TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    CJP का यू-टर्न क्यों? पहले अपील, अब INDIA गठबंधन की रैली से दूरी; AAP कनेक्शन पर सवाल

    CJP का यू-टर्न क्यों? पहले अपील, अब INDIA गठबंधन की रैली से दूरी; AAP कनेक्शन पर सवाल

    ‘जेन-जी’ से ‘रिजीम चेंज’ तक: शब्दों के पीछे नैरेटिव का खेल

    ‘जेन-जी’ से ‘रिजीम चेंज’ तक: शब्दों के पीछे नैरेटिव का खेल

    बैलेट पेपर से भी हारी कांग्रेस, BJP का तंज—अब कहां गई ‘वोट चोरी’ की कहानी?

    बैलेट पेपर से भी हारी कांग्रेस, BJP का तंज—अब कहां गई ‘वोट चोरी’ की कहानी?

    महर्षि वाल्मीकि: जिन्होंने ‘राम’ को जन-जन तक पहुँचाया

    महर्षि वाल्मीकि: जिन्होंने ‘राम’ को जन-जन तक पहुँचाया

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    Bangladesh Crisis : क्या बांग्लादेश से छिन जाएगी कपड़ा उद्योग की ताकत?

    Bangladesh Crisis : क्या बांग्लादेश से छिन जाएगी कपड़ा उद्योग की ताकत?

    What MCA Data Reveals About India’s Growing LLP and OPC Ecosystem

    What MCA Data Reveals About India’s Growing LLP and OPC Ecosystem

    H-1B पर ट्रंप का नया वार: Microsoft से Infosys-TCS तक शिकंजा, भारतीयों के लिए अमेरिका में नौकरियां खत्म ?

    H-1B पर ट्रंप का नया वार: Microsoft से Infosys-TCS तक शिकंजा, भारतीयों के लिए अमेरिका में नौकरियां खत्म ?

    India GDP Growth: World Bank ने FY27 का अनुमान 7.1% किया,महंगा तेल और El Niño से ग्रोथ पर खतरा

    India GDP Growth: World Bank ने FY27 का अनुमान 7.1% किया,महंगा तेल और El Niño से ग्रोथ पर खतरा

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    नए IAF चीफ का ‘VAYU’ मिशन क्या है? चार अक्षरों में भारतीय वायुसेना की नई युद्ध रणनीति

    नए IAF चीफ का ‘VAYU’ मिशन क्या है? चार अक्षरों में भारतीय वायुसेना की नई युद्ध रणनीति

    HSL-KSPL Deal: काकीनाडा में जहाज बनाएगा रक्षा मंत्रालय का PSU? 1941 से अब तक का सफर

    HSL-KSPL Deal: काकीनाडा में जहाज बनाएगा रक्षा मंत्रालय का PSU? 1941 से अब तक का सफर

    एक जहाज़ लॉन्च करना समारोह, पाँचवाँ समय पर देना उद्योग! HSL CMD ने बताया भारत की शिपबिल्डिंग का असली मंत्र

    एक जहाज़ लॉन्च करना समारोह, पाँचवाँ समय पर देना उद्योग! HSL CMD ने बताया भारत की शिपबिल्डिंग का असली मंत्र

    भारत का ‘Palantir Moment’: सरवम AI से कैसे बदलेगी सेना की ताकत?

    भारत का ‘Palantir Moment’: सरवम AI से कैसे बदलेगी सेना की ताकत?

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    अमेरिका में मौत का लाइव तमाशा! कौन हैं निदाल हसन, जिन्हें फायरिंग स्क्वाड से दी जाएगी सजा?

    अमेरिका में मौत का लाइव तमाशा! कौन हैं निदाल हसन, जिन्हें फायरिंग स्क्वाड से दी जाएगी सजा?

    भारत का JD Vance को करारा जवाब! भारतीय पेशेवरों पर टिप्पणी को बताया ‘बेहद आपत्तिजनक’, H-1B पर भी साफ की तस्वीर

    भारत का JD Vance को करारा जवाब! भारतीय पेशेवरों पर टिप्पणी को बताया ‘बेहद आपत्तिजनक’, H-1B पर भी साफ की तस्वीर

    The Moon Is Ours’! ट्रंप के दावे के बीच बड़ा सवाल- क्या कोई देश चांद पर कब्जा कर सकता है

    The Moon Is Ours’! ट्रंप के दावे के बीच बड़ा सवाल- क्या कोई देश चांद पर कब्जा कर सकता है

    BRICS 2026 में PM Modi, Putin and Xi Jinping

    BRICS Explained: क्या अमेरिकी डॉलर से दूर जा रही है दुनिया ?

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    लर्निंग लाइसेंस पर गाड़ी चलाने वाले को भी मिलेगा बीमा क्लेम? हिमाचल हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

    लर्निंग लाइसेंस पर गाड़ी चलाने वाले को भी मिलेगा बीमा क्लेम? हिमाचल हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

    राष्ट्र सेविका समिति: प्रभाव से परिवर्तन तक 90 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा

    राष्ट्र सेविका समिति: प्रभाव से परिवर्तन तक 90 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा

    महर्षि वाल्मीकि: सामाजिक समरसता के शाश्वत प्रेरणास्रोत

    महर्षि वाल्मीकि: सामाजिक समरसता के शाश्वत प्रेरणास्रोत

    विजयादशमी: “संगठन में शक्ति” का प्रतीक

    विजयादशमी: “संगठन में शक्ति” का प्रतीक

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    ‘मिस्टर रोबोट’ का नया खतरा; फोन से ऐप गायब, बैंक से पैसा साफ

    ‘मिस्टर रोबोट’ का नया खतरा; फोन से ऐप गायब, बैंक से पैसा साफ

    Liver Support vs Metabolic Support: Which Supplement Fits Which Goal?

    Liver Support vs Metabolic Support: Which Supplement Fits Which Goal?

    पीएम मोदी मिलें खिलाड़ियों से

    एशियन गेम्स 2026 के पदक विजेता खिलाड़ियों से मिले PM मोदी, 85 पदकों के साथ चौथे स्थान पर रहा भारत

    भारत में हेयर रिस्टोरेशन: जल्दबाज़ी वाले समाधानों से ज़्यादा ज़रूरी है सही योजना

    भारत में हेयर रिस्टोरेशन: जल्दबाज़ी वाले समाधानों से ज़्यादा ज़रूरी है सही योजना

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    CJP का यू-टर्न क्यों? पहले अपील, अब INDIA गठबंधन की रैली से दूरी; AAP कनेक्शन पर सवाल

    CJP का यू-टर्न क्यों? पहले अपील, अब INDIA गठबंधन की रैली से दूरी; AAP कनेक्शन पर सवाल

    ‘जेन-जी’ से ‘रिजीम चेंज’ तक: शब्दों के पीछे नैरेटिव का खेल

    ‘जेन-जी’ से ‘रिजीम चेंज’ तक: शब्दों के पीछे नैरेटिव का खेल

    बैलेट पेपर से भी हारी कांग्रेस, BJP का तंज—अब कहां गई ‘वोट चोरी’ की कहानी?

    बैलेट पेपर से भी हारी कांग्रेस, BJP का तंज—अब कहां गई ‘वोट चोरी’ की कहानी?

    महर्षि वाल्मीकि: जिन्होंने ‘राम’ को जन-जन तक पहुँचाया

    महर्षि वाल्मीकि: जिन्होंने ‘राम’ को जन-जन तक पहुँचाया

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    Bangladesh Crisis : क्या बांग्लादेश से छिन जाएगी कपड़ा उद्योग की ताकत?

    Bangladesh Crisis : क्या बांग्लादेश से छिन जाएगी कपड़ा उद्योग की ताकत?

    What MCA Data Reveals About India’s Growing LLP and OPC Ecosystem

    What MCA Data Reveals About India’s Growing LLP and OPC Ecosystem

    H-1B पर ट्रंप का नया वार: Microsoft से Infosys-TCS तक शिकंजा, भारतीयों के लिए अमेरिका में नौकरियां खत्म ?

    H-1B पर ट्रंप का नया वार: Microsoft से Infosys-TCS तक शिकंजा, भारतीयों के लिए अमेरिका में नौकरियां खत्म ?

    India GDP Growth: World Bank ने FY27 का अनुमान 7.1% किया,महंगा तेल और El Niño से ग्रोथ पर खतरा

    India GDP Growth: World Bank ने FY27 का अनुमान 7.1% किया,महंगा तेल और El Niño से ग्रोथ पर खतरा

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    नए IAF चीफ का ‘VAYU’ मिशन क्या है? चार अक्षरों में भारतीय वायुसेना की नई युद्ध रणनीति

    नए IAF चीफ का ‘VAYU’ मिशन क्या है? चार अक्षरों में भारतीय वायुसेना की नई युद्ध रणनीति

    HSL-KSPL Deal: काकीनाडा में जहाज बनाएगा रक्षा मंत्रालय का PSU? 1941 से अब तक का सफर

    HSL-KSPL Deal: काकीनाडा में जहाज बनाएगा रक्षा मंत्रालय का PSU? 1941 से अब तक का सफर

    एक जहाज़ लॉन्च करना समारोह, पाँचवाँ समय पर देना उद्योग! HSL CMD ने बताया भारत की शिपबिल्डिंग का असली मंत्र

    एक जहाज़ लॉन्च करना समारोह, पाँचवाँ समय पर देना उद्योग! HSL CMD ने बताया भारत की शिपबिल्डिंग का असली मंत्र

    भारत का ‘Palantir Moment’: सरवम AI से कैसे बदलेगी सेना की ताकत?

    भारत का ‘Palantir Moment’: सरवम AI से कैसे बदलेगी सेना की ताकत?

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    अमेरिका में मौत का लाइव तमाशा! कौन हैं निदाल हसन, जिन्हें फायरिंग स्क्वाड से दी जाएगी सजा?

    अमेरिका में मौत का लाइव तमाशा! कौन हैं निदाल हसन, जिन्हें फायरिंग स्क्वाड से दी जाएगी सजा?

    भारत का JD Vance को करारा जवाब! भारतीय पेशेवरों पर टिप्पणी को बताया ‘बेहद आपत्तिजनक’, H-1B पर भी साफ की तस्वीर

    भारत का JD Vance को करारा जवाब! भारतीय पेशेवरों पर टिप्पणी को बताया ‘बेहद आपत्तिजनक’, H-1B पर भी साफ की तस्वीर

    The Moon Is Ours’! ट्रंप के दावे के बीच बड़ा सवाल- क्या कोई देश चांद पर कब्जा कर सकता है

    The Moon Is Ours’! ट्रंप के दावे के बीच बड़ा सवाल- क्या कोई देश चांद पर कब्जा कर सकता है

    BRICS 2026 में PM Modi, Putin and Xi Jinping

    BRICS Explained: क्या अमेरिकी डॉलर से दूर जा रही है दुनिया ?

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    लर्निंग लाइसेंस पर गाड़ी चलाने वाले को भी मिलेगा बीमा क्लेम? हिमाचल हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

    लर्निंग लाइसेंस पर गाड़ी चलाने वाले को भी मिलेगा बीमा क्लेम? हिमाचल हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

    राष्ट्र सेविका समिति: प्रभाव से परिवर्तन तक 90 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा

    राष्ट्र सेविका समिति: प्रभाव से परिवर्तन तक 90 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा

    महर्षि वाल्मीकि: सामाजिक समरसता के शाश्वत प्रेरणास्रोत

    महर्षि वाल्मीकि: सामाजिक समरसता के शाश्वत प्रेरणास्रोत

    विजयादशमी: “संगठन में शक्ति” का प्रतीक

    विजयादशमी: “संगठन में शक्ति” का प्रतीक

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    ‘मिस्टर रोबोट’ का नया खतरा; फोन से ऐप गायब, बैंक से पैसा साफ

    ‘मिस्टर रोबोट’ का नया खतरा; फोन से ऐप गायब, बैंक से पैसा साफ

    Liver Support vs Metabolic Support: Which Supplement Fits Which Goal?

    Liver Support vs Metabolic Support: Which Supplement Fits Which Goal?

    पीएम मोदी मिलें खिलाड़ियों से

    एशियन गेम्स 2026 के पदक विजेता खिलाड़ियों से मिले PM मोदी, 85 पदकों के साथ चौथे स्थान पर रहा भारत

    भारत में हेयर रिस्टोरेशन: जल्दबाज़ी वाले समाधानों से ज़्यादा ज़रूरी है सही योजना

    भारत में हेयर रिस्टोरेशन: जल्दबाज़ी वाले समाधानों से ज़्यादा ज़रूरी है सही योजना

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

महिलाओं के परिधानों में ‘जेब’ नहीं होने के पीछे बहुत हद तक जिम्मेदार हैं सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक कारण

दुनिया 21वीं सदी में पहुंच गई और महिलाएं अभी भी अपने अधिकारों के लिए ही लड़ रही हैं!

Padma Shree Shubham द्वारा Padma Shree Shubham
26 May 2022
in ज्ञान, समीक्षा
महिलाओं की जेब

Source- Google

Share on FacebookShare on X

कल मुझे थोड़ी ही दूर पर मार्केट जाना था, मैंने सोचा कि जेब में कुछ पैसे, मोबाइल फोन और रूमाल रखकर चली जाऊं, अब हर जगह पर्स ले जाने की भी क्या ही आवश्यकता है। पर जब मैंने अपनी जेब टटोली तो उसमें इतनी भी जगह नहीं थी कि चंद सिक्कों के अलावा और कोई सामान रखकर ले जा सकूं। मेरे हर कुर्ते, जींस और बाकी के पोशाकों का भी यही हाल है। किसी में जेबें बहुत छोटी हैं और किसी पोशाक में तो जेब है ही नहीं। हालांकि, मेरे किसी पुरुष मित्र या कार्यालय के पुरुष सहकर्मी या फिर भाइयों के साथ ऐसा नहीं है। अपनी पैंट की जेब में वे रूमाल, मोबाइल फोन और बहुत सारे सामान भर लेते हैं। जेबों के द्वारा महिलाओं के साथ होने वाले इस भेदभाव को देखकर मेरा दिमाग ठनका और मैंने इसकी तह तक जाने का प्रयास किया।

इस लेख में हम जानेंगे कि कैसे एक समय था जब जेबों के द्वारा भी महिलाओं के साथ भेदभाव किया गया और आगे चलकर कैसे पहले यह जेबें महिलाओं को आंकने का माध्याम बनीं और फिर महिलाओं के पोशाक से स्वयं के अस्तित्व को मिटाकर ये जेबें पर्स की मार्केटिंग का माध्यम बनीं। समाज को आइना दिखाते जेबों के इतिहास पर चलिए ध्यान आकर्षित करते हैं।

संबंधितपोस्ट

हिंदू पत्नियां सलाहकार और मार्गदर्शिका होती थीं फिर ‘मुगल’ आ गए

और लोड करें

पोशाक में जेब का होना कोई नयी बात या लेटेस्ट फैशन नहीं है, बल्कि इसका इतिहास शुरू होता है 17वीं शताब्दी से। उससे पहले रस्सी में कपड़ा बांधकर बनायी गयी थैलियों से पुरुष और महिला दोनों ही काम चला लिया करते थे। उसी कपड़े वाली थैली में वे अपने जरूरी सामान रख लिया करते थे। फिर ऐसे पॉकेट अस्तित्व में आए जो पहने हुए पोशाक से ही जुड़े होते थे, लेकिन ऐसे सिर्फ पुरुषों के लिए ही था। महिलाओं को तो अभी भी वैसे ही रस्सी से कपड़ा बांध कर उसमें ही आवश्यक वस्तुओं को रखना होता था। ध्यान देने वाली बात है कि पोशाक से जुड़े हुए जेब का विकल्प होने के बाद भी महिलाओं को कपड़े वाले झोले को पेटिकोट के अंदर रखना पड़ता था, जिसकी वजह से वे सार्वजनिक स्थल पर अपनी आवश्यक वस्तुए निकाल ही नहीं सकती थीं।

ये वो दौर भी था जब मध्य-पूर्वी देशों का प्रभाव पूर्व और पश्चिमी देशों पर बढ़ रहा था और इसके कारण इन देशों में भी डोरी वाले पर्स अस्तित्व में आने लगे। भारत के परिप्रेक्ष्य में इसकी बात करें तो लटकन के अलावा इन थैलों को कढ़ाई से सजाया जाने लगा। यह सजावट तब बहुत चलन में था। मुगल शासन के समय इसे बटुआ और पोटली कहा जाने लगा। फिर बाद में ये फैशन एक्सेसरी के रूप में प्रयोग किया जाने लगे।

और पढ़ें: खुसरो जैसे अनपढ़ शायर और आधुनिक युग के अर्द्धज्ञानी बुद्धिजीवी उत्तर और दक्षिण भारत के बीच के बंधन को कभी समझ नहीं सके

महिलाओं की ‘जेब’ और ‘पर्स’ का है अनोखा कनेक्शन

फिर 18वीं सदी के अंत तक यह फैशन भी बदलने लगा और साथ ही एक बीमार मनसिकता ने भी जन्म लिया, लेकिन 1790 के दशक में महिलाओं के लिए पोशाक चिपके और टाइट डिजाइन किए जाने लगे। जिससे जेब गायब थी और पर्स अस्तित्व में आया, जिसमें दो चार सिक्के और रुमाल को रखा जा सकता था। एक तो महिलाओं के पोशाक में पॉकेट नहीं, ऊपर से पर्स भी छोटा, ऐसा क्यों? इस प्रश्न के लिए हमें तब की पितृसत्तात्मक मानसिकता पर ध्यान देना होगा जो गहरायी से सबके दिमाग पर हावी थी। महिलाओं के छोटे पर्स बताते थे कि तब समाज में महिलाओं का कोई अधिकार ही नहीं था। पैसों के लिए, गुजारे के लिए वो पुरुषों पर निर्भर थी। समाज में तब ऐसी सोच थी कि बड़े पर्स और जेब रखकर महिलाएं आखिर करेंगी क्या, जब उन्हें चूल्हें के पास बैठकर खाना ही पकाना है और घर संभालना है। पैसा कमाकर तो पुरुष ही ले आता है।

ध्यान देने वाली बात है कि एक समय तक जेब पितृसत्तात्मक समाज को दर्शाती रही, फिर रही सही कसर पर्स ने पूरी कर दी। उस समय ऐसा माना जाने लगा कि जिस महिला का पर्स जितना बड़ा वो महिला उतनी बुरी। क्योंकि उस समय महिलाएं काम करने हेतु बाहर निकलती तो समाज उन्हें बुरी महिला होने का दर्जा दे देता। यह उस समय की सोच थी जिसने समाज को बुरी तरह से जकड़ लिया था।

लेकिन 19वीं सदी के अंत में जेब के लिए और सुविधाजनक पोशाक के लिए महिलाओं ने जमकर विरोध किया। जेब का अधिकार पाकर वे अत्मनिर्भरता का भाव अपने भीतर भरना चाहती थी। 20वीं सदी की शुरुआत में महिलाएं जेब वाली पैंट पहनने लगी। फिर आया 1914 से 1945 के बीच का समय जब प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्ध हुए, इसमें पुरुष युद्ध में थे और महिलाओं को इस दौरान जेबों वाली पोशाक पहनने की स्वतंत्रता मिलीपर जब युद्ध से पुरूष लौटे तो महिलाओं का संघर्ष फिर लौट आया। लौट आयी वहीं पुरुष की महिलाओं पर हावी होने वाली सोच। पुरुषों जैसी जेबें नहीं हो सकती महिलाओं की, महिलाएं बाहर काम नहीं कर सकती और भी ऐसी ही कई सोच लौट आयीं। इसी तरह की सोच के साथ समय गुजरा, फैशन बदला, रहन-सहन में बदलाव आने लगा। महिलाओं के लिए स्लिम दिखने वाली और बिना जेब वाली पोशाकें डिजाइन की जाने लगी। फैशन में हैंडबैग भी आया और हैंडबैग उद्योग फलने फूलने लगा। दिमाग में ऐसी सोच बैठती चली गयी कि महिलाओं को जेब की आवश्यकता नहीं और हैंडबैग के साथ महिलाएं ज्यादा स्टाइलिश दिखती हैं।

महिलाओं के दिखावटी जेब के पीछे ये हो सकते हैं कारण

मौजूदा समय की बात करें तो महिलाओं के पोशाक में जेबों का नहीं होना या फिर दिखावटी जेब होना या फिर जेबों की गहरायी पुरुषों की जेबों की गहरायी से कम होना इसके कई कारण समझ में आते हैं। फैशन ट्रेंड, महिलाओं की जींस की डिजाइन जैसे कारण हो सकते हैं लेकिन इन सबसे भी बड़े कारण जो दिखायी देते हैं वो दो हैं, एक तो कॉस्ट कटिंग हो सकती हैं। सोचिए कि एक जींस में पॉकेट नहीं दी गयी तो पॉकेट जितना कपड़ा बच गया और ऐसे ही कोई कंपनी 100 या फिर 1000 जींस के उत्पादन में कितने मीटर कपड़े बचा सकती है। कंपनिया कुछ ऐसे ही उपायों से बचत कर पाती हैं। दूसरा ये कि अगर महिलाओं की जींस या कुर्ते या फिर किसी और पोशाकों में जेब दे दी गयी तो भला पर्स या हैंडबैग उद्योग का बंटाधार ही हो जाएगा। ये तो हुई फैशन, उद्योग और अधिकार की बात जो जेब से सीधे-सीधे जुड़ी दिखायी देती है। लेकिन मेरे पोशाक में जेब का न होना या फिर जेबों का छोटा होना दिक्कत की बात तो है और मेरी जैसी कई लड़कियों को भी ये दिक्कत जरूर होगी। आशा है कि कुछ ऐसा क्रांतिकारी डिजाइन आए और हमारी इस दिक्कत का समाधान कर दे।

और पढ़ें: भारतीय संस्कृति और विरासत के पुनरुद्धार के लिए राकेश सिन्हा की पहल समय की मांग है

Tags: पितृसत्तात्मक समाजपॉकेटमहिलाओं की जेब
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

चीनी निर्यात पर ‘प्रतिबंध’ भारतीयों को बड़ा फायदा पहुंचाने वाला निर्णय है

अगली पोस्ट

‘रोडीज के रघुराम’ से पंचायत के निर्देशक तक, दीपक मिश्रा ने गाड़ दिए हैं झंडे

संबंधित पोस्ट

लर्निंग लाइसेंस पर गाड़ी चलाने वाले को भी मिलेगा बीमा क्लेम? हिमाचल हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
चर्चित

लर्निंग लाइसेंस पर गाड़ी चलाने वाले को भी मिलेगा बीमा क्लेम? हिमाचल हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

3 November 2026

ड्राइविंग सीखने के दौरान अगर किसी व्यक्ति की गाड़ी से दुर्घटना हो जाए, तो क्या बीमा कंपनी मुआवजा देने से इनकार कर सकती है? क्या...

राष्ट्र सेविका समिति: प्रभाव से परिवर्तन तक 90 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा
संस्कृति

राष्ट्र सेविका समिति: प्रभाव से परिवर्तन तक 90 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा

29 October 2026

राष्ट्र सेविका समिति की 90 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा नारी शक्ति, व्यक्तित्व निर्माण, संस्कार, सेवा, सामाजिक जागरण और राष्ट्र के प्रति समर्पण की प्रेरणादायी गाथा...

महर्षि वाल्मीकि: सामाजिक समरसता के शाश्वत प्रेरणास्रोत
ज्ञान

महर्षि वाल्मीकि: सामाजिक समरसता के शाश्वत प्रेरणास्रोत

26 October 2026

भारतीय सनातन संस्कृति की समृद्ध ज्ञान परंपरा में अनेक ऐसे संत और ऋषि हुए हैं, जिन्होंने अपनी आध्यात्मिक और सांसारिक शिक्षाओं के माध्यम से समरस...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

India Built Rudra and Prachand. Now It Wants to Make Their Gun at Home.

India Built Rudra and Prachand. Now It Wants to Make Their Gun at Home.

00:03:14

INS Samarthak: The Indigenous Warship Built to Do More Than One Job VO:

00:03:01

Why Is India Investing in Underwater Weapons?

00:02:10

How DRDO Is Making India's Military Communications More Secure

00:03:28

How Ice on Aircraft Wings Can Turn Deadly

00:03:19
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited