TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    बंगाल सीएम ममता बेनर्जी खुद करेंगी करेगी कोर्ट में सवाल

    सुप्रीम कोर्ट पहुंची बंगाल सीएम ममता बनर्जी, खुद लड़ सकती हैं अपना केस

    दिल्ली में लापता महिलाओं की बढ़ती संख्या

    2026 की शुरुआत में दिल्ली में लापता मामलों में तेज़ उछाल, महिलाओं की संख्या सबसे अधिक

    बुद्ध ग्रां प्री की वापसी की संभावनाएं

    भारत में फ़ॉर्मूला 1 की वापसी की उम्मीदें तेज़, बुद्ध सर्किट पर फिर दौड़ सकती हैं रेस कारें

    मेट्रो में शालीनता, सड़कों पर अव्यवस्था

    मेट्रो में लाइन, बसों में धक्का-मुक्की: आर्थिक सर्वेक्षण ने बताई वजह

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    अडानी ग्रुप इटली के लियोनार्दो के साथ स्वदेशी समानों से बनाएगा हेलिकॉप्टर

    भारत में हेलिकॉप्टर उत्पाद बढ़ेगा, अदानी ग्रुप ने लियोनार्दो के साथ की पहल ,स्वदेशी को दिया जाएगा बढ़ावा

    युवाओॆ का बजट

    युवा चेतना को लेकर क्या कहता है 2026–27 का यूनियन बजट ?

    भारत-यूरोपीय संघ समझौता वैश्विक व्यापार के लिए बड़ा अवसर

    पीएम मोदी-ट्रम्प के बीच बातचीत के बाद भारत पर अमेरिकी टैरिफ घट कर हुआ 18%

    वित्त मंत्री ने देश का रक्षा बजट ₹6.81 लाख करोड़ से बढ़ाकर ₹7.85 लाख करोड़ कर दिया है

    रक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा फोकस: बजट 2026–27 की रणनीति

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    डिंगातारा सिंगापुर के साथ मिलकर करेगा उपग्रहों की सुरक्षा

    अंतरिक्ष मलबे से निपटने के लिए भारतीय स्टार्टअप डिंगातारा और सिंगापुर की साझेदारी

    भारत-जर्मनी की मेगा सबमरीन डील

    भारत-जर्मनी की मेगा सबमरीन डील जल्द! समुद्र में बढ़ेगी भारत की ताकत

    MSME और ड्रोन उद्योग पर राहुल गांधी के बयान, BJP ने किया खंडन

    मेक इन इंडिया पर राहुल गांधी की आलोचना, भाजपा का पलटवार

    ravikota

    एलसीए मैन’ रवि कोटा संभालेंगे एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की जिम्मेदारी, उत्पादन और सुधार पर रहेगा फोक्स

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    भारत–EU सहयोग को नई गति

    समुद्री निगरानी को मजबूत करता भारत, यूरोपीय संघ को दी IFC-IOR तक पहुंच

    एलन मस्क को भारत से बड़ा झटका

    एलन मस्क को झटका : भारत ने स्टारलिंक के GEN-2 सैटेलाइट सिस्टम को किया खारिज

    तिब्बत में चीनी नियंत्रण के दावों की समीक्षा

    तिब्बत का इतिहास और चीन का दावा: “प्राचीन शासन” मिथक पर सवाल

    भारत तीसरा एशियाई देश बना

    भारत तीसरा एशियाई देश बना जिसने यूरोपीय संघ के साथ सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पक्की की

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    के एम करियाप्पा अनुशासन के प्रतीक

    फील्ड मार्शल के .एम. करियाप्पा : अनुशासन और देशभक्ति की मिसाल

    10 फिल्में जो होलोकॉस्ट और नाजी क्रूरता को दर्शाती हैं

    इतिहास की गवाही: 10 फिल्में जो होलोकॉस्ट और नाजी क्रूरता को दर्शाती हैं

    नेहरू अपने निजी अकाउंट में जमा कराना चाहते थे कुछ खजाना!

    नेताजी की आजाद हिंद फौज के खजाने का क्या हुआ? क्यों खजाने की लूट पर जांच से बचते रहे जवाहर लाल नेहरू ?

    भारतीय संविधान और मौलिक अधिकार

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकार बाहर से नहीं आए, इनकी संकल्पना भारतीय ज्ञान परंपरा में सदियों से मौजूद है

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    आतंक के खिलाफ बड़ा कदम: J&K में 5 सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त

    जम्मू कश्मीर में 5 सरकारी कर्मचारी सेवा से बर्खास्त , जानें क्यों मनोज सिन्हा ने लिया यह फैसला?

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    शोले फिल्म में पानी की टंकी पर चढ़े धर्मेंद्र

    बॉलीवुड का ही-मैन- जिसने रुलाया भी, हंसाया भी: धर्मेंद्र के सिने सफर की 10 नायाब फिल्में

    नीतीश कुमार

    जेडी(यू) के ख़िलाफ़ एंटी इन्कंबेसी क्यों नहीं होती? बिहार में क्यों X फैक्टर बने हुए हैं नीतीश कुमार?

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    बंगाल सीएम ममता बेनर्जी खुद करेंगी करेगी कोर्ट में सवाल

    सुप्रीम कोर्ट पहुंची बंगाल सीएम ममता बनर्जी, खुद लड़ सकती हैं अपना केस

    दिल्ली में लापता महिलाओं की बढ़ती संख्या

    2026 की शुरुआत में दिल्ली में लापता मामलों में तेज़ उछाल, महिलाओं की संख्या सबसे अधिक

    बुद्ध ग्रां प्री की वापसी की संभावनाएं

    भारत में फ़ॉर्मूला 1 की वापसी की उम्मीदें तेज़, बुद्ध सर्किट पर फिर दौड़ सकती हैं रेस कारें

    मेट्रो में शालीनता, सड़कों पर अव्यवस्था

    मेट्रो में लाइन, बसों में धक्का-मुक्की: आर्थिक सर्वेक्षण ने बताई वजह

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    अडानी ग्रुप इटली के लियोनार्दो के साथ स्वदेशी समानों से बनाएगा हेलिकॉप्टर

    भारत में हेलिकॉप्टर उत्पाद बढ़ेगा, अदानी ग्रुप ने लियोनार्दो के साथ की पहल ,स्वदेशी को दिया जाएगा बढ़ावा

    युवाओॆ का बजट

    युवा चेतना को लेकर क्या कहता है 2026–27 का यूनियन बजट ?

    भारत-यूरोपीय संघ समझौता वैश्विक व्यापार के लिए बड़ा अवसर

    पीएम मोदी-ट्रम्प के बीच बातचीत के बाद भारत पर अमेरिकी टैरिफ घट कर हुआ 18%

    वित्त मंत्री ने देश का रक्षा बजट ₹6.81 लाख करोड़ से बढ़ाकर ₹7.85 लाख करोड़ कर दिया है

    रक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा फोकस: बजट 2026–27 की रणनीति

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    डिंगातारा सिंगापुर के साथ मिलकर करेगा उपग्रहों की सुरक्षा

    अंतरिक्ष मलबे से निपटने के लिए भारतीय स्टार्टअप डिंगातारा और सिंगापुर की साझेदारी

    भारत-जर्मनी की मेगा सबमरीन डील

    भारत-जर्मनी की मेगा सबमरीन डील जल्द! समुद्र में बढ़ेगी भारत की ताकत

    MSME और ड्रोन उद्योग पर राहुल गांधी के बयान, BJP ने किया खंडन

    मेक इन इंडिया पर राहुल गांधी की आलोचना, भाजपा का पलटवार

    ravikota

    एलसीए मैन’ रवि कोटा संभालेंगे एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की जिम्मेदारी, उत्पादन और सुधार पर रहेगा फोक्स

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    भारत–EU सहयोग को नई गति

    समुद्री निगरानी को मजबूत करता भारत, यूरोपीय संघ को दी IFC-IOR तक पहुंच

    एलन मस्क को भारत से बड़ा झटका

    एलन मस्क को झटका : भारत ने स्टारलिंक के GEN-2 सैटेलाइट सिस्टम को किया खारिज

    तिब्बत में चीनी नियंत्रण के दावों की समीक्षा

    तिब्बत का इतिहास और चीन का दावा: “प्राचीन शासन” मिथक पर सवाल

    भारत तीसरा एशियाई देश बना

    भारत तीसरा एशियाई देश बना जिसने यूरोपीय संघ के साथ सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पक्की की

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    के एम करियाप्पा अनुशासन के प्रतीक

    फील्ड मार्शल के .एम. करियाप्पा : अनुशासन और देशभक्ति की मिसाल

    10 फिल्में जो होलोकॉस्ट और नाजी क्रूरता को दर्शाती हैं

    इतिहास की गवाही: 10 फिल्में जो होलोकॉस्ट और नाजी क्रूरता को दर्शाती हैं

    नेहरू अपने निजी अकाउंट में जमा कराना चाहते थे कुछ खजाना!

    नेताजी की आजाद हिंद फौज के खजाने का क्या हुआ? क्यों खजाने की लूट पर जांच से बचते रहे जवाहर लाल नेहरू ?

    भारतीय संविधान और मौलिक अधिकार

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकार बाहर से नहीं आए, इनकी संकल्पना भारतीय ज्ञान परंपरा में सदियों से मौजूद है

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    आतंक के खिलाफ बड़ा कदम: J&K में 5 सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त

    जम्मू कश्मीर में 5 सरकारी कर्मचारी सेवा से बर्खास्त , जानें क्यों मनोज सिन्हा ने लिया यह फैसला?

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    शोले फिल्म में पानी की टंकी पर चढ़े धर्मेंद्र

    बॉलीवुड का ही-मैन- जिसने रुलाया भी, हंसाया भी: धर्मेंद्र के सिने सफर की 10 नायाब फिल्में

    नीतीश कुमार

    जेडी(यू) के ख़िलाफ़ एंटी इन्कंबेसी क्यों नहीं होती? बिहार में क्यों X फैक्टर बने हुए हैं नीतीश कुमार?

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

भारत की SLV-3 से विश्व स्तरीय GSLV Mk III तक सफल यात्रा की कहानी

बैलगाड़ी से GSLV तक भारत ने गाड़े है सफलता के झंडे !

Aniket Raj द्वारा Aniket Raj
15 June 2022
in चर्चित
एसएलवी-3 to world-class GSLV Mk III

Source.in

Share on FacebookShare on X

20 नवंबर 1967 को भारत में विकसित पहला रॉकेट, RH-75(ROHINI-75), थुम्बा इक्वेटोरियल रॉकेट लॉन्चिंग स्टेशन (TERLS) से लॉन्च किया गया। थुम्बा को इसलिए चुना गया क्योंकि यह चुंबकीय भूमध्य रेखा के करीब है इसलिए हमारे वैज्ञानिकों को इस कार्यक्रम के लिए एक आदर्श स्थान लगा। किन्तु, गर्व तो इस बात का था की RH-75 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा विकसित किया गया था। पहले और दूसरे रॉकेट क्रमशः रूस और फ्रांस से आयात किए गए थे। अतः, 1963 में इसके प्रक्षेपण ने भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत को चिह्नित किया।

यह भारत का पहला स्वदेशी रूप से विकसित रॉकेट है। इसे साउंडिंग रॉकेटों की “रोहिणी” श्रृंखला के अंतर्गत बनाया गया था। इस श्रृंखला में पहला रॉकेट 1963 में लॉन्च किया गया था। पहले और दूसरे रॉकेट क्रमशः रूस और फ्रांस से आयात किए गए थे। हम में से बहुत से लोग अपने ही राष्ट्र की आलोचना करने में इतने व्यस्त हैं कि हम पिछले कुछ वर्षों में भारत में हुए जबरदस्त विकास को नजरअंदाज कर देते हैं।बुनियादी ढांचा हो, स्वास्थ्य हो, अर्थव्यवस्था हो चाहे रणनीति हो, दुनिया अब भारत की ताकत को पहचानने लगी है। भारत का ऐसा प्रभाव ऐसा है कि यह वैश्विक राजनीति का केंद्र बन गया है। हालाँकि, एक पहलू ऐसा भी है जिस पर लोग अक्सर चर्चा नहीं करते हैं। यह भारत के एसएलवी-3 से विश्व स्तरीय जीएसएलवी एमके III तक भारत की राकेट यात्रा है। निश्चित रूप से, हर भारतीय इस पुनीत यात्रा का हिस्सा बनने पर गर्व करेगा।

संबंधितपोस्ट

समुद्री निगरानी को मजबूत करता भारत, यूरोपीय संघ को दी IFC-IOR तक पहुंच

आया ऊंट पहाड़ के नीचे: ट्रम्प की दादागीरी से त्रस्त कनाडा अब Order Based World को लेकर भारत के सुर में सुर क्यों मिला रहा है?

