तालिबान का ‘ग्रेटर अफ़ग़ानिस्तान’ नक्शा: लाहौर पर सार्वजनिक तमाचा, पाकिस्तान की सीमाएं और राजनीतिक कमजोरी बेनकाब
TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    राजनीतिक संकट और हिंसा के बीच बांग्लादेश की सड़कें तनावपूर्ण

    1971 कोई विकल्प नहीं: राष्ट्र की स्थापना की स्मृति और इतिहास के कमजोर पड़ने का खतरा

    मिथुन चक्रवर्ती का बड़ा आरोप

    मिथुन चक्रवर्ती का बड़ा आरोप: बंगाल को ‘वेस्ट पाकिस्तान’ बनाने की साजिश, कश्मीर फाइल्स जैसे हालात

    पाकिस्तान की राजनीति में सैन्य प्रभाव का बदला हुआ

    PTI के खिलाफ रणनीति: पाकिस्तान में राजनीतिक नियंत्रण का बदला हुआ चेहरा

    अजय सिंघल बने हरियाणा के नए डीजीपी

    नए साल की पूर्व संध्या पर अजय सिंघल बने हरियाणा के नए डीजीपी

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    खनन क्षेत्र में बेहतरीन काम के लिए केंद्र सरकार ने धामी सरकार की तारीफ की

    खनन सुधारों में फिर नंबर वन बना उत्तराखंड, बेहतरीन काम के लिए धामी सरकार को केंद्र सरकार से मिली 100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    हमसे दुश्मनी महंगी पड़ेगी: भारत की सतर्कता और बांग्लादेश की गलती, जानें बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ रही चोट

    हमसे दुश्मनी महंगी पड़ेगी: भारत की सतर्कता और बांग्लादेश की गलती, जानें बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ रही चोट

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    डॉ. जयतीर्थ आर. जोशी को ब्रह्मोस एयरोस्पेस का महानिदेशक नियुक्त किया था

    ब्रह्मोस एयरोस्पेस के DG & CEO की नियुक्ति रद्द,  ट्रिब्यूनल ने DRDO की चयन प्रक्रिया को बताया मनमाना

    16 दिसंबर को पाकिस्तान के पूर्वी मोर्चे के कमांडर जनरल ए के नियाजी ने 93,000 सैनिकों के साथ सरेंडर किया था

    ढाका सरेंडर: जब पाकिस्तान ने अपने लोगों की अनदेखी की और अपने देश का आधा हिस्सा गंवा दिया

    संसद हमले की बरसी: आपको कॉन्स्टेबल कमलेश कुमारी याद हैं? 

    संसद हमले की बरसी: आपको कॉन्स्टेबल कमलेश कुमारी याद हैं? 

    शिप बेस्ड ISBM लॉन्च के पाकिस्तान के दावे में कितना दम है

    पाकिस्तान जिस SMASH मिसाइल को बता रहा है ‘विक्रांत किलर’, उसकी सच्चाई क्या है ?

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    पाकिस्तान का इतिहास अपने कथित सिद्धांतों से समझौता करने का रहा है

    इस्लामी भाईचारे से बड़ा पैसा: यूएई के खिलाफ कार्रवाई को तैयार पाकिस्तानी सेना?

    ग्रेगोरियन नववर्ष

    ग्रेगोरियन नववर्ष: कब और कैसे हुई इसकी शुरुआत

    उमर ख़ालिद मामले में अमेरिकी दखल

    उमर ख़ालिद की ज़मानत को लेकर अमेरिकी सांसदों का दबाव, भारत के राजदूत को लिखा पत्र

    युद्ध समाप्ति की चुनौती: ज़ेलेंसकी का मुश्किल मोड़

    ज़ेलेंसकी और युद्ध का जटिल खेल: समाप्ति से अधिक खतरनाक बन गया संघर्ष

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    भारतीय संविधान और मौलिक अधिकार

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकार बाहर से नहीं आए, इनकी संकल्पना भारतीय ज्ञान परंपरा में सदियों से मौजूद है

    भारतीय संविधान

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकारों की संकल्पना हमारे लिए नई नहीं है, ये भारतीय ज्ञान परंपरा का अभिन्न हिस्सा है

    औरंगज़ेब ने जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवार मे ज़िंदा चुनवाने का आदेश दिया था

    वीर बाल दिवस: क्रिसमस-नववर्ष का जश्न तो ठीक है लेकिन वीर साहिबजादों का बलिदान भी स्मरण रहे

    गुरु गोबिंद सिंह जी ने मुगल शासक औरंगज़ेब की अधीनता स्वीकार करने से इंकार कर दिया

    वीर बाल दिवस: उत्सवों के बीच साहिबज़ादों के अमर बलिदान को नमन

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    शोले फिल्म में पानी की टंकी पर चढ़े धर्मेंद्र

    बॉलीवुड का ही-मैन- जिसने रुलाया भी, हंसाया भी: धर्मेंद्र के सिने सफर की 10 नायाब फिल्में

    नीतीश कुमार

    जेडी(यू) के ख़िलाफ़ एंटी इन्कंबेसी क्यों नहीं होती? बिहार में क्यों X फैक्टर बने हुए हैं नीतीश कुमार?

    क्यों PariPesa भारत रोमांचक एविएटर क्रैश गेम्स का अनुभव लेने के लिए सबसे बेहतरीन जगह है

    क्यों PariPesa भारत रोमांचक एविएटर क्रैश गेम्स का अनुभव लेने के लिए सबसे बेहतरीन जगह है

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    राजनीतिक संकट और हिंसा के बीच बांग्लादेश की सड़कें तनावपूर्ण

    1971 कोई विकल्प नहीं: राष्ट्र की स्थापना की स्मृति और इतिहास के कमजोर पड़ने का खतरा

    मिथुन चक्रवर्ती का बड़ा आरोप

    मिथुन चक्रवर्ती का बड़ा आरोप: बंगाल को ‘वेस्ट पाकिस्तान’ बनाने की साजिश, कश्मीर फाइल्स जैसे हालात

    पाकिस्तान की राजनीति में सैन्य प्रभाव का बदला हुआ

    PTI के खिलाफ रणनीति: पाकिस्तान में राजनीतिक नियंत्रण का बदला हुआ चेहरा

    अजय सिंघल बने हरियाणा के नए डीजीपी

    नए साल की पूर्व संध्या पर अजय सिंघल बने हरियाणा के नए डीजीपी

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    खनन क्षेत्र में बेहतरीन काम के लिए केंद्र सरकार ने धामी सरकार की तारीफ की

    खनन सुधारों में फिर नंबर वन बना उत्तराखंड, बेहतरीन काम के लिए धामी सरकार को केंद्र सरकार से मिली 100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    हमसे दुश्मनी महंगी पड़ेगी: भारत की सतर्कता और बांग्लादेश की गलती, जानें बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ रही चोट

    हमसे दुश्मनी महंगी पड़ेगी: भारत की सतर्कता और बांग्लादेश की गलती, जानें बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ रही चोट

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    डॉ. जयतीर्थ आर. जोशी को ब्रह्मोस एयरोस्पेस का महानिदेशक नियुक्त किया था

    ब्रह्मोस एयरोस्पेस के DG & CEO की नियुक्ति रद्द,  ट्रिब्यूनल ने DRDO की चयन प्रक्रिया को बताया मनमाना

    16 दिसंबर को पाकिस्तान के पूर्वी मोर्चे के कमांडर जनरल ए के नियाजी ने 93,000 सैनिकों के साथ सरेंडर किया था

    ढाका सरेंडर: जब पाकिस्तान ने अपने लोगों की अनदेखी की और अपने देश का आधा हिस्सा गंवा दिया

    संसद हमले की बरसी: आपको कॉन्स्टेबल कमलेश कुमारी याद हैं? 

    संसद हमले की बरसी: आपको कॉन्स्टेबल कमलेश कुमारी याद हैं? 

    शिप बेस्ड ISBM लॉन्च के पाकिस्तान के दावे में कितना दम है

    पाकिस्तान जिस SMASH मिसाइल को बता रहा है ‘विक्रांत किलर’, उसकी सच्चाई क्या है ?

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    पाकिस्तान का इतिहास अपने कथित सिद्धांतों से समझौता करने का रहा है

    इस्लामी भाईचारे से बड़ा पैसा: यूएई के खिलाफ कार्रवाई को तैयार पाकिस्तानी सेना?

    ग्रेगोरियन नववर्ष

    ग्रेगोरियन नववर्ष: कब और कैसे हुई इसकी शुरुआत

    उमर ख़ालिद मामले में अमेरिकी दखल

    उमर ख़ालिद की ज़मानत को लेकर अमेरिकी सांसदों का दबाव, भारत के राजदूत को लिखा पत्र

    युद्ध समाप्ति की चुनौती: ज़ेलेंसकी का मुश्किल मोड़

    ज़ेलेंसकी और युद्ध का जटिल खेल: समाप्ति से अधिक खतरनाक बन गया संघर्ष

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    भारतीय संविधान और मौलिक अधिकार

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकार बाहर से नहीं आए, इनकी संकल्पना भारतीय ज्ञान परंपरा में सदियों से मौजूद है

    भारतीय संविधान

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकारों की संकल्पना हमारे लिए नई नहीं है, ये भारतीय ज्ञान परंपरा का अभिन्न हिस्सा है

    औरंगज़ेब ने जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवार मे ज़िंदा चुनवाने का आदेश दिया था

    वीर बाल दिवस: क्रिसमस-नववर्ष का जश्न तो ठीक है लेकिन वीर साहिबजादों का बलिदान भी स्मरण रहे

    गुरु गोबिंद सिंह जी ने मुगल शासक औरंगज़ेब की अधीनता स्वीकार करने से इंकार कर दिया

    वीर बाल दिवस: उत्सवों के बीच साहिबज़ादों के अमर बलिदान को नमन

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    शोले फिल्म में पानी की टंकी पर चढ़े धर्मेंद्र

    बॉलीवुड का ही-मैन- जिसने रुलाया भी, हंसाया भी: धर्मेंद्र के सिने सफर की 10 नायाब फिल्में

    नीतीश कुमार

    जेडी(यू) के ख़िलाफ़ एंटी इन्कंबेसी क्यों नहीं होती? बिहार में क्यों X फैक्टर बने हुए हैं नीतीश कुमार?

    क्यों PariPesa भारत रोमांचक एविएटर क्रैश गेम्स का अनुभव लेने के लिए सबसे बेहतरीन जगह है

    क्यों PariPesa भारत रोमांचक एविएटर क्रैश गेम्स का अनुभव लेने के लिए सबसे बेहतरीन जगह है

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

तालिबान का ‘ग्रेटर अफ़ग़ानिस्तान’ नक्शा: लाहौर पर सार्वजनिक तमाचा, पाकिस्तान की सीमाएं और राजनीतिक कमजोरी बेनकाब

तालिबान का यह कदम पाकिस्तानी संस्थाओं, विशेषकर ISI के साथ सम्बन्धों की जटिलता को उजागर करता है। आज तालिबान और आईएसआई के संबंधों में दरारें भी दिखती हैं। तालिबान–आईएसआई के संबंधों में दरार ने क्षेत्रीय शक्ति प्रतिस्पर्धा को और पेचीदा बना दिया है

Vibhuti Ranjan द्वारा Vibhuti Ranjan
3 November 2025
in भारत, भू-राजनीति, रक्षा, विश्व
तालिबान का ‘ग्रेटर अफ़ग़ानिस्तान’ नक्शा: लाहौर पर सार्वजनिक तमाचा, पाकिस्तान की सीमाएं और राजनीतिक कमजोरी बेनकाब

तालिबान का 'ग्रेटर अफ़ग़ानिस्तान' का नक्शा भारत के लिए एक वेक-अप कॉल है।

Share on FacebookShare on X

खोस्त की सूखी ज़मीन पर जब तालिबानी जवान मंच के चारों ओर खड़े थे और उनके सामने रखा नक्शा पाकिस्तान के कई हिस्सों को अफ़ग़ान मानता दिखा, तो वह केवल एक प्रतीकात्मक प्रदर्शन नहीं था। वह एक स्पष्ट संदेश था कि काबुल अब पुरानी सीमाओं को चुनौती देने से नहीं हिचक रहा। यह नक्शा, जिसमें ड्यूरंड रेखा को अनदेखा कर पाकिस्तान के कई पश्तून बहुल इलाके शामिल किए गए थे। यह सिर्फ़ कूटनीतिक बयान नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया की सामरिक तंत्रिका को छेड़ने वाला ज्वलंत संकेत था। भारत के लिए यह सिर्फ पड़ोसी के विवाद का मुद्दा नहीं है, यह एक व्यापक, बहु-आयामी सुरक्षा सतर्कता का अलार्म है।

सबसे पहले स्पष्ट कर लें कि यह अभियान केवल पाकिस्तान के लिए शर्मनाक या अपमानजनक नहीं है, यह पाकिस्तान के आंतरिक संकटों और उसकी सैन्य-राजनीतिक रणनीतियों की विफलताओं का औपचारिक खुलासा भी है। जिस देश ने दशकों से अपने पड़ोसी देशों में प्रभाव जमाने के लिए सशस्त्र नीतियों और गुप्त क्रियाकलापों को अपनाया, वही अब काबुल के मंच पर अपने हिस्से का कट दिखते देख रहा है। यह दिखाता है कि पाकिस्तान की ‘रणनीतिक गहराई’ का मिथक कितनी जल्दी विफल हो सकता है जब स्थानीय परिस्थितियां और पड़ोसी शक्तियां बदल जाएं।

संबंधितपोस्ट

इस्लामी भाईचारे से बड़ा पैसा: यूएई के खिलाफ कार्रवाई को तैयार पाकिस्तानी सेना?

1971 कोई विकल्प नहीं: राष्ट्र की स्थापना की स्मृति और इतिहास के कमजोर पड़ने का खतरा

कानपुर की सड़कों से आसमान तक: शंख एयर के संस्थापक श्रवण कुमार विश्वकर्मा की प्रेरक कहानी

और लोड करें

भारत के लिए जरूरी है कदम उठाना

भारत के लिए इस घटना का समग्र अर्थ यह है कि दक्षिण एशिया का परिदृश्य फिर से बदल रहा है और अब निष्क्रिय पर्यवेक्षक बनने का समय गया। पोस्ट-आमेरिकन अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान का यह आत्मविश्वास, पाकिस्तान के भीतर सक्रिय अस्थिर समूहों की वापसी और चीन के आर्थिक-रणनीतिक हस्तक्षेप इन तीनों का जोड़ भारत के सुरक्षा हितों के लिए घातक साबित हो सकता है यदि समय रहते उचित कदम न उठाए जाएं। तालिबान का नक्शा केवल रेखाएं बदलने वाला कृत्य नहीं, वह एक मनोवैज्ञानिक युद्ध है जो सीमाओं, जनजातीय पहचान और संप्रभुता के संवेदनशील मुद्दों को फिर से उभारता है।

ड्यूरंड रेखा का अस्वीकार पुराने दिनों का पुराना मामला नहीं रहा, वह अब दोनों देशों के बीच बार-बार होने वाली झड़पों, सीमा पार हमलों और हिमायती आंदोलनों की वजह बन सकता है। तालिबान के नक्शे में खैबर पख्तूनख्वा और पश्तून बहुल इलाकों को शामिल कर देना कतई सादा भावनात्मक भाषण नहीं था, यह एक रणनीतिक संकेत था कि तालिबान पाकिस्तान के भीतरी मामलों में अपनी दखलंदाजी का दायरा बढ़ाने के इच्छुक है। इस दावे का तात्त्विक असर यह होगा कि पाकिस्तान के अंदरूनी उथल-पुथल हमारे उत्तर-पश्चिमी सीमाओं पर सीधे महसूस की जाएगी। उधर की अस्थिरता भारत की सीमा-रक्षा, आंतरिक सुरक्षा और कूटनीतिक स्थिरता को चुनौती देगी।

तालिबान और आईएसआई के संबंधों में दरार

खासकर यह समझना ज़रूरी है कि तालिबान का यह कदम पाकिस्तानी संस्थाओं, विशेषकर ISI के साथ सम्बन्धों की जटिलता को उजागर करता है। वर्षो से चलने वाली चर्चा रही है कि किस हद तक तालिबान और ISI के बीच रैखिक साझेदारी रही है। आज उसमें दरारें भी दिखती हैं। Taliban–ISI के संबंधों में दरार ने क्षेत्रीय शक्ति प्रतिस्पर्धा को और पेचीदा बना दिया है, जहां कुछ हिस्से तालिबान को खुले समर्थन देते रहे हैं, वहीं कुछ सैन्य-राजनीतिक फ्रैक्शन चिंतित भी हैं। भारत के लिए इस रिफ्ट का मतलब यह है कि वह समय-समय पर ISI की गलियों में पैदा हुए फूट का इस्तेमाल कर सकता है, बशर्ते उसका इरादा स्पष्ट और प्रभावी हो। परन्तु यह भी सच है कि इस अस्थिरता का लाभ अक्सर सबसे ज़रूरतमंद, समान्य जन और सीमावर्ती समुदाय भुगतते हैं और इससे विस्थापन, शरणार्थी बहाव और आतंकवादी गतिविधियों में वृद्धि का खतरा बढ़ जाता है।

सीपीईसी के स्थायित्व पर भी सवाल

इस पूरे परिदृश्य में चीन की भूमिका एक निर्णायक कारक है। सीपीईसी के माध्यम से चीन ने पाकिस्तान में निवेश कर के न केवल आर्थिक संबंध बनाए बल्कि एक रणनीतिक फ्रंटियर भी स्थापित किया। तालिबान के उदय और अफ़ग़ानिस्तान में उसकी निर्णायक स्थिति, सीपीईसी के स्थायित्व पर प्रश्नचिन्ह लगा सकती है। यदि तालिबान सक्रिय रूप से पाकिस्तान के कुछ हिस्सों के दावे करता है और वहां अस्थिरता फैला देता है, तो चीन की विशाल परियोजनाएँ—जो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए जीवनरेखा हैं, गंभीर संकट में आ सकती हैं। यह स्थिति सीधे चीन के हितों के विरुद्ध है और बीजिंग को या तो तालिबान को नियंत्रण में रखने के लिए पाकिस्‍तानी नेतृत्व पर दबाव डालना होगा या वह स्वयं किसी और तरह का हस्तक्षेप करने पर विचार करेगा। भारत के लिए यह एक अवसर भी पैदा करता है: चीन और पाकिस्तान के बीच दरारें यदि गहरी हों तो भारत अपनी वैकल्पिक कूटनीतिक चालें मजबूत कर सकता है। पर यह मौका लेने के लिए भारत को सावधान और ठोस रणनीति की आवश्यकता है।

भारत की रणनीति में अब तीन स्पष्ट धुरी शामिल होनी चाहिए—पहला, अपनी खुफिया और सुरक्षा तंत्र की त्वरित पुनरावस्था; दूसरा, क्षेत्रीय साझेदारों के साथ सक्रिय संघ; और तीसरा, सॉफ्ट पावर का बुद्धिमत्तापूर्ण इस्तेमाल। RAW का अफ़ग़ानिस्तान में बचा हुआ नेटवर्क, उत्तरी गठबंधन के पुराने संपर्क और चाबहार पोर्ट जैसी संरचनाएँ भारत के पास मौजूद हैं, पर इन संसाधनों का प्रभाव तभी प्रभावी होगा जब इन्हें रणनीतिक दृष्टि से सक्रिय किया जाए। चाबहार पोर्ट को केवल व्यापारिक मार्ग के रूप में न देखें; उसे भारत की समग्र रणनीति का एक कार्यशील हथियार माना जाना चाहिए—एक ऐसा रास्ता जो सामरिक कीमत पर भारत को मध्य एशिया और अफ़ग़ानिस्तान तक अपना पहुंच बनाए रखने में समर्थ बनाए। भारत तजाकिस्तान बेस जैसी सुविधाएं भी रणनीतिक गहराई देने का अवसर हैं। इनका प्रयोग reconnaissance, logistics और crisis response के लिए किया जा सकता है।

भारत को करना होगा ये काम

साफ़ है कि केवल कूटनीति बोलने से काम नहीं चलेगा। तालिबान का नक्शा यह संकेत देता है कि प्रत्यक्ष और गुप्त दोनों तरह के उपायों की आवश्यकता है। खुफिया-संचालित कार्रवाई, सीमापार निगरानी, और समय-समय पर गुप्त अभियान को लागू करने की क्षमता को बढ़ाना होगा, पर यह काम अंतरराष्ट्रीय क़ानून और रणनीतिक विवेक के दायरे में रहकर ही करना होगा। यदि भारत गुप्त कार्रवाई के साथ-साथ प्रत्यक्ष राजनयिक दबाव और बहुपक्षीय मंचों में भी सक्रिय रहेगा, तो वह इस तिकड़ी—तालिबान, ISI और CPEC के प्रभाव—को संतुलित कर सकता है।

तालिबान का नक्शा यह भी साफ़ कर देता है कि अफ़ग़ानिस्तान में अब भारत की सॉफ्ट पावर और विकासात्मक पदचिह्न केवल भलाई के काम नहीं रह गए हैं, वे रणनीतिक संकेत बन गए हैं। स्कूल, अस्पताल, बुनियादी ढांचे और लोक-प्रोजेक्ट्स का संरक्षण भारत के लिए अनिवार्यता बन चुका है। यह कार्य केवल मानवीय सहायता नहीं, बल्कि क्षेत्र में भारत की उपस्थिति और विश्वसनीयता बनाए रखने की रणनीति है। इसके साथ ही भारत-ईरान-अफगानिस्तान गलियारा को मजबूत करना और चाबहार पोर्ट की कार्यक्षमता बढ़ाना अब और अधिक जरूरी हो गया है ताकि भारत अप्रत्यक्ष रूप से अफ़ग़ान बाजार और सामरिक क्षेत्रों तक पहुंच बनाए रख सके।

यह समझना भी आवश्यक है कि भारत को किन जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है यदि वह सक्रिय हो जाता है। पहला जोखिम यह है कि पाकिस्तान इसे प्रत्यक्ष उत्तेजना के रूप में देख सकता है और अपने बचाव में और अधिक आक्रामक कदम उठा सकता है, जिससे सीमापार तनाव बढ़ेगा। दूसरा जोखिम यह है कि क्षेत्रीय actors खासकर चीन और कुछ मध्य पूर्वी खिलाड़ी—भारत की सक्रियता को अपने लिए खतरे के रूप में मान कर पाकिस्तान के संरक्षण में और जुड़ सकते हैं। अतः भारत को हर कदम जोड़-तोड़ कर उठाना होगा, और अपने अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क—विशेषकर रूस, ईरान, और सेंट्रल एशिया के साथ अपनी रणनीति के हिस्से के रूप में जोड़ना होगा।

तालिबान के नक्शे के प्रकाशन में एक और चिंता यह है कि आतंकवाद का प्रवाह फिर से नए मार्ग अपना सकता है। अफ़ग़ानिस्तान से हथियार, ट्रेनिंग और कट्टर विचारधारा पाकिस्तान के अंदर और सीमा पार भारतीय क्षेत्रों तक पहुंच सकती है। खासकर जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में यह खतरा गंभीर है। इसलिए भारत को अपनी आतंरिक सुरक्षा प्रणाली, स्थानीय प्रशासन और फॉरेंसिक और मानव-इंटेलिजेंस क्षमताओं को और मजबूत करना होगा। साथ ही सीमावर्ती जिलों में सामाजिक-आर्थिक परियोजनाओं को तेज़ करना होगा ताकि स्थानीय युवा आतंकवादी लॉरी में आकर्षित न हों।

इस नए हालात में भारत के पास कुछ साफ़ विकल्प हैं और हर विकल्प के साथ फ़ायदे और जोखिम जुड़े हैं। पहला विकल्प है डिप्लोमैटिक प्रेशर के ज़रिए पाकिस्तान पर इंटरनेशनल मंचों पर उसकी ज़िम्मेदारियों का मतलब थोपना—लेकिन यह तभी असरदार होगा जब भारत के पास पक्के सबूत और रीजनल सपोर्ट हो। दूसरा विकल्प है खुफिया ऑपरेशन और इंटेलिजेंस-बेस्ड प्री-एम्प्टिव एक्शन—यह जोखिम भरा लेकिन कभी-कभी ज़रूरी होगा; इसमें सावधानी के साथ प्रोपोर्शनैलिटी का पालन करना ज़रूरी है। तीसरा विकल्प है रीजनल अलायंस को मज़बूत करना—रूस, ईरान, सेंट्रल एशियाई देशों और कुछ मामलों में खाड़ी देशों के साथ मिलकर काम करके भारत चीन-पाकिस्तान तिकड़ी के स्ट्रेटेजिक असर को कम कर सकता है। चौथा विकल्प है इकोनॉमिक और सॉफ्ट-पावर पुश—चाबहार पोर्ट की क्षमता और अफगानिस्तान में रिकंस्ट्रक्शन की कोशिशों को तेज़ करके भारत अपनी लोकप्रियता और असर बढ़ा सकता है।

स्पष्ट होना चाहिए भारत का लक्ष्य

किसी भी विकल्प को अपनाते समय भारत के लिए प्राथमिक लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए: दक्षिण एशिया में स्थिरता और अपने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा। इसका मतलब केवल सैन्य तैयारी नहीं, बल्कि एक व्यापक रणनीति है जिसमें कूटनीति, खुफिया, आर्थिक नीति और मानवीय उपाय शामिल हों। यदि भारत संतुलित, परन्तु निर्णायक नीति अपनाएगा तो वह तालिबान के नक्शे द्वारा बनाए गए मनोवैज्ञानिक दबाव और पाकिस्तान में उठते अस्थिरताओं को नियंत्रित कर सकता है। यदि भारत ने समय रहते कदम न उठाए तो यह नक्शा एक शुरुआत बन सकता है—एक ऐसी शुरुआत जो क्षेत्र में नयी सीमाओं, विस्थापन और हिंसा का मार्ग प्रशस्त कर दे।

एक ठोस तंत्र के रूप में, भारत को तुरंत कुछ कदम उठाना चाहिए। पहला- अपने खुफिया साझा प्रणाली को मजबूत बनाना और पड़ोसी देशों के साथ साझा स्तर पर जानकारी साझा करना। दूसरा- चाबहार बंदरगाह और भारत-ताजिकिस्तान बेस जैश-ए-जाम को परिचालन रूप से तैयार रखना ताकि संकट के समय रसद और सामरिक सहायता दी जा सके। तीसरा- अफगान नागरिक समाज और स्थानीय नेतृत्व के साथ स्थायी संबंध बनाए रखें ताकि भारत पर नरम बिजली प्रभाव बने रहे। चौथा—रक्षा और सुरक्षा के साथ-साथ सीमा पार निगरानी और घुसपैठ विरोधी प्रणाली को उन्नत करना। और पांचवां—अंतरराष्ट्रीय मंचों पर डायनासोर, वृत्तचित्र पर आधारित दस्तावेज़ों के आधार पर अंतर्राष्ट्रीय समर्थन से अलग-अलग तर्क देना।

यह भी ध्यान देना होगा कि तालिबान के नक्शे का असर केवल तत्काल सैन्य या कूटनीतिक प्रतिक्रियाओं तक सीमित नहीं होगा, यह क्षेत्रीय मानस और स्थानीय पहचान के स्वरूप को भी प्रभावित करेगा। पश्तून समुदायों के लिए यह समय संवेदनशील हो सकता है। उनके बीच तालिबान का संदेश और पाकिस्तान की नीतियां दोनों सामाजिक तनावों को जन्म दे सकती हैं। भारत को इन सामाजिक-राजनीतिक पहलुओं को समझते हुए स्थानीय स्तर पर मानवीय जुड़ाव बढ़ाने चाहिए ताकि भुखमरी, शिक्षा और स्वास्थ्य के मसलों के ज़रिये हम स्थानीय समर्थन और भरोसा जीत सकें।

आखिरकार, तालिबान का ‘ग्रेटर अफ़ग़ानिस्तान’ का नक्शा भारत के लिए एक वेक-अप कॉल है। यह न केवल पाकिस्तान की सीमाओं पर गहरी लकीरें खींचता है बल्कि दक्षिण एशिया के स्ट्रेटेजिक मैप को भी फिर से परिभाषित करने का संकेत देता है। भारत का कर्तव्य सिर्फ अपनी सीमाओं की रक्षा करना नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करना भी है – और इसके लिए उसे सिर्फ passive observer बनने के बजाय सक्रिय, निर्णायक और मल्टी-डाइमेंशनल रणनीति अपनानी होगी। चाबहार पोर्ट, नॉर्दर्न अलायंस से संपर्क, इंडिया-ताजिकिस्तान बेस और RAW जैसे साधन अब सिर्फ विकल्प नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की ज़रूरत बन गए हैं।

यह समय जरा भी हिचकिचाने का नहीं। यदि भारत ने ठोस और संपूर्ण रणनीति अपनाई, पर covert और overt, कूटनीतिक और सैन्य, विकास और सुरक्षा-तो वह दक्षिण एशिया में अपनी भूमिका और प्रभाव कायम रख सकेगा। वरना तालिबान का यह नक्शा केवल कागज़ पर नहीं रहेगा; यह वास्तविक दुनिया में सीमाओं, जन-जीवन और क्षेत्रीय संतुलन को बदलने की क्षमता रखता है। भारत के लिए अब केवल निर्णय लेना बाकी है-क्या वह जागेगा और सक्रिय होगा, या फिर इतिहास की धूल में एक नया चुनौतीग्रस्त अध्याय बनकर रह जाएगा।

Tags: AfghanistanChinaGreater AfghanistanIndiaPakistanSouth AsiaTalibanअफ़ग़ानिस्तानग्रेटर अफगानिस्तानचीनतालिबानदक्षिण एशियापाकिस्तानभारत
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

13,700 फीट की ऊंचाई पर भारत का गर्व: न्योमा एयरबेस सीमाओं की रक्षा, वायु शक्ति की नई उड़ान और राष्ट्र की अडिग सामरिक तैयारी का प्रतीक

अगली पोस्ट

हवा, पानी और जमीन तीनों सेनाएं एक साथ: मेचुका में ‘पूर्वी प्रचंड प्रहार’ से चीन के इरादों को कड़ा जवाब

संबंधित पोस्ट

पाकिस्तान का इतिहास अपने कथित सिद्धांतों से समझौता करने का रहा है
विश्व

इस्लामी भाईचारे से बड़ा पैसा: यूएई के खिलाफ कार्रवाई को तैयार पाकिस्तानी सेना?

3 January 2026

पाकिस्तान ने फिर से अपनी विदेश नीति की कहानी बदल दी है। इस बार लक्ष्य संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) है। इस्लामाबाद ने यूएई पर आरोप...

पाकिस्तान की राजनीति में सैन्य प्रभाव का बदला हुआ
भारत

PTI के खिलाफ रणनीति: पाकिस्तान में राजनीतिक नियंत्रण का बदला हुआ चेहरा

2 January 2026

पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व ने बार-बार यह कहा है कि देश अब सीधे राजनीतिक हस्तक्षेप के दौर से आगे बढ़ चुका है। आधिकारिक रूप से...

ग्रोक पर महिलाओं को सार्वजनिक रूप से निशाना बनाने की सुविधा
भारत

स्पाइसी एआई विवाद: ग्रोक पर महिलाओं को सार्वजनिक रूप से निशाना बनाने की सुविधा

2 January 2026

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक चिंताजनक प्रवृत्ति उभर रही है, जहाँ उपयोगकर्ता एलोन मस्क समर्थित एआई चैटबोट Grok का उपयोग बिना अनुमति के महिलाओं...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

Captured Turkish YIHA drone Showed by the Indian Army |Defence News| Operation Sindoor

Captured Turkish YIHA drone Showed by the Indian Army |Defence News| Operation Sindoor

00:00:58

A War Won From Above: The Air Campaign That Changed South Asia Forever

00:07:37

‘Mad Dog’ The EX CIA Who Took Down Pakistan’s A.Q. Khan Nuclear Mafia Reveals Shocking Details

00:06:59

Dhurandar: When a Film’s Reality Shakes the Left’s Comfortable Myths

00:06:56

Tejas Under Fire — The Truth Behind the Crash, the Propaganda, and the Facts

00:07:45
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited