अपने गुरु को देवगुरु का अवतार मानना रसलीन के सनातनी संस्कार का ही बोध होता है। रसलीन के साहित्य में तत्कालीन लोक जीवन की अनुभूतियाँ, प्रचलित लोक कथाएँ एवं भारतीय पौराणिक इतिहास के प्रसंगों की विविधता के साथ ही प्रचुरता भी है। उदाहरण के लिए वे एक हिन्दू भक्त की भाँति ही भगीरथी गंगा की भी स्तुति भारतीय पद्धति के अनुसार करते हुए स्मरण करते हैं कि गंगा विष्णु के पैरों से निकलकर शिव के सीस में जा बसी।
TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    वैश्विक ‘जरासंध’ का छल-बल और ‘केशव’ का संघ

    वैश्विक ‘जरासंध’ का छल-बल और ‘केशव’ का संघ

    हिन्दू समाज के संगठन, सेवा और समरसता की यात्रा: विश्व हिन्दू परिषद्

    हिन्दू समाज के संगठन, सेवा और समरसता की यात्रा: विश्व हिन्दू परिषद्

    मोहन भागवत ने न्यू यॉर्क के मेडिसिन स्क्वॉयर गार्डन में संबोधित करते हुए हिंदुत्व और हिंदुस्तान की व्यापक अवधारणा को सामने रखा था

    हिंदुत्व का स्पंदन: मोहन भागवत का वैश्विक संदेश

    रक्षाबंधन पर महिलाओं को बड़ी सौगात

    रक्षाबंधन पर महिलाओं को बड़ी सौगात, ई-बसों में मुफ्त सफर के साथ एक सहयात्री को भी मिलेगा लाभ

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    India GDP DEBATE Q1 FY 2027

    India GDP DEBATE: जीडीपी की तेज रफ्तार या आंकड़ों का खेल? जानिए सच

    RBI Purpose Codes in 2026: How Your Incoming Foreign Payment Gets Classified

    RBI Purpose Codes in 2026: How Your Incoming Foreign Payment Gets Classified

    Lalithaa Jewellery Mart IPO: A Look at India’s Gold and Jewellery Retail Boom

    Lalithaa Jewellery Mart IPO: A Look at India’s Gold and Jewellery Retail Boom

    1947 to 2026 Independence Day Nehru to Modi

    Independence Day 2026: सुई बनाने से स्पेस तक, 80 साल में कितना बदला भारत?

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    Exercise Pitch Black 2026 in Australia and Exercise Udara Shakti 2026 in Malaysia

    पिच ब्लैक से उदारा शक्ति तक: इंडो पैसेफिक में भारतीय वायु सेना का दम

    Third Aircraft Carrier Indian Navy China Threat

    भारत को क्यों चाहिए तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर? Explainer

    Chinese CCTV RISK

    CCTV के अंदर छिपा चीन का ‘सिक्योरिटी रिस्क’: ब्रिटेन में खुलासा, भारत में कितनी बड़ी चुनौती?

    Territorial Army AI Cyber Security and Direct Entry

    टेरिटोरियल आर्मी में अब AI और साइबर एक्सपर्ट्स की सीधी एंट्री? रक्षा मंत्रालय की नई योजना से बदल जाएगा TA का रोल

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    मोहन भागवत ने न्यू यॉर्क के मेडिसिन स्क्वॉयर गार्डन में संबोधित करते हुए हिंदुत्व और हिंदुस्तान की व्यापक अवधारणा को सामने रखा था

    हिंदुत्व का स्पंदन: मोहन भागवत का वैश्विक संदेश

    अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में घर के अंदर अंधाधुंध फायरिंग

    अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में घर के अंदर अंधाधुंध फायरिंग, कई लोगों की मौत; जांच में जुटी पुलिस

    क्या यूरोप पर 'आक्रमण' शुरू हो चुका है

    क्या यूरोप पर ‘आक्रमण’ शुरू हो चुका है? स्यूटा से उठ रहे वे सवाल जिन्हें अब यूरोप नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता

    ट्रंप का बड़ा दावा

    डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर लगी मुहर, मार्को रुबियो बोले- जल्द आएंगे अमेरिकी राष्ट्रपति

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    हिन्दू समाज के संगठन, सेवा और समरसता की यात्रा: विश्व हिन्दू परिषद्

    हिन्दू समाज के संगठन, सेवा और समरसता की यात्रा: विश्व हिन्दू परिषद्

    Anil Kakodar Uranium, Thorium, Nuclear energy

    दुनिया में बढ़ेगा यूरेनियम संकट, भारत के लिए थोरियम क्यों जरूरी? अनिल काकोदकर का बड़ा बयान

    भारत पाकिस्तान का विभाजन

    15 अगस्त के बाद…80 वर्ष पहले भारत विभाजित होकर स्वतंत्र तो हो गया.. परन्तु अब आगे क्या..?

    80 वां स्वतंत्रता दिवस: दक्षिण भारत के गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों को सलाम

    80 वां स्वतंत्रता दिवस: दक्षिण भारत के गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों को सलाम

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य

    Mostbet Casino in the Czech Republic: What Players Actually Get

    ऑनलाइन वीडियो देखने की आदतें कैसे बदल रही हैं: स्ट्रीमिंग से ऑफलाइन एक्सेस तक

    ऑनलाइन वीडियो देखने की आदतें कैसे बदल रही हैं: स्ट्रीमिंग से ऑफलाइन एक्सेस तक

    बिना किसी ऐप के Instagram वीडियो और फोटो कैसे डाउनलोड करें

    बिना किसी ऐप के Instagram वीडियो और फोटो कैसे डाउनलोड करें

    गेमिंग और हमारे देश के नौजवानों का नया रिश्ता: मस्ती से लेकर कमाई तक का पूरा चक्कर

    गेमिंग और हमारे देश के नौजवानों का नया रिश्ता: मस्ती से लेकर कमाई तक का पूरा चक्कर

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    वैश्विक ‘जरासंध’ का छल-बल और ‘केशव’ का संघ

    वैश्विक ‘जरासंध’ का छल-बल और ‘केशव’ का संघ

    हिन्दू समाज के संगठन, सेवा और समरसता की यात्रा: विश्व हिन्दू परिषद्

    हिन्दू समाज के संगठन, सेवा और समरसता की यात्रा: विश्व हिन्दू परिषद्

    मोहन भागवत ने न्यू यॉर्क के मेडिसिन स्क्वॉयर गार्डन में संबोधित करते हुए हिंदुत्व और हिंदुस्तान की व्यापक अवधारणा को सामने रखा था

    हिंदुत्व का स्पंदन: मोहन भागवत का वैश्विक संदेश

    रक्षाबंधन पर महिलाओं को बड़ी सौगात

    रक्षाबंधन पर महिलाओं को बड़ी सौगात, ई-बसों में मुफ्त सफर के साथ एक सहयात्री को भी मिलेगा लाभ

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    India GDP DEBATE Q1 FY 2027

    India GDP DEBATE: जीडीपी की तेज रफ्तार या आंकड़ों का खेल? जानिए सच

    RBI Purpose Codes in 2026: How Your Incoming Foreign Payment Gets Classified

    RBI Purpose Codes in 2026: How Your Incoming Foreign Payment Gets Classified

    Lalithaa Jewellery Mart IPO: A Look at India’s Gold and Jewellery Retail Boom

    Lalithaa Jewellery Mart IPO: A Look at India’s Gold and Jewellery Retail Boom

    1947 to 2026 Independence Day Nehru to Modi

    Independence Day 2026: सुई बनाने से स्पेस तक, 80 साल में कितना बदला भारत?

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    Exercise Pitch Black 2026 in Australia and Exercise Udara Shakti 2026 in Malaysia

    पिच ब्लैक से उदारा शक्ति तक: इंडो पैसेफिक में भारतीय वायु सेना का दम

    Third Aircraft Carrier Indian Navy China Threat

    भारत को क्यों चाहिए तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर? Explainer

    Chinese CCTV RISK

    CCTV के अंदर छिपा चीन का ‘सिक्योरिटी रिस्क’: ब्रिटेन में खुलासा, भारत में कितनी बड़ी चुनौती?

    Territorial Army AI Cyber Security and Direct Entry

    टेरिटोरियल आर्मी में अब AI और साइबर एक्सपर्ट्स की सीधी एंट्री? रक्षा मंत्रालय की नई योजना से बदल जाएगा TA का रोल

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    मोहन भागवत ने न्यू यॉर्क के मेडिसिन स्क्वॉयर गार्डन में संबोधित करते हुए हिंदुत्व और हिंदुस्तान की व्यापक अवधारणा को सामने रखा था

    हिंदुत्व का स्पंदन: मोहन भागवत का वैश्विक संदेश

    अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में घर के अंदर अंधाधुंध फायरिंग

    अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में घर के अंदर अंधाधुंध फायरिंग, कई लोगों की मौत; जांच में जुटी पुलिस

    क्या यूरोप पर 'आक्रमण' शुरू हो चुका है

    क्या यूरोप पर ‘आक्रमण’ शुरू हो चुका है? स्यूटा से उठ रहे वे सवाल जिन्हें अब यूरोप नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता

    ट्रंप का बड़ा दावा

    डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे पर लगी मुहर, मार्को रुबियो बोले- जल्द आएंगे अमेरिकी राष्ट्रपति

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    हिन्दू समाज के संगठन, सेवा और समरसता की यात्रा: विश्व हिन्दू परिषद्

    हिन्दू समाज के संगठन, सेवा और समरसता की यात्रा: विश्व हिन्दू परिषद्

    Anil Kakodar Uranium, Thorium, Nuclear energy

    दुनिया में बढ़ेगा यूरेनियम संकट, भारत के लिए थोरियम क्यों जरूरी? अनिल काकोदकर का बड़ा बयान

    भारत पाकिस्तान का विभाजन

    15 अगस्त के बाद…80 वर्ष पहले भारत विभाजित होकर स्वतंत्र तो हो गया.. परन्तु अब आगे क्या..?

    80 वां स्वतंत्रता दिवस: दक्षिण भारत के गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों को सलाम

    80 वां स्वतंत्रता दिवस: दक्षिण भारत के गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों को सलाम

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य

    Mostbet Casino in the Czech Republic: What Players Actually Get

    ऑनलाइन वीडियो देखने की आदतें कैसे बदल रही हैं: स्ट्रीमिंग से ऑफलाइन एक्सेस तक

    ऑनलाइन वीडियो देखने की आदतें कैसे बदल रही हैं: स्ट्रीमिंग से ऑफलाइन एक्सेस तक

    बिना किसी ऐप के Instagram वीडियो और फोटो कैसे डाउनलोड करें

    बिना किसी ऐप के Instagram वीडियो और फोटो कैसे डाउनलोड करें

    गेमिंग और हमारे देश के नौजवानों का नया रिश्ता: मस्ती से लेकर कमाई तक का पूरा चक्कर

    गेमिंग और हमारे देश के नौजवानों का नया रिश्ता: मस्ती से लेकर कमाई तक का पूरा चक्कर

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

बिस्नु जू के पग तें निकसि संभु सीस बसि… माँ गंगा और गणेश के आराधक सैयद गुलाम नबी, सनातन परंपराओं से था स्नेह

भारत में जिस स्थान पर रसलीन रहते थे उस भूमि पर मुस्लिम ही रहा करते थे और रोचक तथ्य यह है कि वहाँ के सभी मुस्लिम साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं में भारतीयता, सनातन को महत्व दिया। यह स्थान उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले का बिलग्राम नामक गाँव है।

architsingh द्वारा architsingh
11 November 2024
in इतिहास, ज्ञान, संस्कृति
रसलीन, सैयद गुलाम नबी

रसलीन ने ब्रजभाषा सीखने के लिए उस भाषा में ग्रन्थ की ही रचना कर दी, निश्चित रूप से यह उनकी असाधारण प्रतिभा को परिलक्षित करता है

Share on FacebookShare on X

मध्यकाल में जो हिंदी साहित्य हमें प्राप्त होता है उसे समृद्ध करने में तत्कालीन रचनाकारों का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है। मध्यकाल के रचनाकारों ने जो साहित्य रचा, उस साहित्य की समृद्धि के कारण ही इसे स्वर्ण युग कहा गया। निःसन्देह मध्यकाल का यह दौर दो संस्कृतियों की टकराहट का दौर था, विदेशी संस्कृति भी भारतीय संस्कृति पर थोपी जा रही थी किन्तु वास्तविकता यह है कि संस्कृति थोपी नहीं जा सकती बल्कि जब भी दो संस्कृतियों का मेल होता है तो सहज ही दोनों एक दूसरे से अनेक तत्व ग्रहण करती हैं।

भारत में भी ऐसा हुआ किन्तु यहाँ बात ध्यान रखनी चाहिए कि भारतीय संस्कृति में विदेशी संस्कृति के कुछ तत्व भले ही शामिल हुए हों किन्तु मध्यकाल में भी अनेक विदेशी मूल के लोगों ने भारत में आकर भारतीय संस्कृति को अपनाया। आज हम बात करेंगे एक ऐसे ही मुस्लिम साहित्यकार ‘रसलीन‘ की जो मूलतः भारत से नहीं थे किंतु उनकी रचनाओं में भारत–बोध, भारतीय मूल्य आदि बेहद सुंदर ढंग से मिलते हैं। रसलीन ने स्वयं अपनी वंश परम्परा के बारे में बताते हुए कहा है कि इनके पूर्वज हिंदुस्तान में आकर बस गए थे– “प्रगट हुसेनी बासती, बंस जो सकल जहान। तामैं सैद अब्दुल फरह, आए मधि हिंदुवान।” रसलीन यहाँ हिंदुस्तान के स्थान पर हिंदुवान शब्द का प्रयोग करते हैं। हिंदुवान अर्थात जहाँ हिन्दू रहते हैं, हिंदुओं का जनपद आदि।

संबंधितपोस्ट

बलिदान दिवस विशेष: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के ऐतिहासिक भाषणों की प्रासंगिकता

पंजाब सीएम भगवंत मान की बढ़ीं मुश्किलें: वायरल वीडियो मामले में अकाल तख्त ने सुनाया फैसला

‘भारत पर इस्लामी आक्रमण होगा, तो किस तरफ होंगे सेना के मुस्लिम’? अंबेडकर को था संदेह, लिखा – इस्लाम के लिए हमारा देश दारुल हर्ब

और लोड करें

हालाँकि, कुछ तथाकथित लोग भले ही आज इस बात को न मानें किन्तु मध्यकाल के उस दौर में भारत में आने वाले अनेक मुस्लिम कवियों ने यहाँ की संस्कृति, मूल्यों और परम्पराओं को अपनाते हुए साहित्य रचना की। जिसके स्पष्ट साक्ष्य भी हमें प्राप्त होते हैं। हालाँकि इन कवियों के लिए यह करना आसान नहीं था क्योंकि केंद्रीय सत्ता कट्टर और रूढ़िवादी थी जिसकी वजह से भारतीय परम्पराओं, संस्कृति और मूल्यों को हीन बताने का कुत्सित प्रयास भी चल रहा था।

भारतीय परंपराओं से प्रेरित थे बिलग्राम के मुस्लिम साहित्यकार

अब रसलीन के विषय में हम यह तो जान चुके हैं कि वे एक विदेशी मूल के व्यक्ति थे। इनका पूरा नाम सैयद गुलाम नबी ‘रसलीन‘ था एवं इनके पिता का नाम सैयद मुहम्मद बाकर बताया जाता है। रसलीन का जन्म कब हुआ था इस सम्बंध में एक दोहे में संकेत मिलता है। इस दोहे में वे कहते हैं ‘मैं (रसलीन) सूरी के फूल (सूरजमुखी) के समान खिला हूँ और अपनी जन्म तिथि जो मैंने स्वयं कही ‘नूर चश्मे बाकरे अब्दुल हमीदम’ (1111 हिजरी) है।‘ इसी दोहे के आधार पर इतिहासकार रामनरेश त्रिपाठी ने रसलीन के जन्म का वर्ष सन 1689 ई. माना है। दोहा यहाँ पढ़ा जा सकता है– 

“नूर चश्मे मीर बाकर गुफ्त बामन, चूँ गुले खुरशीद दर आलम दमीदम
साल तारीखे तवल्लुद खुद बेगुफ्तम, नर चश्मे बाकरे अब्दुल हमीद।“

हमें ज्ञात हो गया कि ये विदेशी मूल के व्यक्ति थे किंतु भारत में ये किस स्थान पर रहते थे यह जानना भी महत्वपूर्ण है। महत्वपूर्ण इसलिए क्योंकि भारत में जिस स्थान पर रसलीन रहते थे उस भूमि पर मुस्लिम ही रहा करते थे और रोचक तथ्य यह है कि वहाँ के सभी मुस्लिम साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं में भारतीयता, सनातन को महत्व दिया। यह स्थान उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले का बिलग्राम नामक गाँव है। बिलग्राम के मुस्लिम साहित्यकारों ने जिस तरह सनातन, भारतीय भक्ति, परम्पराओं को अपनी रचनाओं में अभिव्यक्त किया, हिंदी साहित्य में इस पर शोध कार्य हुए हैं एवं वर्तमान में भी हो रहे हैं।

सैयद ‘रसलीन’ ने ब्रजभाषा सीखने के लिए लिख डाला ग्रन्थ

यह ठीक है कि सैयद ‘रसलीन‘ मुस्लिम थे किंतु उन्हें संस्कृत भाषा और साहित्य का पंडित कहा जाए तो यह गलत नहीं होगा। ‘अंग दर्पण‘ (1737 ई.) और ‘रसप्रबोध‘ (1749 ई.) इनकी दो रचनाएँ हमें प्राप्त होती हैं। इनके अध्ययन से हमें ज्ञात होता है कि इन्हें भारतीय काव्यशास्त्र की परंपरा और रूढ़ियों की गहरी जानकारी थी। उसकी बारीकियों को समझकर उन्होंने इन रीतिग्रंथों की रचना की। विभिन्न लक्षणों का उल्लेख करने के बाद उन्होंने जो उदाहरण दिए हैं उनमें भारतीय संस्कृति, इतिहास, लोक और पुराण के संदर्भ निहित हैं जो यह सिद्ध करते हैं कि वे संस्कृत के बड़े विद्वान थे। यह बात तो हो गयी इनकी विद्वता की। हालाँकि इनकी प्रतिभा का अनुमान इस बात से ही लगाया जा सकता है कि ‘अंगदर्पण‘ की रचना रसलीन ने ब्रजभाषा सीखने के लिए की।

जहाँ सामान्य व्यक्ति किसी भी भाषा को सीखने के लिए अनेक प्रयत्न करता है तब जाकर वह उस भाषा को बोल–समझ सकता है किंतु रसलीन ने ब्रजभाषा सीखने के लिए उस भाषा में ग्रन्थ की ही रचना कर दी, निश्चित रूप से यह उनकी असाधारण प्रतिभा को परिलक्षित करता है।

अब यदि रसलीन के काव्य में सनातन–राग को देखें तो वास्तव में इनके दोहों को पढ़कर यह अनुमान लगाना कठिन हो जाएगा कि ये रचना किसी मुस्लिम व्यक्ति ने लिखी है। रसलीन ने अपनी रचनाओं में गुरु को महत्व दिया है। राम, कृष्ण, सीता, पार्वती, गंगा, लक्ष्मण, हनुमान, सरस्वती, इंद्र आदि से जुड़े अनेक प्रसंग रसलीन  के दोहों में दिखाई देते हैं। भारतीय पौराणिक इतिहास से जुड़े इन प्रसंगों का रसलीन की रचनाओं में होना यह प्रमाणित करता है कि वे सनातन में गहरी आस्था रखते थे। रसलीन ने अपनी रचनाओं के लिए विषय–वस्तु एवं प्रतीकों का चयन भारतीय महाकाव्यों की परंपरा से किया है, फ़ारसी साहित्य से नहीं। इसीलिए सही अर्थों में इनका सम्पूर्ण साहित्य भारतीय संस्कृति का संवाहक प्रतीत होता है। रसलीन की सनातन में आस्था को जानने के लिए हम उनकी रचनाओं को ही आधार बनाएँगे। हम जानते हैं कि सनातन धर्म में किसी भी कार्य को प्रारम्भ करने से पूर्व विघ्नहर्ता गणेश की प्रार्थना एवं स्तुति की जाती है। रसलीन भी अपने ग्रन्थ ‘रस प्रबोध’ में सोहिल विवाह के प्रसंग में गणेश की वंदना करते हैं – 

“गनपति आराधि आदि, उत्तम सगुन साधि, सुभ घरी, धरी लगन।
गावत गुनीन गायन, मोहत नर नारायन, इंद्रादिक सुन सुन होत मगन।” 

यहाँ गणेश की प्रार्थना, एक उत्तम शकुन साधना, शुभ घड़ी एवं शुभ लग्न विचारना और नर–नारायण तथा इंद्रादिक देवों का उल्लेख जिस तरह मिलता है इससे स्पष्ट होता है कि रसलीन सनातन परंपरा में पूर्णतः पगे हुए हैं। भारतीय मूल्यों में उनकी आस्था की गहराई को इस बात से भी मापा जा सकता है कि वे अपने गुरु तुफैल मुहम्मद बिलग्रामी की प्रशस्ति करते हुए उन्हें देवताओं के गुरु कहे जाने वाले ब्रहस्पति का अवतार बताते हैं।

जहाँ आज अनेक कट्टरपंथी लोग हिन्दू देवी–देवताओं एवं सनातन परंपराओं का सोशल मीडिया पर मखौल उड़ाते हुए दिखेंगे उनके ही धर्म में आने वाले लोग मध्यकाल के दौर में सनातन की खूबसूरती की तारीफ करते नहीं थके, सिर्फ तारीफ ही नहीं बल्कि सनातन को आत्मसात भी किया। अपने गुरु की बात करते हुए रसलीन लिखते हैं– 

“देस बिदेसन के सब पंडित, सेवत हैं पग सिष्य कहाई।
आयो है ज्ञान सिखावन को,सुर को गुरु मानुस रूप बनाई।“

गंगा नदी में श्रद्धा रखते थे रसलीन

अपने गुरु को देवगुरु का अवतार मानना रसलीन के सनातनी संस्कार का ही बोध होता है। रसलीन के साहित्य में तत्कालीन लोक जीवन की अनुभूतियाँ, प्रचलित लोक कथाएँ एवं भारतीय पौराणिक इतिहास के प्रसंगों की विविधता के साथ ही प्रचुरता भी है। उदाहरण के लिए वे एक हिन्दू भक्त की भाँति ही भगीरथी गंगा की भी स्तुति भारतीय पद्धति के अनुसार करते हुए स्मरण करते हैं कि गंगा विष्णु के पैरों से निकलकर शिव के सीस में जा बसी। जैसे आज भी हिंदुओं में गंगा, यमुना, सरस्वती आदि नदियों को लेकर मातृत्व का भाव है, उनके प्रति अपार श्रद्धा और भाव है। हम मानते हैं कि इन नदियों में स्नान से रजोगुण और तमोगुण का अंत होकर सत्वगुण की प्राप्ति होती है। रसलीन के इस दोहे में भी इसी आस्था और श्रद्धा को देखा जा सकता है– 

“बिस्नु जू के पग तें निकसि संभु सीस बसि, भगीरथ तप तें कृपा करी जहाँ पैं।
पतिततन तारिबे की रीति तेरी एरी गंग, पाइ रसलीन इन्ह तेरेई प्रमाण पैं।
कालिमा कलिंदी सुरसती अरुनाई दाऊ, मेटि–मेटि कीन्हैं सेत आपने विधान पैं।
त्यों ही तमोगुन रजोगुन सब जगत के, करिके सतोगुन चढ़ावत बिमान पैं॥“

आज कुछ कट्टरपंथी लोग नदियों को माता मानने पर सनातन का तिरस्कार करके अपनी मूढ़ता प्रदर्शित करते हैं, उन्हें रसलीन के इस दोहे को पढ़ना चाहिए और विचार करना चाहिए कि किस तरह एक विदेशी मूल एवं विदेशी धर्म से आने वाले व्यक्ति ने सनातन की खूबसूरती को पहचान कर उसे पूर्णतः आत्मसात कर लिया। उपर्युक्त उदाहरणों के अतिरिक्त रसलीन के काव्य में कृष्ण, राधा, गोपिकाएं, बंशी आदि भी खूब दिखाई देती है। शेषनाग को लेकर सनातन में कहा जाता है कि उन्होंने ही धरती का भार उठा रखा है रसलीन के दोहे में यह जिक्र भी दिखाई देता है। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि सनातन के लगभग सभी पक्षों उससे जुड़े सभी प्रसंगों को रसलीन ने अपनी रचनाओं में स्थान दिया एवं सनातन को आत्मसात किया।

पठानों के साथ युद्ध करने वक्त हुई मृत्यु

इनका व्यक्तित्व कैसा था इनके दोहों से हमें ज्ञात होता है किंतु इनकी एक और विशेषता थी कि रसलीन ने ईश्वर और गुरु के अतिरिक्त किसी के सामने अपना मस्तक नहीं झुकाया। वे जीवन यापन के क्षेत्र में अपने कर्म के कारण प्रतिष्ठित थे। जहाँ एक ओर मध्यकाल में दरबारी कवि राजाओं को ही भगवान मां लिया करते थे वहीं रसलीन का स्वाभिमान उन्हें इसकी इजाजत नहीं देता है। उनके यह दोहा इस दृष्टि से उल्लेखनीय है– 

“तजि द्वार ईस को नवायो सीस मानुस को।
पेट ही के काज सब, लाज खोइ बावरे।।“

रसलीन के विषय में यह ज्ञात होता है कि ये सिर्फ कवि ही नहीं बल्कि योद्धा भी थे। इतिहास की पुस्तकों का अध्ययन करने पर जानकारी मिलती है कि ये निपुण तीरंदाज, सुयोग्य सैनिक एवं अच्छे घुड़सवार थे। वो नवाब सफदरजंग की सेना में थे। कहा जाता है कि इनकी मृत्यु भी पठानों के साथ युद्ध करते हुए आगरा के समीप 1750 ई. में हुई। इस तरह मध्यकालीन साहित्य को अपना अमूल्य प्रदेय देकर सनातन में आस्था रखने वाले एक वीर योद्धा रसलीन इस भौतिक संसार से विदा ले गए। 

स्रोत: Rasleen, रसलीन, मध्यकाल, Medieval India, मध्यकाल का भारत, Poet, कवि, Syed Ghulam Nabi, सैयद गुलाम नबी
Tags: HistoryPoetRasleenइतिहासकविरसलीन
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

ट्रंप और पुतिन की ‘सीक्रेट’ बातचीत; अब थम जाएगा रूस और यूक्रेन का युद्ध!

अगली पोस्ट

‘बच्चों की लाश पर टीआरपी का खेल’: आग से हुई 22 मौतें, जबरन PM मोदी का नाम डलवाना चाहते थे विनोद कापड़ी?

संबंधित पोस्ट

हिन्दू समाज के संगठन, सेवा और समरसता की यात्रा: विश्व हिन्दू परिषद्
ज्ञान

हिन्दू समाज के संगठन, सेवा और समरसता की यात्रा: विश्व हिन्दू परिषद्

4 September 2026

हिन्दवः सोदराः सर्वे, न हिन्दूः पतितो भवेत् मम दीक्षा हिन्दू रक्षा, मम मन्त्रः समानता यही वह भाव है, जिसके साथ विश्व हिन्दू परिषद् की स्थापना...

Anil Kakodar Uranium, Thorium, Nuclear energy
ज्ञान

दुनिया में बढ़ेगा यूरेनियम संकट, भारत के लिए थोरियम क्यों जरूरी? अनिल काकोदकर का बड़ा बयान

4 September 2026

दुनिया भर में यूरेनियम की कमी की आशंका गहराती जा रही है। ऐसे वक्त में भारत के जाने-माने परमाणु वैज्ञानिक और परमाणु ऊर्जा आयोग (AEC)...

भारत पाकिस्तान का विभाजन
इतिहास

15 अगस्त के बाद…80 वर्ष पहले भारत विभाजित होकर स्वतंत्र तो हो गया.. परन्तु अब आगे क्या..?

16 August 2026

15 अगस्त 1947 को भारत को स्वतंत्रता तो मिली, लेकिन प्रश्न था कि अब आगे क्या ? दुर्भाग्य से गांधी जी ने मुस्लिम लीग के...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

Who Is Major Rishabh Sambhyal? The Army Officer Who Became a Social Media Sensation

Who Is Major Rishabh Sambhyal? The Army Officer Who Became a Social Media Sensation

00:03:34

The Missing 54: What Happened to India’s Soldiers After the 1965 & 1971 Wars | POW | Indo-Pak

00:04:43

J-20 vs India: How Super Sukhoi, Rafale & AMCA Could Counter China’s Stealth Fleet | IAF | HAL

00:03:32

QRSAM to Akash NG: India’s Massive Push to Build 2,000 Indigenous Air Defence Missiles | DRDO| IAF

00:04:05

MQ-9B SeaGuardian: Why India Needs More Eyes Over the Indian Ocean | NAVY | USA | Hormuz

00:03:51
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited