‘जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है’, ये कथन एक व्यक्ति के जीवन का संक्षिप्त परिचय कराने के लिए...
‘दुश्मनी पर्सनल है, निभानी तो पड़ेगी!’ दबंग-3 का यह डायलॉग आश्चर्यजनक रूप से पाकिस्तान के एक परिवार पर बड़ा सटीक फिट होता है।...
क्या आपने कभी सोचा है कि जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री होते हुए भी अपने गृहमंत्री से इतने असहज क्यों रहते थे? कभी सोचा है...
किसी व्यक्ति ने सही ही कहा था, ‘बदलाव तभी सार्थक है, जब आप उस बदलाव का हिस्सा बने!’ कुछ लोग बातें तो बड़ी-बड़ी...
डिमेंशिया एक बीमारी है। उस बीमारी में व्यक्ति झल्ला जाता है, शब्द टूटकर बाहर आते है, उसे नींद आती है, वो चीजें भूल...
NCERT कहने को तो भारत में शिक्षण व्यवस्था की देख-रेख करता है, लेकिन यही संस्थान भारत की मूलभूत संस्कृति से खिलवाड़ भी कर...
जब भी पाकिस्तान की बात आती है, द्विराष्ट्र सिद्धांत का मुद्दा भी सामने आता है। इस सिद्धांत को जन्म देने वाले सर सैयद...
अक्टूबर 1965, में डॉ होमी जहांगीर भाभा ने ऑल इंडिया रेडियो पर घोषणा की थी कि अगर उन्हें अनुमति मिल जाती है, तो...
जो नहीं होना चाहिए था, वो हो गया। सबकी आंखों के समक्ष उनके प्रिय नेता पर कुछ नीच, निकृष्ट अंग्रेज़ और उनके चाटुकार...
ब्रिक्स की स्थापना कब हुई? ब्रिक्स जिसे उस समय ब्रिक नाम से जाना जाता था की औपचारिक स्थापना वर्ष 2006 के जून माह...
'जिन्ना टावर' गुंटूर : विश्वास करिए, वो तो सनातन संस्कृति के शौर्य और संस्कार हैं, जिन्होंने आपके अंदर मानवता के उच्च आदर्शों और...
“जो कलम सरीखे टूट गये पर झुके नहीं, उनके आगे यह दुनिया शीश झुकाती है जो कलम किसी कीमत पर बेची नहीं गई,...


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