केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार (2 अप्रैल) लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश कर दिया है। इस बिल को लेकर जहां एक ओर विपक्षी दल और कई इस्लामी संगठन विरोध कर रहे हैं। विपक्षी गठबंधन की पार्टियां इसके खिलाफ एकजुट हैं और इस बिल को किसी भी तरह पास होने से रोकना चाहती हैं। वहीं, दूसरी ओर बीजेपी की तरफ से लगातार यह कहा जा रहा है कि यह बिल मुस्लिमों के हित में ही है और विपक्ष इस पर गलत प्रचार कर रहा है। कांग्रेस के साथ लामबंद विपक्षी दल वक्फ इस मुद्दे पर एनडीए के सहयोगियों को उकसाना चाहते हैं तो ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या बीजेपी लोकसभा और राज्यसभा से यह बिल सहजता से पास करा सकती है।
लोकसभा में क्या है नंबर गेम?
सत्तारूढ़ बीजेपी के लिए लोकसभा से इस बिल को पास कराने में कोई दिक्कत आने के आसार नहीं है। बीजेपी के पास बेशक अकेले दम पर पूर्ण बहुमत नहीं है लेकिन एनडीए के पास पूर्ण बहुमत है। जेडीयू व टीडीपी के इस बिल का विरोध किए जाने की जो उम्मीद विपक्ष को थी वो भी धराशायी हो गई है। लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल को पारित करने के लिए 272 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता है। वर्तमान में भाजपा के पास 240 सांसद हैं जबकि उसके प्रमुख सहयोगी दलों में जनता दल (यूनाइटेड) (12 सांसद), तेलुगु देशम पार्टी (16 सांसद), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) (5 सांसद), राष्ट्रीय लोक दल (2 सांसद) और शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) (7 सांसद) और अन्य दलों को मिला लिया जाए तो यह संख्या 290 के पार चली जाती है। ऐसे में अगर एनडीए के दल एकजुट रहते हैं तो लोकसभा में इस बिल को पास कराने में सरकार को कोई दिक्कत नहीं होने वाली है।
राज्यसभा में क्या है नंबर गेम?
राज्यसभा की स्थिति लोकसभा के मुकाबले बीजेपी के लिए थोड़ी मुश्किल है। हालांकि, हालात वहां भी ऐसे नहीं नज़र आ रहे हैं कि वक्फ बिल को पास होने से रोका जा सके। राज्यसभा की कुल सदस्य संख्या 236 है और इस विधेयक को पारित करने के लिए 119 सदस्यों की ज़रूरत है। वर्तमान में एनडीए के पास बीजेपी के 98 सांसदों समेत 115 सांसद हैं। अगर इसमें यदि छह मनोनीत सदस्यों को भी जोड़ा जाए तो एनडीए का संख्या बल बढ़कर 121 हो जाता है जो आवश्यक बहुमत से अधिक है। अगर एनडीए में एकजुटता बनी रहे और मनोनीत सदस्य भी सरकार के साथ रहे तो इस बिल को कानून बनने से रोकना बेहद ही मुश्किल है।
इस बिल को पास कराने के लिए सबसे ज़्यादा अगर किसी चीज़ की ज़रूरत है तो वह है विपक्ष की एकजुटता। रिपोर्ट्स की मानें तो इस बिल के लिए जेडीयू और टीडीपी की तरफ से सुझाव दिए गए थे जिन्हें सरकार ने मान लिया है और ऐसे में उनके इस बिल का विरोध करने की कोई वजह नहीं नज़र आ रही है। यानी कुल मिलाकर देखें तो बीजेपी के लिए इस बिल को संसद के दोनों सदनों से पास कराने में कोई समस्या नहीं है और विपक्ष के विरोध के बावजूद जल्द ही यह बिल कानून का रूप ले सकता है।