Maruthu Brothers: मरुदु बंधुओं का वो इतिहास, जो आपसे छुपाया गया

ज़ुबैर को क्या पता, किस मिट्टी के बने थे ये वीर....

Maruthu Brothers

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Maruthu Brothers history in Hindi: कहते हैं, बंद घड़ी भी दिन में दो बार सही समय दिखा देता है। कथित “फ़ैक्ट चेकर” मोहम्मद ज़ुबैर ने भाजपा को घेरने के प्रयास में दो स्वतंत्रता सेनानियों का उपहास उड़ाया, जिसके पीछे उसे ट्वीट ही डिलीट करना पड़ा।

परंतु वे देशभक्त थे कौन, जिनके प्रभाव को आज भी अस्वीकार नहीं किया जा सकता?  इस लेख में जानिये के बारे में Maruthu Brothers से, और कैसे उन्होंने अपने पराक्रम से ब्रिटिश साम्राज्यवादियों में त्राहिमाम मचा दिया।

अंग्रेज़ों की आँखों में खटकते थे Maruthu Brothers

अभी कुछ समय पूर्व कथित फ़ैक्ट चेकर मोहम्मद ज़ुबैर ने भाजपा को एक विषय पर घेरने का प्रयास किया। भाजपा कर्नाटक में चुनाव अभियान के समय गौड़ा बंधुओं का उल्लेख कर रही थी, जिनके बारे में ये लोकरीति है कि उन्होंने टीपू सुल्तान को मार गिराया था। परंतु प्रचार के समय में जो फोटो लगी, वह लोगों को मरुदु बंधुओं (Maruthu Brothers) का स्मरण अधिक करा रहा था। इसपर मोहम्मद ज़ुबैर ने ये ट्वीट किया :

मोहम्मद जुबैर ने अपने ट्वीट में कहा, “शिवगंगा साम्राज्य के राजाओं मारुथु भाइयों (Maruthu Brothers) (मारुथु पांडियार) ने अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध लड़ा। इसके बाद अंग्रेजों ने उन्हें 1801 में तिरुपुथुर किले मे सरेआम फाँसी पर लटका दिया”। इस ट्वीट के अंत में जुबैर ने मजाक उड़ाने के लिए ‘लाफिंग’ इमोजी का इस्तेमाल किया।

यही नहीं, जुबैर ने उरी गौड़ा और नानजे गौड़ा को काल्पनिक पात्र करार देते हुए सनातन संस्कृति पर लांछन लगाने में प्रयासरत था। उदाहरण के लिए इसने तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के अन्नामलाई का एक पुराना ट्वीट भी शेयर किया। इसमें अन्नामलाई को मारुथु पांडियार भाइयों की तस्वीर के सामने सिर झुकाते देखा जा सकता है। इस ट्वीट में उसने कर्नाटक भाजपा के नेता सीटी रवि का मजाक उड़ाते हुए कहा कि के अन्नामलाई, सीटी रवि को इतिहास की सही जानकारी नहीं दे सके।

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वेलू नाचियार की अप्रत्याशित विजय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

परंतु ये Maruthu Brothers थे कौन? जब मराठा साम्राज्य अंग्रेज़ों से जूझ रहा था, और उनके प्रभाव को बढ़ने से रोकने में प्रयासरत था, उस समय तमिलनाडु के शिवगंगा प्रांत का शासन मुथु वडुगनाथ पेरियावुदय थेवर के हाथ में था। उनकी पत्नी वेलु नाचियार किसी मामले में उनसे कम नहीं थी, चाहे युद्धकला हो या फिर प्रशासन। इन दोनों के शासन में शिवगंगा प्रांत खूब फल फूल रहा था।

परंतु 1780 में इनके राज्य पर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की कुदृष्टि पड़ गए। मुथु थेवर ने इनके अत्याचारों का विरोध किया, परंतु इनसे युद्ध करते हुए वे वीरगति को प्राप्त हो गए। ऐसे में जब रानी वेलु नाचियार को हिरासत में लेने हेतु ब्रिटिश साम्राज्यवादी आए, तो उन्हे उनकी पुत्री सहित पेरिया मरुदु और चिन्ना मरुदु ने सकुशल बाहर निकाला, और उन्हे वीरूपाची में गोपाल नायक नामक सामंत के यहाँ शरण दिलवाई।

शास्त्र और शस्त्र, दोनों में ही Maruthu Brothers निपुण थे। इनकी आयुधकला इतनी समृद्ध थी, कि इन्होंने बूमरैंग का ही एक अनोखा वर्जन, वालारी निर्मित किया। कुछ लोग तो ये भी कहते हैं कि इन्होंने मैसूर के हैदर अली और उसके बेटे फतेह खान, जिसे इतिहास टीपू सुल्तान के नाम से बेहतर जानता है, के पास गए और उनसे सहायता मांगी। परंतु ये कितना सत्य था, ये आज भी वाद विवाद का विषय है।

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इनके शौर्य से आज भी अपरिचित है तमिलनाडु

8 वर्ष की कड़ी तपस्या के बाद कई साम्राज्यों के नेतृत्व में वेलु नाचियार, कुईल एवं मरुदु बंधुओं ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी पर धावा बोला, और शिवगंगा समेत कई प्रांतों को स्वतंत्र कराकर ही दम लिया। अपनी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए मरुदु बंधुओं को शिवगंगा का संरक्षक बनाया गया, और ब्रिटिश साम्राज्यवादियों से लड़ते लड़ते ये वीरगति को प्राप्त हुए।

आश्चर्य की बात देखिए, जिन लोगों को भगत सिंह, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, मंगल पांडे इत्यादि जैसा सम्मान मिलना चाहिए था, उनसे आज भी अधिकतम भारत अपरिचित है, और तमिलनाडु में शिवगंगई जिले को छोड़कर इनके शौर्य से बहुत ही कम लोग परिचित है।

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जो लोग बात बात पर तमिल प्राइड का राग अलापते नहीं थकते, उन लोगों का भी इनका नाम सुनते ही सांप सूंघ जाता है। क्या ये तमिलनाडु का गौरव नहीं है? क्या इन्होंने अपनी माटी के लिए अपना सर्वस्व अर्पण नहीं किया? या इनका एजेंडा इनसे पूर्ण नहीं होता, क्योंकि शिवगंगा में जातिवाद के लिए कोई स्थान नहीं था?

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