Al के विमान दिखाई देने की बात सामने आई है। वीडियो के अंत में अल-कायदा के पूर्व प्रमुख अयमान अल-जवाहिरी और 2009 के Camp Chapman हमले के हमलावर हुमाम खलील अबू-मुलाल अल-बलावी की तस्वीरें दिखाई गई थीं। दूसरे पोस्ट में मक्का, मदीना और यरुशलम जो कि इस्लाम के तीन पवित्र स्थलों को दिखाने वाली AI-generated तस्वीर और एक कविता थी।
हालांकि यहां भी एक महत्वपूर्ण सवाल बाकी है कि पोस्टों को वास्तव में किसने अपलोड किया और क्या वे हमाम के ही पोस्ट थे? CNN की रिपोर्टिंग के मुताबिक दोनों पोस्ट घटना के करीब नौ घंटे बाद सामने आए थे। इसलिए जांचकर्ता उनकी प्रामाणिकता और अपलोड करने वाले व्यक्ति की पुष्टि भी कर रहे हैं।
क्या हमला आतंकवादी था?
संयुक्त अरब अमीरात ने घटना की जांच शुरू कर दी है। UAE के Attorney General ने यह पता लगाने के लिए जांच के आदेश दिए हैं कि हमला आतंकी गतिविधि से जुड़ा था या नहीं और क्या इसमें पहले से योजना या किसी बाहरी व्यक्ति/संगठन का निर्देश था। वहीं UAE के राष्ट्रपति के सलाहकार अनवर गर्गाश ने घटना को सार्वजनिक रूप से “act of terrorism” बताया है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी कहा है कि आरोपी के बारे में माना जाता है कि वह “Islamist radical indoctrination” से गुजरा था। लेकिन अंतिम कानूनी निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा।
ओमानी नागरिक तेल अवीव जा रही फ्लाइट में कैसे पहुंचा?
यह इस मामले का एक और बड़ा सवाल है। ओमान इजरायल को आधिकारिक तौर पर मान्यता नहीं देता। ऐसे में एक ओमानी नागरिक का तेल अवीव जाने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ान के कॉकपिट में सह-पायलट के रूप में होना जांचकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण सवाल बन गया है।
इजरायली अधिकारियों के मुताबिक Shin Bet, Mossad, सेना और Transportation Ministry इस बात की जांच कर रहे हैं कि हमाम Flydubai की इस उड़ान के क्रू का हिस्सा कैसे बना। हालांकि ये सवाल सिर्फ उसकी राष्ट्रीयता का नहीं है। असली सवाल है कि क्या भर्ती, बैकग्राउंड चेक और सुरक्षा मंजूरी की प्रक्रिया में उसके पुराने रिकॉर्ड को पर्याप्त महत्व दिया गया था?
सबसे बड़ा सवाल: क्या सुरक्षा व्यवस्था में कोई गैप था?
इस पूरे मामले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी शायद यही है। एक तरफ एक ऐसा पायलट है जिसके बारे में पुराने नियोक्ता के स्तर पर कथित चरमपंथी विचारों को लेकर चिंता सामने आई थी। दूसरी तरफ वह बाद में Royal Air Maroc और फिर Flydubai तक पहुंच गया।
अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि किसी एक एयरलाइन या एजेंसी ने निश्चित तौर पर लापरवाही की। जांच को यह स्थापित करना होगा कि Oman Air में सामने आई जानकारी क्या थी, वह किस रिकॉर्ड में दर्ज हुई, क्या उसे किसी अन्य संस्था के साथ साझा किया गया और बाद की नियुक्तियों में उसकी जांच कैसे हुई।
और यही Flydubai FZ1073 की कहानी को सिर्फ एक विमान में हुए हमले से आगे ले जाता है। यह अब पायलट की भर्ती, सुरक्षा जांच, खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान और अंतरराष्ट्रीय विमानन सुरक्षा से जुड़े कई सवालों की जांच बन चुका है। फिलहाल जांच जारी है और हमाम अल-हमामी के हमले के अंतिम मकसद तथा किसी संभावित आतंकी नेटवर्क से उसके संबंध पर अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है।
