ईद-उल-अजहा (बकरीद) पर हर साल इस्लामिक समाज में लाखों निर्दोष पशुओं की कुर्बानी दी जाती है, लेकिन इस बार खुद इस्लामिक देश मोरक्को के राजा मोहम्मद VI ने अपने लोगों से कुर्बानी न देने की अपील की है। 6 जून 2025 को मनाई जाने वाली इस ईद पर, जब भेड़ों समेत हजारों जानवरों की कुर्बानी दी जाती है, राजा मोहम्मद VI ने कहा है कि देश में भेड़ों की संख्या में भारी गिरावट आई है, इसलिए इस साल ईद पर कुर्बानी न देने की अपील की है।
मोरक्को पर बरसा है कुदरत का कहर
मोरक्को इस समय भीषण सूखे और बारिश की भारी कमी से जूझ रहा है, जिससे पशुओं की आबादी में भारी गिरावट आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस साल बारिश 53% तक कम हुई, जो पिछले तीन दशकों में सबसे कम है। इसका सीधा असर चारागाहों और मांस उत्पादन पर पड़ा, जिससे देश में मांस की कीमतें आसमान छू गई हैं। आम जनता इस महंगाई से बेहाल है, जिसके चलते सरकार को 2025 के बजट में मवेशियों, भेड़ों, ऊंटों और रेड मीट पर आयात शुल्क और वैल्यू ऐडेड टैक्स (VAT) निलंबित करना पड़ा।
मोरक्को पिछले सात सालों से सूखे की चपेट में है, जिससे भेड़ों और बकरियों की आबादी तेजी से घटी है। लेकिन इस्लामिक कट्टरपंथियों के लिए यह सब मायने नहीं रखता। ईद-उल-अजहा, जिसे पैगंबर इब्राहिम की कुर्बानी की याद में मनाया जाता है, में हर साल लाखों बेजुबान पशुओं की बलि दी जाती है। मुस्लिम समुदाय में मान्यता है कि पैगंबर इब्राहिम ने अल्लाह के आदेश पर अपने बेटे की बलि देने की तैयारी की थी, लेकिन अंतिम क्षणों में अल्लाह ने उन्हें जानवर की कुर्बानी देने का आदेश दिया। तभी से इस परंपरा का पालन किया जाता है।
लेकिन इस बार मोरक्को के राजा मोहम्मद VI ने खुद अपने देशवासियों से अपील की है कि वे इस साल कुर्बानी न करें। बुधवार को सरकारी टीवी पर मोरक्को के मंत्री अहमद तौफीक ने राजा का बयान पढ़ते हुए कहा, “इन मुश्किल हालातों में कुर्बानी की रस्म निभाना हमारे लोगों के लिए नुकसानदेह होगा… खासकर उनके लिए, जिनके पास पहले से ही आर्थिक कठिनाइयां हैं।”
ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब मोरक्को में कुर्बानी रोकने की अपील की गई हो। 1966 में भी देश को भयंकर सूखे का सामना करना पड़ा था, जिससे हजारों भेड़ों की मौत हो गई थी। तब मोरक्को के तत्कालीन राजा और मौजूदा शासक के पिता, हसन II ने भी इसी तरह की अपील कर अपने देशवासियों से बलि न देने का अनुरोध किया था।