कैसे चीन प्रेमी WHO ने सुनिश्चित किया कि ‘Xi’ वेरिएंट कभी सामने आये ही नहीं

जो हुकुम जिनपिंग आका!

XI Virus चीन WHO

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कोरोना महामारी चीन से उपजी और समस्त विश्व में फैली। कैसे उपजी ये विवाद का विषय है, क्योंकि चीन ने कभी इस मसले पर निष्पक्ष जांच नहीं होने दिया। इसका कारण चीन का वैश्विक षडयंत्र, अपनी वैश्विक छवि का रक्षण और कोरोना को वैश्विक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की नियति के कारण था, यह बात तो कोई बच्चा भी बता सकता है। चीन के इस अत्याचार और हठ के आगे अमेरिका भी लाचार था। हाल के वर्षों में चीन ने अपनी आर्थिक शक्ति का प्रयोग कर WHO पर इंटरपोल की तरह ही प्रभुत्व जमा लिया है।

चीन का प्रभुत्व इतना बढ़ गया है कि अमेरिका ने ट्रम्प के शासन काल में इस संगठन की सदस्यता तक त्यागने का ऐलान कर दिया था। परंतु, इस बार विश्व स्वस्थ्य संगठन ने तो चीनी चाटुकारिता की सारी सीमाएं लांघ दी! WHO को चीन ने एक राजनीतिक संगठन में परिवर्तित किया, लेकिन अब WHO एक राजनीतिक संगठन से भी नीचे गिरकर चीन के राजनीतिक संगठन में परिवर्तित हो चुका है!

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ग्रीक वर्णमाला का उपयोग कर कोरोना वेरिएंट का नामकरण

हुआ यूं कि कालांतर में कोरोना के कई प्रकार विश्व के सामने आने लगे। लोगों को जागरूक करने के लिए WHO को इसके नामकरण की आवश्यकता महसूस हुई। WHO को सलाह देने वाली एक विशेषज्ञ समिति ने स्थान के आधार पर नामकरण करने की सिफ़ारिश की। परंतु, इससे विद्वेष, विभेद और वैमनस्य फैलने की संभावना बता कर खारिज कर दिया गया, जबकि असल कारण तो चीन की छवि को सुरक्षित करना था। अंतत: यह तय हुआ कि ग्रीक वर्णमाला का उपयोग कर ‘कोरोना के प्रकार’ अर्थात् covid variant का वर्णन किया जाये।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की नई प्रणाली उपयोगकर्ता के लिए अनुकूल विकल्प है और भौगोलिक कलंक और भेदभाव को कम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो किसी स्थान के साथ वायरस को जोड़ने से आ सकता था। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि जब लाखों पाठक और दर्शक वाले समाचार संगठनों द्वारा देशों के नाम पर वायरस को चुना जाता, तो सरकारें हिचकिचा सकती थी। सरकारें नकारात्मक प्रचार या दोषी ठहराए जाने के जोखिम से बचने के लिए कोरोनो वायरस पर डेटा एकत्र करने या नए वेरिएंट की घोषणा करने में देरी कर सकती थी। जिसके कारण WHO की ओर से यह फैसला लिया गया था।

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चीन का पिट्ठू है विश्व स्वास्थ्य संगठन!

जिसके बाद WHO ने पहले ही ग्रीक के 24 वर्णमालाओं में से 10 वर्णमालाओं का उपयोग कर 6 प्रकार के कोरोना वेरिएंट चिन्हित किए हैं, जिनकी पहचान दिसंबर 2020 में की गई थी। बीते दिनों में एक नए वेरिएंट की खोज हुई, अब बारी थी इसके नामकरण की और मानद प्रक्रिया के अनुसार बारी थी ग्रीक वर्णमाला में से एक नए वर्णमाला को चुनने की। अल्फा, बीटा, गामा और डेल्टा के बाद सबसे उपयुक्त वर्णमाला थी- “Xi”।

पर पक्षपात को आधार बनाकर स्थान के नाम पर कोरोना वेरिएंट के नामकरण को न करने वाला WHO, चीन के लिए स्वयं दूसरी बार पक्षपात कर बैठा। चीन के सर्वेसर्वा Xi Jinping है और WHO के चीन से क्या संबंध है यह पूरी दुनिया जानती है। अतः उनके नाम पर कोरोना वेरिएंट के नामकरण का दुस्साहस WHO कैसे कर सकता था! सारे नियम कायदे- क़ानूनों और प्रक्रियाओं को ताक पर रखते हुए WHO ने Xi के बाद की वर्णमाल चुनी, जिसे Omicron कहा जाता है।

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प्रश्न, यहां वर्णमाला और उसके चुनाव का नहीं है। यहां प्रश्न है झुकाव का? अगर विश्व स्वस्थ्य संगठन जैसी वैश्विक संस्था इस तरह की झुकाव और चीनी दबाव का प्रदर्शन करेगी या उसके कृत्यों में चीनी साम्यवाद की झलक दिखेगी, तो वो अपनी प्रासंगिकता खो देगा और उस निर्वात को भरना और इसके विकल्प का निर्माण करना अत्यंत मुश्किल होगा।

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