ईरान संकट: भारत के लिए स्थिरता ही सही रणनीति

और लोड करें

और पढ़ें: ISRO ने शुरू किया प्रोजेक्ट ‘नेत्र’, अब अंतरिक्ष में उपग्रहों को डेब्रीज से नहीं पहुंचेगा नुकसान

भारत का पहला उपग्रह और सोवियत संघ

भारत ने 47 साल पहले देश के इतिहास में सबसे गौरवपूर्ण क्षण तब देखा जब 19 अप्रैल 1975 को भारत का पहला स्वदेशी उपग्रह आर्यभट्ट लॉन्च किया गया था। इसे कॉसमॉस-3 एम लॉन्च वाहन का उपयोग कर के सोवियत रॉकेट लॉन्च और विकास स्थल कपुस्टिन यार्ड से लॉन्च किया गया था। भारतीय उपग्रह कार्यक्रम के स्वप्नों ने 1970 के दशक की शुरुआत में आकार लेना शुरू किया। डॉ. यू आर राव के निर्देशन में 100 किलोग्राम का एक उपग्रह डिजाइन किया गया था। तत्कालीन इसरो अध्यक्ष एम.जी.के. मेनन ने फरवरी 1972 में त्रिवेंद्रम में सोवियत संघ के साथ एक समझौता किया।

समझौते के अनुसार, यूएसएसआर को जहाजों पर नज़र रखने और जहाजों को लॉन्च करने के लिए भारतीय पोर्टलों का उपयोग करने की अनुमति दी गई थी और बदले में भारत विभिन्न उपग्रहों को लॉन्च कर सकता था। उपग्रह डिजाइन के लिए शुल्क लगभग 3.9 मिलियन अमेरिकी डॉलर, साथ ही अन्य शुल्क $ 1.3 मिलियन देने होते थे। यह उस समय के लिए बहुत बड़ा खर्च था। आर्यभट्ट का प्रक्षेपण सफल रहा। और इसने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा क्योंकि उस समय, प्रमुख अंतरिक्ष शक्तियों को स्वदेशी उपग्रह बनाने की भारत की संभावनाओं में कोई विश्वास नहीं था।

भारत का अपना प्रक्षेपण यान एसएलवी-3

हालाँकि, भारत अपने प्रयोगों के लिए सोवियत संघ पर निर्भरता पसंद नहीं करता था। इस प्रकार, इसने अपने स्वयं के प्रक्षेपण यान को विकसित करने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल नाम से एक प्रोजेक्ट शुरू किया है। इस परियोजना का उद्देश्य अंतरिक्ष में उपग्रहों को प्रक्षेपित करने के लिए आवश्यक तकनीकी क्षमताओं को विकसित करना है।अंतत: 18 जुलाई 1980 को भारत का पहला प्रायोगिक उपग्रह प्रक्षेपण यान एसएलवी-3 लॉन्च किया गया।

एसएलवी-3 22 मीटर की ऊंचाई के साथ 17 टन वजन का एक ठोस, चार चरण वाला वाहन था, और लो अर्थ ऑर्बिट (एलईओ) में 40किलो वर्ग के पेलोड रखने में सक्षम था। कथित तौर पर, इसे श्रीहरिकोटा रेंज (SHAR) से लॉन्च किया गया था जबकि रोहिणी उपग्रह, RS-1, को कक्षा में रखा गया था। एसएलवी-3 के प्रक्षेपण के साथ, भारत ऐसा करनेवाला छठा सदस्य बन गया। हालांकि, अगस्त 1979 में एसएलवी-3 की पहली प्रायोगिक उड़ान पूरी तरह से सफल नहीं रही थी। एसएलवी परियोजना के सफल प्रक्षेपण ने एएसएलवी, पीएसएलवी और जीएसएलवी जैसी अधिक उन्नत प्रक्षेपण यान परियोजनाओं का मार्ग प्रशस्त किया।

और पढ़ें: स्पेस इंडस्ट्री का शुभारंभ अंतरिक्ष उद्यम के निजीकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है

एएसएलवी का प्रक्षेपण

एसएलवी-3 के बाद, भारत ने अपना ऑगमेंटेड सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (ASLV) प्रोग्राम लॉन्च किया। 40 टन भारोत्तोलन भार के साथ, 24 मीटर ऊँचे एएसएलवी को 150 किलो वर्ग के उपग्रहों को 400 किमी वृत्ताकार कक्षाओं में परिक्रमा करने के मिशन के साथ, पाँच चरण, पूर्ण-ठोस प्रणोदक वाहन के रूप में कॉन्फ़िगर किया गया था। इसे लो अर्थ ऑर्बिट्स (LEO) के लिए पेलोड क्षमता को 150 किलोग्राम तक बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया था, जो एसएलवी-3 से तीन गुना है।

एसएलवी-3 मिशनों से प्राप्त अनुभव से सीखते हुए, एएसएलवी स्ट्रैप-ऑन टेक्नोलॉजी, इनर्शियल नेविगेशन, बल्बस हीट शील्ड, वर्टिकल इंटीग्रेशन जैसे भविष्य के लॉन्च वाहनों के लिए महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित करने और मान्य करने के लिए एक कम लागत वाला मध्यवर्ती वाहन बन गया। विशेष रूप से, एसएलवी-3 में दो पेलोड थे, गामा रे बर्स्ट (जीआरबी) प्रयोग और रिटार्डिंग पोटेंशियो एनालाइज़र (आरपीए). इसने सात साल तक काम किया।

तब से भारत ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा

भारत ने अपनी यात्रा शुरू कर दी थी और अब वह पीछे मुड़कर देखने को तैयार नहीं था। इस प्रकार, अपनी शानदार खगोलीय यात्रा की दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए भारत ने जल्द ही अपना पहला संचार उपग्रह APPLE लॉन्च किया। पहले, भारत ने पहली भूस्थैतिक प्रायोगिक संचार उपग्रह परियोजना शुरू की और फिर 1981 में Apple को लॉन्च किया गया। लॉन्च के पीछे की कहानी ने इसे और भी खास बना दिया है। APPLE को फ्रांस के गुयाना स्पेस सेंटर से लॉन्च किया गया था, जो अपने आप में अद्भुत है क्योंकि लॉन्च होने से पहले इसे बैलगाड़ी पर ले जाया जाता था। इसकी एक कालजयी फोटो अभी भी आप नेट पर देख सकते हैं। भारत, अब क्रायोजेनिक रॉकेट-इंजन तकनीक की तलाश में था और इसके लिए वह रूस पर निर्भर था। अमेरिका जबकि यह दावा कर रहा था कि क्रायोजेनिक इंजन प्रौद्योगिकी प्राप्त करने में भारत के गुप्त सैन्य उद्देश्य हैं।

इस प्रकार, अमेरिकी सीनेट की विदेश संबंध समिति ने रूस के $24 बिलियन की अंतर्राष्ट्रीय सहायता पर एक शर्त लगा दी। रूस को यह सहायता प्रदान करने की प्रथम शर्त यह थी की मास्को भारत के साथ $250 मिलियन का क्रायोजेनिक सौदा नहीं करेगा सौदे के साथ आगे बढ़ता है। रूस को अमेरिकी सहायता में संशोधन करने वाले व्यक्ति स्वयं जो बिडेन थे। अंतत:, अमेरिका ने मास्को को भारत को सात क्रायोजेनिक इंजन की आपूर्ति करने की अनुमति दी। लेकिन किसी भी प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की अनुमति नहीं दी गई, जिससे भारत के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष मिशन को नुकसान पहुंचा। 28 साल बाद, अमेरिका ने महसूस किया कि उसे बिडेन के प्रयासों की भारी कीमत चुकानी पड़ी है, क्योंकि भारत ने एसएलवी 3 से अपने मुख्य प्रक्षेपण वाहन- पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी) और फिर जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (जीएसएलवी) पर आगे बढ़ने का फैसला किया। जिसके लगभग 4 से 5 टन के पेलोड ले जाने की उम्मीद थी।

और पढ़ें: Skyroot Aerospace ने शुरू की भारतीय निजी क्षेत्र में अंतरिक्ष की रेस

भारत के लिए शुरू हुई आत्मनिर्भरता की उलटी गिनती

अब, खगोलीय अंतरिक्ष में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए, भारत ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV) और भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान (GSLV) के विकास की ओर अग्रसर था। इसने जल्द ही भारतीय रिमोट सेंसिंग (IRS) उपग्रहों को सूर्य की समकालिक कक्षाओं में लॉन्च करने की क्षमता विकसित कर ली। पीएसएलवी, जो छोटे आकार के उपग्रहों को भूस्थिर स्थानान्तरण कक्षा में प्रक्षेपित कर सकता था उसको पहली बार 20 सितंबर 1993 को प्रक्षेपित किया गया था। यह 600 किमी की ऊंचाई के सूर्य-तुल्यकालिक ध्रुवीय कक्षाओं में 1,750 किलोग्राम पेलोड तक ले जा सकता है। 2015 तक, पीएसएलवी ने विभिन्न कक्षाओं में 93 उपग्रह (20 विभिन्न देशों के 36 भारतीय और 57 विदेशी उपग्रह) लॉन्च किए थे।

इस वाहन ने 2008 में एक बार में दस उपग्रहों को लॉन्च करने का विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया। इसके अलावा, ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण वाहन ने 16 दिसंबर 2015 को श्रीहरिकोटा में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के अंतरिक्ष बंदरगाह से लॉन्च करने के बाद सिंगापुर से छह उपग्रहों को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया। पीएसएलवी तरल चरणों से लैस होने वाला पहला भारतीय प्रक्षेपण यान है। यह भारत के सबसे विश्वसनीय और बहुमुखी वर्कहॉर्स लॉन्च व्हीकल के रूप में उभरा है। इसके अलावा, पीएसएलवी ने दो अंतरिक्ष यान- 2008 में चंद्रयान -1 और 2013 में मार्स ऑर्बिटर स्पेसक्राफ्ट को भी सफलतापूर्वक लॉन्च किया।

अंतरिक्ष वर्चस्व वाले राष्ट्रों में शामिल

PSLV के लॉन्च के बाद भारत ने वो कर दिखाया जो दुनिया सोच भी नहीं सकती थी। इसने पीएसएलवी मॉडल को अपने छह ठोस स्ट्रैप-ऑन इंजनों के साथ विकास इंजन के आधार पर चार तरल स्ट्रैप-ऑन द्वारा प्रतिस्थापित किया और पहले दो चरणों को क्रायोजेनिक इंजन द्वारा प्रतिस्थापित किया गया। इससे जीएसएलवी 3 का प्रक्षेपण हुआ, जिसे इनसैट श्रृंखला जैसे भारी उपग्रहों को लॉन्च करने के लिए डिज़ाइन किया गया था, जिसमें 500 टन (आर्यभट्ट की तुलना में जो केवल 40 किलोग्राम था) के पेलोड ले जाने की क्षमता थी। 05 जनवरी 2014 को, GSLV D5 ने GSAT-14 को अपनी इच्छित कक्षा में सफलतापूर्वक लॉन्च किया और भारत को अंतरिक्ष-उत्साही राष्ट्रों के एक चुनिंदा समूह ‘क्रायो क्लब’ में डाल दिया जिसमे सिर्फ अमेरिका, रूस, फ्रांस, जापान और चीन जैसे देश थे। यह भारत के लिए महत्वपूर्ण था क्योंकि यह 3.5 टन वजन वाले संचार उपग्रहों को लॉन्च करने के लिए विदेशी एजेंसियों को शुल्क के रूप में $85-90 मिलियन (500 करोड़) का भुगतान करने वाला देश इतना आगे बढ़ गया।

जीएसएलवी एमके III को चंद्रयान -2 अंतरिक्ष यान को लॉन्च करने के लिए चुना गया जो इसरो द्वारा विकसित तीन चरणों वाला भारी लिफ्ट लॉन्च वाहन है। वाहन में दो सॉलिड स्ट्रैप-ऑन, एक कोर लिक्विड बूस्टर और एक क्रायोजेनिक अपर स्टेज है। जीएसएलवी एमके III को 4 टन वर्ग के उपग्रहों को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) या लगभग 10 टन लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में ले जाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसके पास GSLV Mk II से लगभग दोगुना क्षमता है।

और पढ़ें:  दुनिया के पहले ‘लिक्विड मिरर टेलीस्कोप’ के साथ अब अंतरिक्ष का ‘बादशाह’ बन गया है भारत

बैलगाड़ी से जीएसएलवी तक

भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम एक लंबा सफर तय कर चुका है। बैलगाड़ी पर रॉकेट ले जाने से लेकर अब 3,000 किलोग्राम से अधिक वजन वाले उपग्रहों के निर्माण तक, इसरो ने वह किया है जो कोई अन्य अंतरिक्ष एजेंसी नहीं कर सकती थी। रिपोर्टों के अनुसार, एक समय था जब वैज्ञानिकों के लिए अपने प्रयोग करने के लिए बुनियादी ढांचा भी उपलब्ध नहीं था। इसरो के पूर्व अध्यक्ष यूआर राव के अनुसार- “यहां तक ​​कि एक शौचालय को भी आर्यभट्ट के लिए डेटा प्राप्ति केंद्र में बदल दिया गया था।”

इससे भी अधिक प्रशंसनीय बात यह है कि इसरो अपने प्रयोगों में सफल होने के लिए धन का दुरुपयोग नहीं करता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इसरो एक साल में इतना खर्च करता है जितना नासा सिर्फ एक महीने में खर्च करता है। इसके अलावा, इसे प्राप्त होने वाला धन चीनी और रूसी अंतरिक्ष एजेंसियों की तुलना में बहुत कम है। अब, आप जानते हैं कि भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी असाधारण क्यों है और आपको उस राष्ट्र का हिस्सा होने पर गर्व होना चाहिए जिसकी प्रगति अन्य देशों के लिए एक प्रेरक यात्रा है।

और पढ़ें: शीघ्र ही आ रहा है चंद्रयान-3

TFI का समर्थन करें:

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की ‘राइट’ विचारधारा को मजबूती देने के लिए TFI-STORE.COM से बेहतरीन गुणवत्ता के वस्त्र क्रय कर हमारा समर्थन करें।

Tags: GSLV Mk IIISLV-3भारतभारतीय अंतरिक्षराकेट
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

पीएम मोदी की रणनीतियों ने अरब देशों के घमंड को कर दिया चकनाचूर

अगली पोस्ट

IPL से लोग ‘पक’ चुके हैं, TV रेटिंग और दर्शकों की संख्या में ‘रिकॉर्ड’ गिरावट यही संकेत देते हैं

संबंधित पोस्ट

बंगाल सीएम ममता बेनर्जी खुद करेंगी करेगी कोर्ट में सवाल
चर्चित

सुप्रीम कोर्ट पहुंची बंगाल सीएम ममता बनर्जी, खुद लड़ सकती हैं अपना केस

4 February 2026

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बुधवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं, जहां राज्य में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) यानी मतदाता सूची के विशेष...

दिल्ली में लापता महिलाओं की बढ़ती संख्या
चर्चित

2026 की शुरुआत में दिल्ली में लापता मामलों में तेज़ उछाल, महिलाओं की संख्या सबसे अधिक

4 February 2026

राजधानी दिल्ली से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जिसकी खबर मिलते ही दिल्ली पुलिस जांच में जुट गई है, हालांकि अभी...

बुद्ध ग्रां प्री की वापसी की संभावनाएं
चर्चित

भारत में फ़ॉर्मूला 1 की वापसी की उम्मीदें तेज़, बुद्ध सर्किट पर फिर दौड़ सकती हैं रेस कारें

4 February 2026

फ़ॉर्मूला 1 कैलेंडर से गायब हुए एक दशक से ज़्यादा समय बाद, इंडियन ग्रां प्री की वापसी की उम्मीद फिर से जाग गई है।भारत सरकार...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

Between Rafale and AMCA; Where Does the Su-57 Fit | IAF| HAL | Wings India

Between Rafale and AMCA; Where Does the Su-57 Fit | IAF| HAL | Wings India

00:06:10

Pakistan’s Rafale Narrative Ends at Kartavya Path| Sindoor Formation Exposes the BS022 Claim | IAF

00:09:35

If US Says NO, F-35 Can’t Fly: The Hidden Cost of Imports | Make In India

00:06:15

Republic Day Shock: India’s Hypersonic Warning to the World| DRDO | HGV | Indian Army

00:05:24

French Media Exposes Pakistan and China on the Rafale lost

00:04:36
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited