TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    शशि त्रिपाठी अपनी प्रदर्शनी में शहर और प्रकृति के सह-अस्तित्व को दर्शाती कला के साथ

    शशि त्रिपाठी की कला: शहर और प्रकृति के बीच का मौन संवाद

    ज़ंजीरों से आज़ादी तक: बलिदान और संघर्ष से जन्मा बांग्लादेश

    ज़ंजीरों से आज़ादी तक: पूर्वी पाकिस्तान से बांग्लादेश के उदय की कहानी

    पूर्व पीएम हसीना ने अलार्म बजाया: बांग्लादेश में बढ़ती धार्मिक कट्टरता और कानून की विफलता

    पूर्व पीएम हसीना ने अलार्म बजाया: बांग्लादेश में बढ़ती धार्मिक कट्टरता और कानून की विफलता

    रेल मंत्रालय की मंथन योजना शताब्दी एक्सप्रेस की जगह वंदे भारत चेयर कार

    शताब्दी एक्सप्रेस को धीरे-धीरे बंद करने की तैयारी, वंदे भारत चेयर कार कोचों का बड़ा प्लान

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    खनन क्षेत्र में बेहतरीन काम के लिए केंद्र सरकार ने धामी सरकार की तारीफ की

    खनन सुधारों में फिर नंबर वन बना उत्तराखंड, बेहतरीन काम के लिए धामी सरकार को केंद्र सरकार से मिली 100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    हमसे दुश्मनी महंगी पड़ेगी: भारत की सतर्कता और बांग्लादेश की गलती, जानें बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ रही चोट

    हमसे दुश्मनी महंगी पड़ेगी: भारत की सतर्कता और बांग्लादेश की गलती, जानें बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ रही चोट

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    वेनेजुएला के मामले में भारत की नपी-तुली प्रतिक्रिया रही है

    वेनेजुएला-अमेरिका संघर्ष पर भारत का संतुलित रुख क्या दर्शाता है ?

    डॉ. जयतीर्थ आर. जोशी को ब्रह्मोस एयरोस्पेस का महानिदेशक नियुक्त किया था

    ब्रह्मोस एयरोस्पेस के DG & CEO की नियुक्ति रद्द,  ट्रिब्यूनल ने DRDO की चयन प्रक्रिया को बताया मनमाना

    16 दिसंबर को पाकिस्तान के पूर्वी मोर्चे के कमांडर जनरल ए के नियाजी ने 93,000 सैनिकों के साथ सरेंडर किया था

    ढाका सरेंडर: जब पाकिस्तान ने अपने लोगों की अनदेखी की और अपने देश का आधा हिस्सा गंवा दिया

    संसद हमले की बरसी: आपको कॉन्स्टेबल कमलेश कुमारी याद हैं? 

    संसद हमले की बरसी: आपको कॉन्स्टेबल कमलेश कुमारी याद हैं? 

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    ईरान के ऐतिहासिक ध्वज का पुनरुत्थान: संस्कृति, बदलाव और राष्ट्रीय गर्व का प्रतीक

    ईरान का ऐतिहासिक ध्वज: संस्कृति, बदलाव और गर्व का प्रतीक

    पाकिस्तान में हिंदू लड़के की हत्या के खिलाफ सिंध में हो रहे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन

    पाकिस्तान में हिंदू लड़के की हत्या पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन जारी

    फंडिंग फ्रीज़ रोकने के बाद भारतीय-अमेरिकी जज को ऑनलाइन हमलों का सामना

    ट्रंप की फंडिंग फ्रीज़ रोकने के बाद भारतीय-अमेरिकी जज को MAGA समर्थकों के विरोध का सामना

    छात्रवृत्ति वापसी से प्रभावित यूके–यूएई अकादमिक संबंध

    मुस्लिम ब्रदरहुड विवाद के बीच यूके विश्वविद्यालयों से यूएई की छात्रवृत्ति वापस

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    भारतीय संविधान और मौलिक अधिकार

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकार बाहर से नहीं आए, इनकी संकल्पना भारतीय ज्ञान परंपरा में सदियों से मौजूद है

    भारतीय संविधान

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकारों की संकल्पना हमारे लिए नई नहीं है, ये भारतीय ज्ञान परंपरा का अभिन्न हिस्सा है

    औरंगज़ेब ने जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवार मे ज़िंदा चुनवाने का आदेश दिया था

    वीर बाल दिवस: क्रिसमस-नववर्ष का जश्न तो ठीक है लेकिन वीर साहिबजादों का बलिदान भी स्मरण रहे

    गुरु गोबिंद सिंह जी ने मुगल शासक औरंगज़ेब की अधीनता स्वीकार करने से इंकार कर दिया

    वीर बाल दिवस: उत्सवों के बीच साहिबज़ादों के अमर बलिदान को नमन

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    शोले फिल्म में पानी की टंकी पर चढ़े धर्मेंद्र

    बॉलीवुड का ही-मैन- जिसने रुलाया भी, हंसाया भी: धर्मेंद्र के सिने सफर की 10 नायाब फिल्में

    नीतीश कुमार

    जेडी(यू) के ख़िलाफ़ एंटी इन्कंबेसी क्यों नहीं होती? बिहार में क्यों X फैक्टर बने हुए हैं नीतीश कुमार?

    क्यों PariPesa भारत रोमांचक एविएटर क्रैश गेम्स का अनुभव लेने के लिए सबसे बेहतरीन जगह है

    क्यों PariPesa भारत रोमांचक एविएटर क्रैश गेम्स का अनुभव लेने के लिए सबसे बेहतरीन जगह है

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    शशि त्रिपाठी अपनी प्रदर्शनी में शहर और प्रकृति के सह-अस्तित्व को दर्शाती कला के साथ

    शशि त्रिपाठी की कला: शहर और प्रकृति के बीच का मौन संवाद

    ज़ंजीरों से आज़ादी तक: बलिदान और संघर्ष से जन्मा बांग्लादेश

    ज़ंजीरों से आज़ादी तक: पूर्वी पाकिस्तान से बांग्लादेश के उदय की कहानी

    पूर्व पीएम हसीना ने अलार्म बजाया: बांग्लादेश में बढ़ती धार्मिक कट्टरता और कानून की विफलता

    पूर्व पीएम हसीना ने अलार्म बजाया: बांग्लादेश में बढ़ती धार्मिक कट्टरता और कानून की विफलता

    रेल मंत्रालय की मंथन योजना शताब्दी एक्सप्रेस की जगह वंदे भारत चेयर कार

    शताब्दी एक्सप्रेस को धीरे-धीरे बंद करने की तैयारी, वंदे भारत चेयर कार कोचों का बड़ा प्लान

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    खनन क्षेत्र में बेहतरीन काम के लिए केंद्र सरकार ने धामी सरकार की तारीफ की

    खनन सुधारों में फिर नंबर वन बना उत्तराखंड, बेहतरीन काम के लिए धामी सरकार को केंद्र सरकार से मिली 100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    हमसे दुश्मनी महंगी पड़ेगी: भारत की सतर्कता और बांग्लादेश की गलती, जानें बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ रही चोट

    हमसे दुश्मनी महंगी पड़ेगी: भारत की सतर्कता और बांग्लादेश की गलती, जानें बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ रही चोट

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    वेनेजुएला के मामले में भारत की नपी-तुली प्रतिक्रिया रही है

    वेनेजुएला-अमेरिका संघर्ष पर भारत का संतुलित रुख क्या दर्शाता है ?

    डॉ. जयतीर्थ आर. जोशी को ब्रह्मोस एयरोस्पेस का महानिदेशक नियुक्त किया था

    ब्रह्मोस एयरोस्पेस के DG & CEO की नियुक्ति रद्द,  ट्रिब्यूनल ने DRDO की चयन प्रक्रिया को बताया मनमाना

    16 दिसंबर को पाकिस्तान के पूर्वी मोर्चे के कमांडर जनरल ए के नियाजी ने 93,000 सैनिकों के साथ सरेंडर किया था

    ढाका सरेंडर: जब पाकिस्तान ने अपने लोगों की अनदेखी की और अपने देश का आधा हिस्सा गंवा दिया

    संसद हमले की बरसी: आपको कॉन्स्टेबल कमलेश कुमारी याद हैं? 

    संसद हमले की बरसी: आपको कॉन्स्टेबल कमलेश कुमारी याद हैं? 

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    ईरान के ऐतिहासिक ध्वज का पुनरुत्थान: संस्कृति, बदलाव और राष्ट्रीय गर्व का प्रतीक

    ईरान का ऐतिहासिक ध्वज: संस्कृति, बदलाव और गर्व का प्रतीक

    पाकिस्तान में हिंदू लड़के की हत्या के खिलाफ सिंध में हो रहे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन

    पाकिस्तान में हिंदू लड़के की हत्या पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन जारी

    फंडिंग फ्रीज़ रोकने के बाद भारतीय-अमेरिकी जज को ऑनलाइन हमलों का सामना

    ट्रंप की फंडिंग फ्रीज़ रोकने के बाद भारतीय-अमेरिकी जज को MAGA समर्थकों के विरोध का सामना

    छात्रवृत्ति वापसी से प्रभावित यूके–यूएई अकादमिक संबंध

    मुस्लिम ब्रदरहुड विवाद के बीच यूके विश्वविद्यालयों से यूएई की छात्रवृत्ति वापस

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    भारतीय संविधान और मौलिक अधिकार

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकार बाहर से नहीं आए, इनकी संकल्पना भारतीय ज्ञान परंपरा में सदियों से मौजूद है

    भारतीय संविधान

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकारों की संकल्पना हमारे लिए नई नहीं है, ये भारतीय ज्ञान परंपरा का अभिन्न हिस्सा है

    औरंगज़ेब ने जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवार मे ज़िंदा चुनवाने का आदेश दिया था

    वीर बाल दिवस: क्रिसमस-नववर्ष का जश्न तो ठीक है लेकिन वीर साहिबजादों का बलिदान भी स्मरण रहे

    गुरु गोबिंद सिंह जी ने मुगल शासक औरंगज़ेब की अधीनता स्वीकार करने से इंकार कर दिया

    वीर बाल दिवस: उत्सवों के बीच साहिबज़ादों के अमर बलिदान को नमन

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    शोले फिल्म में पानी की टंकी पर चढ़े धर्मेंद्र

    बॉलीवुड का ही-मैन- जिसने रुलाया भी, हंसाया भी: धर्मेंद्र के सिने सफर की 10 नायाब फिल्में

    नीतीश कुमार

    जेडी(यू) के ख़िलाफ़ एंटी इन्कंबेसी क्यों नहीं होती? बिहार में क्यों X फैक्टर बने हुए हैं नीतीश कुमार?

    क्यों PariPesa भारत रोमांचक एविएटर क्रैश गेम्स का अनुभव लेने के लिए सबसे बेहतरीन जगह है

    क्यों PariPesa भारत रोमांचक एविएटर क्रैश गेम्स का अनुभव लेने के लिए सबसे बेहतरीन जगह है

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

UNESCO की विश्व धरोहर स्थल की सूची में शामिल किए गए मराठा सैन्य किलों को कितना जानते हैं आप?

इन 12 किलों में से 11 किले महाराष्ट्र के अलग अलग ज़िलों में स्थित हैं जबकि एक तमिलनाडु में है

Shiv Chaudhary द्वारा Shiv Chaudhary
12 July 2025
in इतिहास
रायगड किले का चिलखती बुर्ज और मैप पर साइट्स (चित्र: UNESCO)

रायगड किले का चिलखती बुर्ज और मैप पर साइट्स (चित्र: UNESCO)

Share on FacebookShare on X

मराठा शासन की रणनीतिक सैन्य शक्ति की प्रतीक रहे 12 सैन्य किलों को संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) की विश्व धरोहर स्थल (World Heritage Sites) की सूची में शामिल किया गया है। इन 12 किलों में से 11 किले महाराष्ट्र के अलग अलग ज़िलों में स्थित हैं जबकि एक तमिलनाडु में है। इनमें महाराष्ट्र में सालहेर किला, शिवनेरी किला, लोहागढ़, खंडेरी किला, रायगढ़, राजगढ़, प्रतापगढ़, सुवर्णदुर्ग, पन्हाला किला, विजय दुर्ग, सिंधुदुर्ग और तमिलनाडु में जिंजी किला शामिल हैं। इसके साथ ही भारत में स्थित विश्व धरोहर स्थलों की संख्या बढ़कर 43 हो गई है इससे पहले इस सूची में भारत के 34 सांस्कृतिक स्थल, 7 प्राकृतिक स्थल और एक मिश्रित स्थल शामिल थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं ने इन किलों को सूची में शामिल किए जाने पर खुशी जताई है।

पीएम मोदी ने क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों ने इन किलों के बारे में और जानने का आह्वान करते हुए X पर लिखा, “हर भारतीय इस मान्यता को पाकर गर्व महसूस कर रहा है। इन ‘मराठा सैन्य परिदृश्यों’ में 12 भव्य किले शामिल हैं, जिनमें से 11 महाराष्ट्र में हैं और 1 तमिलनाडु में।” उन्होंने आगे लिखा, “जब हम मराठा साम्राज्य की गौरवशाली कहानी की बात करते हैं, तो हम उसे अच्छे शासन, मजबूत सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक कल्याण की भावना से जोड़ते हैं। मराठा शासकों ने कभी भी अन्याय के सामने झुकने से इनकार किया, और यही बात आज भी हमें प्रेरणा देती है। मैं सभी लोगों से अपील करता हूं कि वे इन किलों की यात्रा करें और मराठा साम्राज्य के समृद्ध इतिहास को करीब से जानें।” साथ ही, पीएम मोदी ने 2014 की अपनी रायगड किले की यात्रा की कुछ तस्वीरें भी X पर शेयर की हैं।

संबंधितपोस्ट

सॉफ्टवेयर इंजीनियर से कट्टर जिहादी तक: जुबैर की गिरफ्तारी ने खोले अल-कायदा और आईएस के डिजिटल नेटवर्क के पते

अमेरिकी ‘मिशनरी’ या छुपा एजेंट? भीवंडी में गिरफ्तारी और विदेशी कनेक्शन वाली धर्मांतरण की घटना

महाराष्ट्र में धर्मांतरण रैकेट का खुलासा: ‘बिज़नेस’ के नाम पर चल रहा था धर्मांतरण का एजेंडा

और लोड करें

Here are pictures from my visit to Raigad Fort in 2014. Had the opportunity to bow to Chhatrapati Shivaji Maharaj. Will always cherish that visit. pic.twitter.com/sLx9jFXvsB

— Narendra Modi (@narendramodi) July 12, 2025

मराठा सैन्य किलों का इतिहास

‘मराठा सैन्य परिदृश्य’ का मतलब है मराठों द्वारा बनाए गए और विकसित किए गए वे खास किले और सैन्य ढांचे जो 17वीं से लेकर 19वीं शताब्दी के बीच तैयार हुए थे। यह सिर्फ किलों की बात नहीं है, बल्कि एक पूरी सैन्य रणनीति, किलेबंदी की सोच, और उस समय के भूगोल के अनुसार की गई इंजीनियरिंग को दर्शाता है। ये किले उस समय के मराठा शासकों की दूरदर्शिता और रणनीतिक सोच का प्रमाण हैं।

ये किले कहां-कहां स्थित हैं?

भारत में मराठों ने कुल मिलाकर 390 से ज्यादा किले बनाए थे। लेकिन इन सभी में से सिर्फ 12 किलों को ‘मराठा सैन्य परिदृश्य’ के तहत चुना गया है। इन किलों की खास बात ये है कि ये भारत के अलग-अलग भौगोलिक इलाकों– जैसे सह्याद्रि की पहाड़ियां, कोंकण तट, दक्कन का पठार और पूर्वी घाट में फैले हुए हैं। इसका मतलब ये किले सिर्फ सुंदर नहीं बल्कि स्थानीय भौगोलिक स्थिति के हिसाब से रणनीतिक रूप से बनाए गए थे।

तस्वीरें – PIB

कौन-कौन से 12 किले हुए शामिल?

इन 12 किलों को दो संस्थाओं द्वारा संरक्षित किया गया है:-

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित 8 किले:

  1. शिवनेरी किला

  2. लोहगढ़

  3. रायगढ़

  4. सुवर्णदुर्ग

  5. पन्हाला किला

  6. विजयदुर्ग

  7. सिंधुदुर्ग

  8. जिंजी किला (तमिलनाडु में)

महाराष्ट्र सरकार के पुरातत्व और संग्रहालय विभाग द्वारा संरक्षित 4 किले:

  1. सालहेर किला

  2. राजगढ़

  3. खंडेरी किला

  4. प्रतापगढ़

कहां हैं ये सैन्य किले

1. सालहेर किला (Salher Fort)

यह सह्याद्री की पहाड़ियों में सबसे ऊंचा किला है। इसकी चट्टानों को काटकर बनाई गई संरचना, ऊंची ढलानों और प्राकृतिक सुरक्षा से जुड़ी खासियतें इसे अनोखा बनाती हैं। यह किला साल्हेर की ऐतिहासिक लड़ाई से भी जुड़ा है, इसलिए इसे संरक्षित करना और इसकी कहानी को लोगों तक सही तरीके से पहुँचाना ज़रूरी है।

2. शिवनेरी किला (Shivneri Fort)

शिवनेरी किले में प्रथम सदी ईस्वी के बौद्ध गुफाएं हैं और यह पश्चिमी घाट (देश क्षेत्र) से कल्याण-ठाणे होते हुए समुद्र तट तक जाने वाले प्राचीन व्यापार मार्ग पर स्थित है। इसके मजबूत दरवाज़े और प्रवेश द्वार बाद के कई किलों के लिए प्रेरणा बने। यह किला ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत मूल्यवान है और इसे संरक्षित रखना ज़रूरी है।

3. लोहगढ़ किला (Lohagad Fort)

यह किला बोर घाट के ज़रिए उत्तरी कोंकण और पनवेल क्षेत्र पर नियंत्रण में बहुत अहम था। छत्रपति शिवाजी महाराज के समय इस किले की योजना महत्वपूर्ण थी और पेशवाओं के समय में बने इसके दरवाजे भी खास शैली में हैं। इन सभी पहलुओं को संरक्षित रखना आवश्यक है।

4. खंडेरी किला (Khanderi Fort)

यह एक द्वीपीय किला है जो बॉम्बे और चौल बंदरगाहों के बीच नौसैनिक केंद्र के रूप में अहम था। इसकी विशेष भौगोलिक स्थिति, शिवाजी महाराज के समय हुई पुनर्निर्माण गतिविधियाँ, और इससे जुड़ी लड़ाइयों को लोगों तक सही तरीके से प्रस्तुत करना ज़रूरी है।

5. रायगड किला (Raigad Fort)

यह किला महाराष्ट्र के इतिहास और लोककथाओं से गहराई से जुड़ा है। यह सिसोदिया वंश की दूसरी राजधानी भी था और रायगढ़ युद्ध का केंद्र रहा। यहां कई अलग-अलग वास्तुशिल्पिक अवशेष हैं, जिन्हें उनके ऐतिहासिक महत्व के अनुसार संरक्षित किया जाना चाहिए ताकि इस किले की भव्यता और अनूठापन सही रूप में सामने आ सके।

6. राजगढ़ किला (Rajgad Fort)

यह किला जिस पहाड़ी पर स्थित है, उसकी आकृति और किले की योजना उसी के अनुसार तैयार की गई है। संजिवनी माची की तीन परतों वाली रक्षा व्यवस्था खास और अनोखी है। इन सभी पहलुओं को उसी मूल रूप में संरक्षित रखना ज़रूरी है।

7. प्रतापगढ़ किला (Pratapgad Fort)

यह जंगलों से घिरा हुआ किला है और यह प्रतापगढ़ की लड़ाई तथा अफज़ल खान वध जैसे ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़ा है, जो मराठा साम्राज्य की स्थापना में निर्णायक साबित हुईं। इसकी रक्षा व्यवस्था और माची (किले की नीची सतहों) की रचना मराठा स्थापत्य की शुरुआती मिसाल है।

8. सुवर्णदुर्ग किला (Suvarndurg Fort)

यह किला एक निचली द्वीपीय भूमि पर बना हुआ है और छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा कब्जा कर इसे मजबूत किया गया था। यह मराठा नौसेना के शुरुआती केंद्रों में से एक बना। इसके सागर की ओर निकलने वाले दरवाजे, किले की दीवारें, और अन्य संरचनाएं विशेष हैं जिन्हें संरक्षित करने की ज़रूरत है।

9. पन्हाला किला (Panhala Fort)

यह किला एक महत्वपूर्ण पर्वतीय मार्ग और व्यापार रास्तों के पास स्थित है, जिससे बीजापुर तक नजर रखी जा सकती थी। यह कई राजवंशों द्वारा समय-समय पर विकसित किया गया, जिससे इसकी वास्तुशैली में विविधता है। इसके विशाल अनाज भंडार और पत्थरों से तराशी गई बावड़ियाँ संरक्षित करने योग्य हैं। यह किला पावनखिंड की लड़ाई से भी जुड़ा है।

10. विजयदुर्ग किला (Vijaydurg Fort)

यह किला एक प्रमुख नौसैनिक ऑपरेशन केंद्र था और तीन स्तरीय सुरक्षा प्रणाली के कारण यह भारतीय उपमहाद्वीप के सबसे मजबूत तटीय किलों में गिना जाता है। यह एक प्रायद्वीप पर स्थित है, जिसके तीन तरफ पानी है। इसकी प्राकृतिक रक्षा प्रणाली और इससे जुड़ी ऐतिहासिक लड़ाइयों को संरक्षित और सही तरीके से प्रस्तुत करना आवश्यक है।

11. सिंधुदुर्ग किला (Sindhudurg Fort)

यह सबसे मजबूत और अब तक संरक्षित तटीय किलों में से एक है। यह मराठा नौसेना के विस्तार में बेहद अहम रहा। इसकी फैली हुई प्राचीर और रक्षा दीवारों को संरक्षित करना और इसके महत्व को लोगों तक समझाना ज़रूरी है।

12. जिंजी किला (Gingee Fort)

यह किला विजयनगर नायक, बीजापुर सुल्तान, मुग़ल, मराठा, फ्रेंच और अंग्रेज़ शासकों के अधीन रहा है। इसका मराठा कालीन रक्षा ढांचा बहुत अच्छी तरह से दर्ज है और यह एक बेहतरीन सुरक्षा प्रणाली का उदाहरण है। इसकी सभी परतों को संरक्षित करना और इसके विभिन्न रक्षा तत्वों को समझाकर प्रस्तुत करना जरूरी है।

इन किलों की विशेषताएं क्या हैं?

इन किलों की बनावट अलग-अलग प्रकार की है, जैसे:

  • पहाड़ी किले: शिवनेरी, रायगढ़, सालहेर, लोहगढ़, राजगढ़ और जिंजी किला

  • पहाड़ी-वन्य किला: प्रतापगढ़

  • पहाड़ी-पठारी किला: पन्हाला

  • तटीय किला: विजयदुर्ग

  • द्वीपीय किले: खंडेरी, सुवर्णदुर्ग, सिंधुदुर्ग

इस तरह, हर किला उस इलाके की भौगोलिक स्थिति के अनुसार डिज़ाइन किया गया था, कहीं समुद्र के बीचों-बीच, तो कहीं ऊंची पहाड़ियों पर। यह दिखाता है कि मराठों की सैन्य रणनीति कितनी मजबूत और विस्तृत थी।

कितने बड़े हैं ये किले?

इस सूची के अनुसार, महाराष्ट्र के रायगढ़ ज़िले में स्थित रायगढ़ किला सबसे बड़ा है, जिसका नामित क्षेत्रफल 397.4 हेक्टेयर है और उसका बफ़र ज़ोन क्षेत्र 52,168.9 हेक्टेयर तक फैला हुआ है।, वहीं, सबसे छोटा किला है रत्नागिरी जिले में स्थित सुवर्णदुर्ग है, जिसका नामित क्षेत्रफल सिर्फ 6.75 हेक्टेयर है और बफ़र ज़ोन 376.9 हेक्टेयर है।

कितने बड़े हैं ये किले? (चित्र: Archaeological Survey of India)

मराठा सैन्य विचारधारा की शुरुआत कैसे हुई?

मराठा साम्राज्य की नींव छत्रपति शिवाजी महाराज ने रखी थी। उन्होंने 1670 ई. के आसपास एक संगठित सैन्य नीति और किला प्रणाली की शुरुआत की। शिवाजी का मानना था कि अगर किलों को रणनीतिक ढंग से बनाया जाए तो वे दुश्मनों से लड़ने में बड़ी मददगार हो सकते हैं। उनके बाद यह व्यवस्था पेशवाओं के शासन (1818 ई.) तक चलती रही और मराठों की शक्ति का आधार बनी रही।

UNESCO विश्व धरोहर सूची में कैसे शामिल होता है कोई स्थल

UNESCO की विश्व धरोहर सूची में उन स्थलों को शामिल किया जाता है जो पूरी मानवता और प्रकृति के लिए बेहद खास और अद्वितीय महत्व रखते हैं। ये स्थल या तो सांस्कृतिक धरोहर होते हैं या प्राकृतिक सुंदरता और महत्व के स्थान होते हैं।

चयन के लिए मानदंड क्या होते हैं?

2004 तक इस सूची में किसी स्थल को शामिल करने के लिए छह सांस्कृतिक और चार प्राकृतिक मानदंड होते थे। लेकिन 2005 में UNESCO ने बदलाव करते हुए इन सभी को मिलाकर अब एक ही सूची बनाई है, जिसमें कुल 10 मानदंड होते हैं। इनमें से पहले छह (i से vi तक) सांस्कृतिक मानदंड होते हैं, और अगले चार (vii से x तक) प्राकृतिक। किसी भी स्थल को इस सूची में आने के लिए कम से कम एक मानदंड को पूरा करना अनिवार्य होता है। साथ ही, यह स्थल “असाधारण वैश्विक महत्व” (Outstanding Universal Value) का होना चाहिए।

मराठा सैन्य परिदृश्य किस श्रेणी में शामिल हुआ है?

भारत का ‘Maratha Military Landscapes’ यानी मराठा सैन्य परिदृश्य, सांस्कृतिक श्रेणी में नामांकित हुआ है। इसे तीन सांस्कृतिक मानदंडों के तहत प्रस्तावित किया गया है- (iii), (iv) और (vi)। यानी यह स्थल एक अनोखी सांस्कृतिक परंपरा या सभ्यता को दर्शाता है, इसमें विशिष्ट वास्तुशिल्पीय या तकनीकी विशेषताएँ हैं, और यह किसी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक परंपरा या घटना से जुड़ा हुआ है।

नामांकन से पहले की प्रक्रिया: टेंटेटिव लिस्ट

कोई भी देश UNESCO को किसी स्थल का नामांकन तभी भेज सकता है जब वह स्थल उसकी टेंटेटिव लिस्ट में पहले से मौजूद हो। टेंटेटिव लिस्ट एक तरह की प्रारंभिक सूची होती है, जिसमें संभावित विश्व धरोहर स्थलों को शामिल किया जाता है। किसी स्थल को टेंटेटिव लिस्ट में कम से कम एक वर्ष तक होना अनिवार्य है, तभी उसका औपचारिक नामांकन किया जा सकता है।

अंतिम निर्णय कौन लेता है?

जब कोई देश किसी स्थल को नामांकित करता है, तो UNESCO की वर्ल्ड हेरिटेज कमेटी उस प्रस्ताव की समीक्षा करती है। यही कमेटी तय करती है कि वह स्थल विश्व धरोहर सूची में शामिल होगा या नहीं। यह कमेटी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘World Heritage Programme’ के तहत कार्य करती है और नामांकनों की वैज्ञानिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जांच करती है।

UNESCO विश्व धरोहर बनने का क्या मतलब है?

UNESCO द्वारा किसी स्मारक या जगह को विश्व धरोहर (World Heritage) का दर्जा दिया जाना, उस स्थान को वैश्विक महत्व और संरक्षण की आवश्यकता के रूप में मान्यता देना है। इसका मतलब यह भी है कि इन किलों की देखरेख अब सिर्फ भारत की नहीं बल्कि पूरे विश्व की जिम्मेदारी है, और इनके संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी मिल सकता है।

मराठा सैन्य परिदृश्य को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया जाना सिर्फ महाराष्ट्र या मराठा इतिहास की बात नहीं, यह भारत की सैन्य, स्थापत्य और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलने का प्रमाण है। छत्रपति शिवाजी महाराज की सोच, मराठा इंजीनियरिंग कौशल, और भारतीय भौगोलिक विशेषताओं को समेटे ये किले आज भी हमारे अतीत की गौरवगाथा सुनाते हैं।

Tags: MaharashtraTamil NaduUNESCOWorld heritage siteतमिलनाडुमहाराष्ट्रविश्व धरोहर स्थल
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

महाराष्ट्र सरकार ने ‘गणेशोत्सव’ को घोषित किया राज्य उत्सव, भव्य समारोह का खर्च उठाएगी सरकार

अगली पोस्ट

ना दक्षिण भारत, ना महिला….नए भाजपा अध्यक्ष के लिए सबसे अहम होने वाला है ये फैक्टर

संबंधित पोस्ट

औरंगज़ेब ने जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवार मे ज़िंदा चुनवाने का आदेश दिया था
इतिहास

वीर बाल दिवस: क्रिसमस-नववर्ष का जश्न तो ठीक है लेकिन वीर साहिबजादों का बलिदान भी स्मरण रहे

26 December 2025

यह सप्ताह, वर्ष का अंतिम सप्ताह है। नए साल की दहलीज़ पर खड़े इस सप्ताह का इंतज़ार सबको ही रहता है, क्योंकि पहले क्रिसमस का...

गुरु गोबिंद सिंह जी ने मुगल शासक औरंगज़ेब की अधीनता स्वीकार करने से इंकार कर दिया
इतिहास

वीर बाल दिवस: उत्सवों के बीच साहिबज़ादों के अमर बलिदान को नमन

26 December 2025

यह सप्ताह वर्ष का अंतिम सप्ताह होता है, जिसका लोग बेसब्री से इंतज़ार करते हैं, क्योंकि इसी दौरान पहले क्रिसमस और फिर नए साल का...

23 दिसम्बर  बलिदान-दिवस: परावर्तन के अग्रदूत — स्वामी श्रद्धानन्द
इतिहास

23 दिसम्बर बलिदान-दिवस: परावर्तन के अग्रदूत — स्वामी श्रद्धानन्द

23 December 2025

भारत में परावर्तन आंदोलन के सबसे प्रभावशाली और निर्भीक अग्रदूत स्वामी श्रद्धानन्द थे। उनका दृढ़ विश्वास था कि भारत में निवास करने वाले मुसलमानों के...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

Trump makes false apache deal claims, runs down India US relations

Trump makes false apache deal claims, runs down India US relations

00:05:44

Captured Turkish YIHA drone Showed by the Indian Army |Defence News| Operation Sindoor

00:00:58

A War Won From Above: The Air Campaign That Changed South Asia Forever

00:07:37

‘Mad Dog’ The EX CIA Who Took Down Pakistan’s A.Q. Khan Nuclear Mafia Reveals Shocking Details

00:06:59

Dhurandar: When a Film’s Reality Shakes the Left’s Comfortable Myths

00:06:56
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited