TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    मेट्रो में शालीनता, सड़कों पर अव्यवस्था

    मेट्रो में लाइन, बसों में धक्का-मुक्की: आर्थिक सर्वेक्षण ने बताई वजह

    मणिपुर विधानसभा

    मणिपुर को आज मिल सकता है नया मुख्यमंत्री, संभावित सरकार गठन को लेकर बीजेपी मुख्यालय में विधायक दल की बैठक

    युवाओॆ का बजट

    युवा चेतना को लेकर क्या कहता है 2026–27 का यूनियन बजट ?

    सुप्रीमकोर्ट ने डेटा लिक को लेकर दी कड़ी चेतावनी

    डेटा प्राइवेसी पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख, व्हाट्सएप के खिलाफ सख्त चेतावनी

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    युवाओॆ का बजट

    युवा चेतना को लेकर क्या कहता है 2026–27 का यूनियन बजट ?

    भारत-यूरोपीय संघ समझौता वैश्विक व्यापार के लिए बड़ा अवसर

    पीएम मोदी-ट्रम्प के बीच बातचीत के बाद भारत पर अमेरिकी टैरिफ घट कर हुआ 18%

    वित्त मंत्री ने देश का रक्षा बजट ₹6.81 लाख करोड़ से बढ़ाकर ₹7.85 लाख करोड़ कर दिया है

    रक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा फोकस: बजट 2026–27 की रणनीति

    भारत में डेटा सेंटर इस्तेमाल करने वाली विदेशी कंपनियों को 20 साल तक टैक्स में राहत

    भारत में डेटा सेंटर इस्तेमाल करने वाली विदेशी कंपनियों को 20 साल तक टैक्स में राहत

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    डिंगातारा सिंगापुर के साथ मिलकर करेगा उपग्रहों की सुरक्षा

    अंतरिक्ष मलबे से निपटने के लिए भारतीय स्टार्टअप डिंगातारा और सिंगापुर की साझेदारी

    भारत-जर्मनी की मेगा सबमरीन डील

    भारत-जर्मनी की मेगा सबमरीन डील जल्द! समुद्र में बढ़ेगी भारत की ताकत

    MSME और ड्रोन उद्योग पर राहुल गांधी के बयान, BJP ने किया खंडन

    मेक इन इंडिया पर राहुल गांधी की आलोचना, भाजपा का पलटवार

    ravikota

    एलसीए मैन’ रवि कोटा संभालेंगे एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की जिम्मेदारी, उत्पादन और सुधार पर रहेगा फोक्स

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    भारत–EU सहयोग को नई गति

    समुद्री निगरानी को मजबूत करता भारत, यूरोपीय संघ को दी IFC-IOR तक पहुंच

    एलन मस्क को भारत से बड़ा झटका

    एलन मस्क को झटका : भारत ने स्टारलिंक के GEN-2 सैटेलाइट सिस्टम को किया खारिज

    तिब्बत में चीनी नियंत्रण के दावों की समीक्षा

    तिब्बत का इतिहास और चीन का दावा: “प्राचीन शासन” मिथक पर सवाल

    भारत तीसरा एशियाई देश बना

    भारत तीसरा एशियाई देश बना जिसने यूरोपीय संघ के साथ सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पक्की की

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    के एम करियाप्पा अनुशासन के प्रतीक

    फील्ड मार्शल के .एम. करियाप्पा : अनुशासन और देशभक्ति की मिसाल

    10 फिल्में जो होलोकॉस्ट और नाजी क्रूरता को दर्शाती हैं

    इतिहास की गवाही: 10 फिल्में जो होलोकॉस्ट और नाजी क्रूरता को दर्शाती हैं

    नेहरू अपने निजी अकाउंट में जमा कराना चाहते थे कुछ खजाना!

    नेताजी की आजाद हिंद फौज के खजाने का क्या हुआ? क्यों खजाने की लूट पर जांच से बचते रहे जवाहर लाल नेहरू ?

    भारतीय संविधान और मौलिक अधिकार

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकार बाहर से नहीं आए, इनकी संकल्पना भारतीय ज्ञान परंपरा में सदियों से मौजूद है

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    आतंक के खिलाफ बड़ा कदम: J&K में 5 सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त

    जम्मू कश्मीर में 5 सरकारी कर्मचारी सेवा से बर्खास्त , जानें क्यों मनोज सिन्हा ने लिया यह फैसला?

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    शोले फिल्म में पानी की टंकी पर चढ़े धर्मेंद्र

    बॉलीवुड का ही-मैन- जिसने रुलाया भी, हंसाया भी: धर्मेंद्र के सिने सफर की 10 नायाब फिल्में

    नीतीश कुमार

    जेडी(यू) के ख़िलाफ़ एंटी इन्कंबेसी क्यों नहीं होती? बिहार में क्यों X फैक्टर बने हुए हैं नीतीश कुमार?

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    मेट्रो में शालीनता, सड़कों पर अव्यवस्था

    मेट्रो में लाइन, बसों में धक्का-मुक्की: आर्थिक सर्वेक्षण ने बताई वजह

    मणिपुर विधानसभा

    मणिपुर को आज मिल सकता है नया मुख्यमंत्री, संभावित सरकार गठन को लेकर बीजेपी मुख्यालय में विधायक दल की बैठक

    युवाओॆ का बजट

    युवा चेतना को लेकर क्या कहता है 2026–27 का यूनियन बजट ?

    सुप्रीमकोर्ट ने डेटा लिक को लेकर दी कड़ी चेतावनी

    डेटा प्राइवेसी पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख, व्हाट्सएप के खिलाफ सख्त चेतावनी

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    युवाओॆ का बजट

    युवा चेतना को लेकर क्या कहता है 2026–27 का यूनियन बजट ?

    भारत-यूरोपीय संघ समझौता वैश्विक व्यापार के लिए बड़ा अवसर

    पीएम मोदी-ट्रम्प के बीच बातचीत के बाद भारत पर अमेरिकी टैरिफ घट कर हुआ 18%

    वित्त मंत्री ने देश का रक्षा बजट ₹6.81 लाख करोड़ से बढ़ाकर ₹7.85 लाख करोड़ कर दिया है

    रक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा फोकस: बजट 2026–27 की रणनीति

    भारत में डेटा सेंटर इस्तेमाल करने वाली विदेशी कंपनियों को 20 साल तक टैक्स में राहत

    भारत में डेटा सेंटर इस्तेमाल करने वाली विदेशी कंपनियों को 20 साल तक टैक्स में राहत

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    डिंगातारा सिंगापुर के साथ मिलकर करेगा उपग्रहों की सुरक्षा

    अंतरिक्ष मलबे से निपटने के लिए भारतीय स्टार्टअप डिंगातारा और सिंगापुर की साझेदारी

    भारत-जर्मनी की मेगा सबमरीन डील

    भारत-जर्मनी की मेगा सबमरीन डील जल्द! समुद्र में बढ़ेगी भारत की ताकत

    MSME और ड्रोन उद्योग पर राहुल गांधी के बयान, BJP ने किया खंडन

    मेक इन इंडिया पर राहुल गांधी की आलोचना, भाजपा का पलटवार

    ravikota

    एलसीए मैन’ रवि कोटा संभालेंगे एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की जिम्मेदारी, उत्पादन और सुधार पर रहेगा फोक्स

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    भारत–EU सहयोग को नई गति

    समुद्री निगरानी को मजबूत करता भारत, यूरोपीय संघ को दी IFC-IOR तक पहुंच

    एलन मस्क को भारत से बड़ा झटका

    एलन मस्क को झटका : भारत ने स्टारलिंक के GEN-2 सैटेलाइट सिस्टम को किया खारिज

    तिब्बत में चीनी नियंत्रण के दावों की समीक्षा

    तिब्बत का इतिहास और चीन का दावा: “प्राचीन शासन” मिथक पर सवाल

    भारत तीसरा एशियाई देश बना

    भारत तीसरा एशियाई देश बना जिसने यूरोपीय संघ के साथ सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पक्की की

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    के एम करियाप्पा अनुशासन के प्रतीक

    फील्ड मार्शल के .एम. करियाप्पा : अनुशासन और देशभक्ति की मिसाल

    10 फिल्में जो होलोकॉस्ट और नाजी क्रूरता को दर्शाती हैं

    इतिहास की गवाही: 10 फिल्में जो होलोकॉस्ट और नाजी क्रूरता को दर्शाती हैं

    नेहरू अपने निजी अकाउंट में जमा कराना चाहते थे कुछ खजाना!

    नेताजी की आजाद हिंद फौज के खजाने का क्या हुआ? क्यों खजाने की लूट पर जांच से बचते रहे जवाहर लाल नेहरू ?

    भारतीय संविधान और मौलिक अधिकार

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकार बाहर से नहीं आए, इनकी संकल्पना भारतीय ज्ञान परंपरा में सदियों से मौजूद है

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    आतंक के खिलाफ बड़ा कदम: J&K में 5 सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त

    जम्मू कश्मीर में 5 सरकारी कर्मचारी सेवा से बर्खास्त , जानें क्यों मनोज सिन्हा ने लिया यह फैसला?

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    शोले फिल्म में पानी की टंकी पर चढ़े धर्मेंद्र

    बॉलीवुड का ही-मैन- जिसने रुलाया भी, हंसाया भी: धर्मेंद्र के सिने सफर की 10 नायाब फिल्में

    नीतीश कुमार

    जेडी(यू) के ख़िलाफ़ एंटी इन्कंबेसी क्यों नहीं होती? बिहार में क्यों X फैक्टर बने हुए हैं नीतीश कुमार?

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

क्या गाँधी वास्तव में ब्रिटिश साम्राज्य के लिए खतरा थे?

Abhishek Mishra द्वारा Abhishek Mishra
4 December 2017
in इतिहास
गाँधी-ब्रिटिश-साम्राज्य

Lord and Lady Mountbatten with Gandhi

Share on FacebookShare on X

स्कूल के दिनों में हमने भारत को आजाद कराने वाले लोगों के संघर्ष के बारे में अध्ययन करते हुए, मोहनदास करमचन्द गाँधी के गुणगानों को भी सुना और पढ़ा है। “दे दी हमें आजादी बिना खड़ग बिना ढाल साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल” यह गीत उनकी प्रशंसा में लिखे गए सैंकड़ो गीतों में से एक है। गाँधी एक युगपुरुष से कम नहीं थे, वे अंग्रेजों के घोर-विरोधी थे और साम्राज्यवादी ताकतों से अपने देश की स्वतंत्रता छीनने का माद्दा रखते थे। लेकिन एक सवाल यह उठता है कि अगर भारत में गाँधी वास्तव में अंग्रेजों के लिए बहुत बड़ा खतरा थे तो अंग्रेज उन्हें अपने रास्ते से हटाना क्यों नहीं चाहते थे?

अंग्रेज अपने शत्रुओं से छुटकारा पाने के लिए नैतिक और अनैतिक दोनों तरीकों का प्रयोग करने के लिए जाने जाते थे। अगर वास्तव में अंग्रेजों को यह लगता कि गाँधी उनके रास्ते में बाधा हैं तो वे उन्हें आसानी से मार कर इस मुद्दे को हमेशा के लिए सुलझा सकते थे और इस बात को दबाने के लिए मीडिया भी उनके नियंत्रण में थी। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।

संबंधितपोस्ट

वंदे मातरम् के 150 वर्ष: बंकिमचंद्र की वेदना से जनमा गीत, जिसने भारत को जगाया और मोदी युग में पुनः जीवित हुआ आत्मगौरव

सरदार पटेल: लौहपुरुष जिन्होंने मातृभूमि के लिए अपना सबकुछ कुर्बान कर दिया

लंदन में गांधी की प्रतिमा का अपमान- कोई नई बात नही, पहले भी हो चुके कई हमले! गांधीविरोध की क्या है वजह?

और लोड करें

आइए जानने की कोशिश करें ऐसा क्यों?

अंग्रेज भारत पर लंबे समय तक शासन करना चाहते थे। यूरोपीय देशों ने लाभ पाने के उद्देश्य से विश्वभर में उपनिवेश किया था। भारत में सस्ते श्रम, सस्ते कच्चे माल और एक बड़े बाजार की सुविधा उपलब्ध थी। इसलिए हम यह मान सकते हैं कि अंग्रेजों का इरादा भारत छोड़ने का बिलकुल नहीं था, वे चाहते थे कि ज्यादा से ज्यादा दिनों तक वे भारत पर शासन करें।

अंग्रेजों ने अपने रास्ते में बाधा बन रहे ऐसे किसी भी व्यक्ति को नहीं बख्शा, जो उनके लक्ष्यों और मंसूबों के लिए खतरा थे। ख़ास तौर पर 20वीं शताब्दी में अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए, उन्होंने पक्षपाती कानून, भ्रष्ट व्यवहार और अनैतिक तरीकों का प्रयोग करके राजनैतिक हत्याएं भी कीं। ब्रिटिश औपनिवेशिक इतिहास खून में लथपथ है। हम जानते हैं कि उत्तरी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका या भारत में मूल आबादी का क्या हश्र हुआ था।

जैसा कि हमारे इतिहास की किताबें हमें बताती हैं कि भारत में गाँधी, ब्रिटिश साम्राज्य के लिए सबसे बड़ा खतरा थे।

अब इस तथ्य के आधार पर पहले दो बिंदु गलत साबित होते हैं। हम जानते हैं कि अंग्रेज भारत को छोड़ना नहीं चाहते थे और हम यह भी जानते हैं कि अंग्रेजों ने उनके रास्ते में अड़चनें पैदा कर रहे लोगों को बहुत ही आसानी से मार दिया था। लेकिन उन्होंने इसके लिए गाँधी को क्यों छोड़ दिया? जिन्होंने भारत को स्वतंत्रता दिलाई और जो भारत में अंग्रेजी शासन के लिए सबसे बड़ा खतरा माने जाते थे।

इसका तार्किक स्पष्टीकरण केवल यह है कि वास्तव में गाँधी ब्रिटिश साम्राज्य के लिए कोई खतरा नहीं थे।

गाँधी को पाँच बार गिरफ्तार किया गया और उन्हें हर बार बहुत ही कम अवधि की सजा सुनाई गई थी, उनकी सबसे लंबी अवधि की सजा केवल छह साल की थी। इन पाँच बार में चार बार गाँधी जल्दी-जल्दी जेल जाते गए और अविश्वनीय रूप से पूरी सजा काटे बिना ही उन्हें रिहा कर दिया गया। जेल में समय बिताने की उनकी सबसे लंबी अवधि एक साल और दस महीने थी। कैसे अंग्रेज, उस व्यक्ति पर इतना दयावान हो सकते हैं, जिसे पूरा राष्ट्र अपनी आजादी के नायक के रूप में देखता था।

इसमें एक तर्क यह हो सकता है कि गाँधी ने कभी भी कोई कानून नहीं तोड़ा होगा, जिसके लिए उन्हें उम्र कैद या मौत की सजा सुनाई जाती। यह तर्क बिल्कुल गलत है क्योंकि गाँधी ने ऐसे कानून तोड़े थे, जिसके लिए आजीवन कारावास या मौत की सजा का प्रावधान था, लेकिन सोचनीय बात तो यह है कि उनके ऊपर ऐसे कोई आरोप कभी लगाए ही नहीं गए। उदाहरण के लिए, महामहिम (या इंग्लैंण्ड के विरुद्ध) के खिलाफ युद्ध छेड़ना एक धारा थी जो लगभग हर स्वतंत्रता सेनानी पर लगायी गयी, इसमें भगत सिंह (जिन्होंने स्वेच्छा से समर्पण किया) और सावरकर जैसे लोग भी शामिल हैं।

सावरकर, ब्रिटिश विरोधी गतिविधियों के संदेह में विदेश में पकड़े गए थे। हालांकि जब ये भारत से निर्वासित किए जा रहे थे तो इन्होंने भागने की कोशिश की लेकिन ये पकड़े गए और इन्हें दो जन्मों के आजीवन करावास की सजा सुनाई गई। उनके चार्जशीट में “द क्राउन के खिलाफ युद्ध छेड़ने” का उल्लेख किया गया था। उन्हें दुनिया की सबसे खराब जेल काला पानी में भेजा गया, जहाँ कैदी प्रतिदिन अपनी मौत के लिए प्रार्थना करते थे। काला पानी में ग्यारह वर्षों की सजा के बाद उन्हें इस शर्त पर छोड़ दिया गया था कि अब वह भारतीय राजनीति और क्रांतिकारी गतिविधियों में शामिल नहीं होंगे।

गाँधी को कभी भी इन स्वतंत्रता सेनानियों की तरह सजा नहीं दी गई। बल्कि वह तय अवधि से पहले ही, बिना किसी शर्त के जेल से रिहा कर दिए जाते थे। अगर अंग्रेजों का उद्देश्य भारत न छोड़ने का था और यह भी स्पष्ट था कि गाँधी जी अहिंसक होकर लड़ रहे थे लेकिन फिर भी ये अंग्रेंजों के खिलाफ एक शक्तिशाली युद्ध था, तब भी अंग्रेजों ने कुछ क्यों नहीं किया? गाँधी के नेतृत्व वाला असहयोग आन्दोलन जो कि देशद्रोह के आरोपों का समर्थन करता था फिर भी वे सभी चुपचाप क्यों बैठे रहे और उन्होंने गाँधी द्वारा उनको बाहर क्यों निकालने दिया?

काला पानी की सजा का इस्तेमाल मुख्य रूप से स्वतंत्रता सेनानियों को रोकने के लिए किया जाता था, ताकि लोग उनके बारे में भूल जाएं, क्योंकि उन्हें मारने से वे लोगों के दिलों में शहीद हो जाते थे, जिससे लोग और अधिक हिंसक हो जाते थे। लेकिन गाँधी पर कभी भी देशद्रोह का आरोप नहीं लगाया गया और न हीं उन्हें काला पानी भेजा गया।

गाँधी को एक राजनीतिक कठपुतली कहना निश्चित रूप से अनुचित होगा, लेकिन ऐसा लगता है कि अंग्रेजों ने उन्हें अपने लाभ के लिए उपयोग करने का तरीका ढूँढ़ लिया था। मुझे पूरा भरोसा है कि गाँधी जैसे चतुर, नीतिकुशल और दूरदर्शी राजनीतिज्ञ को ये ज़रूर पता चल गया होगा कि अंग्रेजी हुकूमत उनके साथ अलग सा व्यवहार कर रही है।

गाँधी ने जनता की राय को प्रभावित किया और फांसी या काला पानी के भय के बिना स्वतंत्रता संग्राम में डटकर लड़ते रहे। यह काफी उल्लेखनीय है। फिर उन्होंने एक मामूली घटना की वजह से असहयोग आंदोलन समाप्त कर दिया, जिसकी आलोचना सुभाष चंद्र बोस सहित कई स्वतंत्रता सेनानियों ने की।

यह अच्छी तरह से ज्ञात है कि गाँधी द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अंग्रेजों की सहायता करते थे और अफ्रीका के मूल निवासियों के स्वतंत्रता संग्राम के खिलाफ लड़े थे। उन्होंने भारतीय सैनिको को विश्व युद्ध में अंग्रेजों के लिए लड़ने के लिए प्रेरित किया। इतिहासकारों ने हमेशा यह बताने असहजता महसूस की  है कि शांति और अहिंसा के दूत ब्रिटिश सेना के लिए भर्ती क्यों कर रहे थे?

क्या गाँधी एक अवसरवादी नेता हो सकते हैं जिनको अंग्रेजों से मदद मिली? 1920 के दशक के दौरान जब गाँधी से इस बारे में पूछा गया तो गाँधी ने विपरीत प्रतिक्रिया व्यक्त की।

उन्हें अंग्रेज शासित भारत के द्वारा केसर-ए-हिंद पदक से सम्मानित किया गया था। एक तरफ उन्होंने सत्याग्रह आंदोलन किया वहीँ दूसरी ओर और अंग्रेजों के लिए लड़ने के लिए लोगों की भर्ती की (1917-1919)। हमें यह याद रखना चाहिए कि अंग्रेजों ने भारतीय लोगों को सबसे खराब मोर्चे पर भेज दिया था, जहाँ मरने की संभावना बहुत अधिक थी। ज़ाहिर सी बात है कि वे अंग्रेजों को पहले नहीं मरने दे सकते थे!

अंग्रेज हमेशा अपने अधीन किसी राज्य में होने वाले हिंसक विद्रोह के भय में जीवन व्यतीत करते थे। अमेरिका अंग्रेजों की अधीनता से एक हिंसक संघर्ष के माध्यम से १७७६ में आजाद हुआ था। १८५७ का स्वतंत्रता संग्राम भी एक इसी तरह का एक विद्रोह था, अंग्रेजों ने अपना भविष्य देख लिया कि यदि अगर अगला ऐसा ही कोई भीषण आंदोलन हुआ तो वह भारत में और अधिक टिक नहीं पाएंगे। ऐसे में उन्हें एक ऐसे व्यक्ति की आवश्यकता थी जो जनता की विचारधारा को बदलकर उनके गुस्से को भटका कर उनका नेतृत्व करे और उनको अहिंसा के रास्ते पर ले जा सके।

हिंसक संघर्ष का मतलब था कि ब्रिटिश राज एक ही महीने के अन्दर साफ़ हो जाता। क्रन्तिकारी यही करना चाहते थे लेकिन गाँधी द्वारा युवाओं को क्रांतिकारियों का अनुसरण न करने के लिए प्रेरित करके उन्हें लगातार कमजोर करने का प्रयास किया गया। इसके लिए गाँधी ने अंग्रेजो के हिंसक अत्याचारों पे बहुत कम बोला लेकिन क्रांतिकारियों के हिंसक संघर्ष पे बोलने के लिए उनके पास बहुत कुछ था।

ये बिल्कुल स्पष्ट था कि अंग्रेज़ चाहते थे कि गाँधी जहाँ तक संभव हो सके, भारतीयों को शांत रखें। जिससे कि आज़ादी को जितने लम्बे समय तक संभव हो, टाला जा सके। गाँधी के उपवासों ने अंग्रेजों पे असर डाला, इसलिए नहीं कि अंग्रेजों को गाँधी की मौत का डर था बल्कि इसलिए कि गाँधी की मौत के बाद भारत में हिंसक संघर्ष शुरू हो जायेगा। स्वयं गाँधी भी इस बात से भलीभांति परिचित थे कि काफी हद तक उन्होंने अपना ये ढोंग कायम भी इसीलिए रखा था। वास्तव में गाँधी का उपवास, हिंसा की एक धमकी थी। उनके समर्थकों द्वारा ये तर्क दिया गया की सशस्त्र संघर्ष से आज़ादी तो मिल जाएगी लेकिन लोकतंत्र बहाल नहीं हो पायेगा और एकता का भी अभाव रहेगा। अमेरिका भी एक हिंसक संघर्ष के बाद पचास राज्यों के संयुक्त देश लोकतंत्र के रूप में स्थापित हुआ।

अंग्रेज़ गाँधी को जिस जगह देखना चाहते थे गाँधी ठीक वहीं पर थे। उन्होंने जानबूझकर या अनजाने में जो कुछ भी किया उससे ब्रिटिश राज को यहाँ बने रहने में मदद मिली। अंग्रेजों को, गाँधी पर राज द्रोह लगाकर कालापानी जेल भेजने, फांसी देने, या उन्हें गुप्त तरीके से मार देने की भी आवश्यकता नहीं थी। उनकी हत्या या फांसी देश को संघर्ष की तरफ धकेल सकती था लेकिन उन्हें कालापानी जेल भेजने से ऐसा कोई भी प्रभाव नहीं पड़ता, फिर भी अंग्रेजों ने ऐसा नहीं किया। हमें जिस व्यक्ति के बारे में ये पढाया गया कि उन्होंने विश्व के सबसे बड़े साम्राज्य को घुटनों टेकने को मजबूर कर दिया, वो अंग्रेजों के लिए संभवतः कोई खतरा थे ही नहीं। जो लोग वास्तव में उनके लिए खतरा थे उन्हें या तो फांसी दी गयी, गोली मारी गयी, गुप्त तरीके से हत्या कर दी गयी या बहुत लम्बे समय के लिए कारावास की सजा के लिए भेज दिया गया।

एक वकील होने के नाते गाँधी ब्रिटिश कानूनों और नौकरशाही को लगभग सभी भारतीयों से बेहतर समझते थे, जिसे उन्होंने निश्चित तौर पर अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया। आमजनता में गाँधी वो गाँधी हैं ही नहीं जिन्हें हम लोगों ने जाना और पढ़ा है। उनकी कहानी को उन लोगों ने बदल दिया जो लोग स्वतंत्रता के बाद सत्ता में आये। इतिहास विजेताओं द्वारा लिखा गया है। उनकी गलतियों की अनदेखी की गई, उनके अतीत को मिटा दिया गया, उनके पाखंड को इतिहास से हटा दिया गया और गाँधी को भारत का राष्ट्रपिता घोषित कर दिया गया। इसका एक उदाहरण है “गाँधी” फिल्म का बनना, जिसे भारतीय राजकोष द्वारा एक तिहाई वित्त पोषित किया गया था। इंदिरा गाँधी और कांग्रेस के प्रमुखतम व्यक्ति इस फिल्म के प्रोडक्शन से पहले के प्रमुख बिन्दुओं के निर्धारण के समय मौजूद थे। कथानक उन्होंने चुना था इसलिए दुनिया ने सिर्फ वही जाना जिसे वे चाहते थे कि दुनिया जाने।

अतः क्या गाँधी वास्तव में ब्रिटिश साम्राज्य के लिए खतरा थे? क्या उन्होंने वास्तव में हमें आजादी दिलवाई जैसा कि हमारी पाठ्यपुस्तकों में दावा किया जाता है? क्या उन्होंने अंग्रेजों की सहायता की थी जिसकी वज़ह से अंग्रेज़ उनको नहीं हटा सके? इस निबंध को पढने के बाद आपकी ये जिम्मेदारी बनती है कि आप भी सब कुछ समझने के बाद उत्तर ढूंढें कि क्या गाँधी हमारे लिए खड़े थे या नहीं खड़े थे। आगे और भी सवाल पूछना न भूलें।

Tags: गाँधीब्रिटिश साम्राज्यमहात्मा गाँधी
शेयर908ट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

हम्मीर सिंह सिसोदिया: वह राजपूत योद्धा जिसने समूचे राजपुताना के गौरव को पुनर्स्थापित किया

अगली पोस्ट

सैनिटरी नैपकिन पर 12% जीएसटी के पीछे का गणित

संबंधित पोस्ट

के एम करियाप्पा अनुशासन के प्रतीक
इतिहास

फील्ड मार्शल के .एम. करियाप्पा : अनुशासन और देशभक्ति की मिसाल

29 January 2026

फील्ड मार्शल कोडंडेरा मदप्पा करियप्पा, जिन्हें प्यार से के.एम. करियप्पा कहा जाता है, भारतीय सेना के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ और राष्ट्र सेवा, अनुशासन और समर्पण...

10 फिल्में जो होलोकॉस्ट और नाजी क्रूरता को दर्शाती हैं
इतिहास

इतिहास की गवाही: 10 फिल्में जो होलोकॉस्ट और नाजी क्रूरता को दर्शाती हैं

28 January 2026

होलोकॉस्ट एक सुनियोजित, राज्य-प्रायोजित नरसंहार था, जिसे 1933 से 1945 के बीच नाजी जर्मनी ने एडॉल्फ़ हिटलर के नेतृत्व में अंजाम दिया। इसका मूल कारण...

नेहरू अपने निजी अकाउंट में जमा कराना चाहते थे कुछ खजाना!
इतिहास

नेताजी की आजाद हिंद फौज के खजाने का क्या हुआ? क्यों खजाने की लूट पर जांच से बचते रहे जवाहर लाल नेहरू ?

23 January 2026

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की वर्ष 1945 में हुए विमान हादसे में मृत्यु होने के दावे को लगभग खारिज किया जा चुका है, लेकिन इससे...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

Between Rafale and AMCA; Where Does the Su-57 Fit | IAF| HAL | Wings India

Between Rafale and AMCA; Where Does the Su-57 Fit | IAF| HAL | Wings India

00:06:10

Pakistan’s Rafale Narrative Ends at Kartavya Path| Sindoor Formation Exposes the BS022 Claim | IAF

00:09:35

If US Says NO, F-35 Can’t Fly: The Hidden Cost of Imports | Make In India

00:06:15

Republic Day Shock: India’s Hypersonic Warning to the World| DRDO | HGV | Indian Army

00:05:24

French Media Exposes Pakistan and China on the Rafale lost

00:04:36
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited