UPA द्वारा पोषित NPA अब अपने अंत की ओर अग्रसर है

अक्सर किसी और की करनी का फल किसी और को भुगतना पड़ता है

नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी

नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी ने कार्य शुरू किया: लोगों को लगता है कि नयी सरकार बनने पर उसे जनता की सेवा करने के कई अवसर मिलते हैं। हां ये कहना गलत तो नहीं होगा लेकिन नई सरकार को जहां जनता की सेवा के लिए नये अवसर मिलते हैं, वहीं उसको पुरानी सरकार के द्वारा की गयी कुछ गलतियों को भी भुगतना पड़ता है। नयी सरकार को जनता की सेवा करने और उसकी भलाई के लिए पुरानी सरकार के द्वारा की गयी गलतियों का सफाया भी करना पड़ता है।

संकट का सफाया

भाजपा की सरकार भी इससे अछूती नहीं रह पायी, उसे भी कुछ बुरे संकट विरासत में मिले हैं और जिनमें से एक है एनपीए नामक संकट। इस संकट का सफाया करने में सरकार को 8 सालों का लंबा समय लग गया और अंततः ये संकट दूर हुआ। एनपीए (जब ग्राहक बैंक का कर्ज समय पर नहीं चुका पाता है तो वह फंसा हुआ कर्ज एनपीए में बदल जाता है।) को अगर हम संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन या संप्रग ( UPA) का बच्चा कहें तो यह कतई गलत नहीं होगा। UPA एक राजनीतिक गठबंधन है जिसका नेतृत्व भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस करती है।

मोदी सरकार के प्रमुख बैड बैंक ने अपना परिचालन आरंभ कर दिया है। बैंकों के नॉन परफॉर्मिंग एसेट(NPA) की बिक्री करने वाली सरकारी एजेंसी नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी NARCL ने अपना कार्य शुरू कर दिया है। अभी हाल में ही ऐसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी ने स्टील का निर्माण करने वाली मित्तल कॉरपोरेशन के लोन के लिए ऑफर को पेश किया है।

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नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी (NARCL), सरकार के द्वारा प्रवर्तित बैड बैंक ने इस बात की सूचना दी है। एनएआर सीएल ने मित्तल कॉर्प के कर्ज के लिए 228 करोड़ रुपए चुकाने का ऑफर दिया है। पब्लिक सेक्टर के बैंकों का मित्तल कॉर्प पर कुल 1414 करोड़ रुपये का कर्ज है।

जिस कारण सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को (कानूनी रूप से) मित्तल कॉर्पोरेशन को 1414.5 करोड़ रुपये का भुगतान चुकाना है। जिसमें से 16 प्रतिशत का भुगतान एनएआरसीएल के द्वारा होना है। बैड बैंक के द्वरा मित्तल कॉर्पोरेशन पर 173 करोड़ रुपये के निजी कर्ज का 16 फीसदी भुगतान करने को कहा है। इसका मतलब है कि नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी को कर्ज के लिए 256 करोड़ रुपये का भुगतान करना है। इसमें 15 फीसदी नकद और 85 फीसदी सिक्योरिटी डिपॉजिट होगा।

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मित्तल कॉर्पोरेशन एक छोटी सी शुरुआत

बैड बैंक के लिए मित्तल कॉर्पोरेशन एक छोटी सी शुरुआत है। बैंक को स्वयं वित्त मंत्रालय के द्वारा सहायता दी जाती है। मंत्रालय के द्वारा बैंको को अक्टूबर 2022 के अंत तक एनएआरसीएल को कम से कम 2 और स्ट्रेस्ड एसेट्स बेचने कि बात कही है। इस लिस्ट में पहले चरण की कंपनियों में रेनबो पेपर्स और कंसोलिडेटेड कंस्ट्रक्शन का नाम है।

इसके पहले चरण में, नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी (NARCL) 16,744 रुपये के कर्ज वाले आठ खातों का चुनाव करेगी। दूसरे चरण में, एनएआरसीएल 18,177 रुपये के 10 खातों के कर्ज का भुगतान करेगी। जेपी इंफ्रास्ट्रक्चर, कोस्टल एनर्जी, रोल्टा, मैकनली भारत इंजीनियरिंग और मीनाक्षी एनर्जी इस सूची में शामिल है। इसके दोनों चरणों में करीब 39,921 करोड़ रुपये के कर्ज का भुगतान होगा।

देश में बैड बैंक के संचालन को NPA संकट के विरुद्ध अंतिम कदम माना जा रहा है। भारत में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां यूपीए सरकार के खराब नीतिगत निर्णयों के साथ-साथ विफलता का परिणाम था।

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आर्थिक भविष्य का निर्माण

साल 2004 में, मनमोहन सिंह ने सरकार को एक नीति विरासत में दी थी जिस पर भारत के आर्थिक भविष्य का निर्माण किया जाना था। यूपीए-1 में, 2004-05 और 2008-09 के बीच वाणिज्यिक ऋण दोगुने से अधिक हो गया था।

टेलीकॉम, पावर, रोड, एविएशन, स्टील में कार्य करने वाली भारतीय फर्मों ने कर्ज तो लिया। लेकिन साथ ही, यूएसए में लेहमैन ब्रदर्स दुर्घटनाग्रस्त हो गया और उसने अपने साथ पूरी पश्चिमी अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया। जिस वजह से वित्तीय क्षेत्र के लिए दो समस्याएं पैदा हो गयीं।  सबसे पहले, बैंकों ने उधार देने के प्रति अपने दृष्टिकोण को सँकरा कर लिया और दूसरा जिन लोगों ने उधार लिया था उन्हें भुगतान करना बहुत मुश्किल हो गया।

इसलिए मोदी सरकार ने सत्ता में आते ही एसेट क्वालिटी रिव्यू (एक्यूआर) का निर्माण किया। इस कदम से जनता के सामने सारी सच्चाई आ गयी। साल 2015-16 में एनपीए पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में लगभग दोगुना तक हो गया।

इसमें कोई भी आश्चर्य की बात नहीं है कि इस साल मार्च में एनपीए सबसे कम था। अपनी वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में आरबीआई ने बताया है कि मार्च 2022 में बैंकों का एनपीए गिरकर 5.9 प्रतिशत तक हो गया था। इस समस्या के समाधान के लिए बैड बैंक बचाव में आ रहे हैं। लेकिन बैड बैंक इस समस्या का स्थायी समाधान होगा इस बारे में कुछ कहना सही नहीं होगा। सरकार को इसके बारे में सतर्क रहने कि काफी आवश्यकता है।

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