तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज
TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    पीएम मोदी बोले– विध्वंस नहीं, यह भारत की आत्मा का पुनर्जागरण

    सोमनाथ 1000 वर्ष: मोदी ने कहा– आस्था को नष्ट नहीं किया जा सकता

    बांग्लादेश में खोकोन चंद्र दास की निर्मम हत्या

    असहिष्णुता की हिंसा: बांग्लादेश में खोकोन चंद्र दास की निर्मम हत्या

    भारत के मौलिक अधिकारों की जड़ें

    मौलिक अधिकार: पश्चिमी नहीं, भारतीय ज्ञान परंपरा की देन

    राजनीतिक संकट और हिंसा के बीच बांग्लादेश की सड़कें तनावपूर्ण

    1971 कोई विकल्प नहीं: राष्ट्र की स्थापना की स्मृति और इतिहास के कमजोर पड़ने का खतरा

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    खनन क्षेत्र में बेहतरीन काम के लिए केंद्र सरकार ने धामी सरकार की तारीफ की

    खनन सुधारों में फिर नंबर वन बना उत्तराखंड, बेहतरीन काम के लिए धामी सरकार को केंद्र सरकार से मिली 100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    हमसे दुश्मनी महंगी पड़ेगी: भारत की सतर्कता और बांग्लादेश की गलती, जानें बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ रही चोट

    हमसे दुश्मनी महंगी पड़ेगी: भारत की सतर्कता और बांग्लादेश की गलती, जानें बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ रही चोट

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    डॉ. जयतीर्थ आर. जोशी को ब्रह्मोस एयरोस्पेस का महानिदेशक नियुक्त किया था

    ब्रह्मोस एयरोस्पेस के DG & CEO की नियुक्ति रद्द,  ट्रिब्यूनल ने DRDO की चयन प्रक्रिया को बताया मनमाना

    16 दिसंबर को पाकिस्तान के पूर्वी मोर्चे के कमांडर जनरल ए के नियाजी ने 93,000 सैनिकों के साथ सरेंडर किया था

    ढाका सरेंडर: जब पाकिस्तान ने अपने लोगों की अनदेखी की और अपने देश का आधा हिस्सा गंवा दिया

    संसद हमले की बरसी: आपको कॉन्स्टेबल कमलेश कुमारी याद हैं? 

    संसद हमले की बरसी: आपको कॉन्स्टेबल कमलेश कुमारी याद हैं? 

    शिप बेस्ड ISBM लॉन्च के पाकिस्तान के दावे में कितना दम है

    पाकिस्तान जिस SMASH मिसाइल को बता रहा है ‘विक्रांत किलर’, उसकी सच्चाई क्या है ?

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है

    वेनेज़ुएला जैसा प्रयोग ईरान में? अमेरिका की रणनीति पर सवाल

    ट्रंप के दावे बनाम हकीकत

    अपाचे सौदे पर ट्रंप के दावे बनाम हकीकत: भारत ने दिखाया सच का आईना

    आधुनिक गणतंत्र का चीनी वादा भी चाइनीज़ सामान की तरह निकला

    चीन में गणतांत्रिक वादे की त्रासदी उसका घरेलू मामला भर नहीं है, इसका प्रभाव पूरी दुनिया महसूस कर रही है

    कट्टर इस्लामी आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने की अपील

    क्या ईरान के साथ भी अमेरिका वही कर सकता है, जो उसने वेनेजुएला और मादुरो के साथ किया है ?

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    भारतीय संविधान और मौलिक अधिकार

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकार बाहर से नहीं आए, इनकी संकल्पना भारतीय ज्ञान परंपरा में सदियों से मौजूद है

    भारतीय संविधान

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकारों की संकल्पना हमारे लिए नई नहीं है, ये भारतीय ज्ञान परंपरा का अभिन्न हिस्सा है

    औरंगज़ेब ने जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवार मे ज़िंदा चुनवाने का आदेश दिया था

    वीर बाल दिवस: क्रिसमस-नववर्ष का जश्न तो ठीक है लेकिन वीर साहिबजादों का बलिदान भी स्मरण रहे

    गुरु गोबिंद सिंह जी ने मुगल शासक औरंगज़ेब की अधीनता स्वीकार करने से इंकार कर दिया

    वीर बाल दिवस: उत्सवों के बीच साहिबज़ादों के अमर बलिदान को नमन

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    शोले फिल्म में पानी की टंकी पर चढ़े धर्मेंद्र

    बॉलीवुड का ही-मैन- जिसने रुलाया भी, हंसाया भी: धर्मेंद्र के सिने सफर की 10 नायाब फिल्में

    नीतीश कुमार

    जेडी(यू) के ख़िलाफ़ एंटी इन्कंबेसी क्यों नहीं होती? बिहार में क्यों X फैक्टर बने हुए हैं नीतीश कुमार?

    क्यों PariPesa भारत रोमांचक एविएटर क्रैश गेम्स का अनुभव लेने के लिए सबसे बेहतरीन जगह है

    क्यों PariPesa भारत रोमांचक एविएटर क्रैश गेम्स का अनुभव लेने के लिए सबसे बेहतरीन जगह है

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    पीएम मोदी बोले– विध्वंस नहीं, यह भारत की आत्मा का पुनर्जागरण

    सोमनाथ 1000 वर्ष: मोदी ने कहा– आस्था को नष्ट नहीं किया जा सकता

    बांग्लादेश में खोकोन चंद्र दास की निर्मम हत्या

    असहिष्णुता की हिंसा: बांग्लादेश में खोकोन चंद्र दास की निर्मम हत्या

    भारत के मौलिक अधिकारों की जड़ें

    मौलिक अधिकार: पश्चिमी नहीं, भारतीय ज्ञान परंपरा की देन

    राजनीतिक संकट और हिंसा के बीच बांग्लादेश की सड़कें तनावपूर्ण

    1971 कोई विकल्प नहीं: राष्ट्र की स्थापना की स्मृति और इतिहास के कमजोर पड़ने का खतरा

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    खनन क्षेत्र में बेहतरीन काम के लिए केंद्र सरकार ने धामी सरकार की तारीफ की

    खनन सुधारों में फिर नंबर वन बना उत्तराखंड, बेहतरीन काम के लिए धामी सरकार को केंद्र सरकार से मिली 100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    हमसे दुश्मनी महंगी पड़ेगी: भारत की सतर्कता और बांग्लादेश की गलती, जानें बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ रही चोट

    हमसे दुश्मनी महंगी पड़ेगी: भारत की सतर्कता और बांग्लादेश की गलती, जानें बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ रही चोट

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    डॉ. जयतीर्थ आर. जोशी को ब्रह्मोस एयरोस्पेस का महानिदेशक नियुक्त किया था

    ब्रह्मोस एयरोस्पेस के DG & CEO की नियुक्ति रद्द,  ट्रिब्यूनल ने DRDO की चयन प्रक्रिया को बताया मनमाना

    16 दिसंबर को पाकिस्तान के पूर्वी मोर्चे के कमांडर जनरल ए के नियाजी ने 93,000 सैनिकों के साथ सरेंडर किया था

    ढाका सरेंडर: जब पाकिस्तान ने अपने लोगों की अनदेखी की और अपने देश का आधा हिस्सा गंवा दिया

    संसद हमले की बरसी: आपको कॉन्स्टेबल कमलेश कुमारी याद हैं? 

    संसद हमले की बरसी: आपको कॉन्स्टेबल कमलेश कुमारी याद हैं? 

    शिप बेस्ड ISBM लॉन्च के पाकिस्तान के दावे में कितना दम है

    पाकिस्तान जिस SMASH मिसाइल को बता रहा है ‘विक्रांत किलर’, उसकी सच्चाई क्या है ?

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है

    वेनेज़ुएला जैसा प्रयोग ईरान में? अमेरिका की रणनीति पर सवाल

    ट्रंप के दावे बनाम हकीकत

    अपाचे सौदे पर ट्रंप के दावे बनाम हकीकत: भारत ने दिखाया सच का आईना

    आधुनिक गणतंत्र का चीनी वादा भी चाइनीज़ सामान की तरह निकला

    चीन में गणतांत्रिक वादे की त्रासदी उसका घरेलू मामला भर नहीं है, इसका प्रभाव पूरी दुनिया महसूस कर रही है

    कट्टर इस्लामी आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने की अपील

    क्या ईरान के साथ भी अमेरिका वही कर सकता है, जो उसने वेनेजुएला और मादुरो के साथ किया है ?

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    भारतीय संविधान और मौलिक अधिकार

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकार बाहर से नहीं आए, इनकी संकल्पना भारतीय ज्ञान परंपरा में सदियों से मौजूद है

    भारतीय संविधान

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकारों की संकल्पना हमारे लिए नई नहीं है, ये भारतीय ज्ञान परंपरा का अभिन्न हिस्सा है

    औरंगज़ेब ने जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवार मे ज़िंदा चुनवाने का आदेश दिया था

    वीर बाल दिवस: क्रिसमस-नववर्ष का जश्न तो ठीक है लेकिन वीर साहिबजादों का बलिदान भी स्मरण रहे

    गुरु गोबिंद सिंह जी ने मुगल शासक औरंगज़ेब की अधीनता स्वीकार करने से इंकार कर दिया

    वीर बाल दिवस: उत्सवों के बीच साहिबज़ादों के अमर बलिदान को नमन

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    शोले फिल्म में पानी की टंकी पर चढ़े धर्मेंद्र

    बॉलीवुड का ही-मैन- जिसने रुलाया भी, हंसाया भी: धर्मेंद्र के सिने सफर की 10 नायाब फिल्में

    नीतीश कुमार

    जेडी(यू) के ख़िलाफ़ एंटी इन्कंबेसी क्यों नहीं होती? बिहार में क्यों X फैक्टर बने हुए हैं नीतीश कुमार?

    क्यों PariPesa भारत रोमांचक एविएटर क्रैश गेम्स का अनुभव लेने के लिए सबसे बेहतरीन जगह है

    क्यों PariPesa भारत रोमांचक एविएटर क्रैश गेम्स का अनुभव लेने के लिए सबसे बेहतरीन जगह है

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

भारत अब दुनिया से कुछ लेने नहीं, बल्कि देने की भूमिका में है। विचार देने की, दृष्टि देने की, और साझेदारी के उस नए मॉडल की, जो उपनिवेशवाद या शोषण पर नहीं, समानता और सम्मान पर टिका है।

Vibhuti Ranjan द्वारा Vibhuti Ranjan
7 November 2025
in अर्थव्यवस्था, भारत, भू-राजनीति, विश्व, व्यवसाय
तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

भारत अब पश्चिम का अनुयायी नहीं, सभ्यताओं का मार्गदर्शक बन रहा है।

Share on FacebookShare on X

भारत आज जिस मोड़ पर खड़ा है, वह केवल उसके आर्थिक उत्कर्ष का नहीं, बल्कि उसके सभ्यतागत पुनर्जागरण का भी क्षण है। यह वह युग है जब सात दशक की औपनिवेशिक मानसिकता से ऊपर उठकर भारत स्वयं को वैश्विक नेतृत्व के केंद्र में स्थापित कर रहा है। भारत की इस यात्रा का नवीन अध्याय अब अफ्रीका की धरती पर लिखा जा रहा है। वह धरती, जिसे कभी पश्चिम ने केवल संसाधन का खदान समझा था। लेकिन, भारत उसे साझेदारी और समानता की भूमि मानता है।

इसी दृष्टि से नवंबर 2025 ऐतिहासिक बन गया है, जब भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अंगोला और बोत्सवाना की राजकीय यात्रा पर रवाना हो रही हैं और उसके ठीक बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दक्षिण अफ्रीका में जी20 शिखर सम्मेलन के लिए पहुंचने वाले हैं। यह महज़ दो यात्राएं नहीं, बल्कि दो प्रतीक हैं, भारत की ग्लोबल साउथ नीति के उद्घोष और उसके भू-राजनीतिक आत्मविश्वास के।

संबंधितपोस्ट

अपाचे सौदे पर ट्रंप के दावे बनाम हकीकत: भारत ने दिखाया सच का आईना

चीन में गणतांत्रिक वादे की त्रासदी उसका घरेलू मामला भर नहीं है, इसका प्रभाव पूरी दुनिया महसूस कर रही है

पाकिस्तानी नागरिक से विवाह के बाद सरबजीत कौर को अटारी–वाघा सीमा से भेजा जाएगा वापस

और लोड करें

भारत अब दुनिया से कुछ लेने नहीं, बल्कि देने की भूमिका में है। विचार देने की, दृष्टि देने की, और साझेदारी के उस नए मॉडल की, जो उपनिवेशवाद या शोषण पर नहीं, समानता और सम्मान पर टिका है।

अफ्रीका की पुकार और भारत का उत्तर

याद रखें कि अफ्रीका आज उसी मोड़ पर है, जिस पर सौ वर्ष पहले एशिया था युवा जनसंख्या, अपार संसाधन, पर शोषण के इतिहास की गहरी परछाइयां। भारत ने इस पीड़ा को समझा है क्योंकि उसने स्वयं इसे झेला है। यही कारण है कि जब राष्ट्रपति मुर्मू अंगोला की स्वतंत्रता के 50 वर्ष पूरे होने पर वहां की संसद को संबोधित करेंगी, तो वह केवल एक औपचारिक भाषण नहीं होगा, वह उपनिवेशवाद के खिलाफ सभ्यतागत एकजुटता की घोषणा होगी।

यहां बता दें कि अंगोला की पहचान उसके तेल भंडारों से है। यह अफ्रीका का दूसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है। वहीं बोत्सवाना हीरों की धरती है, जो दुनिया के rough diamonds का सबसे विश्वसनीय स्रोत मानी जाती है। ये दो देश भारत की ऊर्जा और उद्योग श्रृंखला से सीधे जुड़े हैं। सूरत के हीरा उद्योग से लेकर रिफाइनिंग कॉरिडोर तक। लेकिन असल बात केवल व्यापार की नहीं, भरोसे की है।

भारत इन देशों के पास किसी करार के लिए नहीं जा रहा, बल्कि सहयोग के लिए जा रहा है। यह फर्क ही भारत को चीन, अमेरिका या यूरोप से अलग करता है। जहां पश्चिमी देश अफ्रीका को निवेश की मंडी और चीन उसे कर्ज के जाल में बांधता आया है, वहीं भारत उसे बराबरी के साझेदार के रूप में देखता है।

भारत की सभ्यता और अफ्रीका का आत्मसम्मान

यह तथ्य अपने आप में ऐतिहासिक है कि किसी भारतीय राष्ट्रपति की अंगोला या बोत्सवाना की यह पहली राजकीय यात्रा है। लेकिन यह केवल पहली यात्रा नहीं, बल्कि पहला सन्देश है कि भारत अब अफ्रीका को केवल मदद का पात्र नहीं, बल्कि विकास का सहयात्री मानता है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू स्वयं उस भारत की प्रतिनिधि हैं जो गांवों, आदिवासी समाज और संघर्षों की मिट्टी से उठकर वैश्विक कूटनीति के केंद्र तक पहुंची हैं। जब वे अंगोला या बोत्सवाना की संसदों में भारत की लोकतांत्रिक यात्रा की कहानी सुनाएंगी, तो यह उन अफ्रीकी राष्ट्रों के लिए आशा का दीपक बनेगा, जो आज भी असमानता, गरीबी और बाहरी नियंत्रण से जूझ रहे हैं।

भारत का संदेश स्पष्ट है कि हम साझेदारी करेंगे, शर्तें नहीं रखेंगे। हम पूंजी देंगे, नियंत्रण नहीं करेंगे। हम आत्मनिर्भरता सिखाएंगे, निर्भरता नहीं बढ़ाएंगे। यही वह सॉफ्ट पावर है, जिसने भारत को दुनिया का नैतिक नेता बनाया है।

तेल और हीरे की भू-राजनीति में भारत की रणनीति

अफ्रीका की धरती प्राकृतिक संपदा से भरी है, लेकिन राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक असमानता ने उसे अब तक कमजोर बनाए रखा है। आज जब दुनिया ऊर्जा के नए स्रोत ढूंढ रही है, भारत इस अवसर को केवल तेल या गैस तक सीमित नहीं देख रहा। अंगोला में भारत केवल पेट्रोलियम क्षेत्र में निवेश नहीं कर रहा, बल्कि एनर्जी इकोसिस्टम की संपूर्णता में साझेदारी कर रहा है। रिफाइनिंग, ग्रीन एनर्जी, और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के रूप में। यही भारत की नीति की विशेषता है स्थायी विकास (Sustainable Development) पर आधारित साझेदारी।

बोत्सवाना में भारत की दिलचस्पी केवल हीरे तक नहीं, बल्कि डायमंड वैल्यू एडिशन चेन में है। सूरत की हीरा पॉलिशिंग इंडस्ट्री को बोत्सवाना की खदानों से जोड़ने की योजना भारत के दक्षिण-दक्षिण सहयोग (South–South Cooperation) की नई मिसाल है।

यह रणनीति केवल व्यापार की नहीं, बल्कि भू-राजनीति की है। भारत जिस अफ्रीका में निवेश कर रहा है, वह हिंद महासागर से अटलांटिक तक फैला है। यानी भारत अब अपने सुरक्षा प्रभाव क्षेत्र (Strategic Arc) को पश्चिमी अफ्रीका तक विस्तारित कर रहा है।

चीन का कर्ज-जाल और भारत का भरोसे का पुल

बीते दो दशकों में चीन ने बेल्ट एंड रोड परियोजना के माध्यम से अफ्रीका में अरबों डॉलर निवेश किए, लेकिन परिणाम क्या हुआ? कई देशों पर असहनीय कर्ज का बोझ, अधूरे प्रोजेक्ट्स और राजनीतिक निर्भरता। अफ्रीकी देशों को जल्द ही एहसास हुआ कि चीन की मदद वास्तव में नियंत्रण है।

भारत ने इसके विपरीत एक भरोसे का मॉडल पेश किया ट्रेड विथ ट्रस्ट। न ऋण का जाल, न शासन में दखल, केवल साझा विकास। यही कारण है कि केन्या, तंजानिया, नाइजीरिया, घाना और अब अंगोला जैसे देश भारत के साथ दीर्घकालिक साझेदारी के समझौते कर रहे हैं।

भारत का लक्ष्य स्पष्ट है कि अफ्रीका को केवल ऊर्जा का स्रोत नहीं, बल्कि साझेदारी का आधार बनाना है। अफ्रीका का उदय भारत के उदय से जुड़ा है, क्योंकि यदि एशिया और अफ्रीका मिलते हैं, तो वैश्विक शक्ति-संतुलन पश्चिम से पूर्व की ओर स्थानांतरित हो जाएगा।

पीएम मोदी की संभावित दक्षिण अफ्रीका यात्रा: G20 के मंच से नया संदेश

22–23 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दक्षिण अफ्रीका में होने वाले जी20 सम्मेलन में शामिल होंगे। यह भारत की अफ्रीका नीति की राजनीतिक पुष्टि होगी। दक्षिण अफ्रीका BRICS का सदस्य है, और भारत के लिए इस मंच का उपयोग केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि वैचारिक स्तर पर भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। मोदी वहां से दुनिया को यह बताने वाले हैं कि भारत और अफ्रीका मिलकर ग्लोबल साउथ की आवाज़ बनेंगे।

यह वही नीति है जिसकी नींव मोदी सरकार ने “Voice of Global South Summit” के जरिए रखी थी। एक ऐसा मंच, जो पश्चिमी शक्तियों के एकाधिकार से मुक्त हो। दक्षिण अफ्रीका की धरती से जब मोदी कहेंगे कि विकास का अधिकार किसी का दान नहीं, हर राष्ट्र का अधिकार है, तब वह पश्चिमी उपदेशवाद के पूरे ढांचे को चुनौती दे रहे होंगे।

भारत इस समय विश्व को दो बातें सिखा रहा है तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजे भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज। भारत आज जिस मोड़ पर खड़ा है, वह केवल उसके आर्थिक उत्कर्ष का नहीं, बल्कि उसके सभ्यतागत पुनर्जागरण का भी क्षण है। यह वह युग है जब सात दशक की औपनिवेशिक मानसिकता से ऊपर उठकर भारत स्वयं को “वैश्विक नेतृत्व” के केंद्र में स्थापित कर रहा है। और इस यात्रा का नवीन अध्याय अब अफ्रीका की धरती पर लिखा जा रहा है । वह धरती, जिसे कभी पश्चिम ने केवल संसाधन का खदान समझा था, पर भारत उसे साझेदारी और समानता की भूमि मानता है।

इसी दृष्टि से नवंबर 2025 ऐतिहासिक बन गया है, जब भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अंगोला और बोत्सवाना की राजकीय यात्रा पर रवाना हो रही हैं और उसके ठीक बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दक्षिण अफ्रीका में जी20 शिखर सम्मेलन के लिए पहुंचने वाले हैं। यह महज़ दो यात्राएँ नहीं, बल्कि दो प्रतीक हैं] भारत की ग्लोबल साउथ नीति के उद्घोष और उसके भू-राजनीतिक आत्मविश्वास के।

भारत अब दुनिया से कुछ लेने नहीं, बल्कि देने की भूमिका में है। विचार देने की, दृष्टि देने की, और साझेदारी के उस नए मॉडल की, जो उपनिवेशवाद या शोषण पर नहीं, समानता और सम्मान पर टिका है।

अफ्रीका की पुकार और भारत का उत्तर

अफ्रीका आज उसी मोड़ पर है जिस पर सौ वर्ष पहले एशिया था। युवा जनसंख्या, अपार संसाधन, पर शोषण के इतिहास की गहरी परछाइयाँ। भारत ने इस पीड़ा को समझा है क्योंकि उसने स्वयं इसे झेला है। यही कारण है कि जब राष्ट्रपति मुर्मू अंगोला की स्वतंत्रता के 50 वर्ष पूरे होने पर वहां की संसद को संबोधित करेंगी, तो वह केवल एक औपचारिक भाषण नहीं होगा] वह उपनिवेशवाद के खिलाफ सभ्यतागत एकजुटता की घोषणा होगी।

अंगोला की पहचान उसके तेल भंडारों से है यह अफ्रीका का दूसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है। वहीं बोत्सवाना हीरों की धरती है, जो दुनिया के rough diamonds का सबसे विश्वसनीय स्रोत मानी जाती है। ये दो देश भारत की ऊर्जा और उद्योग श्रृंखला से सीधे जुड़े हैं। सूरत के हीरा उद्योग से लेकर रिफाइनिंग कॉरिडोर तक। लेकिन असल बात केवल व्यापार की नहीं, भरोसे की है।

भारत इन देशों के पास किसी “करार” के लिए नहीं जा रहा, बल्कि “सहयोग” के लिए जा रहा है। यह फर्क ही भारत को चीन, अमेरिका या यूरोप से अलग करता है। जहाँ पश्चिमी देश अफ्रीका को निवेश की मंडी और चीन उसे कर्ज के जाल में बांधता आया है, वहीं भारत उसे बराबरी के साझीदार के रूप में देखता है।

भारत की सभ्यता और अफ्रीका का आत्मसम्मान

यह तथ्य अपने आप में ऐतिहासिक है कि किसी भारतीय राष्ट्रपति की अंगोला या बोत्सवाना की यह पहली राजकीय यात्रा है। लेकिन यह केवल “पहली यात्रा” नहीं, बल्कि पहला सन्देश है  कि भारत अब अफ्रीका को केवल मदद का पात्र नहीं, बल्कि विकास का सहयात्री मानता है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू स्वयं उस भारत की प्रतिनिधि हैं जो गांवों, आदिवासी समाज और संघर्षों की मिट्टी से उठकर वैश्विक कूटनीति के केंद्र तक पहुँचा है। जब वे अंगोला या बोत्सवाना की संसदों में भारत की लोकतांत्रिक यात्रा की कहानी सुनाएंगी, तो यह उन अफ्रीकी राष्ट्रों के लिए आशा का दीपक बनेगा, जो आज भी असमानता, गरीबी और बाहरी नियंत्रण से जूझ रहे हैं।

भारत का संदेश स्पष्ट है, हम साझेदारी करेंगे, शर्तें नहीं रखेंगे; हम पूंजी देंगे, नियंत्रण नहीं करेंगे; हम आत्मनिर्भरता सिखाएंगे, निर्भरता नहीं बढ़ाएंगे। यही वह “सॉफ्ट पावर” है जिसने भारत को दुनिया का नैतिक नेता बनाया है।

तेल और हीरे की भू-राजनीति में भारत की रणनीति

अफ्रीका की धरती प्राकृतिक संपदा से भरी है, लेकिन राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक असमानता ने उसे कमजोर बनाए रखा। आज जब दुनिया ऊर्जा के नए स्रोत ढूंढ रही है, भारत इस अवसर को केवल तेल या गैस तक सीमित नहीं देख रहा।

अंगोला में भारत केवल पेट्रोलियम क्षेत्र में निवेश नहीं कर रहा, बल्कि एनर्जी इकोसिस्टम” की संपूर्णता में साझेदारी कर रहा है। रिफाइनिंग, ग्रीन एनर्जी, और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के रूप में। यही भारत की नीति की विशेषता है- स्थायी विकास (Sustainable Development) पर आधारित साझेदारी।

बोत्सवाना में भारत की दिलचस्पी केवल हीरे तक नहीं, बल्कि “डायमंड वैल्यू एडिशन चेन” में है। सूरत की हीरा पॉलिशिंग इंडस्ट्री को बोत्सवाना की खदानों से जोड़ने की योजना भारत के दक्षिण-दक्षिण सहयोग (South–South Cooperation) की नई मिसाल है।

यह रणनीति केवल व्यापार की नहीं, बल्कि भू-राजनीति की है। भारत जिस अफ्रीका में निवेश कर रहा है, वह हिंद महासागर से अटलांटिक तक फैला है — यानी भारत अब अपने “सुरक्षा प्रभाव क्षेत्र” (Strategic Arc) को पश्चिमी अफ्रीका तक विस्तारित कर रहा है।

चीन का कर्ज-जाल और भारत का भरोसे का पुल

बीते दो दशकों में चीन ने “बेल्ट एंड रोड” परियोजना के माध्यम से अफ्रीका में अरबों डॉलर निवेश किए, लेकिन परिणाम क्या हुआ? कई देशों पर असहनीय कर्ज का बोझ, अधूरे प्रोजेक्ट्स और राजनीतिक निर्भरता। अफ्रीकी देशों को जल्द ही एहसास हुआ कि चीन की मदद” वास्तव में नियंत्रण है।

भारत ने इसके विपरीत एक भरोसे का मॉडल पेश किया ट्रेड विथ ट्रस्ट। न ऋण का जाल, न शासन में दखल; केवल साझा विकास। यही कारण है कि केन्या, तंजानिया, नाइजीरिया, घाना और अब अंगोला जैसे देश भारत के साथ दीर्घकालिक साझेदारी के समझौते कर रहे हैं।

भारत का लक्ष्य स्पष्ट है अफ्रीका को केवल ऊर्जा का स्रोत नहीं, बल्कि साझेदारी का आधार बनाना। अफ्रीका का उदय भारत के उदय से जुड़ा है; क्योंकि यदि एशिया और अफ्रीका मिलते हैं, तो वैश्विक शक्ति-संतुलन पश्चिम से पूर्व की ओर स्थानांतरित हो जाएगा।

पीएम मोदी की संभावित दक्षिण अफ्रीका यात्रा: G20 के मंच से नया संदेश

22–23 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दक्षिण अफ्रीका में होने वाले जी20 सम्मेलन में शामिल होंगे। यह भारत की अफ्रीका नीति की राजनीतिक पुष्टि होगी। दक्षिण अफ्रीका BRICS का सदस्य है, और भारत के लिए इस मंच का उपयोग केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि वैचारिक स्तर पर भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मोदी वहाँ से दुनिया को यह बताने वाले हैं कि भारत और अफ्रीका मिलकर “ग्लोबल साउथ” की आवाज़ बनेंगे। यह वही नीति है जिसकी नींव मोदी सरकार ने “Voice of Global South Summit” के जरिए रखी थी। एक ऐसा मंच, जो पश्चिमी शक्तियों के एकाधिकार से मुक्त हो। दक्षिण अफ्रीका की धरती से जब मोदी कहेंगे कि “विकास का अधिकार किसी का दान नहीं, हर राष्ट्र का अधिकार है”, तब वह पश्चिमी उपदेशवाद के पूरे ढांचे को चुनौती दे रहे होंगे।

भारत इस समय विश्व को दो बातें सिखा रहा है, पहली यह कि वैश्विक न्याय आर्थिक बराबरी से शुरू होता है। दूसरी, कि सभ्यताओं का सम्मान राजनीतिक साझेदारी की नींव है।

हिंद महासागर से अटलांटिक तक: भारत की समुद्री रणनीति

भारत की अफ्रीका नीति का एक गुप्त लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू उसकी समुद्री सुरक्षा रेखा है। भारत ने पहले ही मॉरीशस, सेशेल्स, मोज़ाम्बिक और मेडागास्कर के साथ नौसैनिक समझौते किए हैं। अब अंगोला के साथ संबंध इस रणनीति को अटलांटिक तक बढ़ा देंगे। यह विस्तार केवल नौसैनिक नहीं, बल्कि सामरिक भी है। भारत अब String of Pearls (चीन की समुद्री श्रृंखला) के जवाब में Necklace of Diamonds बना रहा है। ऐसे साझेदारों की श्रृंखला जो भारत के साथ पारस्परिक विश्वास पर खड़े हैं।

भारत की नौसेना पहले ही मिशन सागर के तहत अफ्रीकी तटों पर मानवता और राहत का चेहरा बन चुकी है। अब यह मिशन आर्थिक और रणनीतिक सहयोग की दिशा में बढ़ रहा है। यह वह रणनीति है, जिसमें मानवीय मूल्य और सैन्य संतुलन दोनों का समावेश है।

ग्लोबल साउथ की अगुवाई और सभ्यतागत नेतृत्व

भारत के लिए ग्लोबल साउथ केवल राजनीतिक गठबंधन नहीं है, यह सभ्यतागत दृष्टि है। भारत इस समूह का नेतृत्व किसी आधुनिक गठबंधन की तरह नहीं, बल्कि संस्कृति के साझा ताने-बाने के रूप में कर रहा है। यह भी महत्वपूर्ण है कि भारत और अफ्रीका दोनों ही औपनिवेशिक पीड़ा से गुजरे हैं। दोनों की आत्मा आज भी आत्मनिर्भरता और स्वाभिमान के लिए तड़पती है। यही कारण है कि जब भारत विकास की साझेदारी की बात करता है, तो अफ्रीका उसकी भाषा समझता है, क्योंकि वह अनुभव साझा है।

पीएम मोदी का यह विचार कि हम विश्व को अपने संस्कारों से जोड़ना चाहते हैं, न कि अपनी शक्ति से झुकाना इस नीति का आधार है। भारत की Vaccine Maitri से लेकर Solar Alliance तक, हर पहल में यह भाव झलकता है कि भारत शक्ति नहीं, समाधान बनना चाहता है।

यह केवल यात्राएं नहीं, युग परिवर्तन का संकेत हैं

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अफ्रीका यात्राएं भारत की नई विदेश नीति की आत्मा हैं। एक ऐसी नीति जो पश्चिम की तरह संसाधन-भूखी नहीं, बल्कि साझेदारी-संवेदनशील है। भारत अब उस तीसरी दुनिया का नेतृत्व कर रहा है, जिसे कभी पश्चिम ने विकासशील कहकर नीचा दिखाया था। आज जब अंगोला के तेल-कुएं, बोत्सवाना के हीरे, और दक्षिण अफ्रीका की धरती भारत के सहयोग का स्वागत कर रहे हैं, तब दुनिया को समझना चाहिए कि भारत अब केवल एशिया की शक्ति नहीं, विश्व दक्षिण का नेतृत्वकर्ता है। यह वही भारत है जो वसुधैव कुटुम्बकम् के दर्शन को आधुनिक वैश्विक नीति में रूपांतरित कर रहा है।

भारत अब अफ्रीका से तेल लेने नहीं, आत्मा जोड़ने जा रहा है। भारत अब हीरे खरीदने नहीं, विश्वास गढ़ने जा रहा है। भारत अब पश्चिम का अनुयायी नहीं, सभ्यताओं का मार्गदर्शक बन रहा है। जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अंगोला की संसद में भारत की लोकतांत्रिक यात्रा का उल्लेख करेंगी, और प्रधानमंत्री मोदी दक्षिण अफ्रीका की धरती से ग्लोबल साउथ यूनिटी का उद्घोष करेंगे, तब दुनिया यह देखेगी कि यह वही भारत है जिसने हजारों वर्षों पहले कहा था
‘आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः’ अर्थात्, सभी दिशाओं से कल्याणकारी विचार हमारे पास आएं।

आज वही भारत अब कह रहा है कि सभी दिशाओं में कल्याणकारी विचार लेकर भारत स्वयं जा रहा है। पहला यह कि वैश्विक न्याय आर्थिक बराबरी से शुरू होता है। दूसरा सभ्यताओं का सम्मान राजनीतिक साझेदारी की नींव है।

Tags: AfricaAmericaAngolaBotswanaChinaDiamondG20IndiaOilPM ModiPresident Draupadi MurmuSouth Africaअंगोलाअफ्रीकाअमेरिकाचीनतेलदक्षिण अफ्रीकापीएम मोदीबोत्सवानाभारतराष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मूहीरा
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

वंदे मातरम् के 150 वर्ष: बंकिमचंद्र की वेदना से जनमा गीत, जिसने भारत को जगाया और मोदी युग में पुनः जीवित हुआ आत्मगौरव

अगली पोस्ट

चीन और पाकिस्तान के लिए चेतावनी: 80 मीडियम ट्रांसपोर्ट विमानों के साथ भारतीय वायुसेना की सामरिक ताकत अब अटल, आत्मनिर्भर और अजेय

संबंधित पोस्ट

ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है
विश्व

वेनेज़ुएला जैसा प्रयोग ईरान में? अमेरिका की रणनीति पर सवाल

7 January 2026

ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। कई विश्लेषक अब वेनेज़ुएला में...

ट्रंप के दावे बनाम हकीकत
AMERIKA

अपाचे सौदे पर ट्रंप के दावे बनाम हकीकत: भारत ने दिखाया सच का आईना

7 January 2026

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत को लेकर ऐसे दावे करके विवाद खड़ा कर दिया है, जो गहन जांच के सामने टिकते...

आधुनिक गणतंत्र का चीनी वादा भी चाइनीज़ सामान की तरह निकला
विश्व

चीन में गणतांत्रिक वादे की त्रासदी उसका घरेलू मामला भर नहीं है, इसका प्रभाव पूरी दुनिया महसूस कर रही है

7 January 2026

जब 1912 में चीन गणराज्य की घोषणा हुई, तो इसे साम्राज्य से इसका अलगाव माना गया। चिंग राजवंश के पतन का अर्थ था—विजय, पदानुक्रम और...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

Captured Turkish YIHA drone Showed by the Indian Army |Defence News| Operation Sindoor

Captured Turkish YIHA drone Showed by the Indian Army |Defence News| Operation Sindoor

00:00:58

A War Won From Above: The Air Campaign That Changed South Asia Forever

00:07:37

‘Mad Dog’ The EX CIA Who Took Down Pakistan’s A.Q. Khan Nuclear Mafia Reveals Shocking Details

00:06:59

Dhurandar: When a Film’s Reality Shakes the Left’s Comfortable Myths

00:06:56

Tejas Under Fire — The Truth Behind the Crash, the Propaganda, and the Facts

00:07:45
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited